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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 291

Plate LXIV. लिपिपत्र ६४वां.
श्रीवल्लभंगोडै, भास्कररविवर्मन् और वीरराघव के दानपत्रों से.
(ई. स. की १०वीं से १४वीं शताब्दी के आसपास तक).
मांबळ्ळि से मिले हुए श्रीवल्लभंगोडै के दानपत्र से (कोल्लम् सं. १४६ = ई. स. ९७३).
अ आ इ ऊ क ङ च ञ ट ण त न प म म य र ल
व ळ ऴ र ऱ का ना या चि यि रि वि की ळी कु चु
तु लु ळु रु कू पू रू पे वे टै रै को चो पो रा.
कोचिन् से मिले हुए भास्कररविवर्मन् के दानपत्र से (ई. स. की ११वीं शताब्दी के आसपास).
अ आ इ ई उ ए क ङ च ञ ट ण त न प म
य र ल व ळ ऴ र ऱ ऩ टा मा टि ति वी कु
चु टु मु रु लु ळु कू नू यू के पे वे मै को तो.
कोट्टयं से मिले हुए वीरराघव के दानपत्र से (ई. स. की १४वीं शताब्दी के आसपास).
अ इ उ ए ए ऐ ओ क ङ च ञ ट ण त न प
म य र ल व ळ ऴ र ऱ ता या णा ति नि वि
चि णि कु तु मु रु रू नू चे टे तै तो यो रो.
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri