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प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

The Paleography of India by G.H. Ojha

रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

Plate XLIX.
लिपिपत्र ४६वां.
कोरुमेल्लि से मिले हुए पूर्वी चालुक्यवंशी राजा राजराज के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ अ आ आ इ ई उ ए क ख ग घ च च छ ज ट ट
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
ठ ड ढ ण त थ द ध न प फ ब भ म म य र ल
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
ल व श ष स ह र त् न् ना रा लां कि णि ति रि त्ति जी
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
भी मो नु रु चू सू दृ वृ जें ते दे ने ये तै तो
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
धो भो मो मो पो भौ क्र क्रो च्र च्रो ङ्के ङ्गे दृ ण्डी सा
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
हे द्व न्न न्नी न्मु प्र न्न र्बु र्म्मा र्ग्य ष्ट्र श्री द्या द्वा
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
ष्णो स्मा स्य स्व स्मो स्त्र . ञ ञा . ख र . ञ खा . ञ .
[तदनुरूप लिपि-चिह्न]
[मूल दानपत्र की लिपिबद्ध पंक्तियाँ:]
[पंक्ति १: प्राकृत/संस्कृत प्रशस्ति का प्रारम्भिक भाग]
[पंक्ति २: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ३: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ४: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ५: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ६: प्रशस्ति पाठ]
[पंक्ति ७: प्रशस्ति पाठ]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri

Plate L. लिपिपत्र ५०वां.
काकतीयवंशी राजा रुद्रदेव और गणपति के समय के लेखों से.
(ई. स. की १२वीं और १३वीं शताब्दी).
काकतीयवंशी राजा रुद्रदेव के अनमकोंडा के लेख से (श. सं. १०८४ = ई. स. ११६२).
अ आ इ ई उ ए ओ घ ट ठ ड ढ थ ध भ ष स ळ.
𑠀 𑠁 𑠂 𑠃 𑠄 𑠆 𑠈 ... [काकतीय-लिपि वर्णमाला]
काकतीयवंशी राजा गणपति के समय के चेब्रोलू के लेख से (श. सं. ११३५ = ई. स. १२१३).
अ आ इ ई उ ऊ ए ओ क ख ग घ च छ ज झ ट
[काकतीय-लिपि वर्णमाला]
ठ ड ण त थ द ध न प फ ब भ म य र ल व
[काकतीय-लिपि वर्णमाला]
श ष स ह ळ ऱ् त् न् का टा ला कि रि वि दी री कु
[काकतीय-लिपि वर्णमाला]
पू पृ के दे कै दै बो ह्यं गौ सौ त्ति ज्ञ् ण्ण नं स्त्री
[काकतीय-लिपि वर्णमाला]
द्रु प्रे भ्रां र्ग्यं ल्ल ष्कि श्री ष्ट्रा स्थ स्फा. ऋ. ॠ. ऌ. ऐ.
[काकतीय-लिपि वर्णमाला]
[अभिलेख पाठ पंक्ति १ - काकतीय लिपि]
[अभिलेख पाठ पंक्ति २ - काकतीय लिपि]
[अभिलेख पाठ पंक्ति ३ - काकतीय लिपि]
[अभिलेख पाठ पंक्ति ४ - काकतीय लिपि]
[अभिलेख पाठ पंक्ति ५ - काकतीय लिपि]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri

Plate LI.
लिपिपत्र ५१वां.
नामय नायक, अन्नवेम और गणदेव के दानपत्रों से.
(ई. स. की १४वीं और १५वीं शताब्दी).
पीठापुरी के नामय नायक के दोनेपुंडि के दानपत्र से (श. सं १२५८ = ई. स. १३३७).
अ आ ई उ ए क ख ग च ज ट ठ ड ण त त थ
అ ఆ ఈ ఉ ఎ క ఖ గ చ జ ట ఠ డ ణ త త థ
द ध न प फ ब भ म य र ल व श ष ष स
ద ధ న ప ఫ బ భ మ య ర ల వ శ ష ష స
ह ळ ऱ दा मा खि रि वि गी मु ऊ भू जूं
హ ళ ఱ దా మా ఖి రి వి గి ము ఊ భూ జూం
वै शौ शो पौ चि न्ना च्छु ज्ञा न्नों श्री श्री स्तु स्या स्सौ.
వై శౌ శో పౌ చి న్నా చ్ఛు జ్ఞా న్నో శ్రీ శ్రీ స్తు స్యా స్సౌ.
वनपल्ली से मिले हुए अन्नवेम के दानपत्र से मुख्य मुख्य अक्षर (श. सं १३०० = ई. स. १३७८).
आ ऋ च फ म ळ त टा षा पु यै हो ख्यै ह्न प्रशो.
ఆ ఋ చ ఫ మ ళ త టా షా పు యై హో ఖ్యై హ్న ప్రశో.
कोण्डवीडु के राजा गणदेव के दानपत्र से (श. सं. १३७७ = ई. स. १४५५).
अ ट च प व ह न् ढा ला ति लो ङ्क्ष टृ न्ना श्रो श्रो.
అ ట చ ప వ హ న్ ఢా లా తి లొ ఙ్క్ష తృ న్నా శ్రో శ్రో.
ఁ|ఁ శ్రీఉమామహేశ్వరాభ్యాం నమః। దాయాద్వః (श्रीउमामहेश्वराभ्यां नमः । पायाद्वः)
కరివదనః ప్రతనిజదానస్తుతాదివావిగనౌ। (करिवदनः प्रथितनिजदानस्तुतो दिवाविशनौ ।)
నిసదతి ముహురంపిదత్తె కర్ణౌ యః రన్త- (निसदति मुहुुरपिदत्ते कर्णौ यः रन्त-)
తాలాభ్యాం॥ త్రివిష్టరంస్తు భవదిష్టత్థలప్రదా- (तालाभ्यां ॥ त्रिविष्टरंस्तु भवदिष्टस्थलप्रदा-)
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Plate LII.
लिपिपत्र ५१वां.
पल्लववंशी राजाओं के समय के १० लेखों और कूरम के दानपत्र से.
(ई. स. की सातवीं शताब्दी).
पल्लववंशी राजा नरसिंहवर्मन् के समय के मामल्लपुरं के छोटे छोटे ६ लेखों से.
अ अ अ ए द न न प भ य य श ह जा ळि :
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - मामल्लपुरं लेख]
पल्लववंशी राजा राजसिंह के समय के कांचीपुरं के कैलासनाथ नामक मंदिर के लेख से.
अ इ ए घ च ज थ ध न प ब भ ल व म् टा णा मा
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - कांचीपुरं लेख, पंक्ति १]
ळां ति षि रो गु दू पूहू क्ल ह खैः क्र चु ङ्क ज्ञा ञ्च र्थ्य
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - कांचीपुरं लेख, पंक्ति २]
कूरम से मिले हुए पल्लववंशी राजा परमेश्वरवर्मन् के दानपत्र से.
अ आ इ ई उ ए क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द ध
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - कूरम दानपत्र, पंक्ति १]
न न प प फ ब भ म य र ल व श ष स ह ह ळ मा
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - कूरम दानपत्र, पंक्ति २]
सिं ती कु णु गृह क्त भृ तो हो पौ च्त च्छ ज्ञा ञ्च ण्ड्य भ र्म्म.
[पल्लव लिपि वर्णमाला रूप - कूरम दानपत्र, पंक्ति ३]
[कूरम दानपत्र का मूल पल्लव लिपि अभिलेख - पंक्ति १]
[कूरम दानपत्र का मूल पल्लव लिपि अभिलेख - पंक्ति २]
[कूरम दानपत्र का मूल पल्लव लिपि अभिलेख - पंक्ति ३]
[कूरम दानपत्र का मूल पल्लव लिपि अभिलेख - पंक्ति ४]
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Plate LIII. लिपिपत्र ५३वां.
पल्लव और पाण्ड्यवंशी राजाओं के समय के लेख और दानपत्रों से.
(ई. स. की ८वीं शताब्दी).
मावलीपुरं के अतिरणचंडेश्वर नामक गुफामंदिर के लेख से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ आ इ क ख ग च ण द ध व जा शु श्च ष्णा स्था स्य.
[अतिरणचंडेश्वर गुफामंदिर लेख के वर्ण/अक्षर-चिह्न]
कशाकूडि से मिले हुए पल्लव राजा नंदिवर्मा के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ आ इ ई उ ए ऐ क ख ग घ च छ ज ट ड ण त
[कशाकूडि दानपत्र के वर्ण/स्वर-व्यंजन चिह्न]
थ द ध न प फ ब भ म य र ल व श ष स ह ळ
[कशाकूडि दानपत्र के व्यंजन चिह्न]
न म का या रि णी कु तु पु धू भू द्ध दृ चे के कै तो कौ
[कशाकूडि दानपत्र के मात्रा-युक्त वर्ण चिह्न]
मौ क्त च चि ङ्ग च्छ ज्ञा ञ्च ण्ठ ण्ड त्या त्य न्द्र र्द्र ब्द श्रो स्थि.
[कशाकूडि दानपत्र के संयुक्ताक्षर चिह्न]
पाण्ड्यवंशी राजा परान्तक के समय के नारसिंगं के लेख से (कलियुग सं. ३८७१ = ई. स. ७७०).
ए क च ज न ष स म् वा हा सी गृ रो ग ण्ड्य ष्णोः.
[नारसिंगं लेख के वर्ण/संयुक्ताक्षर चिह्न]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति १]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति २]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति ३]
[पाण्ड्य/पल्लव कालीन अभिलेख का मूल प्रतिरूप - पंक्ति ४]
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Plate LIV. लिपिपत्र ५४वां.

पल्लववंशी नन्दिवर्मा (पल्लवमल्ल) और गंगावंशी पृथिवीपति (दूसरे) के दानपत्रों से
(ई. स. की ८वीं और १०वीं शताब्दी).

पल्लववंशी नन्दिवर्मा (पल्लवमल्ल) के उदयॆन्दिरं के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ अ अ आ इ उ उ ए क ख ग ग घ च ज ट
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: अ, अ, अ, आ, इ, उ, उ, ए, क, ख, ग, ग, घ, च, ज, ट]
ठ ड ढ ण त थ द ध न प व भ म य र र ल
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, व, भ, म, य, र, र, ल]
ल व श ष स ह ळ म् मा गि नी वी कु रु भु सु
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण: ल, व, श, ष, स, ह, ळ, म्, मा, गि, नी, वी, कु, रु, भु, सु]
भू मू क्र द्व रै णां जौ न्त च्छी न्थ्य ञ्ज ङ्कु × क.
[पल्लव-ग्रन्थ लिपि वर्ण व संयुक्ताक्षर: भू, मू, क्र, द्व, रै, णां, जौ, न्त, च्छी, न्थ्य, ञ्ज, ङ्कु, क.]

गंगावंशी राजा पृथिवीपति (दूसरे) के उदयॆन्दिरं के दानपत्र से (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
अ आ उ ए क क ख ग घ च ज ट ठ ण त थ द ध
[गंगावंशी ग्रन्थ लिपि वर्ण: अ, आ, उ, ए, क, क, ख, ग, घ, च, ज, ट, ठ, ण, त, थ, द, ध]
न प ब भ म य र ल व श ष स ह ळ पी ण्ड न्नी म्र.
[गंगावंशी ग्रन्थ लिपि वर्ण: न, प, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह, ळ, पी, ण्ड, न्नी, म्र.]

