प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
Plate LIII. लिपिपत्र ५३वां.
पल्लव और पाण्ड्यवंशी राजाओं के समय के लेख और दानपत्रों से.
(ई. स. की ८वीं शताब्दी).
मावलीपुरं के अतिरणचंडेश्वर नामक गुफामंदिर के लेख से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ आ इ क ख ग च ण द ध व जा शु श्च ष्णा स्था स्य.
[अतिरणचंडेश्वर गुफामंदिर लेख के वर्ण/अक्षर-चिह्न]
कशाकूडि से मिले हुए पल्लव राजा नंदिवर्मा के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ आ इ ई उ ए ऐ क ख ग घ च छ ज ट ड ण त
[कशाकूडि दानपत्र के वर्ण/स्वर-व्यंजन चिह्न]
थ द ध न प फ ब भ म य र ल व श ष स ह ळ
[कशाकूडि दानपत्र के व्यंजन चिह्न]
न म का या रि णी कु तु पु धू भू द्ध दृ चे के कै तो कौ
[कशाकूडि दानपत्र के मात्रा-युक्त वर्ण चिह्न]
मौ क्त च चि ङ्ग च्छ ज्ञा ञ्च ण्ठ ण्ड त्या त्य न्द्र र्द्र ब्द श्रो स्थि.
[कशाकूडि दानपत्र के संयुक्ताक्षर चिह्न]
पाण्ड्यवंशी राजा परान्तक के समय के नारसिंगं के लेख से (कलियुग सं. ३८७१ = ई. स. ७७०).
ए क च ज न ष स म् वा हा सी गृ रो ग ण्ड्य ष्णोः.
[नारसिंगं लेख के वर्ण/संयुक्ताक्षर चिह्न]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति १]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति २]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति ३]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति ४]
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Plate LIV. लिपिपत्र ५४वां.
पल्लववंशी नन्दिवर्मा (पल्लवमल्ल) और गंगावंशी पृथिवीपति (दूसरे) के दानपत्रों से
(ई. स. की ८वीं और १०वीं शताब्दी).
पल्लववंशी नन्दिवर्मा (पल्लवमल्ल) के उदयॆन्दिरं के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ अ अ आ इ उ उ ए क ख ग ग घ च ज ट
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: अ, अ, अ, आ, इ, उ, उ, ए, क, ख, ग, ग, घ, च, ज, ट]
ठ ड ढ ण त थ द ध न प व भ म य र र ल
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, व, भ, म, य, र, र, ल]
ल व श ष स ह ळ म् मा गि नी वी कु रु भु सु
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: ल, व, श, ष, स, ह, ळ, म्, मा, गि, नी, वी, कु, रु, भु, सु]
भू मू क्र द्व रै णां जौ न्त च्छी न्थ्य ञ्ज ङ्कु × क.
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण व संयुक्ताक्षर: भू, मू, क्र, द्व, रै, णां, जौ, न्त, च्छी, न्थ्य, ञ्ज, ङ्कु, क.]
गंगावंशी राजा पृथिवीपति (दूसरे) के उदयॆन्दिरं के दानपत्र से (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
अ आ उ ए क क ख ग घ च ज ट ठ ण त थ द ध
[गंगावंशी ग्रन्थ लिपि वर्ण: अ, आ, उ, ए, क, क, ख, ग, घ, च, ज, ट, ठ, ण, त, थ, द, ध]
न प ब भ म य र ल व श ष स ह ळ पी ण्ड न्नी म्र.
[गंगावंशी ग्रन्थ लिपि वर्ण: न, प, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह, ळ, पी, ण्ड, न्नी, म्र.]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति १]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति २]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ३]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ४]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ५]
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Plate LV. लिपिपत्र ५५वां.
कुलोत्तुंगचोड और विक्रमचोड के लेखों तथा विक्रमादित्य के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं और १२वीं शताब्दी).
कुलोत्तुंगचोड के चिदंबरं के लेख से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
य द न भ य र श स ह ळ की क्ष श्व ट्टा श्रीः.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
विक्रमचोड के समय के शेविलिमेडु के लेख से (ई. स. ११२४).
ए ख ग च ज ट ड ण द ध प ब भ म य र ल
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
व श ह ळ त् म् कु शु कृ घृ नृ श्वे च्र व्या स्रो त्त.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
बाणवंशी राजा विक्रमादित्य (विजयवाडू) दूसरे के उदयेंदिरं के दानपत्र से (ई. स. की १२वीं शताब्दी).
अ आ इ क ख ग घ च ज ट ठ ड ण त य द ध
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
न प ब भ म य य र ल ल व श ष स स ह
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
ळ ळ त् म् चि झ ञ ध्य ण्डी त्या द्या द्वौ न्न न्द न्त्रा स्न.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति १]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति २]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति ३]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति ४]
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Plate LVI.
लिपिपत्र ५६वां.
पाण्ड्यवंशी सुंदरपाण्ड्य के लेख और यादव विरूपाक्ष तथा गिरिभूपाल के दानपत्रों से.
(ई. स. की १३वीं से १५वीं शताब्दी तक).
