आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
८ आल्हखण्ड । १२४
मीराताल्हन के लरिका ये नाहर समरधनी तलवार ॥
मन्नागूजर मोहबे वालो सोऊ वेगि भयो असवार ७०
सातलाख लग फौजैं सजिकै नैनागढ़ को भई तयार ॥
डंका बाजैं अहलंका के ऊदन बेंबुलपर असवार ७१
सजे बराती सब मोहबे के जल्दी कूच दीन करवाय ॥
सातरोज की मैजलि करिकै फौजैं अठीं धुरा पर आय ७२
आठ कोस नैनागढ़ रहिगा तहँपर डेरादीन डराय ॥
तम्बू गड़िगा तहँ आल्हा का बैठे सबै शूरमा आय ७३
ऊंचे ऊंचे तम्बू गड़िगे नीचे लागीं खूब बजार ॥
कम्भर छोरे राजपूतन ने हाथिन हौदा धरे उतार ७४
तंग बछेड़न की छोरी गईं क्षत्रिन धरा ढाल तलवार ॥
बनी रसोई राजपूतन की सबहिनजेंयलीन ज्यँवनार ७५
गा हरकारा तब तहँनाते जहँना भरीलाग दरबार ॥
बैठक बैठे सब क्षत्री हैं एकते एक शूर सरदार ७६
गम् गम् गम् गम् तबला गमकैं किन् किन् परी मँजीरन मार ॥
को गतिबरणै सारंगी कै होवै नाच पेतुरियन क्यार ७७
खये अफीमनके गोला कोउ पलकैं मूंदैं औ रहिजायँ ॥
कोऊ जमाये हैं भांगनको मनमाँ रहे रामयश गाय ७८
उड़ै तमाखू बुटवल वाली धुँवना रहा तहांपर छाय ॥
हाथ जोरि औ बिनती करिकै धावन बोल्यो शीशनवाय ७९
अईं बरातें क्यहु राजाकी धूरे परीं आजही आय ॥
आठकोस केहैं दूरीपर सांची खबरि दीन बतलाय ८०
सुनिकै बातें नयपाली ने तीनों लड़का लये बुलाय ॥
जोगा भोगा औ बिजियाते राजा बोल्यो बचन सुनाय ८१
आल्हाका विवाह । १२५ ६
जावो जल्दी तुम धूरेपर हमको खबरि सुनावो आय ॥
सुनिकै बातें तीनों चलिभे धूरे तुरत पहुंचे जाय ८२
ऊंचे टिकुरी तीनों चढ़िकै दूरिते लखैं तमाशा भाय ॥
देखिकै फौजें मलखाने की तीनों गये तहाँ सन्नाय ८३
तीनों लौटे त्यहि टिकुरीते अपने महल पहुंचे आय ॥
भोजन केरी फिरि बिरियामाँ राजै खबरि दीन बतलाय ८४
लगी कचहरी हाँ आल्हाकी भारी लाग तहाँ दरबार ॥
बैठक बैठे सब क्षत्री हैं एकते एक शूर सरदार ८५
मीराताल्हन बनरसवाले आली खानदान के ज्वान ॥
बड़े पियारे ते क्षत्रिनके अपने धर्म कर्म अनुमान ८६
सच्चे साथी रहें चारों के यारों मानों कही हमार ॥
ऐसे होते जो सय्यद ना कैसे बने रहत सरदार ८७
अली अलामत औ दरियाखाँ बेटा जानबेग सुल्तान ॥
औरो लड़का रहें सय्यदके एकते एक रूप गुणखान ८८
मन्नागूजर मोहबे वाला बैठा बड़ा सजीला ज्वान ॥
रुपनाबारी ते त्यहि समया बोले तहाँ बीर मलखान ८९
ऐपनावारी बारी लै कै राजैद्वार पहुंचो जाय ॥
सुनिकै बातें मलखाने की रुपना बोला शीशनवाय ६०
औरो नेगी मोहबे वाले आये साथ बनाफरराय ॥
ऐपनावारी बारी लै कै द्वारे मूड़ कटावै जाय ६१
सुनिकै बातें ये रुपना की बोले तुरत उदयसिंहराय ॥
तुमको नेगी हम मानैं ना जानें सदा आपनो भाय ६२
दादा बियाहन को रहि हैं ना बतियाँ कहिबे को रहिजायँ ॥
यश नहिंजावै नर मरिजावै परहित देवै मूड़क़टाय ६३
१० आल्हखण्ड । १२६
स्वारथ देही तब नरकेही नेही मरे न पावै चाम ॥
सन्मुख जूझै समरभूमि में जावै तुरत हरी के धाम ९४
बड़े प्रतापी जग में जाहिर मनियाँदेव मोहोबे केर ॥
तिनके सेवक तेई रक्षक रूपन काह लगावो देर ९५
रूपन बोला तब मलखे ते दादा मानो कही हमार ॥
घोड़ करिलिया आल्हा वाला अपने हाथ देउ तलवार ९६
सुनिकै बातें ये रुपना की मलखे घोड़ दीन सजवाय ॥
ढाल खड्ग रुपना को दैके बैठे तुरत बनाफरराय ९७
बैठिकै रुपना फिरि घोड़े पर ऐपनावारी लीन उठाय ॥
चारिघरी को अरसा गुजरो नैनागढ़ै पहुँचो जाय ९८
देखिकै बारी दरवानी ने भारी हाँक दीन ललकार ॥
कहां ते आयो औ कहँ जैहौ बोलो घोड़े के असवार ६६
सुनिकै बातें द्वारपाल की रूपन बोला बचन उदार ॥
आल्हा ब्याहन को हम आये नामी मोहबे के सरदार १००
खबरि सुनावो नैपाली को फिरि तुम हमैं सुनावो आय ॥
ऐपनावारी बारी लायो ताको नेग देव पठवाय १०१
सुनिकै बोलो द्वारपाल फिरि तुम्हरो नेग काह है भाय ॥
सोऊ सुनावों महराजा को लादे लिहे घोड़ पर जाय १०२
सुनिकै बातें द्वारपाल की रूपन बोला बचन उदार ॥
चारिघरीभर चलै सिरोही द्वारे बहै रक्त की धार १०३
नेग हमारो यहु प्यारो है देवो पठै स्वईं सरदार ॥
जाहि पियारो तन होवै ना आवै स्वईं शूर अब द्वार १०४
सुनिकै बातें ये बारी की आरी द्वारपाल हैजाय ॥
मनमें सोचै मनै विचारै मनमें बार बार पछिताय १०५
आल्हाका विवाह । १२७ ११
कैसो बारी यहु आयो है नाहर घोड़ेका असवार ॥
जालिम राजा नैपाली है तासों कीन चहै तलवार १०६
यहै सोचिकै द्वारपालने औ रूपन ते कहा सुनाय ॥
गरमी तुम्हरी जो उतरी हो बोलो ठीक ठीक तुम भाय १०७
सुनिकै बातें दरवानी की रूपन गरु दीन ललकार ॥
नगर महोबा जगमें जाहिर नामी मोहबे के सरदार १०८
तिनको नेगी मैं द्वारेपर लीन्हे खड़ा ढाल तलवार ॥
जौन शूरमा हो नैनागढ़ आवै देय नेग सो द्वार १०९
इतनी सुनिकै दरवानी ने राजै खबरि सुनाई जाय ॥
ऐपनवारी बारी लावा भारी बात कहै सो गाय ११०
चारिघरीभर चलै सिरोही द्वारे बहै रक्तकी धार ॥
जौन शूरमाहो राजाघर आवै देय नेग सो द्वार १११
इतना सुनतै महाराजाके नैना अग्नि बरण द्वैजायँ ॥
पूरण राजा पटनावाला बोला राजै बचन सुनाय ११२
हम चलिजावैं अब द्वारेपर बारी नेग देयँ चुकवाय ॥
इतना कहिकै चलि ठाढ़ो भो साथै औरो चले रिसाय ११३
सवैया ॥
द्वार चले तलवार लिये रट मारहि मार कुमारन पेखा ।
लाल गुपाल गहे करबाल खेलैं जसफाग भयउ तस भेखा ॥
मार अपार जुझार किये औ गिरे रणखेत रहे नहिं शेखा ।
बारीकरै कब रारी नृपै ललिते मलखान कि है यह लेखा ११४
पूरन राजा पटना वाला लीन्हे नांगि हाथ तलवार ॥
सो धरि धमका त्यहि रूपनके रूपन लीन ढालपर वार ११५
९२ आल्हाखण्ड । १२८
सांगि उठाई फिरि रूपन ने राजै बार बार ललकार ॥
लटुवा लाग्यो पूरन शिर में औ बहिचली रक्तकी धार ११६
अगल बगल के फिरि मारतभा दाँयें बाँयें दीन हटाय ॥
ऐंड़ा मसके फिरि घोड़ा के फाटक तुरत पार है जाय ११७
गली गली में फिरि मारत भो औ वहिचली रक्तकी धार ॥
घरी चारके फिरि अरसा में लश्कर आयगयो असवार ११८
लाले रंग सों भीजे दीख्यो फागुन टेसू के अनुहार ॥
पूँछी हकीकति तब मलखेने नाहर मोहबे के सरदार ११९
कैसी गुजरी नैनागढ़ में रूपन हाल देउ बतलाय ॥
सुनिकै बातें मलखाने की रूपन यथातथ्य गा गाय १२०
हल्ला हैगा नैनागढ़माँ जहँतहँ कहन लागि सब कोय ॥
ऐस बहादुर जहँके परजा तहँकेनृपतिकहौ कसहोयँ १२१
देखि तमाशा यहु बारी का राजा बार बार पछिताय ॥
बड़ी हीनता हमरी हैगै बारी जियत निकरिगा हाय १२२
जोगा भोगा दोऊ लरिका बोले हाथ जोरि शिरनाय ॥
हुकुम जो पावैं महराजा का सबकी कटा देयँ करवाय १२३
जितनी रौढ़ें चढ़ि आई हैं सो विनघाव एक ना जायँ ॥
खेदिकै मारैं हम मोहबे लग टेंटुवा टायर लैँ छिनाय १२४
सुनिकै बातें ये लरिकन की राजै हुकुम दीन फरमाय ॥
तुरत नगड़ची को बुलवायो तासों बोल्यो हुकुम सुनाय १२५
बजै नगाड़ा नैनागढ़ में सबियाँ फौज होय तय्यार ॥
भोर सुरेरे पहफाटत खन मारों मुहवेके सरदार १२६
इतना कहिकै दूनों चलिभे अपने महल पहुँचे जाय ॥
रैन खटिगा दिननायक सों झण्डागड़ानिशाको आय १२७
आल्हाका विवाह । १२६ ९३
तारागण सब चमकन लागे सन्तन धुनी दीन परचाय ॥
परे आलसी निजनिज खटिया घों घों कंठ रहे घराँय १२८
माथ नवावों पितु अपने को जो नित मेरी करैं सहाय ॥
करों तरंग यहाँ सों पूरण पूरण ब्रह्म रामको ध्याय १२६
आगे फौजें दूनों सजिहैं मचि हैं घोर शोर घमसान ॥
जोगा भोगा के मुर्चापर लड़ि हैं खूब बीरमलखान १३०
इति श्रीलखनऊनिवासि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मज बाबू प्रयागना-
रायणजीकी आज्ञानुसारउन्नावप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भवबुध
कृपाशंकरसूनुपं० ललिताप्रसादकृतबरातआगमनवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥
कवित्त ॥
अंजली दिहेते रोग देहसों हटाय देत ध्यान के धरेते दुख दारिद दिखातना ।
ज्ञानसों विचारे मान राजैसों कराय देत नामके उचारे मुक्ति पदवी बिलातना ॥
धारे उर व्रत काम क्रोधहू नशाय देत दीनहैं पुकार करे खीन कुम्हिलातना ।
बोरिदेत विघ्नन मिरोरि देत शत्रुमुख ललित करजोरे पाप रंचहू लखातना १
सुमिरन ॥
मारतण्ड मैं तुमको सुमिरों धरिकै चरणकमल में माथ ॥
सूर्य्य भास्कर सविता रवि औ औरो नाम बहुत दिननाथ १
कथा पुराणन में पढ़िकै मैं जानों काश्यपेय महराज ॥
जो कोउ आयो तव शरणागत गई न तासु कबों जगलाज २
तुम्हरे कुलमाँ रघुनन्दन भे बन्दनकरैं ललित तिनक्यार ॥
अक्षत चन्दन औ फूलन सों मानस पूजन सदा हमार ३
तुम्ही सहाई हौ दीनन के गाई सबै पुराणन गाथ ॥
स्वई भरोसा धरि जियरेमाँ जावाचहौं नांघि भवपाथ ४
छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥
जोगा भोगा दोऊ लड़िहैं लड़िहैं उदयसिंह सरदार ५
१४ आल्हखण्ड । १३०
अथ कथाप्रसंग ॥
उदय दिवाकर भे पूरबमाँ किरणन कीन जगत उजियार ॥
डंका बाज्यो नैनागढ़माँ सबियाँ फौज भई तय्यार १
बसैं बघेले औ चन्देले पाँवर सूरबंश सरदार ॥
माड़वाड़ के क्षत्री साजे औ परिहार गुटैयाचार २
हाड़ा वाले बूंदी वाले औ राठौर लीन सजाय ॥
तुरत निकुम्भन को सजवायो औ गौरन को लीन बुलाय ३
सजि गुहलौता औ कछवाये बहुतक चन्द्रबंश के ज्वान ॥
तोमर ठाकुर तुमरवार के सजिगे मैनपुरी चवहान ४
सजे भदावर वाले क्षत्री सजिगे गहिलवार सरदार ॥
बैस डौंडियाखेरे वाले जिनके बांट परी तलवार ५
हबशी साजे औ दुर्रानी जे मनइन के करें अहार ॥
कुरी छतीसों सब सजवाई ठाकुर सबै भये तय्यार ६
पूरन राजा पटनावाला सोऊ लीन ढाल तलवार ॥
जोगा भोगा दोनों ठाकुर अपने घोड़न भे असवार ७
रणकी मौहरि बाजन लागी रणकौ होनलाग व्यवहार ॥
दाढ़ी करखा बोलन लागे विप्रन कीन वेद उच्चार ८
मारु मारुकै मौहरि बाजी बाजी हाव हाव करनाल
को गति वरणै तहँ क्षत्रिनकै एक ते एक दई के लाल ६
हतु हुंकारनि तोपैं सजि गईँ जिनसों होय घोर घमसान ॥
मारू डंका बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान १०
खर खर खर खरकै रथ दौरे ख्बा चले पवन की चाल ॥
खट पट खट पट तेगा बोलैं मर मर होयँ गैंड़की ढाल ११
धक धक धक धक करै महावत हाथी धकापेल चलिजायें ॥
[Header] आल्हाका विवाह । १३१ १५
कोउ कोउ घोड़ा मोर चालपर कोउ कोउ सरपट रहे भगाय १२
कोउ कोउ घोड़ा हंस चालपर कोउ कोउ चले कदमपर जायँ ॥
कोउ कोउ घोड़ा ऐसे जावैं जिनके टाप न परै सुनाय १३
कोउ कोउ घोड़ा कावा देवैं कोउ कोउ गर्जि रहे असवार ॥
कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि चमचम चमाचम्म तलवार १४
घन घन घन घन घंटा बाजैं घूमत चलैं मत्त गजराज ॥
बल बल बल बल करैं साँड़िया भागत चलैं समर के काज १५
हिनहिन हिन हिन घोड़ा हींसैं खीसैं कायर देखि परान ॥
छाय अँधरिया गै पृथ्विी में गर्दा छाय गई असमान १६
देवता सकुचे आसमान में जंगल जीव गये थर्राय ॥
घरी चार के फिरि अर्सा में सेना अटी समर में आय १७
धूली दीख्यो आसमान में मलखे बोल्यो बचन सुनाय ॥
सजो बेन्दुला के चढ़वैया फौजै गई ऊपर अब आय १८
सुनिकै बातें मलखाने की ऊदन गरु दीन ललकार ॥
सजो सिपाही मोहबे वाले सबियाँ फौज होय तैयार १६
झीलम बख्तर पहिरिसिपाहिन हाथ म लीन ढाल तलवार ॥
सिरगा घोड़े की पीठिमाँ सय्यद तुरत भये असवार २०
चढ़ो कबूतरी में मलखाने अपनी लिये ढाल तलवार ॥
घोड़ मनोहर की पीठी माँ देवा चढ़त न लागी बार २१
बड़ी बड़ी तोपैं अष्टधातु की सो चरखिन में दीन चढ़ाय ॥
लै लै थैली बारूदन की सो तोपन में दई चलाय २२
बत्ती दइ दइ फिरि तोपन में रंजक तुरत दीन धरवाय ॥
बम्बके गोला छूटन लागे परलय जनो गई नगच्याय २३
गोली ओला सम वर्षत भई भनभन भन्नभन्न भन्नाय ॥
१६ आल्हखण्ड । १३२
सर सर सर सर कै शर छूटैं मन मन मन्त्र मन्त्र मन्त्राय २४
खट खट खट खट तेगा बोलैं हट हट करैं लड़ैता ज्वान ॥
बड़ी लड़ाई भै नैनागढ़ जोगा भोगा के मैदान २५
सूंदि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतनकेर ॥
हौदा हौदा यकमिल हैगे मारैं एक एकको हेर २६
सात लाख दल मलखे लीन्हे भोगा पांच लाख परमान ॥
मीराताल्हन औ जोगाका परिगा समर बरोबरि आन २७
भोगा बोला तब ऊदनते ओ परदेशी बात बनाय ॥
कहाँते आयो औ का करिहौ आपन हाल देव बतलाय २८
ऊदन बोले तब भोगाते तुमते सत्य देयँ बतलाय ॥
देश हमारो नगर मोहोबा जहाँपर बसै चंदेलाराय २६
छोटे भैया हम आल्हाके औ ऊदनहै नाम हमार ॥
सुनवाँ व्याहन आल्हा आये मानौ सत्य वचन सरदार ३०
बाँधिकै मुशकें त्वरे बप्पाकी भँवरी फिरी बड़कवा भाय ॥
नीके ब्याहौ घर फिरिजावो अपने बाप देउ समुझाय ३१
सुनिकै बानै ये ऊदन की भोगा कालरूप हैजाय ॥
धोखे माड़ो के भूल्यो ना जहँ लै लियो बापका दायँ ३२
जाति बनाफर की ओछी है औ सब क्षत्रिन केर उतार ॥
कठिन बिसाने जग में जाहिर मोहबे लौटि जाउ सरदार ३३
बातै सुनिकै ये भोगा की बोला बिहँसि लहुरवा भाय ॥
नदिया भागै तौ गंगाजायँ गंगा भागि समुन्दर जायँ ३४
महादेव अर्घाते भागैं धरती लौटि रसातल जाय ॥
ऊदन भागैं समरभूमिते तौ फिरिभागिकहाँकोजायँ ३५
इतना कहिकै बघऊदनने सुमिरि हृदय शारदा माय ॥
[Header] आल्हाका बिवाह । १३३ १७
देवी शारदा महहरवाली मानों गई भुजापर आय ३६
बाहू फरके बघऊदन के फौजन घुसा बनाफरराय ॥
जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय ३७
तैसे क्षत्री ऊदन देखैं भागैं तुरतै पीठि दिखाय ॥
बड़ी लड़ाई मलखे कीन्हों अद्भुतसमर कहा ना जाय ३८
घोड़ मनोहर की पीठीपर देबा गरु करै ललकार ॥
हनि हनि मारै रजपूतन को बहुतक जूझिगये सरदार ३९
अली अलामत औ दरियाखाँ बेटा जानबेग सुल्तान ॥
ये सब लड़का सय्यदवाले तहँपर करैं घोर घमसान ४०
मन्ना गूजर मोहबेवाला दोऊ हाथ करै तलवार ॥
जोगा भोगा पूरन राजा येऊ करैं तहां पर मार ४१
जूझे सिपाही नैनागढ़ के लगभग एक लाखके ज्वान ॥
पांच सहस मोहबे के जूझे करिकै समर भूमि मैदान ४२
जोगा बोला तब भोगा ते मानो कही हमारी बात ॥
खबरि सुनावो महाराजाको जैसी देखि परै कुशलात ४३
सुनिकै बातें भोगा चलिभा नैनागढ़ै पहूंचा जाय ॥
हाथ जोरिकै महाराजा के भोगा यथातथ्य गा गाय ४४
सुनिकै बातें महाराजा ने लायो अमरढोल को जाय ॥
सो दै दीन्ह्यो कर भोगा के भोगाचलिभाशीशनवाय ४५
आयकै पहुंच्यो समर भूमि में भोगा दीन्ह्यो ढोल बजाय ॥
मुर्दा उठिकै जिन्दा हैंगे घैहा उठे तुरत हरषाय ४६
उठे सिपाही नैनागढ़ के मारैं खैंचि खैंचि तलवार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ४७
ढारे मुर्दा हैं लोहुन में मानों कच्छ मच्छ उतरायँ ॥
१८८ आल्हखण्ड । १३४
पगड़ी गिरि गईँ त्यहि लोहू में फूले कमल सरिस दर्शायँ ४८
परीं बंदूकें कहुँ लोहू में काली नागिनिसी मन्नायँ ॥
पांच कोसलों चली सिरोही लोथिन उपरलोथि दिखरायँ ४६
बड़ी लड़ाई मै नैनागढ़ मारा मारा परै सुनाय ॥
कोऊ हारा नहिं काहू सों दोउरण परा बरोबरि आय ५०
जोगा ठाकुर नैनागढ़ का सय्यद बनरस का सरदार ॥
भोगा देवाके मुर्चा माँ दोउ दिशिहोय बरोबरि मार ५१
'मन्नागूजर पूरन राजा दोऊ करें खूब तलवार ॥
बड़े लड़ैया रणमाँ राहिगे कायर छांड़ि भागि हथियार ५२
अमरढोल कहुँ रणमाँ बाजै गिरि उठि लड़ैं लड़ैताज्वान ॥
देखि तमाशा ऊदन बोले दादा सुनो बीर मलखान ५३
मरिमरि जीवैं नैनागढ़ के मैना दीख कबों असभाय ॥
कावा दै कै ऊदन चलिभे नैनागढ़ै पहुंचे आय ५४
संध्या द्वैगै ह्वाँ लश्कर में तब फिरि मारु बंद द्वैजाय ॥
ऊदन पहुंचे ह्वाँ मालिन घर तुरतै मोहर दीन थँभाय ५५
खबरि सुनावो म्वारि भौजीका आयो मिलन उदयसिंहराय ॥
सुनिकै वातैं मालिनि चलिभै सुनवैं खबरि सुनाई जाय ५६
सुनवाँ चलिभै तब महलन ते आई जहाँ लहुरवा भाय ॥
पाग बैंजनी शिरपर बाँधे ऊदन कह्यो बचन मुसुकाय ५७
याही कारण चिठिया पठई जल्दी अवो लहुरवा भाय ॥
जियत मोहोबे कोउ जाई ना डरिहौ बंश नाश करवाय ५८
मरे सिपाही क्यों जीवत हैं भौजी हाल देउ बतलाय ॥
सुनिकै वातें सुनवाँ बोली तुम सुनिलेउ लहुरवा भाय ५६
बरा बर्षलों मेरे वापने कीन्ह्यो कठिन तपस्या जाय ॥
आल्हाका विवाह । १३५ १६
मांगु मांगु तब इन्दर बोले बप्पा बोले माथ नवाय ६०
अमरढोल जो हमको देवो तौ सब काम सिद्ध हैजाएँ ॥
एवमस्तु तब इन्दर बोले बप्पा भवन पहुंचे आय ६१
जबहीं क्षत्री गिरैं खेतमें अम्मरढोल देयं बजवाय ॥
कान भनक क्षत्रिन के परतै जीवैं तुरत बनाफरराय ६२
धोखे माड़ोके रहियो ना जहँ लैलियो बापका दायँ ॥
लड़े न जितिहौ मेरे बापसों तुमको भेद देउँ बतलाय ६३
देवी पूजन कल मैं जैहौं लेहौं अमरढोल मँगवाय ॥
माली बनिकै तहँ तुम आयो लीन्ह्यो अम्मर ढोल चुराय ६४
इतना कहिकै सुनवाँ चलिभै अपने महल पहुंची आय ॥
ऊदन आये फिरि तम्बूको बैठे जहाँ बनाफरराय ६५
हाल बतायो मलखाने ते सोयो सबै शतिको पाय ॥
भोर भुरहरे मुर्गा बोलत माली बने उदयसिंहराय ६६
जायकै पहुंचे तेहि मठियामाँ जहँपर सुनवाँ गई बताय ॥
घोड़ बेंदुला तहँ बांधा है मालिन बीच बनाफरराय ६७
फूल डिलैया माँ सोहैं भल सुन्दर हरवा रहे बनाय ॥
सुनवाँ जागी ह्याँ महलन में बोली मातै बचन सुनाय ६८
राति सुपनवाँ यक मैं देखा माता तुम्हें देउँ बतलाय ॥
संग सहेलिन देवी पूजैं तहँपर अमरढोल अरराय ६९
त्यहिते मनमाँ यह आई है पूजन करों भवानी जाय ॥
तुमसों माता यह बिनवतिहौं देवो अमरढोल मँगवाय ७०
सुनिकै बातें रानी चलिभै पहुंची तुरत सेजपर जाय ॥
हाल बतायो महराजा को लीन्ह्यो अमरढोल मँगवाय ७१
सो दै दीन्ह्यो लै बेटी को बेटी सखियन लीन बुलाय ॥
२० आल्हखण्ड । १३६
चली भवानी फिरि पूजनको सुन्दरि गीतरहीं सब गाय ७२
जायकै पहुंचीं त्यहि मंदिरमाँ ज्यहिमाँ बसै दुर्गा माय ॥
अक्षत चन्दन सों पूजन करि लौंगनहार दीन पहिराय ७३
शीश नवायो जगदम्बाका सुनवाँ फूलनहार चढ़ाय ॥
भोग लगायो फिरि मेवा का सेवा अधिक कीन हरषाय ७४
किह्यो इशारा फिरि ऊदनको तुरतै लीन्ह्यो ढोल उठाय ॥
कूदि बेंदुलापर चढ़ि बैठ्यो लशकर तुरतपहुंच्योआय ७५
कहाँ कहाँ कहि माली दौरे रहिगे जहाँ तहाँ शिरनाय ॥
खबरि सुनाई नयपाली को सुनतै गयो सनाकाखाय ७६
जायकै पहुंच्यो तेहि मंदिर में जेहि में रहैं दुर्गा माय !
तुरत पंडितन को बुलवायो जानैं तंत्रशास्त्र अधिकाय ७७
इन्द्र यज्ञ नृपने तहँ ठानी स्वाहा स्वाहा परै सुनाय ॥
एकसहसमन होम करायो गायो वेदमंत्र तहँ भाय ७८
हाथ जोरिकै विनय सुनायो मानो सत्यवचन सुरराज ॥
बारह बरसै जब तप कीन्हों तबमोहिंढोल दियोमहराज ७६
जाति बनाफर की ओछी है तिनने चोरी लई कराय ॥
सुनिकै बातें ये राजा की भइ नभवाणि समयसुखदाय ८०
तुम्हरे उनके नहिं काहूघर रहि है ढोल सुनो नृपराय ॥
इन्दर बोले फिरि देवन ते मानो बचन हमारे भाय ८१
आल्हा अम्मर हैं दुनिया में ते कस मरैं यहांपर आय ॥
देवी शारदा का वरदानी आल्हा केर लहुरवा भाय ८२
लै कै ढोलक तुम तम्बू ते पटको तुरत डांड़पर जाय ॥
सुनिकै बातें ये इन्दर की देवता तुरत चले शिरनाय ८३
लै कै ढोलक ते पटकत भे अपने धाम पहुंचे आय ॥
आल्हाका विवाह । १३७ २१
गा नैपाली निज मंदिर को लश्कर खुशी बनाफरराय ८४
ऊदन बोले फिर मलखे ते दादा मोहबेके सरदार ॥
कूच करावो अब लश्कर को चलिकै लड़ैं तासुके द्वार ८५
यह मन भाई मलखाने के तुरतै कूच दीन करवाय ॥
कोउ कोउ घोड़ा हंसचाल पर कोउकोउ मोरचालपरजायँ ८६
चित्रचालपर चतुरचालपर कोईकोईचलैं तितुरकी चाल ॥
मारु मारु कै मौहरि बाजैं बाजैं हाव हाव करनाल ८७
बाजैं डंका अहतंका के घूमत जावैं लाल निशान ॥
छाय अँधेरिया गै दशहू दिशि छिपिगे अंधकार में भान ८८
मारु मारु करि क्षत्री बोलैं रणमें बड़े लड़ैता ज्वान ॥
घोड़ी कबुतरी के ऊपर माँ आगे चला बीर मलखान ८६
तीनकोस जब फाटक रहिगा तब पुरबासी उठे डेराय ॥
यक हरिकारा दौरति आवै राजै खबरि सुनाई आय ६०
सुनिकै बातें हरिकाराकी राजा मनै उठा अकुलाय ॥
जोगा भोगा तहँ बैठेथे बोले राजै शीश नवाय ६१
हुकुम जो पावैं महाराजा को डंका अबै देयँ बजवाय ॥
जाय न पावैं मोहबे वाले सबकी कटा लेयँ करवाय ६२
सुनिकै बातें ये लरिकन की राजै हुकुम दीन फर्माय ॥
जोगा भोगा दोऊ चलिभे लश्कर तुरत पहुंचे आय ६३
बाजे डंका अहतंका के शङ्का करे कोऊ नहिं काल ॥
घोड़ आपनेपर चढ़िबैट्ठ्यो पूरन पटना को नरपाल ६४
जोगा भोगा घोड़े बैठे लश्कर कूच दीन करवाय ॥
बाजे डंका अहतंका के पहुँचे समरभूमि में आय ६५
आगे घोड़ाहै जोगा का पाछे सकल शूर मरदार ॥
२२ आल्हखण्ड । १३८
घोड़ बेंदुला पर ऊदनहैं लीन्हे हाथ ढाल तलवार ९६
जोगा बोला तब घोड़ेते कौने डांड़ दबायो आय ॥
जितने आये हैं मोहवे के सबके मूड़ लेउँ कटवाय ९७
बातें सुनिकै ये जोगा की ऊदन तहां पहुंचे आय ॥
हमहैं क्षत्री मुहवे वाले हमरो मूडलेउ कटवाय ९८
सुनिकै बातें जोगा ठाकुर तुरतै खैंचिलीन तलवार ॥
ऐंचिकै मारा बघऊदन को सोऊ लीन ढालपर वार ९६
भोगा चलिभा तब ऊदनपर मलखे तुरत पहुंचे आय ॥
मलखेठाकुर के मूर्चा में कोउ राजपूत न रोकै पायँ १००
मन्नागूजर मोहवे वाला पूरन पटना का सरदार ॥
लड़ें बहादुर दोउ रणखेतन दोऊहाथ करैं तलवार १०१
घोड़ पपीहा की पीठिपर रूपन गरुदेय ललकार ॥
भाला छूटे असवारन के पैदलचलनलागितलवार १०२
गजके हौदा ते शर वर्षे नीचे करैं महावत मार ॥
कझा भिड़िगे तहँ घोड़न के अंकुशभिड़ेमहौतनक्यार १०३
पैदर के सँग पैदर भिड़िगे घोड़न साथ घोड़ असवार ॥
सूंदि लपेटा हाथी भिड़िगे हौदन होय तीर की मार १०४
चलैं कटारी कोनाखानी ऊना चलैं विलाइति केर ॥
लीन्हे भाला नागदवनि को मारैं एक एक को हेर १०५
झुके सिपाही नैनागढ़ के ऐंड़ा बेंड हनैं तलवार ॥
जोगा भोगा दोनों ठाकुर गरूई हाँक दीनललकार १०६
सदा न फूलै यह बन तोरई यारों सदा न सावन होय ॥
अम्मर देही नहिं मानुष कै मरिहै एकदिना सबकोय १०७
है मरदाना ज्यहि को बाना सो लड़ि मरै समर मैदान ॥
आल्हाका बियाह । १३६ २३
जीवत बचिहै जो मुर्च्चा ते पाई खान पान सनमान १०८
जो भगिजाई अब मुर्च्चा ते तेहिको हनों कठिन तलवार ॥
जोगा भोगा की बातें सुनि झूमनलागि शूर सरदार १०९
कटि कटि कल्ला गिरैं बखेड़ा मरि मरि होनलागखरिहान ॥
धरि धरि धमकैं रण खेतन में क्षत्री बड़े लड़ैता ज्वान ११०
मूड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १११
सवैया ॥
कौन शुमार करै ललिते अतिमार भई सो कहाँ लगगाई ।
खून कि धार बहे नदि नार किनार परैं गज ऊंट दिखाई ॥
नाच पिशाच करैं तहँ साँच लिये करखप्पर योगिनि आई ॥
गावत भूत बजावत ताल तहाँ करतालनकी धुनिछाई ११२
ऊदन बोले मलखाने ते दादा मोहबे के सरदार ॥
कठिन मवासी है नैनागढ़ ह्वाँपर बहुत रहौ हुशियार ११३
मन्नागूजर मोहबे वाले ज़ावो एक तरफ यहिबार ॥
चाचा मालिक सब तुम्हीं हौ राजा बनरस के सरदार ११४
तुम चलिजावो एक तरफको मारो ढूंढि ढूंढि कै ज्वान ॥
हाथिन केरे तुम हौदापर दादा हनो बीर मलखान ११५
इतना कहिकै बघऊदन ने हौदा उपर नचावा घोड़ ॥
काहू मारा तलवारी सों काहू हना तड़ाका गोड़ ११६
बाइस हौदा खाली ह्वैगै अकसर ऊदन के मैदान ॥
घोड़ी कबुतरी के ऊपरते बहुतन हना बीरमलखान ११७
जैसी जावै बनरसवाला आल्हा समर धनी तलवार ॥
२४ आल्हखण्ड । १४०
भगैं सिपाही चौगिर्दा ते भारी होत चलै गलियार ११८
मन्नागूजर ऊजर कीन्हों देवै कठिन कीन तलवार ॥
को गति बरणै तहँ रुपनाकी रणमाँ भली मचाई मार ११९
पूरन राजा पटनावाला भाला लिये हनै दश पांच ॥
को गति बरणै तहँ भोगाकै घोड़ा ऊपर रहा सो नाच १२०
हनि हनि मारै चौगिर्दा ते गरुई हाँक देय 'ललकार ॥
इतना सुनिकै मलखे ठाकुर तुरतै खैंचिलीन तलवार १२१
ऊदन बोले तब मलखे ते दादा मोहबे के सरदार ॥
सुनवाँ भौजी का भैया है आई मड़ये के त्यवहार १२२
इतना सुनिकै मलखे ठाकुर फ़ौजन तरफ पहूंचाय ॥
बहुतन मार्यो तलवारी सों बहुतनहन्यो ढालके घाय१२३
इतना कहिकै ऊदन चलिभे जोगा पास पहूंचे जाय ॥
जोगा बोला तब ऊदनते मानो कही बनाफरराय १२४
बड़ी दूरिते चलिआयो है आपनि लोह दिखावो आय ॥
सुनिकै बातें ऊदन बोले ठाकुर सत्य देयँ बतलाय १२५
मोरे मोहोबे में किरिया भै जो करि डरी चँदेलोराय ॥
कोऊ आवै समरभूमि में आपनिलोह दिखावैआय १२६
पहिले ल्वाहै वहिकी देखो पाछे आपनि देवदिखाय ॥
मारो मारो समर भूमि में नहिंशककरोमनैकछुभाय१२७
इतना सुनिकै जोगाठाकुर तुरतै लीन्ह्यो साँ ग उठाय ॥
मनाएक के सो अंदाजन ऊदन ऊपर दयोचलाय १२८
घोड़बेंदुला ऊपर उड़िगा नीचे सांगगिरी अरराय ॥
बचा बेंदुलाका चढ़वैया आल्हाकेर लघुरवाभाय १२६
ऊदन बोले फिरि जोगा ते दूसरि वार करो सरदार ॥
आल्हाका विवाह । १४१ २५
सुनिके बातें ये ऊदनकी तुरतै खैंचिलीन तलवार १३०
ऐंचिकै मारा बघऊदनको ऊदन लीन ढाल परवार ॥
ऊदन बोल्यो फिरि जोगाते तिसरि वार करो सरदार १३१
खैंचि तड़ाका धनुही लीन्ह्यो तामें दीन्ह्यो तीर लगाय ॥
ऐंचिकै मारा सो ऊदनके ऊदनलीन्ह्यो वार बचाय १३२
खैंचि झड़ाका तलवारीको तुरतै हना उदयसिंहराय ॥
मूड़ बिसानी सो घोड़ेके बिन शिर परै रुंड दिखराय १३३
कोतल घोड़ा जोगा बैठे सायंकाल पहुंचा आय ॥
मारुबन्दभै दोनों दलमाँ फौजै चलीं थलनको धाय १३४
चरि चरि गौवैं घरका डगरीं उड़ि उड़ि पक्षिन लीन बसेर ॥
तारागण सब चमकनलागे संतन रमा रामको टेर १३५
करों तरंग यहाँ सों पूरण तव पद सुमिरि भवानीकन्त ॥
शमरमा मिलि दर्शन देवो इच्छा यही मोरि भगवन्त १३६
इति श्रीलखनऊनिवासि ( सी, आई, ई ) मुंशी नवलकिशोरात्मजवाबूप्रयागना-
रायणजीकीआज्ञानुसारउन्नामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलांनिवासिमिश्र
वंशोद्भवबुधकृपाशङ्करसूनुपण्डितललिताप्रसादकृतऊदनविजय
वर्णनोनामद्वितीयस्तरंगः २ ॥
सवैया ॥
शेष महेश गणेश मनाय, सदा वरदान यही हम पावैं ।
हाथगहे धनुबान सुजान, महान सदा ज्यहि वेद बतावैं ॥
कोटिन जन्म जहां उपजैं, रघुनन्दनके ढिगही तहँ आवैं ।
वरदान यही ललितेकर जान,सुजान सदा रघुनन्दन भावैं १
२६ - आल्हाखण्ड । १४२
सुमिरन ॥
गोपी घूमैं नहिं गलियनमें नहिंकहुँ नचत फिरतहैं श्याम॥
मानुष देही यह रहिहैना इकलो रही जगत में नाम १
नहीं भरोसा नर देहीको कैसे करै झूठ अभिमान ॥
सदा इकेलो तर बिरवाके मनमें करै रामको ध्यान २
यहै सहाई है दुनिया में गाई बेद पुराणन गाथ ॥
ताते ज्वानो खूब यह समझो गुजरो फेरि न आवै हाथ ३
समय जो पावो कछु दुनियामें ध्यावो सदा राम रघुराज ॥
विगरी सुधरै तुरतै तुम्हरी पूरण होयँ तुम्होरे काज ४
छूटि सुमिरनी गै देवनकै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥
सुन्दरवन को चिट्ठी जाई लड़ि हैं बड़े बड़े सरदार ५
अथ कथाप्रसंग ॥
उदय दिवाकर भे पूरब में किरणनकीन जगतउजियार ॥
जोगा भोगा त्यहि समया में आये तुरत राज दरबार १
हाथ जोरिकै जोगा बोले बप्पा वचन करो परमान ॥
पाँचलाख फौजै हम लैगे रहिगे तीनिलाख सब ज्वान २
सुनिकै बातें ये जोगा की राजै कागज़ लीन उठाय ॥
चिट्ठी लिखिकै अरिनन्दन को सुन्दरवन को दीन पठाय ३
पाती लैके हरिकारा गो सुन्दर वनै पहुंचा जाय ॥
पढ़िकै पाती अरिनन्दन ने गौरीनन्दन चरण मनाय ४
तुरत बुलायो सेनापति को तासों कह्यो हाल समुझाय ॥
जितनी सेना सुन्दरवन की सबियाँ कूच देव करवाय ५ ।
सुनिकै बातें महराजा की कूचक डङ्का दीन बजाय ॥
कूच कराये सुन्दरवन ते नदी निकट पहुँचे आय ६
आल्हाका विवाह । १४३ २७
तम्बू गड़िगे महराजन के डेरा गड़े सिपाहिन केर ॥
आल्हा ऊदन के डेरे ते योजन एक कोस के नेर ७
किश्ती नावै तिहि नदिया में तामें नचैं कंचनी नाच ॥
आल्हा पकरै के कारण में ज्ञानिन युक्ति कीन यह साँच ८
दिखैं तमाशा तहँ नदिया में इत उत दोऊ दिशाके ज्वान ॥
आल्हा ठाकुर त्यहि समया में तहँ पर करै गये असनान ६
होनी होवै सो सच होवै ज्ञानी ध्यानी को दिखलाय ॥
कौन गुमानी अरमानी अस जानी मौत नहीं ज्यहिभाय १०
फिरि अभिमानी नर देही के नेही चरणशरण नहिंजायँ ॥
बिना पियारे रघुनन्दन के चन्दन कौन परै दिखराय ११
बन्दन करिकै रघुनन्दन कों आल्हा नदी अन्हाने जाय ॥
चन्दन अक्षत सों पूजन करि प्रातःकृत्य कीन हर्षाय १२
मेला दीख्यो फिरि नदिया में दोउदिशि रहे नारि नर हेर ॥
नावै किश्तिन के ऊपर में होवै नाच पतुरियन केर १३
दिखै तमाशा तहँ ठाढ़े भे ठाकुर मोहबे के सरदार ॥
नावै आई अरिनन्दन की तिनमाँ होवै अधिक बहार १४
तहँ हरिकारा नैनागढ़ को बोला अरिनन्दन सों बात ॥
नामी ठाकुर मोहबे वाले आये आल्हा क्यरी बरात १५
सुनिकै बातें हरिकारा की बोल्यो अरिनन्दन त्यहिकाल ॥
रहे सगाई देशराज सों आल्हा बड़े पियारे बाल १६
अयो बराते का तिनके हौ पैदल नाच दिखौ महिपाल ॥
सुनिकै बातें अरिनन्दन की बोले देशराज के लाल १७
कौनि सगाई देशराज सों साँचे हाल देव बतलाय ॥
सुनिकै बातें ये आल्हा की कहअरिनन्दनबचन सुनाय १८