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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३६ ११
भलओअनभल जबजसहोवय तबतस बुद्धि जाय बौराय ॥
सुनान हन्ना क्यहु सुवरण का नाकयहु दीख नैनसों जाय १०६
रचा विधाता नहिं कबहुंथा मारन हेतु गये रघुराय ॥
यह अनहोनी हम दिखलाई सोचोसदास्वजनजनभाय १०७
होनहार बश ब्रह्मा हैके डोला निकटगये नगचाय ॥
तबहीं चौंड़ा उठि पलकी ते बाँये दीन कटारीघाय १०८
दहिने सांगहनी धाँधू ने ताहर मार्यो तीरचलाय ॥
तीनों घायपरे ब्रह्मा के तुरतै गिरे मूर्च्छाखाय १०९
यह गति दीखी जब ब्रह्मा की रोवनलागि मोहबियाज्वान ॥
तबललकार्यो जगनायकजी होवो खड़े समर चौहान ११०
दगाते मार्यो तुम ब्रह्माको हमरे साथ करो तलवार ॥
जियत न जाई कउ दिल्ली का सबका डरों जानसों मार १११
तौ तौ मैने चंदेले का नहिं ई डारौं मुच्छ मुड़ाय ॥
सुनिकै बातें जगनायक की ताहर कूच दीन करवाय ११२
ताहर नाहर के जातैखन जगना अटा तहाँ पर जाय ॥
मूर्च्छित दीख्यो ब्रह्मानँदको पलकी उपर दीन पौढ़ाय ११३
लै कै पलकी जगनायक जी तम्बुन फेरि पहुँचेआय ॥
जागी मूर्च्छा तहँ ब्रह्मा की बोले तुरत चंदेलेराय ११४
कूच करायो नहिं लश्कर को मोहबे खबरि देउ पठवाय ॥
सुनिकै बातें ये ब्रह्मा की धावन तुरत लीन बुलवाय ११५
कही हकीकति सब धावन ते तुरतै चला शीशकोनाय ॥
जहाँ कचहरी परिमालिक की धावन तहाँ पहुँचा आय ११६
कही हकीकति महराजाते तुरतै गिरे पछाराखाय ॥
बीछी काट्यो या बर्रै ने मानो डसा भुजंगम आय ११७

९२ आल्हाखण्ड । ५४०
बिपदा आई फिरि मोहबेमा फैली बात महल में जाय ॥
सुनी हकीकति रानी मल्हना महलन गिरी मूर्च्छाखाय ११८
बारह रानी चंदेले की रोवैं तहाँ पछारखाय ॥
ख्याति रोवैं घर अपने मां सपनेसरिसजगतदिखलाय ११९
साँचो स्वपना जग हम देखैं कोउन पूत पतोहू भाय ॥
आज मरैं दिन दूसर काल्ही याही साँच परै दिखलाय १२०
इयहिते भैया यहि दुनिया मा कबहुँन करै उपरको शीश ॥
सम्मत हमरो यह साँचा है नितप्रतिभजैरामजगदीश १२१
सोउन बाचा यहि दुनिया मा बाहू गये जासु के बीश ॥
सहसन बाहुनका अर्जुन भा ताकाहनावशिजगदीश १२२
काह हकीकति नरपामर की जो करिलेय उपर को शीश ॥
रहिगा ठाकुर ना सिरसा का कलियुगवीरधीरअवनीश १२३
ताते चाही नर देही को झुकि २ झुकतर झुकि जाय ॥
त्यों त्यों त्यों त्यों ऊपर जावै ज्यों २ शीश झुकावत जाय १२४
जैसे तरुवर है रसालको बौरन भार रहा गरुवाय ॥
ज्यों ज्यों बाढ़ फल रसालके त्योंत्योंझुकत २झुकिजाय १२५
ज्यों ज्यों पकिपकि टपकतआवैं त्यों त्यों डार उपरको जाय ॥
ऐसो सम्मत यह साँचा है साँचासमयगयोनगन्याय १२६
नहीं तो आल्हा को थाल्हाकरि ललिने धर्म देत दिखलाय ॥
काह हकीकति नर पामर की जोअभिमानकरतरहिजाय १२७
सुनी पाठ है जिन दुर्गा की खिन हना वीर समुदाय ॥
धर्म यथारथकी बातें सब अबकोस्वजनदेयदिखलाय १२८
ताते गाथा यह सब छूटा लूटा दुःख मोहोबा आय ॥
खबरि पहुँचीगै दथहरिपुरमा आल्हानिकटतड़ाका जाय १२६

बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५४१ १३
आल्हा ऊदन इन्दल तीनों लागे बैठि तहाँ पछिताय ॥
धावलि सुनवाँ फुलवा तीनों सुनतै गिरीं पछाराखाय १३०
बड़ी दुर्दशा त्यहि समया कै हमरे बूत कही ना जाय ॥
रानी मल्हना के महलन मा सब दुखउतरा गायबजाय १३१
फिरि फिरि रानी रोदन ठानैं सखियाँ रहीं तहाँ समुझाय ॥
माहिल भूपति द्वउ मरिजावैं उरई गिरै गाज अरराय १३२
जिनकीचुगुलिनते महलनमा यहदुखपरा आजदिन आय ॥
मरै पिथौरा दिल्लीवाला जो यहु पूत डरा मरवायें १३३
होय निपूती रानी अगमा सोऊ महल बैठि पछिताय ॥
इतना कहिकै रानी मल्हना फिरिफिरिबारबारपछिताय १३४
ताहर नाहर गा दिल्ली मा राजै खबरि जनाई जाय ॥
बात फैलिगै सब दिल्ली मा औरनिवासपहूंची आय १३५
खबरि पायकै रानी अगमा महलन गिरी पछारा खाय ॥
कन्त जूझिगे रण खेतन मा बेला सुना तहाँपर आय १३६
यहु पछितानी मन अपने मा भूषण बसन दीन छिरकाय ॥
कहा न मानै तहँ काहू का बेला गिरै परै बिलखाय १३७
औ गरियावै बेला रानी चौंड़ा बंश नाशि हैजाय ॥
बने जनाना तू दिल्ली मा ओदहिजार भवानी खाय १३८
नाहक जन्मी धाँधू मैया दैया गती कही ना जाय ॥
नहिं रजपूती कछु ताहर मा धोखे हना तीरका घाय १३६
इतना कहिकै बेला रानी तुरतै उठी तड़ाका धाय ॥
महल छोड़ि कै महतारीका पहुँची और महलमें जाय १४०
प्रथम युद्ध मा जो गौने मा सो हम सबै गये अवगाय ॥
आशिर्वाद देउँ मुन्शी सुत जीवो प्रागनरायणभाय १४१.

६४ आल्हखण्ड । ५४२
रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥
मालिक ललितेके तबलों तुम यशसों रहौ सदामरपूर १४२
माथ नवावों पितु माता को जिन बल पूरिभई यह गाथ ॥
करों तरंग यहाँ सों पूरण तवपदसुमिरि भवानीनाथ १४३
जो अभिलाषा मन हमरे है सो तुम पूरिकरो भगवन्त ॥
राम रमामिलि दर्शन देवैं इच्छा यही भवानीकन्त १४४
इति श्रीलखनऊनिवासि(सी.आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजबाबू प्रयागनारायण
जीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पंडरीकलांनिवासि मिश्रवंशोद्भव
बुधकृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृतबेलागौन आनयमैठाकुर
ब्रह्मासिंहघायल वर्णनोजनामप्रथमयुद्धेप्रथमस्तरंगः १ ॥
बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्धसमाप्त ॥
इति ॥

॥ श्रीगणेशाय नमः ॥
अथ आल्हखण्ड ॥
बेलाकेगौने की दूसरीलड़ाई में रानालाखनिसिंह
तथा उदयसिंहजी की चढ़ाई का वर्णन ॥
सवैया ॥
हे बिधि दे वरदान यही पद पंकज ईश सदा हम ध्यावैं ।
होवैं जहाँ जलहू थल में रघुनन्दन को तहँ शीशनवावैं ॥
और न काम कछू हमको इक रामको नाम नितै हमगावैं।
याँच यही लहिते कर साँच मिलैं रघुनाथ तबै सुखपावैं १
सुमिरन ॥
तुम्हें विधाता हम ध्यावतहैं धाता कृपा करौ अब हाल ॥
परम पियारे रघुनन्दनजी जाते दरशदेयँ यहिकाल १
युक्तिबतावो स्वइ धाता तुम जाते मिटै सकल भ्रमजाल ॥
दशरथ नन्दन रघुनन्दन को बन्दन करों सदासबकाल २
चन्दन अक्षत औ पुष्पन सों पूजों शम्भु भवानी लाल ॥
कण्ठ हलाहल भल सोहत है सोहै बाल चन्द्रमा भाल ३

२ आल्हखण्ड । ५३४
जटा के ऊपर सुरसरि सोहै तापर बैठ भुजग विकराल ॥
श्वेत वरण तन भस्म रमाये धारे हृदय मुण्ड के माल ४
को गति बरणै शिवशङ्कर कै बस्तर नित्त करै विशराम ॥
भाँग धतूरन को भोजन करि ध्यावैं नित्त रामको नाम ५
छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥
चढ़ी कनौजी अब दिल्लीपर चढ़ि हैं उदयसिंह सरदार ६
अथ कथाप्रसंग ॥
बेला बैठी निज महलन माँ मनमा धरे राम को ध्यान ॥
कन्त झूझिगे रणखेतन मा फिरियहकरनलागिअनुमान १
नैनन आँसू ढारन लागी पागी महादुःख भ्रमजाल ॥
मूर्च्छा जागी जब बेला की चिट्ठी लिखन लागित्यहिकाल २
लिखी हकीकति यह ऊदनका बेटा देशराज के लाल ॥
तुम्हें मुनासिब यह नाहीं थी जैसी कीन आप यहिकाल ३
वादा कीन्ह्यो तुम ब्याहे मा गौने विदा लेब करवाय ॥
कन्त जूझिगे रण खेतन माँ अन्तौमिलनकठिनदिखराय ४
भये जनाना तुम द्यावलि के ऊदन बार बार धिकार ॥
नालति तुम्हरी रजपूती का नाहक लेउ ढाल तलवार ५
होतिउ बिटिया तुम द्यावलिके करतिउ बैठि महल श्रृङ्गार ॥
शोच न होतै तब बेला के ठाकुर उदयसिंह सरदार ६
होत जो बेटा बच्छराज का ठाकुर शूर वीर मलखान ॥
तौ का करतीं दिल्ली वाले बिल्ली रूप सबै चौहान ७
गिल्ली ह्वैहै आल्हा ठाकुर दिल्ली देखि डरे यहिकाल ॥
ऐसी दिल्ली है मोहवे मा तौ का करें रजा परिमाल ८
दिल टिल दिल्ली खलभल्ली ई लल्ली देशराज के लाल ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५४५ ३
होत इकछी ज्यहि पल्ली मा बेटा बच्छराजे को बाल ९
करत दुपल्ला सो छाती के घाती समर शूर मलखान ॥
तुम्हें मुनासिब अब याही है आवो उदयसिंह चढ़िज्वान१०
प्रथम मिलावो मोहिं प्रीतमको बदला लेउ बन्धुको आन ॥
जो नहिं अहौ उदयसिंह तुम मरि हैं गदा बीर चौहान ११
शोक समानी अलसानी सो मानी प्रथम यौबना नारि ॥
