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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

DevanagariHindipublished292 पृष्ठ

६५ अकबर बीरबल विनोद

६५ अकबर बीरबल विनोद

नवीन घटना थी, सुनकर बादशाह दंग हो गया । वह इस
सौदागर को भलीभाँति जानता था, वह दिल्ली नगर का बहुत
प्राचीन व्योपारी था । उसने अनेक अवसरों पर अपना तन
धन लगाकर सरकारी सहायता की थी जिस कारण बाद-
शाह को उसकी दशा पर बड़ी तर्श आई और उसकी रक्षा का
भार स्वयं अपने शिर लिया । तत्क्षण साहूकार को घर
जाने की आज्ञा देकर आप दीवानखाने में पहुँचे । बीरबल
स्वागत के लिये अपने आसन से उठ खड़ा हुआ और
बादशाह उसकी बगल में एक कुर्सी पर जा बैठे । दोनों में
अन्तरंग गोष्ठी होने लगी ।
बादशाह बीरबल को दीनदयाल का सारा कच्चा चिट्ठा सुना
कर बोला-"बीरबल ! इस साहूकार का न्याय ऐसी युक्ति से
करो, जिसमें उसकी जान बचे और अन्याय भी न हो, मैं
इसकी दैन्य दशा पर बड़ा चिन्तित हो रहा हूँ । बीरबल
बोला-"पृथ्वीनाथ ! चिन्ता करने की कोई बात नहीं है आपकी
आज्ञा का यथोचित पालन करूँगा । उधर वे बीरबल को
समझा कर अपनी सभा में पहुँचे इधर बीरबल उसके छुट-
कारे की तरकीब सोचने लगा । एकाएक उसका चेहरा प्रफु-
ल्लित हो गया और फिर अपने कार्य में दत्तचित्त हुआ ।
उधर केशवदास मारवाड़ी को भी नींद नहीं आती थी, वह
तो दीनदयाल के पीछे हाथ धोकर पड़ा हुआ था पाँच छः दिनों
की मुहलत देकर फिर बादशाह की अदालत में दावा दायर
किया-"शर्त के मुवाफिक अदालत दीनदयाल से उसके शरीर
का एक सेर मांस दिलवा दे ।" बीरबल इस अभियोग
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का न्यायाधीश बनाया गया। वह बादशाह की आज्ञा
स्वीकार करते हुए बोला-"पृथ्वीनाथ ! मैं यथाशीघ्र इसका
न्याय करने का प्रयत्न करूँगा।"
वह मारवाड़ी को एक ठौर बैठाकर दीनदयाल को बुलाने
के लिये एक कर्मचारी को भेजा। जब आया तो उसे मारवाड़ी
के सामने खड़ा कराकर बीरबल ने पूछा-"क्या तुम्हें अपना
रुपया लेना मंजूर नहीं है? मारवाड़ी रुपया लेना नहीं चाहता
था इससे साफ इनकार कर दिया। तब बीरबलने कहा-"मुझे
काजी का फैसला शर्तनामे के बमूजिब स्वीकार है अतः
मारवाड़ी को हुक्म देता हूँ कि सौदागर के शरीर से
एक सेर माँस का टुकड़ा अपने हाथ से निकाल ले; परन्तु
ध्यान रहे; अगर टुकड़ा जरा भी छोटा बड़ा हुआ कि वह
सकुदुंब जान से मारा जावेगा। घर बार तथा उसका सारा
कोष उसी अपराध के कारण जब्त कर लिया जायगा।"
इस विज्ञप्ति से मारवाड़ी दहल गया और उससे कुछ
उत्तर देते न बना। बीरबल उसे चुप देखकर जवाब के
लिये बारबार उत्तेजित करने लगा। तब वह बोला-
"दीवान जी ! मुझे माँस लेने की खाहिश नहीं है, मैं केवल
पाँच लाख रुपये लेकर अपने मामले को उठा लेना चाहता हूँ,
सूद भी छोड़े देता हूँ।" बीरबल ने कहा-"यह हरगिज नहीं
हो सकता, तुम्हें मांस का टुकड़ाही लेना पड़ेगा, क्योंकि पहले
तूँ साहूकार से रुपये लेना नामंजूर कर चुका है।" यदि तूँ
शर्तनामें के अनुसार माँस न लेगा तो राजाज्ञा भंग करने के
अपराध में तुझे सात लाख रुपये जरबाने लगेंगे। इस बार