पाण्ड्यवंशी राजा सुन्दरपाण्ड्य के ओरंगं के लेख से (ई. स. की १३वीं शताब्दी).
अ आ इ उ ऊ ऌ ओ क ख ग घ ङ च ज ट ठ
ड ण त थ द ध न प फ ब भ म य र ल
व श ष स ह ळ त् त् म् र् कि री मु मू क्त दृ
ष्टं ते घै वो हौ क्लृ क्रा क्र च्च च्छा
ञ्ज ञ्जि ण्ड्य द्रु न्द म्प र्ङ्गि र्ष्णा र्य्य र्ब्बि र्म्म श्री स्ख.
आलंपूण्डि से मिलेहुए विजयनगर के यादव राजा विरूपाक्ष के दानपत्र से (श. सं. १३०५ = ई. स. १३८३).
ओं ख ग ड म र श ळ त न का थि सी कु ष्पु चू रू क्रा.
विजयनगर के यादव गिरिभूपाल के दानपत्र से (शक. सं. १३४६ = ई. स. १४२४).
अ आ उ ऋ ए औ क ग घ फ भ म ह ळ म् रू व्य.
हरिः ॐ स्वस्ति श्रीः येनामौलि
करुणाम्भोधेय दशां श्रीरङ्गवज्रकान्ताः
सुधाधरह्वनाधारवुणयिनं कण्ठा-
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Plate LVII.
लिपिपत्र ५७ वां.
कलिंग नगर के गंगावंशी (पूर्वी) राजाओं के तीन दानपत्रों से.
(ई. स. की ७वीं और ८वीं शताब्दी ?)
पूर्वी गंगावंशी राजा इन्द्रवर्मन् के अच्युतपुरं के दानपत्र से (गांगेय सं. ८७ = ई. स. की ७वीं शताब्दी !).
अ आ इ उ क ख ग घ च ज ट ड त द ध न प फ ब
[glyphs representing archaic characters]
भ म र व श ष या या लि णी स्तू द्ये जे गो गौ ङ्गा ङ्ग द्व.
[glyphs representing archaic characters]
पूर्वी गंगावंशी राजा इन्द्रवर्मन् (दूसरे) के चिकाकोल के दानपत्र से (गांगेय सं. १४६ = ई. स. की ७वीं शताब्दी ?).
आ क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द ध न प फ ब भ
[glyphs representing archaic characters]
म य र श ष स म् ला त्रि जे हे या ङ्ग ङ्क ङ्गा र्क द्व.
[glyphs representing archaic characters]
गंगावंशी राजा देवेन्द्रवर्मन् (गुणार्णव के पुत्र) के दानपत्र से (गांगेय सं. १८३ = ई. स. की ८वीं शताब्दी ?).
अ इ उ क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द ध न प फ
[glyphs representing archaic characters]
ब भ म य र ल व श ष स ह ङ्ग ङ्क ङ्गा ज्ञ *क ४प.
[glyphs representing archaic characters]
[Inscriptions line 1 in ancient characters]
[Inscriptions line 2 in ancient characters]
[Inscriptions line 3 in ancient characters]
[Inscriptions line 4 in ancient characters]
[Inscriptions line 5 in ancient characters]
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Plate LVIII.
लिपिपत्र ५८वां.
कलिंग नगर के गंगवंशी (पूर्वी) राजाओं के दानपत्रों से.
(ई. स. की ८वीं शताब्दी ?).
गंगवंशी देवेन्द्रवर्मन् (अनंतवर्मन् के पुत्र) दूसरे के दानपत्र से (गांगेय सं. [२] ५१ = ई. स. की ८वीं शताब्दी!).
ऊ अ आ उ ए क क क क ख ख ग ग ग ग च
ॐ अ [glyph] उ △ क क क क ख ख ग ग ग ग च
छ छ ज ज ञ ञ ञ ड ड ण त त थ द द ध
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph]
न न न प प फ भ म य य य र र ल व व
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph]
श ष ष स ह का या लि शि णी गु भु चू सू सू
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph]
हे षै गो रो च चो झा ज्ञा ञ्ञ ष्ट्रा दु न्ने र्मा र्यो र्व्व.
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph].
राजा देवेन्द्रवर्मन् (दूसरे) के विज़ागापट्टम् के दानपत्र से (गांगेय सं. २५४ = ई. स. की ८वीं शताब्दी!).
अ आ इ क ख ग च ट ड ण त थ थ द ध न फ भ
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph]
म म य य व श ष स ज्ञा ङ्ग क्क ज्ञ ञ्झि ध्ध न्द न्त स्था.
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph].
[चार पंक्तियों का मूल अनुलेख / Inscription facsimile lines in Ganga script]
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Plate LIX.
लिपिपत्र ५६वां.
कलिंग नगर के गंगवंशी राजा वज्रहस्त के पर्लाकिमेडि के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं शताब्दी के मध्य के आसपास).