पूरी पाती लय छाती में थाती यौबन के उनहारि १२
यौवन केरे मदमाती सो घाती समय दीख त्यहिबार ॥
फरकत यौवन भुज दक्षिण है करकत हृदय करेजाफार १३
धड़कनअनवटबिछियाअँगुरिन कड़कत चोलीबन्द निहार ॥
तड़कन तनियाँ चौतनियाँसब रनियाँ दुखितभई त्यहिबार १४
दुख मदमाती रस बिसराती आती यार घांवरा धार ॥
फिर सतरांती पछताती मन घाती समय दीखत्यहिबार १५
थर थहराती लहराती मन आती मन्द मन्द त्यहिबार ॥
लखि कर पाती दुखघातीको ढाहत नैनन नीर अपार १६
थाहत आई द्वारपाल ढिग पाती दुःख करेजा फार ॥
सो दै दीन्ही द्वारपाल को मुद्रा दीन्हे एक हजार १७
मुद्रा रुद्रा के तुल्या जो मुल्या बिका सबै संसार १८
राम न लीन्ह्यो इक मुद्रा को त्यागे लंक अवध सरदार १८=
अनुचित वानी हम ठानी है रामै कहा जौन सरदार ॥
तीन लोक के आनँद करता हरता दुःख जगत भरतार १६
तिनसरदारकहब जगअनुचित नहिं यह देव वाणि निरवार ॥
बेद शास्त्रन के भोगत खन आल्हा जीतिलीन संसार २०
परम पवित्र चरित्र हैं जिनके तिनके नाम लेय संसार ॥
३५

४ आल्हखण्ड । ५४६
आल्हा ऊदन मलखे सुलखे कलियुग धर्मध्वजासरदार २१
इनकी कीरति अतिपवित्र है जो कोउ देखै हृदय उघार ॥
परम पवित्र चरित्र जिनके हैं तिनके नाम लेय संसार २२
यहतो ललिते कै ध्वनि बोलै खोलै और हाल यहिवार ॥
पाती लैकै धावन चलिभा पहुँचा नगर मोहोवादार २३
विपदा छाई ह्याँ मोहवे में कोउन मसा सरिस भुन्नाय ॥
यहि गति देखी द्वारपाल ने ठाढ़े लोग रहे सन्नाय २४
चुप्पे चलिभा दशहरिपुर का जहँ पर बैठि बनाफरराय ॥
पाती दीन्ही तहँ धावन ने ठाकुर उदयसिंह को जाय २५
चुप्पे पाती ऊदन पढ़िकै तुरतै डरी तड़ाकाफार ॥
आल्हाठाकुर तब बोलत भे साँचे धर्म्मरूप अवतार २६
कहाँ कि पाती यह आई थी डारी जौनि तड़ाकाफार ॥
बातें सुनिकै ये आल्हा की बोले उदयसिंह सरदार २७
अड़वड़ पाती थी बेला की गड़बड़ लिखी दुःखकेभार ॥
जो नहिं जावैं हम दिल्ली को बेला देय बहुत धिक्कार २८
आयसु पावैं हम दादा को जावैं युक्ति सहित यहिवार ॥
जो नहिं जावैं हम दिल्ली को हमरे जीवे को धिक्कार २६
सुनिकै बातें आल्हा बोले मानो कही लहुरवा भाय ॥
तुम नहिं जावो अब दिल्लीको चहु मरि जाय चँदेलाराय ३०
दोष न देई कउ दुनिया मा ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ॥
अबहीं भूले त्यहि वघऊदन कैसी कहै लहुरवाभाय ३१
सुनिकै बातें ये आल्हा की बोले उदयसिंह सरदार ॥
दूधपियायो बालापन में मल्हना कीन बड़ा उपकार ३२
कैसे जैवे हम दिल्ली ना दादा जियत मोहिं धिक्कार ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५४७ ५
