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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

DevanagariHindipublished292 पृष्ठ

५८—भाग्य बड़ी है कि उद्योग १७५

( ४ )
विषय पृष्ठ संख्या
५५—काली ही न्यामत है १७१
५६—और क्या कढ़ी १७२
५७—माला दे १७४
५८—भाग्य बड़ी है कि उद्योग १७५
५६—बादशाह और कवि गंग १८०
६०—सब से प्यारी बस्तु १८६
६१—दीवान और काना नाई १९६
६२—सौ गायों के एकमात्र अधिपति आप हो हैं २१४
६३—गरीब लड़की वेश्या के घर २१५
६४—महाकाली के ठट्ठे २२०
६५—हम दोनों एक साथ आवेंगे २२१
६६—सुनार के हथफोड़े २२४
६७—व्यसनी की लत २२७
६८—लोहा और पारश का स्पर्श २३०
६६—तुम बड़े गदहे हो २३२
७०—दीपक तले अँधेरा २३३
७१—बादशाह के चार प्रश्न २३४
७२—शाही रामायण २३७
७३—केवल लोटा न था २३८

( ५ )
विषय पृष्ठ संख्या
७४—कौन ऋतु सर्वोत्तम है ।२३६
७५—पीर, बावर्ची, भिश्ती, खर २४०
७६—बनस्पति का बीज २४१
७७—हौज के अण्डे २४२
७८—कोई धनी और कोई दरिद्र क्यों होता है २४३
७९—अब मैं उसको भूल गया २४४
८०—बीरबल को कुत्तों की हाकिमी ,,
८१—एक हज़ार जूते २४४
८२—चोर की दाढ़ी में तिनका २४५
८३—सोया सो खोया २४६
८४—मूर्ख से पाला पड़े तो चुप रहना २४७
८५—बादशाह का नाखून २५२
८६—योगी का भेष २५७
८७—बीरबल की धर्म-रक्षा २५६
८८—एक कृपिण पुरुष २६४
८९—लकीर छोटी हो गई २६६
९०—ब्राह्मणी पर मांसखोरी का अभियोग ,,
९१—खटिक और तेली २७३
९२—दौलत ड्योढ़ी पर हाजिर है २७६

( ६ )
विषय पृष्ठ संख्या
६३—बादशाह के साले को दीवान की पदवी २८९
६४—साईं की बदनियती २६७
९५—बीरबल को मुँह पीछे गालियाँ ३०१
६६—अब तो आन पड़ी है ३०२
६७—भंगी मुसलमान नहीं होते ,,
९८—अजीब तरह की पहेली ३०३
६६—अप्सरा और पिशाचिन ३०५
१००—दादः हुजूरस्त ३०६
१०१—मित्र का मित्र से विश्वासघात ३०८
१०२—बादशाह को ठग लिया ३१३
१०३—तोर में मोर ३१९
१०४—नहिं राँचे रहिमान ३२०
१०५—लड़का रो रहा था ३२१
१०६—असल का कम-असल, कम-असल का असल,
बाजार का कुत्ता और गद्दी का गधा ३३५
१०७—काजी की बददयानती ३३६
१०८—आगे होकर मरवाइयेगा ३४३
१०६—ऊँट की गर्दन टेढ़ी क्यों है ३४४
११०—अब किस पर चढ़ेंगे ”

( ७ )
विषय पृष्ठ संख्या
१११-पारस से बीरबल की समता ३४५
११२-मानो चन्द्र को चीर कुसुम चुवायो ३४६
११३-सूर और कादर ३४७
११४-जड़ वृक्ष की साक्षी ३४८
११५-हँसना अथवा रोना ३५०
११६-दो गधों का बोझ ३५२
११७-मैं ब्राह्मण बनूँगा ३५३
११८--शिकार में दिल चस्पी ३५५
११९-बेगम का कोप ३५७
१२०--दिल्ली के कौवों की गणना ३६२
१२१--औसान सच्चा है ३६३
१२२-अकबर भारत ३६४
१२३-मणिपुराधीश द्वारा बीरबल के
न्याय की परीक्षा ३६८
१२४--चञ्चल नैन छिपै न छिपाये ३७०
१२५-टूटे-फूटे सड़े को कैसी विधि सराहिये ३७१
१२६-केहि कारण डोल में हालत पानी ३७२
१२७-केहि कारण प्रात बफात है पानी ३७३
१२८-न्याय की घंटी ३७४

( ८ )
विषय पृष्ठ संख्या
१२६—मुझको हँसा दो ३७७
१३०—स्वप्न का भावार्थ ३७८
१३१—अन्धकार ३७६
१३२—चार प्रश्नों का एक उत्तर ,,
१३३—अँगुली का संकेत ३८०
१३४—सबसे बड़ा कौन ३८४
१३५—राजा, लड़का, फूल और दाँत किसके किसके
बड़े हैं और गुण कौन सा बड़ा है ३८६
१३६—बीरबल को सजा— ३८८
१३७—हाथी का पैर और कुँए का विवाह ३६१
१३८—बाजार की खाट, हाथ की मणी, नरक का
मार्ग, व्यापार की नाक और आँख रहते अंधा ३६७
१३६—आधा आपका ४१५
१४०—उत्तम जल किस नदी का है ४१६
१४१—आमका छिलका ,,
१४२—बाग और जंगली पेड़ों में अन्तर ४१७
१४३—हाथ के कंकन और दाढ़ी के बाल ४१८
१४४—फाँसी से मुक्त करदो ४२०
१४५—पाखाने में चित्र ,,

( ९ )
विषय पृष्ठ संख्या
१४६—शायद कोई पट्ठा चढ़ गया ४२१
१४७—यहाँ है, वहाँ नहीं, यहाँ नहीं पर वहाँ है
यहाँ वहाँ दोनों जगह नहीं है और यहाँ
वहाँ दोनों जगह है ,,
१४८—हुजूर गधे आ रहे हैं ४२३
१४९—यह तो हमारा ही है ,,
१५०—बारह में से चार गये ४२४
१५१—दो मास का एक मास ,,
१५२—खुश वा नाखुश ,,
१५३—आपही बादशाह कैसे होते ४२५
१५४—जो ईश्वर न करे उसे मैं करूँ ,,
१५५—आम की चोरी ४२६
१५६—कुरान की बे नुकते वाली टीका ४३०
१५७—नौका का न्याय ४३२
१५८—चतुर और भुग्गा ४३६
१५९—आप मुझको चाटते थे और मैं आपको चाट
रहा था ,,
१६०—कौन सुखी है ४४०
१६१—निकस्यो रवि फोड़ पहाड़ की ताईं ४४१

(१०)
विषय पृष्ठ संख्या
१६२—बेटी दे दो पोती दिलादो ४४२
१६३—दण्ड वा पुरस्कार ”
१६४—देने वाले का हाथ नीचा ४४४
१६५—स्वर्ग और नरक ”
१६६—बख्तर की परीक्षा ४४५
१६७—सबसे उज्ज्वल क्या ४४७
१६८—प्राकृतिक और कृत्रिम ४४६
१६९—मेरी धरती पर पैर न रखना ४५२
१७०—आकाश के तारों की गणना ४५४
१७१—मूर्खों की फेहरिस्त ४५५
१७२—हथेली पर बाल क्यों नहीं उगता ४५६
१७३—नाव लाने दो ४५७
१७४—सुन्दर बच्चा किसका ४५८
१७५—बिचारे जूतों के मारे खड़े हैं ४६१
१७६—मोम निर्मित शाहजादा ”
१७७—गऊ के चमड़े का जूता ४६२
१७८—आधा बाहर आधा भीतर ४६३
१७९—नदी रोती क्यों है ४६४
१८०--जाड़ा कितना ४६६

(११)
विषय पृष्ठ संख्या
१८१--इस समय कौन चलता है ४६६
१८२--राम के बदले मेरा नाम लिखो ,,
१८३--पूर्णिमा का चन्द्रमा ४६७
१८४--कृतघ्न और कृतज्ञ ४७०
१८५--दुनियाँ में स्त्रियों की संख्या अधिक है
वा पुरुषों की ४७१
१८६--खिजाब लगाने वालों को दिमाग नहीं होता ४७२
१८७--गधा तम्बाकू नहीं खाता ,,
१८८--बैगन की भाँजी ४७३
१८६--पाद और दस्त ,,
१९०--हाथन के छूये कोऊ बेरहू न खायगो ४७४
१९१--एक भँडुवा दूसरे मालजादी ४७५
१९२--सड़क किस तरफ जाती है ४७६
१९३--फूलकर चगत्ता हो गया ,,
१९४--दूध भाई ४७७
१९५--हाँ मिहर्वांन ४७८
१९६--नौकर ने चूना खाया ,,
१९७--सत्ताईस में से नौ गये बाकी बचा कुछ नहीं ४८२
१९८--सूर्य पश्चिम में ही क्यों छिपता है। ,,

( १२ )
पृष्ठ संख्या
विषय
१९९-- इतने पैर पसारिये जितनी चादर होय ४८३
२००-- पूर्व जन्म का निर्णय ४८५
२०१-- रुई की चोरी ४८६
२०२-- आँखों देखी बात झूठी हो सकती है ४८७
२०३-- चोर पकड़ने की युक्ति ४८६
२०४-- बलात्कार ४९१
२०५-- हमारा पैर अधिक सुन्दर है ४९२