अ अ आ आ इ ई उ ऋ ए क क क क क ख ख ग
[अक्षर-चिह्न]
ग ग ग ग च च ज ज ज ज ज ज ट ड ड ण ण
[अक्षर-चिह्न]
ण ण ण ण ण त त त त त त द द द द ध न न
[अक्षर-चिह्न]
न न प प प फ ब भ भ म म म य य य य र र
[अक्षर-चिह्न]
र र ल ल ल व व व व व श श श ष ष स स
[अक्षर-चिह्न]
स स ह ह ह ह ळ त्य र टा धा वा रा धि गु तुं
[अक्षर-चिह्न]
पु पू पू पू सू सू क्त क्क ह्न नै को गो हो कौ च्चि ज्ञा
[अक्षर-चिह्न]
ज्ञ ज्ञा ज्ञ ज्ञ ङ्कः ण्डि त्य त्त ह्मा न्ना क्क ख्यो ईं र्ब र्भा श्री .
[अक्षर-चिह्न]
[अभिलेख-पंक्ति १: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति २: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ३: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ४: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ५: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
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Plate LX. लिपिपत्र ६०वां.
पल्लववंशी राजाओं के तीन दानपत्रों के अंत के तामिल अंशों से.
(ई. स. की सातवीं और आठवीं शताब्दी).
पल्लववंशी राजा परमेश्वरवर्मन् के कूरम के दानपत्र से (ई. स. की ७वीं शताब्दी).
अ आ इ उ ए ऐ ओ क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/व म य र ल
व व ळ ऴ ऱ ण़ ण़् म् रू का चा पा मा कि नि पि यि
कु टु तु पु रु ळु कू रू ते ले वे नै ळै को क्का त्ति.
पल्लववंशी राजा नन्दिवर्मन् के कशाकूडि के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ इ उ ऊ ए क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/ब म य र ल
व ळ ऴ ऱ ण़ ऴ का टा या णा टि ति की नी कु टु त
मु रू णू ने कै रै टो णो ट्ट त्तु प्प र्रि.
पल्लववंशी राजा नन्दिवर्मन् (पल्लवमल्ल) के उदयेंदिरम् के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
इ उ ओ क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/ब म य र ल
व ऴ ऱ का सा या ति रि कु टु तु रु रू ळू कू के मे
मै रै को यो रो क्कु ण्ट त्ता प्प.
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Plate LXI. लिपिपत्र ६१वां.
पल्लवतिलक दन्तिवर्मन् और राष्ट्रकूट कृष्णराज (तीसरे) के लेखों से.
(ई. स. की नवीं और दसवीं शताब्दी).
पल्लवतिलकवंशी राजा दन्तिवर्मन् के समय के तिरुवेळ्ळरै के लेख से (ई. स. की ९वीं शताब्दी).
अ आ इ उ क ङ च ट ण त न प म य य र ल
[अक्षर-चिह्न]
व ळ ळ र ण क ण म् ण् का णा ना मा ला कि नि
[अक्षर-चिह्न]
कु टु त मु रु वु रू नू लू मू लू पे नै रै क्को.
[अक्षर-चिह्न]
राष्ट्रकूट राजा कण्णरदेव (कृष्णराज तीसरे) के समय के तिरुक्कोवलूर के लेख से (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
आ इ उ ए क ङ च ञ ट ण त न न प म म य र
[अक्षर-चिह्न]
ल व व ळ ळ र ण मा या रि वि कु टु णु तु पू मु
[अक्षर-चिह्न]
रु रू कू चू पे वे रै वै लौ पो ट्टा ट्टु.
[अक्षर-चिह्न]
राष्ट्रकूट राजा कण्णरदेव (कृष्णराज तीसरे) के समय के वेल्लूर के चटान पर के लेख से.
अ इ उ ए क ङ च च ञ ट ण त न प प प
[अक्षर-चिह्न]
म म य र ल व ळ ळ र ण ता ता ना या पि
[अक्षर-चिह्न]
वी कु टु चू लू वू पे मे कै कौ पै रै.
[अक्षर-चिह्न]
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Plate LXII. लिपिपत्र ६२वां.
राजेन्द्रचोल, विरूपाक्ष और वावलकामय के लेखादि से.
(ई. स. की ११वीं से १५वीं शताब्दी).
राजेन्द्रचोल (प्रथम) के तिरुमले के चट्टान पर खुदे हुए लेख से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ इ ई उ ऊ ए ओ क ङ च ञ ञ ट ण त न प म
அ இ ஈ உ ஊ எ ஒ க ங ச ஞ ஞ ட ண த ந ப ம
य र ल व ळ ऴ ऱ ऩ पा ति णि ची यु मु चू वे वै.
ய ர ல வ ள ழ ற ன பா தி ணி சீ யு மு சூ வெ வை.
पगन (बर्मा में) से मिले हुए वैष्णव लेख से (ई. स. की १३वीं शताब्दी के आसपास).
अ इ क क च ञ ट ट ट ण त न प प म म य य
அ இ க க ச ஞ ட ட ட ண த ந ப ப ம ம ய ய
र ल व ळ ऴ ऱ ऩ मा वा रि यि कु टु पु रे लै.
ர ல வ ள ழ ற ன மா வா ரி யி கு டு பு ரெ லை.
विजयनगर के राजा विरूपाक्ष के सोरैक्कावुर के दानपत्र से (श. सं. १३०८ = ई. स. १३८६).
अ आ इ उ ए ओ क ङ च ञ ट ट ण त न प म
அ ஆ இ உ எ ஒ க ங ச ஞ ட ட ண த ந ப ம
य र ल व ळ ऴ ऱ ऩ ति लि की कु पु कू वू रै को.
ய ர ல வ ள ழ ற ன தி லி கி கு பு கூ வூ ரை கொ.
महामंडलेश्वर वावलकामय के जंबुकेश्वर के लेख से (श. सं. १४०३ = ई. स. १४८२).
अ आ इ उ ए ओ क ङ च ट ण त न प म य र ल
அ ஆ இ உ எ ஒ க ங ச ட ண த ந ப ம ய ர ல
व ळ ऴ ऱ ऩ णा टि यि मु वु रू पू णा णै रौ.
வ ள ழ ற ன ணா டி யி மு வு ரூ பூ ணா ணை ரொ.
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Plate LXIII.
लिपिपत्र ६३वां.
जटिलवर्मन् और वरगुणपांड्य के लेखादि से.
(ई. स. की ८वीं और ९वीं शताब्दी).
जटिलवर्मन् के समय के आणैमले के लेख से (ई. स. की ८वीं शताब्दी):
अ आ इ उ क ङ च ञ ट ण त न प म य र
ल व ळ ऱ ऴ् प् य् ण् ता पा मा या कि रि नी कु
गु मु मू णे पे मे टै रै को क्कु र्क्कु ण्णै त्त.
जटिलवर्मन् के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी):
अ आ इ ई उ ए ओ क ङ च ञ ट ण त न प म य र
ल व ळ ऴ र् ऴ् क् त् चा ना मा णा कि टि की नी
कु टु तु यु रु कू चू रू ते पे यै रै को तो पो.
वरगुणपांड्य के अंबासमुद्र के लेख से (ई. स. की ९वीं शताब्दी):
अ आ इ इ ई उ ए ऐ ऐ ओ क ङ च ञ ट ण त
न न प म य र ल व ळ ळ ऴ र् र् ण् ण् का टा
रा वा वि री कु चु दु तु लु नू रू ने वै मे पो.
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Plate LXIV. लिपिपत्र ६४वां.
श्रीवल्लभंगोडै, भास्कररविवर्मन् और वीरराघव के दानपत्रों से.
(ई. स. की १०वीं से १४वीं शताब्दी के आसपास तक).
मांबळ्ळि से मिले हुए श्रीवल्लभंगोडै के दानपत्र से (कोल्लम् सं. १४६ = ई. स. ९७३).
अ आ इ ऊ क ङ च ञ ट ण त न प म म य र ल
व ळ ऴ र ऱ का ना या चि यि रि वि की ळी कु चु
तु लु ळु रु कू पू रू पे वे टै रै को चो पो रा.
कोचिन् से मिले हुए भास्कररविवर्मन् के दानपत्र से (ई. स. की ११वीं शताब्दी के आसपास).
अ आ इ ई उ ए क ङ च ञ ट ण त न प म
य र ल व ळ ऴ र ऱ ऩ टा मा टि ति वी कु
चु टु मु रु लु ळु कू नू यू के पे वे मै को तो.
कोट्टयं से मिले हुए वीरराघव के दानपत्र से (ई. स. की १४वीं शताब्दी के आसपास).
अ इ उ ए ए ऐ ओ क ङ च ञ ट ण त न प
म य र ल व ळ ऴ र ऱ ता या णा ति नि वि
चि णि कु तु मु रु रू नू चे टे तै तो यो रो.
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri
Plate LXV.
लिपिपत्र ६५वां.
मौर्यवंशी राजा अशोक के शहबाजगढ़ि और मान्सेरा के लेखों से.
(ई. स. पूर्व की तीसरी शताब्दी).
अ अ अ इ इ उ उ ए ए ए ओ अं क क ख ख ग ग घ
੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭
घ च च च छ छ ज ज ज झ ञ ञ ञ ट ट ट ठ ठ ठ
ड ड ढ ढ ण ण त त त त त थ थ द द द द ध ध
न न न न प प प फ फ ब ब ब भ भ म म म म
म य य र र र ल ल व व श श श ष ष स स स
ह ह ह ह कि खि चि जि ठि णि ति मि भि सि गु चु तु धु नु
यु वु झु जे ते ने दे ये पे चो नो मो शो षो सो जं थं नं मं मं
यं रं वं षं हं ग्र द्र द्रि त्ति/व च द्र ध प्रि/पि भ्ये य्य स्य ब्र/व स्त स्तिव स्यु/द्यु
[खरोष्ठी लेख: पंक्ति १]
[खरोष्ठी लेख: पंक्ति २]
[खरोष्ठी लेख: पंक्ति ३]
[खरोष्ठी लेख: पंक्ति ४]
[खरोष्ठी लेख: पंक्ति ५]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri
Plate LXVI. लिपिपत्र ६६वां.
हिन्दुस्तान के ग्रीक (यूनानी), शक, पार्थिअन और कुशनवंशी राजाओं के सिक्कों से.
(ई. स. पूर्व की दूसरी शताब्दी से ई. स. की पहिली शताब्दी तक).
ग्रीक (यूनानी) राजाओं के सिक्कों से.
अ इ इ ए अं अं क ख ख ग च च कु ज ज ज ज ज ज ज झ त
𐨀 𐨀𐨁 𐨀𐨁 𐨀𐨅 𐨀𐨎 𐨀𐨎 𐨐 𐨑 𐨑 𐨒 𐨕 𐨕 𐨐𐨂 𐨗 𐨗 𐨗 𐨗 𐨗 𐨗 𐨗 𐨙 𐨟
त त त त त त द द द ध ध न न न प प फ म म म य य य
𐨟 𐨟 𐨟 𐨟 𐨟 𐨟 𐨡 𐨡 𐨡 𐨢 𐨢 𐨣 𐨣 𐨣 𐨤 𐨤 𐨥 𐨨 𐨨 𐨨 𐨩 𐨩 𐨩
र र र र ल ल ल व श स स स स स स ह ह ह ह ह
𐨪 𐨪 𐨪 𐨪 𐨫 𐨫 𐨫 𐨬 𐨭 𐨯 𐨯 𐨯 𐨯 𐨯 𐨯 𐨱 𐨱 𐨱 𐨱 𐨱
डि दि फि बि मि शि पु पु यु वु मे हे झो चं यं क्र चे/तै द्र भ्र ख्वें स्त्र.
𐨜𐨁 𐨡𐨁 𐨥𐨁 𐨦𐨁 𐨨𐨁 𐨭𐨁 𐨤𐨂 𐨤𐨂 𐨩𐨂 𐨬𐨂 𐨨𐨅 𐨱𐨅 𐨙𐨆 𐨕𐨎 𐨩𐨎 𐨐𐨿𐨪 𐨕𐨅/𐨟𐨅 𐨡𐨿𐨪 𐨧𐨿𐨪 𐨑𐨿𐨬𐨅𐨎 𐨯𐨿𐨟𐨿𐨪.
शक, पार्थिअन और कुशनवंशी राजाओं के सिक्कों से मुख्य मुख्य अक्षर.
अ अ ओ ग क क ज ज ज फ फ फ र र र ल प श स म स ह ह
𐨀 𐨀 𐨀𐨆 𐨒 𐨐 𐨐 𐨗 𐨗 𐨗 𐨥 𐨥 𐨥 𐨪 𐨪 𐨪 𐨫 𐨤 𐨭 𐨯 𐨨 𐨯 𐨱 𐨱
इ ति थि चि कु गु गु जु दु दु पु मो प्र र्म र्व त्र य्र स्प ट्फि.
𐨀𐨁 𐨟𐨁 𐨠𐨁 𐨕𐨁 𐨐𐨂 𐨒𐨂 𐨒𐨂 𐨗𐨂 𐨡𐨂 𐨡𐨂 𐨤𐨂 𐨨𐨆 𐨤𐨿𐨪 𐨪𐨿𐨨 𐨪𐨿𐨬 𐨟𐨿𐨪 𐨩𐨿𐨪 𐨯𐨿𐨤 𐨚𐨿𐨥𐨁.
𐨨𐨱𐨪𐨗𐨯 𐨟𐨿𐨪𐨟𐨪𐨯 𐨡𐨁𐨩𐨨𐨁𐨡𐨯 . 𐨨𐨱𐨪𐨗𐨯 𐨟𐨿𐨪𐨟𐨪𐨯 𐨨𐨅𐨣𐨎𐨡𐨿𐨪𐨯
𐨟𐨿𐨪
like ठ or ष with ट?
Wait, could it be ठे?
Wait, what about शे शे?
The next two are: शे शे (or गे शे? Wait, look at the first: ग्रे? No, the second is शे, third is शे? Wait, look at the first: ग्रे?
Wait! Look at the glyphs:
Glyph 1: Kharoshthi tre or kṣe?
Glyph 2: Kharoshthi se?
Glyph 3: Kharoshthi śe?
Wait, look at the Devanagari labels:
Label 4 in Row 4: It's [?]
Wait, let's zoom in on Row 4 labels:
1: यु
2: मु
3: यु
4: [?] -> it has an e-matra: े. Consonant: looks like ष्ठ or ष्ट or ठ or ङ? Wait, look at the letter: ष्ठे?
5: [?] -> it has an e-matra: े. Consonant: ग with a slant? ग्रे! Look at the foot: it has a diagonal stroke to the left: ग्रे!
6
Plate LXVIII. लिपिपत्र ६८वां.
पार्थियनवंशी राजा गोंडोफर और कुशनवंशी राजा कनिष्क के समय के लेखों से.
(ई. स. की पहली शताब्दी).
पार्थियनवंशी राजा गोंडोफर के समय के तख्तिवाही के लेख से.
ए ए ख न फ व म म य य र व श ष स ह दि मि गु दु पु मे बो.