कारो बाना कार निशाना सबकोड करें आज सरदार १३
बने गँजरिहा सबदल हमरो दिल्ली हेतु होय तय्यार ॥
मैं अब जावतहौं तहँना पर जहँना कनउज के सरदार ३४
इतना कहिकै ऊदन चलिभे तम्बुन फेरि पहुँचे आय ॥
सम्मत करिकै लखराना सों उत्तर पत्र दीन पठवाय ३५
लाखनिऊदन मिलि आल्हाते फौजै तुरत लीन सजवाय ॥
भई तयारी फिरि दिल्ली की लश्कर कूच दीन करवाय ३६
पाँच सात दिन के अरसा मा दिल्ली शहर गये नगच्याय ॥
दिल्ली केरे फिरि डाँड़ेमा परिगे जाय कनौजीराय ३७
चौंड़ा बकशी त्यहि समयामा तम्बुन पास पहुँचा आय ॥
मिले बनाफर तहँ ऊदन जब पूँछन लाग चौंड़ियाराय ३८
कहाँ ते आयो औ कहँ जैहौ आपन हाल देउ बतलाय ॥
सुनिकै बातें ये चौंड़ा की बोला तुरत बनाफरराय ३९
हिरसिंह विरसिंह हम विरियाके गाँजर देश हमारो जान ॥
सुनी नौकरी घर बेलाके आयनकरन स्वईहमज्वान ४०
इतना सुनिकै चौंड़ा बोला ठाकुर बचन करो परमान ॥
काह दरमहा तुम चाहत हौ हमसे सत्य बतावो ज्वान ४१
हम बतलावें दिल्लीपतिको नौकर तुम्हें देयँ करवाय ॥
करो नौकरी जो औरत की तौ रजपूती धर्म नशाय ४२
इतना सुनिकै ऊदन बोले नाहर साँच देयँ बतलाय ॥
एकलाख ते कम नहिं लेवैं यहु नितखर्च हमारो आय ४३
देय महीना तीसलाख को ताकी करें नौकरी भाय ॥
बारह बरस हमते लरिकै जयचंद कूचदीन करवाय ४४
दीन न पैसा हम कनउजका सो यश रहा जगत में छाय ॥

६ आल्हखण्ड । ५४८
घढ़ा बनाफर उदयसिंह जब हमरी लूट लीन करवाय ४५
तंगी आई जब हमरे घर तब दरबार जुहारा भाय ॥
महिना कमती कछु लेहैं ना तुमते साँच दीन बतलाय ४६
इतना सुनिकै चौंड़ा चलि भा आयो जहाँ पिथौराराय ॥
खबरि गँजरिहन की बतलाई चौंड़ा बार बार समुझाय ४७
खबरिपायकै पिरथी बोले मानो कही चौंड़ियाराय ॥
कहाँ खजाना घर इतना है देवैं तीस लाख जो भाय ४८
पारस पत्थर चन्देले घर तिनकी करें नौकरी जाय ॥
म्वहिं अभिलाषा नहिं नौकरकी देवैं तीस लाख जो भाय ४६
इतना सुनिकै चौंड़ा बोला मानो कही पिथौराराय ॥
बड़े लड़ैया गाँजर वाले मोहवा आपु लेउ लुटवाय ५०
दश औ पन्द्रा दिन नौकरकरि करिये काज पिथौराराय ॥
फिरि मन भावै महराजा के दीजै सब के नाम कटाय ५१
यह मन भायी पृथीराज के तुरतै हुकुम दीन फरमाय ॥
हुकुम पिथौरा को पावत खन हिरसिंहविरसिंहलीनबुलाय ५२
लाखनि ऊदन दोऊ आये चेहरा अर्पन दीन लिखवाय ॥
कीन नौकरी घर पिरथी के क्षत्री गये शहर में आय ५३
हुकुम लागिगा यह पिरथीका हाथी घोड़ा देउ दगाय ॥
सुनिकै बातें महराजा की लाखनिबहुुतदीनसमुझाय ५४
लिखी न हिंसा कहुँ बेदन में गीता पाठ कीन अधिकाय ॥
विनय हमारी यह राजन है यहु मंसूख हुकुम हैजाय ५५
नहीं फायदा कछु याते है ओ महराज पिथौराराय ॥