[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति १]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति २]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ३]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ४]
[अभिलेख/दानपत्र का ग्रन्थ-लिपि मूल पाठ - पंक्ति ५]
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Plate LV. लिपिपत्र ५५वां.
कुलोत्तुंगचोड और विक्रमचोड के लेखों तथा विक्रमादित्य के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं और १२वीं शताब्दी).
कुलोत्तुंगचोड के चिदंबरं के लेख से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
य द न भ य र श स ह ळ की क्ष श्व ट्टा श्रीः.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
विक्रमचोड के समय के शेविलिमेडु के लेख से (ई. स. ११२४).
ए ख ग च ज ट ड ण द ध प ब भ म य र ल
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
व श ह ळ त् म् कु शु कृ घृ नृ श्वे च्र व्या स्रो त्त.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
बाणवंशी राजा विक्रमादित्य (विजयवाडू) दूसरे के उदयेंदिरं के दानपत्र से (ई. स. की १२वीं शताब्दी).
अ आ इ क ख ग घ च ज ट ठ ड ण त य द ध
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
न प ब भ म य य र ल ल व श ष स स ह
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
ळ ळ त् म् चि झ ञ ध्य ण्डी त्या द्या द्वौ न्न न्द न्त्रा स्न.
[तदनुरूप ग्रन्थ लिपि चिह्न]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति १]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति २]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति ३]
[दानपत्र का मूल ग्रन्थ-लिपि लेख — पंक्ति ४]
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Plate LVI.
लिपिपत्र ५६वां.
पाण्ड्यवंशी सुंदरपाण्ड्य के लेख और यादव विरूपाक्ष तथा गिरिभूपाल के दानपत्रों से.
(ई. स. की १३वीं से १५वीं शताब्दी तक).
पाण्ड्यवंशी राजा सुन्दरपाण्ड्य के ओरंगं के लेख से (ई. स. की १३वीं शताब्दी).
अ आ इ उ ऊ ऌ ओ क ख ग घ ङ च ज ट ठ
ड ण त थ द ध न प फ ब भ म य र ल
व श ष स ह ळ त् त् म् र् कि री मु मू क्त दृ
ष्टं ते घै वो हौ क्लृ क्रा क्र च्च च्छा
ञ्ज ञ्जि ण्ड्य द्रु न्द म्प र्ङ्गि र्ष्णा र्य्य र्ब्बि र्म्म श्री स्ख.
आलंपूण्डि से मिलेहुए विजयनगर के यादव राजा विरूपाक्ष के दानपत्र से (श. सं. १३०५ = ई. स. १३८३).
ओं ख ग ड म र श ळ त न का थि सी कु ष्पु चू रू क्रा.
विजयनगर के यादव गिरिभूपाल के दानपत्र से (शक. सं. १३४६ = ई. स. १४२४).
अ आ उ ऋ ए औ क ग घ फ भ म ह ळ म् रू व्य.
हरिः ॐ स्वस्ति श्रीः येनामौलि
करुणाम्भोधेय दशां श्रीरङ्गवज्रकान्ताः
सुधाधरह्वनाधारवुणयिनं कण्ठा-
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Plate LVII.
लिपिपत्र ५७ वां.
कलिंग नगर के गंगावंशी (पूर्वी) राजाओं के तीन दानपत्रों से.
(ई. स. की ७वीं और ८वीं शताब्दी ?)
पूर्वी गंगावंशी राजा इन्द्रवर्मन् के अच्युतपुरं के दानपत्र से (गांगेय सं. ८७ = ई. स. की ७वीं शताब्दी !).
अ आ इ उ क ख ग घ च ज ट ड त द ध न प फ ब
[glyphs representing archaic characters]
भ म र व श ष या या लि णी स्तू द्ये जे गो गौ ङ्गा ङ्ग द्व.
[glyphs representing archaic characters]
पूर्वी गंगावंशी राजा इन्द्रवर्मन् (दूसरे) के चिकाकोल के दानपत्र से (गांगेय सं. १४६ = ई. स. की ७वीं शताब्दी ?).
आ क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द ध न प फ ब भ
[glyphs representing archaic characters]
म य र श ष स म् ला त्रि जे हे या ङ्ग ङ्क ङ्गा र्क द्व.
[glyphs representing archaic characters]
गंगावंशी राजा देवेन्द्रवर्मन् (गुणार्णव के पुत्र) के दानपत्र से (गांगेय सं. १८३ = ई. स. की ८वीं शताब्दी ?).
अ इ उ क ख ग घ च ज ट ड ण त थ द ध न प फ
[glyphs representing archaic characters]
ब भ म य र ल व श ष स ह ङ्ग ङ्क ङ्गा ज्ञ *क ४प.
[glyphs representing archaic characters]
[Inscriptions line 1 in ancient characters]
[Inscriptions line 2 in ancient characters]
[Inscriptions line 3 in ancient characters]
[Inscriptions line 4 in ancient characters]
[Inscriptions line 5 in ancient characters]
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Plate LVIII.

लिपिपत्र ५८वां.

कलिंग नगर के गंगवंशी (पूर्वी) राजाओं के दानपत्रों से.