𐨀𐨅 𐨀𐨅 𐨑 𐨣 𐨥 𐨬 𐨨 𐨨 𐨩 𐨩 𐨪 𐨬 𐨭 𐨮 𐨯 𐨱 𐨡𐨁 𐨨𐨁 𐨒𐨂 𐨡𐨂 𐨤𐨂 𐨨𐨅 𐨦𐨆 .
कुशनवंशी राजा कनिष्क के समय के सुएविहार के ताम्रलेख से.
अ अ इ इ उ उ. ए क क ख ख ग च ज ट ठ त त द द द न प
𐨀 𐨀 𐨀𐨁 𐨀𐨁 𐨀𐨂 𐨀𐨂 𐨀𐨅 𐨐 𐨐 𐨑 𐨑 𐨒 𐨕 𐨗 𐨚 𐨛 𐨟 𐨟 𐨡 𐨡 𐨡 𐨣 𐨤
प ब भ भ म म य य य य र र ल व व स स स ह ह ह
𐨤 𐨦 𐨧 𐨧 𐨨 𐨨 𐨩 𐨩 𐨩 𐨩 𐨪 𐨪 𐨫 𐨬 𐨬 𐨯 𐨯 𐨯 𐨱 𐨱 𐨱
टि ठि णि ति दि दि नि नि बि भि मि ग्रि सि हि कु कु टु तु नु पु सु दे
𐨚𐨁 𐨛𐨁 𐨞𐨁 𐨟𐨁 𐨡𐨁 𐨡𐨁 𐨣𐨁 𐨣𐨁 𐨦𐨁 𐨧𐨁 𐨨𐨁 𐨒𐨿𐨪𐨁 𐨯𐨁 𐨱𐨁 𐨐𐨂 𐨐𐨂 𐨚𐨂 𐨟𐨂 𐨣𐨂 𐨤𐨂 𐨯𐨂 𐨡𐨅
ने रे श्रो से सो रो ठिं तिं नं नं मं रं सं च ल त्स प्र र्य र्व ष्क व्य स्य स्व .
𐨣𐨅 𐨪𐨅 𐨭𐨿𐨪𐨆 𐨯𐨅 𐨯𐨆 𐨪𐨆 𐨛𐨁𐨎 𐨟𐨁𐨎 𐨣𐨎 𐨣𐨎 𐨨𐨎 𐨪𐨎 𐨯𐨎 𐨕 𐨫 𐨟𐨿𐨯 𐨤𐨿𐨪 𐨪𐨿𐨩 𐨪𐨿𐨬 𐨮𐨿𐨐 𐨬𐨿𐨩 𐨯𐨿𐨩 𐨯𐨿𐨬 .
तक्षशिला के स्तूप से निकले हुए पात्र के लेख से. झेड़ा के लेख से.
अ च द ज व स सु दे प र्य र्व स्ति . ख घ ज ड ण फ ष मं .
𐨀 𐨕 𐨡 𐨗 𐨬 𐨯 𐨯𐨂 𐨡𐨅 𐨤 𐨪𐨿𐨩 𐨪𐨿𐨬 𐨯𐨿𐨟𐨁 . 𐨑 𐨓 𐨗 𐨜 𐨞 𐨥 𐨮 𐨨𐨎 .
[खरोष्ठी लेख पंक्तियाँ / Kharosthi Inscription Lines]
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Plate LXIX. लिपिपत्र ६६वां.
वर्डक (अफ़ग़ानिस्तान में), आरा, पाजा ओर कल्डरा के लेखों से.
(ई. स. की दूसरो शताब्दो).
वर्डक् से मिले हुए पीतल के पात्रपर खुदे हुए कुशनवंशी राजा हुविष्क के समय के लेख से.
अ़ इ इ़ इ़ ए ए क ख ग ग च ज ज ज ज ड ण/न त द ध न/ण प भ
[खरोष्ठी वर्णमाला पंक्ति १]
भ म य य र र ल व व व श श ष स स ह ह घि कि डि ति मि
[खरोष्ठी वर्णमाला पंक्ति २]
रि हि कु गु दु/द्यु त पु मु मु यु रु णे/ने मे रे ले वे जो यो शो यं रं शं
[खरोष्ठी वर्णमाला पंक्ति ३]
सं सं क्य ग्य य्य/य्य चि प्य भ्र म्पि/श्चि म्पि/श्चि र्ट र्य र्व र्वि ल्य ष्ण्/ष्णा ष्क ष्टु स्ते स्थ ल .
[खरोष्ठी वर्णमाला पंक्ति ४]
कुशनवंशी राजा वाझेष्क के पुत्र कनिष्क के समय के आरा के लेख से.
ए क ख च ण र ल व ष . स नि नु कु पु झे दे च त्स र्थ र्य र्व ष्क ष .
[खरोष्ठी वर्णमाला पंक्ति ५]
पाजा के लेख से. कल्डरा के लेख से.
घ च द म श सं चे त्स अ . इ त थ र ष वि पु दो व अ .
[खरोष्ठी वर्णमाला पंक्ति ६]
[खरोष्ठी अभिलेख अनुलेख - पंक्ति १]
[खरोष्ठी अभिलेख अनुलेख - पंक्ति २]
[खरोष्ठी अभिलेख अनुलेख - पंक्ति ३]
[खरोष्ठी अभिलेख अनुलेख - पंक्ति ४]
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Plate LXX. लिपिपत्र ७० वां.
तक्षशिला, फ़तहजंग, कनिहारा, पथियार और चारसडा के लेखों से.
(ई. स. की दूसरी शताब्दी).
तक्षशिला से मिले हुए रौप्यपत्र के लेख से.
अ, अ इ उ ए ए ओ ग ग च च क ज झ ठ ड त त त द ध न
[खरोष्ठी अक्षर-पंक्ति १]
न न प ब भ म य र र व श ष स स ह ह कि ति ति
[खरोष्ठी अक्षर-पंक्ति २]
दि हि नि पि मि लि वि शि खु तु नु पु बु के दे मे से गो तो
[खरोष्ठी अक्षर-पंक्ति ३]
नो बो रो लो त्म त्र त्र त्र त्व प्र प्रि र्व स्त.
[खरोष्ठी अक्षर-पंक्ति ४]
फ़तहजंग के लेख से. | कनिहारा के लेख से. | पथियार के लेख से.
ठ ड त न य मु शे खो प्रो. | य श स पु क्रि. | क त र स णि पु.
[खरोष्ठी अक्षर] | [खरोष्ठी अक्षर] | [खरोष्ठी अक्षर]
चारसडा से मिले हुए ३ लेखों से.
अ घ च त द न म य व स दि बु मु मु रु खे धो सं सं.
[खरोष्ठी अक्षर-पंक्ति]
[खरोष्ठी अभिलेख - पंक्ति १]
[खरोष्ठी अभिलेख - पंक्ति २]
[खरोष्ठी अभिलेख - पंक्ति ३]
[खरोष्ठी अभिलेख - पंक्ति ४]
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Plate LXXI. लिपिपत्र ७१वां.
ब्राह्मी और उससे निकली हुई लिपियों के प्राचीन शैली के अंक.
(१ से ९ तक).
तालिका १ (ऊपरी भाग)
| अंक | अशोक के लेखों से. ई० स० पूर्व की तीसरी शताब्दी. | नानाघाट के लेख से. ई० स० पूर्व की दूसरी शताब्दी. | कुशनवंशियों के समय के मथुरा आदि के लेखों से. ई० स० की पहिली व दूसरी शताब्दी. | क्षत्रप और आंध्रवंशियों के समय के नासिक आदि की गुफ़ाओं के लेखों से. ई० स० की दूसरी शताब्दी. | क्षत्रपों के सिक्कों से. ई० स० की दूसरी से चौथी शताब्दी. | जग्गय्यपेट के लेखों, पल्लव शिवस्कन्दवर्मन् तथा राजा जयवर्मन् के ३ दानपत्रों से. ई० स० की चौथी शताब्दी. |
|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | — | — | — — | — — | — — | — — ⁓ ⁓ ⁓ |
| २ | = | = | = | = = | = | = = ⁓ ⁓ ⁓ |
| ३ | ≡ | ≡ | ≡ ≡ | ≡ | ≡ | ⁓⁓⁓ ⁓⁓⁓ ⁓⁓⁓ |
| ४ | + | Ұ Ұ | ५ ५ | Ұ Ұ Ұ Ұ | Ұ Ұ Ұ ४ ४ | ४ ४ ४ ४ ४ |
| ५ | 𑀪 𑀪 𑀪 𑀪 | 𑀪 𑀪 𑀪 | 𑀪 𑀪 𑀪 𑀪 | 𑀪 𑀪 𑀪 𑀪 | ||
| ६ | 𑀘 𑀘 | ५ | 𑀘 𑀘 𑀘 𑀘 | ५ | ५ | 𑀘 𑀘 𑀘 𑀘 𑀘 |
| ७ | 𑀕 | 𑀕 𑀕 𑀕 | 𑀕 𑀕 | 𑀕 𑀕 | 𑀕 𑀕 𑀕 | |
| ८ | 𑀬 𑀬 𑀬 𑀬 𑀬 | 𑀬 | 𑀬 𑀬 𑀬 𑀬 | 𑀬 𑀬 𑀬 𑀬 𑀬 | ||
| ९ | 𑀒 | 𑀒 | ३ | ३ ३ ३ |
तालिका २ (निचला भाग)
| अंक | गुप्तों तथा उनके समकालीन परिव्राजक और उच्चकल्प के महाराजाओं आदि के लेख व दानपत्रों से. ई० स० की चौथी से छठीं शताब्दी. | वाकाटकों के दान-पत्रों से. ई० स० की पांचवीं शताब्दी. | पल्लव और शालंकायनवंशी राजाओं के दानपत्रों से. ई० स० की पांचवीं और छठीं शताब्दी. | वलभी के राजाओं के दानपत्रों से. ई० स० की छठीं से आठवीं शताब्दी तक. | नैपाल के लेखों से. ई० स० की ७वीं से ९वीं शताब्दी. |
|---|---|---|---|---|---|
| १ | — ⁓ | 𑀦 𑀦 𑀦 𑀦 | — ⁓ | — | |
| २ | = = ⁓ ⁓ | = = = = | = = ⁓ ⁓ ⁓ | = = | |
| ३ | ≡ ≡ ≡ ≡ | ≡ ≡ ≡ | ≡ ≡ ≡ | ≡ ३ ३ | |
| ४ | ४ ४ ४ ४ | ४ ४ ४ ४ ४ | ४ | ||
| ५ | 𑀪 𑀪 𑀪 𑀪 | 𑀪 | 𑀪 𑀪 | 𑀪 𑀪 𑀪 𑀪 | ४ ५ ४ ५ |
| ६ | ५ | 𑀘 | ५ ५ | ७ ७ | |
| ७ | 𑀕 𑀕 | 𑀕 𑀕 | 𑀕 | ||
| ८ | 𑀬 𑀬 𑀬 𑀬 𑀬 | 𑀬 | 𑀬 𑀬 | ||
| ९ | ३ ३ ३ | ७ | ३ ३ | ||
| CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri |
Plate LXXII. लिपिपत्र ७२वां.
