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विज्ञान भैरव तन्त्र (११२ ध्यान धारणाएँ - हिन्दी व्याख्या सहित)

Vijnana Bhairava Tantra with Hindi Commentary

भगवान भैरव / प्रो. ब्रजवल्लभ द्विवेदी द्वारा

स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास / चौखम्बा · मोतीलाल बनारसीदास / चौखम्बा · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished256 पृष्ठ

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यही तो सब तन्त्रों का सार है, शैवागम की दृष्टि है, अनुपाय की प्रक्रिया है जिसका
उपदेश इस ग्रन्थ में भैरवरूप शिव जी ने भैरवी देवी को दिया है। अतः ‘विज्ञान भैरव’
शिवोपनिषद् है, मन्त्रतुल्य है, शैवमतावलम्बियों के लिए परमादरणीय और प्रमाणरूप
है।
इस दर्शन के विद्वान् श्री द्विवेदीजी ने विज्ञान भैरव की जो जनता सुलभ सरल हिन्दी
व्याख्या की है इसके लिये मैं उनको धन्यवाद देता हूं।
इस दिशा में मोतीलाल बनारसीदास ग्रंथप्रकाशन का जो कार्य कर रहे हैं वह
प्रशंसनीय है और उनका भी स्वागत करता हूं। ऐसे ग्रन्थों की व्याख्या केवल हिन्दी में
ही नहीं, विज्ञानवादी जगत् के लिए अंग्रेजी में भी परम आवश्यक है। तन्त्रालोक, ग्रन्थ
भी व्याख्यासहित जनता को उपलब्ध हो, ऐसी मेरी हार्दिक कामना है। इस कार्य में
विद्वज्जन अवश्य ध्यान देंगे, ऐसी आशा है। तन्त्र के इस पुनरुत्थान में सम्पादक,
प्रकाशक, मुद्रक एवं अन्य सहयोगियों का परिश्रम तथा समय-दान अवश्य फलीभूत
होगा। यह जनसेवा और शास्त्र-सेवा ही नहीं, भैरव-सेवा है जिससे शिवजी का प्रसाद
प्राप्त होगा और शिवशक्तिपातरूप भगवती कृपा को आकर्षित करने वाली सेवा तपस्या
रूप होगी। इति आशीर्वाद।
गुरुदेव सिद्धपीठ स्वामी मुक्तानन्द .
गणेशपुरी (थाणा)