सुनिकै बातें ये लाखनि की खारिज हुकुम दीन करवाय ५६
लाखनि ऊदन देवा सय्यद धनुर्वा यई पाँचहू ज्वान ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५४६ ७
बेला बेटी के द्वारे की रक्षा करो कह्यो चौहान ५७
हुकुम पाय कै महराजा को पांचो चले शीश को नाय ॥
बेला बेटी के द्वारे पर ह्वैगे द्वारपाल फिरि आय ५८
चौपरि बिछिगै तहँ लाखनि कै खेलन लाग बनाफरराय ॥
चर्चा कीन्ही तहँ बेला की यहु अलबेला लहुरवाभाय ५६
गुप्त बार्त्ता बाँदी सुनिकै बेलै खबरि जनाई जाय ॥
दारपाल गाँजर के आये तुम्हरी कथा रहे ते गाय ६०
इतना सुनिकै बेला बेटी आपै गयी द्वारढिग आय ॥
लाखनि ऊदन की बातें सुनि जान्यो गये बनाफर आय ६१
रूपा बाँदी ते बोलति भै पूँछो द्वारपाल सों जाय ॥
कहाँ के ठाकुर ये आये हैं आपन हाल देयँ बतलाय ६२
सुनिकै बातें ये बेला की बाँदी चली तड़ाका धाय ॥
जहाँ बनाफर उदयसिंहहैं बाँदी अटी तहाँपर आय ६३
कही हकीकति सब बेला की बाँदी हाथजोरि शिरनाय ॥
सुनिकै बातें त्यहि बाँदी की चिट्ठी दीन बनाफरराय ६४
लै कै चिट्ठी बाँदी चलिभै बेलै दीन तड़ाकाधाय ॥
पढ़ी बनाफर की चिट्ठी जब महलन तुरतलीन बुलवाय ६५
परदा कीन्ह्यो उदयसिंह ते कुरसी अलग दीन डरवाय ॥
गुप्त बार्त्ता बेला पूछी ऊदन सबै दीन बतलाय ६६
तब बिश्वास भई जियरे मा आँहीं ठीक बनाफरराय ॥
तब तो पूँछन बेला लागी साँची कहौ लहुरवाभाय ६७
संग न आये तुम बालम के जूझै खेत चँदेलेराय ॥
कहाँ मंसई तब तुम्हरी गै ऊदन साँच देउ बतलाय ६८
ऊदन बोले तब बेला ते भौजी मोर कीन अपमान ॥

८ आल्हखण्ड । ५५०
बिरा धरावा गा गौने का रहिगा चार घरी लौं पान ६९
कोऊ खावा जब बीरा ना तब मैं उठा शारदा ध्याय ॥
कर्सों हमरे बीरा लीन्ह्यो तुम्हरे कन्त चँदेलेराय ७०
माहिल भूपति तहँ मुसकाने हमरो मरण समय गो आय ॥
कछु नहिं बोले परिमालिकजी दादा हमरे उठे रिसाय ७१
कहा हमारो तुम मान्यो ना ऊदन गयो मोहोवे आय ॥
सवन चिरैया ना घर छोड़ै नावनिउरा बनिजकोजाय ७२
तबै निकार्यो परिमालिकजी दीन्ही बहुत तलाक माय ॥
गे जगनायक जब लेने को तब नहिं अवै बनाफरराय ७३
बहु समुझाये ते आये ते लाखनिराना संग लिवाय ॥
भरी कचहरी परिमालिक की ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ७४
वासरि करिकै द्वासरी कीन्ही दूनों भाय गयन अलगाय ॥
दादा रोंका मोहिं अवतीखन तुमनहिंजाउलहुरवाभाय ७५
वादा तुमते हम कीन्हा था तुम्हरी बिदा लेब करवाय ॥
गड़बड़िचिट्ठीतुमअतिलिखिकै धावन हाथ दीन पठवाय ७६
सो दिखलावा नहिं दादा को कण्ठै हाल दीन बतलाय ॥
दूध पियावा मल्हना रानी स्यावामोहिं बहुत डुलराय ७७
