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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

DevanagariHindipublished292 पृष्ठ

अकबर बीरबल विनोद

अकबर बीरबल विनोद
पहुँचकर बादशाह ने पूछा- "तुम इस समय महल की तरफ
क्यों गये थे और तुम्हारे बगलमें यह क्या चीज है।" बीरबल
ने कहा-"कुछ तो नहीं।" फिर भी बादशाह का शक ब-
ही रहा क्योंकि उसकी काख तले चदरे के भीतर से कोई चीज
दिखाई पड़ रही थी। बादशाह ने दुबारा पूछा- "बीरबल !
झूठा क्यों बोल रहा है, तुम्हारी काख के भीतर कोई चीज
अवश्य छिपी हुई है।" बीरबल ने कहा- "हाँ वह तोता है।"
बीरबल के ऐसे रूखे उत्तर से बादशाह को सन्तोष नहीं हुआ
और क्रोधित होकर बोला- "तुम्हें आज इतना मजाक क्यों
सूझी है।" बीरबल अविलम्ब बोला- "पृथ्वीनाथ ! अश्व है।"
बादशाह बड़ा हैरान हुआ और भौंह चढ़ाकर कहा- "मैं देखता
हूँ कि आज तुम्हारा दिमाग आसमान पर चढ़ता जा रहा
है।" बीरबल ने कहा- "नहीं नहीं हाथी है।" बादशाह ने
कहा- "क्या तुमने भाँग तो नहीं खाई है, ठीक ठीक समझ कर
उत्तर दो।" बीरबल कब चुप रहने वाला था बोला- "गधा
है, गधा।" बारंबार बीरबल के टालमटोल की बातें सुनकर
बादशाह बहुत ही चिढ़ गया और पूछा- "क्या आज तुमपर
मृत्यु तो नहीं सवार हो गई है, काँख में की छिपी वस्तु
का नाम ठीक ठीक क्यों नहीं बतलाते हो ?" इस बार बीरबल
ने साफ बतला दिया-हुजूर ! शराब है !" फिर अपनी बगल
से बोतल निकाल कर बादशाह के हवाले किया। बीरबल
ऐसे धर्म परायण ब्राह्मण के पास शराब की बोतल देखकर
बादशाह को आश्चर्य हुआ और उसका कोप कुछ शान्त हो
गया। वह बीरबल को अपने साथ जनाने महल में लिवा