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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 134

आल्हाका विवाह । १२६ ९३
तारागण सब चमकन लागे सन्तन धुनी दीन परचाय ॥
परे आलसी निजनिज खटिया घों घों कंठ रहे घराँय १२८
माथ नवावों पितु अपने को जो नित मेरी करैं सहाय ॥
करों तरंग यहाँ सों पूरण पूरण ब्रह्म रामको ध्याय १२६
आगे फौजें दूनों सजिहैं मचि हैं घोर शोर घमसान ॥
जोगा भोगा के मुर्चापर लड़ि हैं खूब बीरमलखान १३०
इति श्रीलखनऊनिवासि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मज बाबू प्रयागना-
रायणजीकी आज्ञानुसारउन्नावप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भवबुध
कृपाशंकरसूनुपं० ललिताप्रसादकृतबरातआगमनवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥
कवित्त ॥
अंजली दिहेते रोग देहसों हटाय देत ध्यान के धरेते दुख दारिद दिखातना ।
ज्ञानसों विचारे मान राजैसों कराय देत नामके उचारे मुक्ति पदवी बिलातना ॥
धारे उर व्रत काम क्रोधहू नशाय देत दीनहैं पुकार करे खीन कुम्हिलातना ।
बोरिदेत विघ्नन मिरोरि देत शत्रुमुख ललित करजोरे पाप रंचहू लखातना १
सुमिरन ॥
मारतण्ड मैं तुमको सुमिरों धरिकै चरणकमल में माथ ॥
सूर्य्य भास्कर सविता रवि औ औरो नाम बहुत दिननाथ १
कथा पुराणन में पढ़िकै मैं जानों काश्यपेय महराज ॥
जो कोउ आयो तव शरणागत गई न तासु कबों जगलाज २
तुम्हरे कुलमाँ रघुनन्दन भे बन्दनकरैं ललित तिनक्यार ॥
अक्षत चन्दन औ फूलन सों मानस पूजन सदा हमार ३
तुम्ही सहाई हौ दीनन के गाई सबै पुराणन गाथ ॥
स्वई भरोसा धरि जियरेमाँ जावाचहौं नांघि भवपाथ ४
छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥
जोगा भोगा दोऊ लड़िहैं लड़िहैं उदयसिंह सरदार ५