ब्राह्मी और उससे निकली हुई लिपियों के प्राचीनशैली के अंक.
(१ से ९, और १० से ९० तक).
[ऊपरी सारणी: १ से ९ तक]
| अंक | कलिंग के गंगवंशीयों के दानपत्रों से. ई० स० की ७वीं (?) और ८वीं (?) शताब्दी. | प्रतिहारों के लेख व दानपत्रों से. ई० स० की ९वीं और १०वीं शताब्दी. | भिन्न भिन्न लेख व दानपत्रों से. ई० स० की ५वीं से ८वीं शताब्दी तक | हस्तलिखित पुस्तकों से: बावर साहिब के प्राप्त किये हुए प्राचीन पुस्तकों से. ई० स० की छठी शताब्दी. | हस्तलिखित पुस्तकों से: नैपाल से मिले हुए बौद्ध पुस्तकों से. | हस्तलिखित पुस्तकों से: जैन पुस्तकों से. |
|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | — | 𑁒 𑁒 𑁒 | 𑁒 𑁒 | |||
| २ | 𑁓 𑁓 | 𑁓 | = 𑁓 𑁓 २ | २ २ २ १२ | २ | |
| ३ | 𑁔 | ३ ३ | ≡ 𑁔 𑁔 ३ | ३ ३ ३ १३ | ३ | |
| ४ | ४ | ४ ५ ५ ४ ४ | 𑁕 ५ ५ ५ ४ | क॑ ई॑ 𑁕 | ||
| ५ | 𑁖 𑁖 | 𑁖 | ६ | 𑁖 | ६ 𑁖 𑁖 𑁖 ६ | थ॑ ट॑ त्र॑ |
| ६ | 𑁗 | ६ | ५ ५ | ५ ९ २ ६ ५ | र्ष॑ 𑁗 | |
| ७ | 𑁘 | ७ | 𑁘 ७ ले गु 𑁘 | र्था॑ 𑁘 𑁘 | ||
| ८ | ५ ९ ५ | 𑁙 | ९ | ७ | 𑁙 ड 𑁙 द्व्र | र्फा॑ द्ध्र |
| ९ | ३ ३ ३ | 𑁚 ७ | २ ? | ३ 𑁚 𑁚 𑁚 | 𑁚 𑁚 |
[निचली सारणी: १० से ९० तक]
| अंक | अशोक के लेखों से. ई. स. पूर्व की तीसरी शताब्दी | नानाघाट के लेख से. ई० स० पूर्व की दूसरी शताब्दी. | कुशनवंशियों के समय के मथुरा आदि के लेखों से. ई० स० की पहिली व दूसरी शताब्दी. | छत्रपों और आंध्र वंशियों के समय के नासिक आदि की गुफाओं के लेखों से. ई० स० की दूसरी शताब्दी. | छत्रपों के सिक्कों से. ई० स० की दूसरी से चौथी शताब्दी. | जग्गयपेट के लेखों तथा पल्लव शिवस्कन्दवर्मन् आदि के दानपत्रों से. ई० स० की चौथी शताब्दी. |
|---|---|---|---|---|---|---|
| १० | 𑁛 𑁛 𑁛 | 𑁛 𑁛 𑁛 𑁛 𑁛 | 𑁛 𑁛 | 𑁛 𑁛 𑁛 K | 𑁛 𑁛 | |
| २० | ९ ६ 𑁜 𑁜 | 𑁜 𑁜 | 𑁜 𑁜 | |||
| ३० | 𑁝 | θ θ θ | 𑁝 | θ 𑁝 | 𑁝 | |
| ४० | 𑁞 𑁞 𑁞 | N V d | ||||
| ५० | ५ ५ ५ X X | ५ | H H ४ | |||
| ६० | 𑁠 𑁠 | 𑁠 𑁠 𑁠 | J | |||
| ७० | V Y Y | 𑁡 | ||||
| ८० | X 𑁢 | 十 | X X X X | |||
| ९० | 𑁣 | 𑁣 𑁣 𑁣 | 𑁣 𑁣 𑁣 𑁣 𑁣 | |||
| ⊕ ⊕ | ⊕ ⊕ |
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