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सर्वकोश
प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 290

Plate LXIII.
लिपिपत्र ६३वां.
जटिलवर्मन् और वरगुणपांड्य के लेखादि से.
(ई. स. की ८वीं और ९वीं शताब्दी).


जटिलवर्मन् के समय के आणैमले के लेख से (ई. स. की ८वीं शताब्दी):
अ आ इ उ क ङ च ञ ट ण त न प म य र
ल व ळ ऱ ऴ् प् य् ण् ता पा मा या कि रि नी कु
गु मु मू णे पे मे टै रै को क्कु र्क्कु ण्णै त्त.


जटिलवर्मन् के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी):
अ आ इ ई उ ए ओ क ङ च ञ ट ण त न प म य र
ल व ळ ऴ र् ऴ् क् त् चा ना मा णा कि टि की नी
कु टु तु यु रु कू चू रू ते पे यै रै को तो पो.


वरगुणपांड्य के अंबासमुद्र के लेख से (ई. स. की ९वीं शताब्दी):
अ आ इ इ ई उ ए ऐ ऐ ओ क ङ च ञ ट ण त
न न प म य र ल व ळ ळ ऴ र् र् ण् ण् का टा
रा वा वि री कु चु दु तु लु नू रू ने वै मे पो.


CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri