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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 140

आल्हाका विवाह । १३५ १६
मांगु मांगु तब इन्दर बोले बप्पा बोले माथ नवाय ६०
अमरढोल जो हमको देवो तौ सब काम सिद्ध हैजाएँ ॥
एवमस्तु तब इन्दर बोले बप्पा भवन पहुंचे आय ६१
जबहीं क्षत्री गिरैं खेतमें अम्मरढोल देयं बजवाय ॥
कान भनक क्षत्रिन के परतै जीवैं तुरत बनाफरराय ६२
धोखे माड़ोके रहियो ना जहँ लैलियो बापका दायँ ॥
लड़े न जितिहौ मेरे बापसों तुमको भेद देउँ बतलाय ६३
देवी पूजन कल मैं जैहौं लेहौं अमरढोल मँगवाय ॥
माली बनिकै तहँ तुम आयो लीन्ह्यो अम्मर ढोल चुराय ६४
इतना कहिकै सुनवाँ चलिभै अपने महल पहुंची आय ॥
ऊदन आये फिरि तम्बूको बैठे जहाँ बनाफरराय ६५
हाल बतायो मलखाने ते सोयो सबै शतिको पाय ॥
भोर भुरहरे मुर्गा बोलत माली बने उदयसिंहराय ६६
जायकै पहुंचे तेहि मठियामाँ जहँपर सुनवाँ गई बताय ॥
घोड़ बेंदुला तहँ बांधा है मालिन बीच बनाफरराय ६७
फूल डिलैया माँ सोहैं भल सुन्दर हरवा रहे बनाय ॥
सुनवाँ जागी ह्याँ महलन में बोली मातै बचन सुनाय ६८
राति सुपनवाँ यक मैं देखा माता तुम्हें देउँ बतलाय ॥
संग सहेलिन देवी पूजैं तहँपर अमरढोल अरराय ६९
त्यहिते मनमाँ यह आई है पूजन करों भवानी जाय ॥
तुमसों माता यह बिनवतिहौं देवो अमरढोल मँगवाय ७०
सुनिकै बातें रानी चलिभै पहुंची तुरत सेजपर जाय ॥
हाल बतायो महराजा को लीन्ह्यो अमरढोल मँगवाय ७१
सो दै दीन्ह्यो लै बेटी को बेटी सखियन लीन बुलाय ॥