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बौधायन धर्मसूत्र (विवरण टीका व हिन्दी अनुवाद)
Baudhayana Dharmasutra Hindi
by महर्षि बौधायन
Source: Baudhayana Dharmasutram with Vivarana & Hindi Translation by Dr. Umesh Chandra Pandey (origin)
DevanagariHindipublished486 pages
Page 481Permalink
परिशिष्टम्
| ४२७ | |
|---|---|
| वेश्या ३२८ | सप्तर्षि ३५६ |
| वैण १२३, १२७ | समिदाहरण ३० |
| वैतुषिक ३१६ | समूहा ३०४, ३१२ |
| वैदेहक १२३, १२६ | सम्प्रक्षालनी ३०४, ३१२ |
| वैश्य १९, वर्ण १२१, से कमण्डलु ४१, पत्नियां १२२, का पुत्र १२५, कर्तव्य १२८, के वध का दण्ड १३३, आपत्काल में २०२ | सर्वपृष्ठा १४<br>सर्वारण्यका ३१६<br>सवन ३५५, ४०१, ४०८<br>सवर्णा १८४ |
| वैश्वदेव २०९, २९४ | सहस्रदंष्ट्र ९६ |
| वैश्वानरी १५, ३०५, ३९४, ३९९ | सहस्राक्ष ४०४ |
| व्याहृति ३९, २२७, २४०, २६०, २८५, २९०, २९२, ३०२, ३७०, ३७२, ३७६, ३७८, ३८०, ३९४ | सहोढ १८७<br>सान्तपन ३८६<br>सामवेद ३७७, ३८२, ३९२, ४०८ |
| व्रत ३६१ | सामुद्र शुल्क १३१ |
| व्रतपती १५ | सावित्री २४०, २८५, २९२, ३५९ |
| व्रात्य १२७ | सिद्धेच्छा ३०४, ३१४ |
| शंखपुष्पी १६० | सिन्धु १४ |
| शरद् १९ | सिलोञ्छा ३०४, ३१३ |
| शालीन २८२, २९४, ३०३, ३०४ | सुरभिमती २९० |
| शिक्य २८४ | सुराष्ट्र १४ |
| शिशु आङ्गिरस २८ | सुवर्ण ३६१, का दान ४०३ |
| शिशु चान्द्रायण ३८९ | सूत १२६ |
| शिष्ट २, परम्परा ११ | सूर्भि १५७ |
| शूद्र, अतिथि २१०, अन्न ३६३, स्त्री ३६६, की सेवा १६९, से कमण्डलु ४१, से व्यभिचार १९४, का अन्न ३२८ शूद्र से बात नहीं ३४७ | सूर्य ३४७, ४०४<br>सोम १९७, ४०४, का पान ३६०, सोमयज्ञ २४८, २७९<br>सौवीर १४ |
| शूद्रा ३६४, ३९५, से विवाह २१८, से मैथुन ३७४ | स्त्री, ऋतुमती ३६७, की पवित्रता १९७, की परतन्त्रता १९३, की प्रतिमा १५७, के साथ भोजन ९, पिण्डोदक क्रिया नहीं ७९, पुनर्भू ३६७, से बात नहीं ३४७, ३८३ |
| श्मशान १५३ | स्नातक ३४ |
| श्रोणा ३४९ | स्वधा २४६ |
| श्रोत्रिय २१०, २१२ | स्वयंभू ४३ |
| श्वपाक १२७ | स्वाध्याय २४७, २७९, ३०० |
| षण्णिवर्तनी ३०४, ३०९ | स्वाहा २४६ |
| सङ्कीर्णयोनि १४ | हारीत १७३ |
| सकुल्य ८१ | होता ११९ |
| सन्दंशी ३११ | |
| सन्ध्योपासन २२२ | |
| सपिण्ड ७८ |
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- गोभिलगृह्यसूत्रम् । मुकुन्द झा बक्शी कृत संस्कृत टीका, डॉ० सुधाकर मालवीय कृत हिन्दी टीका (का. ११८)
- गौतमधर्मसूत्राणि । गौतमकृत । हरदत्त कृत 'मिताक्षरा' संस्कृत टीका तथा रमेशचन्द्र पाण्डेय कृत हिन्दी टीका (का. १९२)
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डॉ० ब्रजकिशोर स्वैन (ना. स. ग्र. २६) - पारस्करगृह्यसूत्रम्। प्रथम दो कांड पर हरिहर भाष्य तथा गदाधर भाष्य एवं तृतीय काण्ड पर हरिहर तथा जयराम भाष्य गोपाल शास्त्री नेने कृत भूमिका, नोट्स तथा सुधाकर मालवीय कृत हिन्दी व्याख्या सहित, प्र० काण्ड एवम् सम्पूर्ण (का. १७)
- मनुस्मृतिः। कुल्लूक भट्ट कृत 'मन्वर्थमुक्तावली' टीका तथा हरगोविन्द शास्त्री कृत 'मणिप्रभा' हिन्दी टीका। गोपाल शास्त्री नेने कृत भूमिका १-२ अध्याय, ७वां अध्याय एवम् सम्पूर्ण (का. ११४)
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