(ई. स. की ८वीं शताब्दी ?).
गंगवंशी देवेन्द्रवर्मन् (अनंतवर्मन् के पुत्र) दूसरे के दानपत्र से (गांगेय सं. [२] ५१ = ई. स. की ८वीं शताब्दी!).
ऊ अ आ उ ए क क क क ख ख ग ग ग ग च
ॐ अ [glyph] उ △ क क क क ख ख ग ग ग ग च
छ छ ज ज ञ ञ ञ ड ड ण त त थ द द ध
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph]
न न न प प फ भ म य य य र र ल व व
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph]
श ष ष स ह का या लि शि णी गु भु चू सू सू
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph]
हे षै गो रो च चो झा ज्ञा ञ्ञ ष्ट्रा दु न्ने र्मा र्यो र्व्व.
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph].
राजा देवेन्द्रवर्मन् (दूसरे) के विज़ागापट्टम् के दानपत्र से (गांगेय सं. २५४ = ई. स. की ८वीं शताब्दी!).
अ आ इ क ख ग च ट ड ण त थ थ द ध न फ भ
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph]
म म य य व श ष स ज्ञा ङ्ग क्क ज्ञ ञ्झि ध्ध न्द न्त स्था.
[glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph] [glyph].
[चार पंक्तियों का मूल अनुलेख / Inscription facsimile lines in Ganga script]
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Plate LIX.
लिपिपत्र ५६वां.
कलिं‍ग नगर के गंगवंशी राजा वज्रहस्त के पर्लाकिमेडि के दानपत्र से.
(ई. स. की ११वीं शताब्दी के मध्य के आसपास).
अ अ आ आ इ ई उ ऋ ए क क क क क ख ख ग
[अक्षर-चिह्न]
ग ग ग ग च च ज ज ज ज ज ज ट ड ड ण ण
[अक्षर-चिह्न]
ण ण ण ण ण त त त त त त द द द द ध न न
[अक्षर-चिह्न]
न न प प प फ ब भ भ म म म य य य य र र
[अक्षर-चिह्न]
र र ल ल ल व व व व व श श श ष ष स स
[अक्षर-चिह्न]
स स ह ह ह ह ळ त्य र टा धा वा रा धि गु तुं
[अक्षर-चिह्न]
पु पू पू पू सू सू क्त क्क ह्न नै को गो हो कौ च्चि ज्ञा
[अक्षर-चिह्न]
ज्ञ ज्ञा ज्ञ ज्ञ ङ्कः ण्डि त्य त्त ह्मा न्ना क्क ख्यो ईं र्ब र्भा श्री .
[अक्षर-चिह्न]
[अभिलेख-पंक्ति १: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति २: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ३: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ४: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
[अभिलेख-पंक्ति ५: दानपत्र का मूल पाठ (गंगवंशी लिपि)]
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Plate LX. लिपिपत्र ६०वां.
पल्लववंशी राजाओं के तीन दानपत्रों के अंत के तामिल अंशों से.
(ई. स. की सातवीं और आठवीं शताब्दी).
पल्लववंशी राजा परमेश्वरवर्मन् के कूरम के दानपत्र से (ई. स. की ७वीं शताब्दी).
अ आ इ उ ए ऐ ओ क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/व म य र ल
व व ळ ऴ ऱ ण़ ण़् म् रू का चा पा मा कि नि पि यि
कु टु तु पु रु ळु कू रू ते ले वे नै ळै को क्का त्ति.
पल्लववंशी राजा नन्दिवर्मन् के कशाकूडि के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
अ इ उ ऊ ए क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/ब म य र ल
व ळ ऴ ऱ ण़ ऴ का टा या णा टि ति की नी कु टु त
मु रू णू ने कै रै टो णो ट्ट त्तु प्प र्रि.
पल्लववंशी राजा नन्दिवर्मन् (पल्लवमल्ल) के उदयेंदिरम् के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी).
इ उ ओ क/ग ङ च/जञ ञ ट/ड ण त/द न प/ब म य र ल
व ऴ ऱ का सा या ति रि कु टु तु रु रू ळू कू के मे
मै रै को यो रो क्कु ण्ट त्ता प्प.
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri

Plate LXI. लिपिपत्र ६१वां.
पल्लवतिलक दन्तिवर्मन् और राष्ट्रकूट कृष्णराज (तीसरे) के लेखों से.
(ई. स. की नवीं और दसवीं शताब्दी).
पल्लवतिलकवंशी राजा दन्तिवर्मन् के समय के तिरुवेळ्ळरै के लेख से (ई. स. की ९वीं शताब्दी).
अ आ इ उ क ङ च ट ण त न प म य य र ल
[अक्षर-चिह्न]
व ळ ळ र ण क ण म् ण् का णा ना मा ला कि नि
[अक्षर-चिह्न]
कु टु त मु रु वु रू नू लू मू लू पे नै रै क्को.
[अक्षर-चिह्न]
राष्ट्रकूट राजा कण्णरदेव (कृष्णराज तीसरे) के समय के तिरुक्कोवलूर के लेख से (ई. स. की १०वीं शताब्दी).
आ इ उ ए क ङ च ञ ट ण त न न प म म य र
[अक्षर-चिह्न]
ल व व ळ ळ र ण मा या रि वि कु टु णु तु पू मु
[अक्षर-चिह्न]
रु रू कू चू पे वे रै वै लौ पो ट्टा ट्टु.
[अक्षर-चिह्न]
राष्ट्रकूट राजा कण्णरदेव (कृष्णराज तीसरे) के समय के वेल्लूर के चटान पर के लेख से.
अ इ उ ए क ङ च च ञ ट ण त न प प प
[अक्षर-चिह्न]
म म य र ल व ळ ळ र ण ता ता ना या पि
[अक्षर-चिह्न]
वी कु टु चू लू वू पे मे कै कौ पै रै.
[अक्षर-चिह्न]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri

Plate LXII.    लिपिपत्र ६२वां.
राजेन्द्रचोल, विरूपाक्ष और वावलकामय के लेखादि से.
(ई. स. की ११वीं से १५वीं शताब्दी).
राजेन्द्रचोल (प्रथम) के तिरुमले के चट्टान पर खुदे हुए लेख से (ई. स. की ११वीं शताब्दी).
अ इ ई उ ऊ ए ओ क ङ च ञ ञ ट ण त न प म
அ இ ஈ உ ஊ எ ஒ க ங ச ஞ ஞ ட ண த ந ப ம
य र ल व ळ ऴ ऱ ऩ पा ति णि ची यु मु चू वे वै.
ய ர ல வ ள ழ ற ன பா தி ணி சீ யு மு சூ வெ வை.
पगन (बर्मा में) से मिले हुए वैष्णव लेख से (ई. स. की १३वीं शताब्दी के आसपास).
अ इ क क च ञ ट ट ट ण त न प प म म य य
அ இ க க ச ஞ ட ட ட ண த ந ப ப ம ம ய ய
र ल व ळ ऴ ऱ ऩ मा वा रि यि कु टु पु रे लै.
ர ல வ ள ழ ற ன மா வா ரி யி கு டு பு ரெ லை.
विजयनगर के राजा विरूपाक्ष के सोरैक्कावुर के दानपत्र से (श. सं. १३०८ = ई. स. १३८६).
अ आ इ उ ए ओ क ङ च ञ ट ट ण त न प म
அ ஆ இ உ எ ஒ க ங ச ஞ ட ட ண த ந ப ம
य र ल व ळ ऴ ऱ ऩ ति लि की कु पु कू वू रै को.
ய ர ல வ ள ழ ற ன தி லி கி கு பு கூ வூ ரை கொ.
महामंडलेश्वर वावलकामय के जंबुकेश्वर के लेख से (श. सं. १४०३ = ई. स. १४८२).
अ आ इ उ ए ओ क ङ च ट ण त न प म य र ल
அ ஆ இ உ எ ஒ க ங ச ட ண த ந ப ம ய ர ல
व ळ ऴ ऱ ऩ णा टि यि मु वु रू पू णा णै रौ.
வ ள ழ ற ன ணா டி யி மு வு ரூ பூ ணா ணை ரொ.
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri

Plate LXIII.
लिपिपत्र ६३वां.
जटिलवर्मन् और वरगुणपांड्य के लेखादि से.
(ई. स. की ८वीं और ९वीं शताब्दी).


जटिलवर्मन् के समय के आणैमले के लेख से (ई. स. की ८वीं शताब्दी):
अ आ इ उ क ङ च ञ ट ण त न प म य र
ल व ळ ऱ ऴ् प् य् ण् ता पा मा या कि रि नी कु
गु मु मू णे पे मे टै रै को क्कु र्क्कु ण्णै त्त.


जटिलवर्मन् के दानपत्र से (ई. स. की ८वीं शताब्दी):
अ आ इ ई उ ए ओ क ङ च ञ ट ण त न प म य र
ल व ळ ऴ र् ऴ् क् त् चा ना मा णा कि टि की नी
कु टु तु यु रु कू चू रू ते पे यै रै को तो पो.


वरगुणपांड्य के अंबासमुद्र के लेख से (ई. स. की ९वीं शताब्दी):
अ आ इ इ ई उ ए ऐ ऐ ओ क ङ च ञ ट ण त
न न प म य र ल व ळ ळ ऴ र् र् ण् ण् का टा
रा वा वि री कु चु दु तु लु नू रू ने वै मे पो.


CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri

Plate LXIV. लिपिपत्र ६४वां.
श्रीवल्लभंगोडै, भास्कररविवर्मन् और वीरराघव के दानपत्रों से.
(ई. स. की १०वीं से १४वीं शताब्दी के आसपास तक).
मांबळ्ळि से मिले हुए श्रीवल्लभंगोडै के दानपत्र से (कोल्लम् सं. १४६ = ई. स. ९७३).
अ आ इ ऊ क ङ च ञ ट ण त न प म म य र ल
व ळ ऴ र ऱ का ना या चि यि रि वि की ळी कु चु
तु लु ळु रु कू पू रू पे वे टै रै को चो पो रा.
कोचिन् से मिले हुए भास्कररविवर्मन् के दानपत्र से (ई. स. की ११वीं शताब्दी के आसपास).
अ आ इ ई उ ए क ङ च ञ ट ण त न प म
य र ल व ळ ऴ र ऱ ऩ टा मा टि ति वी कु
चु टु मु रु लु ळु कू नू यू के पे वे मै को तो.
कोट्टयं से मिले हुए वीरराघव के दानपत्र से (ई. स. की १४वीं शताब्दी के आसपास).
अ इ उ ए ए ऐ ओ क ङ च ञ ट ण त न प
म य र ल व ळ ऴ र ऱ ता या णा ति नि वि
चि णि कु तु मु रु रू नू चे टे तै तो यो रो.
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitzed by eGangotri

Plate LXV.
लिपिपत्र ६५वां.
मौर्यवंशी राजा अशोक के शहबाजगढ़ि और मान्सेरा के लेखों से.
(ई. स. पूर्व की तीसरी शताब्दी).
अ अ अ इ इ उ उ ए ए ए ओ अं क क ख ख ग ग घ
੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭ ੭
घ च च च छ छ ज ज ज झ ञ ञ ञ ट ट ट ठ ठ ठ
ड ड ढ ढ ण ण त त त त त थ थ द द द द ध ध
न न न न प प प फ फ ब ब ब भ भ म म म म
म य य र र र ल ल व व श श श ष ष स स स
ह ह ह ह कि खि चि जि ठि णि ति मि भि सि गु चु तु धु नु
यु वु झु जे ते ने दे ये पे चो नो मो शो षो सो जं थं नं मं मं
यं रं वं षं हं ग्र द्र द्रि त्ति/व च द्र ध प्रि/पि भ्ये य्य स्य ब्र/व स्त स्तिव स्यु/द्यु
[खरोष्ठी लेख: पंक्ति १]
[खरोष्ठी लेख: पंक्ति २]
[खरोष्ठी लेख: पंक्ति ३]
[खरोष्ठी लेख: पंक्ति ४]
[खरोष्ठी लेख: पंक्ति ५]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri

Plate LXVI. लिपिपत्र ६६वां.
हिन्दुस्तान के ग्रीक (यूनानी), शक, पार्थिअन और कुशनवंशी राजाओं के सिक्कों से.
(ई. स. पूर्व की दूसरी शताब्दी से ई. स. की पहिली शताब्दी तक).
ग्रीक (यूनानी) राजाओं के सिक्कों से.
अ इ इ ए अं अं क ख ख ग च च कु ज ज ज ज ज ज ज झ त
𐨀 𐨀𐨁 𐨀𐨁 𐨀𐨅 𐨀𐨎 𐨀𐨎 𐨐 𐨑 𐨑 𐨒 𐨕 𐨕 𐨐𐨂 𐨗 𐨗 𐨗 𐨗 𐨗 𐨗 𐨗 𐨙 𐨟
त त त त त त द द द ध ध न न न प प फ म म म य य य
𐨟 𐨟 𐨟 𐨟 𐨟 𐨟 𐨡 𐨡 𐨡 𐨢 𐨢 𐨣 𐨣 𐨣 𐨤 𐨤 𐨥 𐨨 𐨨 𐨨 𐨩 𐨩 𐨩
र र र र ल ल ल व श स स स स स स ह ह ह ह ह
𐨪 𐨪 𐨪 𐨪 𐨫 𐨫 𐨫 𐨬 𐨭 𐨯 𐨯 𐨯 𐨯 𐨯 𐨯 𐨱 𐨱 𐨱 𐨱 𐨱
डि दि फि बि मि शि पु पु यु वु मे हे झो चं यं क्र चे/तै द्र भ्र ख्वें स्त्र.
𐨜𐨁 𐨡𐨁 𐨥𐨁 𐨦𐨁 𐨨𐨁 𐨭𐨁 𐨤𐨂 𐨤𐨂 𐨩𐨂 𐨬𐨂 𐨨𐨅 𐨱𐨅 𐨙𐨆 𐨕𐨎 𐨩𐨎 𐨐𐨿𐨪 𐨕𐨅/𐨟𐨅 𐨡𐨿𐨪 𐨧𐨿𐨪 𐨑𐨿𐨬𐨅𐨎 𐨯𐨿𐨟𐨿𐨪.
शक, पार्थिअन और कुशनवंशी राजाओं के सिक्कों से मुख्य मुख्य अक्षर.
अ अ ओ ग क क ज ज ज फ फ फ र र र ल प श स म स ह ह
𐨀 𐨀 𐨀𐨆 𐨒 𐨐 𐨐 𐨗 𐨗 𐨗 𐨥 𐨥 𐨥 𐨪 𐨪 𐨪 𐨫 𐨤 𐨭 𐨯 𐨨 𐨯 𐨱 𐨱
इ ति थि चि कु गु गु जु दु दु पु मो प्र र्म र्व त्र य्र स्प ट्फि.
𐨀𐨁 𐨟𐨁 𐨠𐨁 𐨕𐨁 𐨐𐨂 𐨒𐨂 𐨒𐨂 𐨗𐨂 𐨡𐨂 𐨡𐨂 𐨤𐨂 𐨨𐨆 𐨤𐨿𐨪 𐨪𐨿𐨨 𐨪𐨿𐨬 𐨟𐨿𐨪 𐨩𐨿𐨪 𐨯𐨿𐨤 𐨚𐨿𐨥𐨁.
𐨨𐨱𐨪𐨗𐨯 𐨟𐨿𐨪𐨟𐨪𐨯 𐨡𐨁𐨩𐨨𐨁𐨡𐨯 . 𐨨𐨱𐨪𐨗𐨯 𐨟𐨿𐨪𐨟𐨪𐨯 𐨨𐨅𐨣𐨎𐨡𐨿𐨪𐨯
𐨟𐨿𐨪

like ठ or ष with ट?
Wait, could it be ठे?
Wait, what about शे शे?
The next two are: शे शे (or गे शे? Wait, look at the first: ग्रे? No, the second is शे, third is शे? Wait, look at the first: ग्रे?
Wait! Look at the glyphs:
Glyph 1: Kharoshthi tre or kṣe?
Glyph 2: Kharoshthi se?
Glyph 3: Kharoshthi śe?
Wait, look at the Devanagari labels:
Label 4 in Row 4: It's [?]
Wait, let's zoom in on Row 4 labels:
1: यु
2: मु
3: यु
4: [?] -> it has an e-matra: े. Consonant: looks like ष्ठ or ष्ट or ठ or ङ? Wait, look at the letter: ष्ठे?
5: [?] -> it has an e-matra: े. Consonant: ग with a slant? ग्रे! Look at the foot: it has a diagonal stroke to the left: ग्रे!
6

Plate LXVIII. लिपिपत्र ६८वां.
पार्थियनवंशी राजा गोंडोफर और कुशनवंशी राजा कनिष्क के समय के लेखों से.
(ई. स. की पहली शताब्दी).
पार्थियनवंशी राजा गोंडोफर के समय के तख्तिवाही के लेख से.
ए ए ख न फ व म म य य र व श ष स ह दि मि गु दु पु मे बो.
𐨀𐨅 𐨀𐨅 𐨑 𐨣 𐨥 𐨬 𐨨 𐨨 𐨩 𐨩 𐨪 𐨬 𐨭 𐨮 𐨯 𐨱 𐨡𐨁 𐨨𐨁 𐨒𐨂 𐨡𐨂 𐨤𐨂 𐨨𐨅 𐨦𐨆 .
कुशनवंशी राजा कनिष्क के समय के सुएविहार के ताम्रलेख से.
अ अ इ इ उ उ. ए क क ख ख ग च ज ट ठ त त द द द न प
𐨀 𐨀 𐨀𐨁 𐨀𐨁 𐨀𐨂 𐨀𐨂 𐨀𐨅 𐨐 𐨐 𐨑 𐨑 𐨒 𐨕 𐨗 𐨚 𐨛 𐨟 𐨟 𐨡 𐨡 𐨡 𐨣 𐨤
प ब भ भ म म य य य य र र ल व व स स स ह ह ह
𐨤 𐨦 𐨧 𐨧 𐨨 𐨨 𐨩 𐨩 𐨩 𐨩 𐨪 𐨪 𐨫 𐨬 𐨬 𐨯 𐨯 𐨯 𐨱 𐨱 𐨱
टि ठि णि ति दि दि नि नि बि भि मि ग्रि सि हि कु कु टु तु नु पु सु दे
𐨚𐨁 𐨛𐨁 𐨞𐨁 𐨟𐨁 𐨡𐨁 𐨡𐨁 𐨣𐨁 𐨣𐨁 𐨦𐨁 𐨧𐨁 𐨨𐨁 𐨒𐨿𐨪𐨁 𐨯𐨁 𐨱𐨁 𐨐𐨂 𐨐𐨂 𐨚𐨂 𐨟𐨂 𐨣𐨂 𐨤𐨂 𐨯𐨂 𐨡𐨅
ने रे श्रो से सो रो ठिं तिं नं नं मं रं सं च ल त्स प्र र्य र्व ष्क व्य स्य स्व .
𐨣𐨅 𐨪𐨅 𐨭𐨿𐨪𐨆 𐨯𐨅 𐨯𐨆 𐨪𐨆 𐨛𐨁𐨎 𐨟𐨁𐨎 𐨣𐨎 𐨣𐨎 𐨨𐨎 𐨪𐨎 𐨯𐨎 𐨕 𐨫 𐨟𐨿𐨯 𐨤𐨿𐨪 𐨪𐨿𐨩 𐨪𐨿𐨬 𐨮𐨿𐨐 𐨬𐨿𐨩 𐨯𐨿𐨩 𐨯𐨿𐨬 .
तक्षशिला के स्तूप से निकले हुए पात्र के लेख से. झेड़ा के लेख से.
अ च द ज व स सु दे प र्य र्व स्ति . ख घ ज ड ण फ ष मं .
𐨀 𐨕 𐨡 𐨗 𐨬 𐨯 𐨯𐨂 𐨡𐨅 𐨤 𐨪𐨿𐨩 𐨪𐨿𐨬 𐨯𐨿𐨟𐨁 . 𐨑 𐨓 𐨗 𐨜 𐨞 𐨥 𐨮 𐨨𐨎 .
[खरोष्ठी लेख पंक्तियाँ / Kharosthi Inscription Lines]
CC-0.Dwivedi Lok Hitkari Pustakalaya, Ghaziabad. Digitized by eGangotri