व्याह हमारे मल्हना रानी कुँवना पाँव दीन लटकाय ॥
प्राण नेग दै मैं मल्हना को टार्यों पैर तहाँ ते माय ७८
प्राण निछावरि तुमपर करिकै बिछुरे कन्त देव मिलवाय ॥
इतना सुनिकै बेला बोली यहनहिंआशपूरिदिखलाय ७९
कुटुंब हमारो सब बैरी है हमको राँड़ दीन करवाय ॥
जियत पिथौरा औ ताहर के कैसे मिलब पियाको जाय ८०
प्रभुता ऐसी क्यहि क्षत्री मा प्रीतम मिलन देय करवाय ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५१
शब्द कान सुनि तीर चलावैं हमरे पिता पिथौराराय ८१
लाखनि ऊदन कै गन्ती का हमरी बिदा लेयँ करवाय ॥
डोला लाये संयोगिनि का तब कहँ हते कनौजीराय ८२
सोई लाखनि की दूसर हैं हमरी बिदा लेयँ करवाय ॥
रहे आसरा तुम्हेरो ऊदन सोऊ नहीं पूर दिखलाय ८३
भारी फौजैं महराजा की डोला कौन भांति सों जाय ॥
यहै अंदेशा है जियरे मा लाखनिराना लेउ बुलाय ८४
हुकुम पायकै यह बेला को बाँदी चली तड़ाका धाय ॥
है मर्दाना ज्यहिका बाना सुन्दर सुघर कनौजीराय ८५
सो चलिआवा सँग बाँदी के पहुँचा रंग महल में आय ॥
आवत दीख्यो लखराना को खातिर कीन लहुरखा माय ८६
बैठि कनौजी गे महलन मा बेला बोली बैन सुनाय ॥
बिदाकरावन तुम कस आये दिल्ली शहर कनौजीराय ८७
तुम्हरे घरते संयोगिनि का लाये दिल्ली के सरदार ॥
त्यही वंश के तुम लाखनि हौ की कहुँअन्तलीनअवतार ८८
सुनिकै बातैं ये बेला की यहु अलबेला कनौजीराय ॥
लाली लाली आँखी करिकै दाढ़ी बार दीन बिखराय ८९
एक हाथ धरि तहँ मुच्छन मा नंगी एक हाथ तलवारि ॥
लाखनि बोले तहँ बेलाते कैसी बातें बकै गँवारि ९०
काह हक़ीकत थी पिरथी की बिटिया लेत चँदेले केरि ॥
बिटिया लाये घर चेरी की रानी कहा गँवारिनि टेरि ९१
त्यहिके बदले कहु अगमा का डोला लेउँ आज निकराय ॥
तौ तो लरिका रतीभान का नहिं ई मुच्छ डरों मुड़वाय ९२
ऊदन बोले फिरि बेलाते भौजी काह गयी बौराय ॥

१० | आल्हखण्ड । ५५२
दीख मंसई तुम ऊदन की | हाथी द्वार पछारा आय ६३
करो तयारी तुम महलन ते | बिछुरे कन्त देयें मिलवाय ॥
इतना सुनिकै बेला बोली | मानो कही लहुरवाभाय ६४
चोरी चोरा हम जैहैं ना | नेगिन नेगु देउ चुकवाय ॥
लेउ अधकरी अब ब्याहे की | पाछे बिदालेउ करवाय ६५
यह मनभाई लखराना के | बोले सुनो बनाफरराय ॥
चारि रुपैयन के तोड़ा लै | नेगिन नेगु देउ चुकवाय ६६
इतना सुनिकै ऊदन ठाकुर | नेगिन तुरत लीन बुलवाय ॥
चारिउ तोड़ा रुपयन वाले | तहँ पर तुरत दीन बँटवाय ६७
रानी अगमा के महलन को | बेला चली तड़ाकाधाय ॥
देवा ऊदन धनुवाँ सय्यद | ये दरबार पहुँचे जाय ६८
द्वारे ड्योढ़ी के महाराजा | ठाढ़े रहेँ पिथौराराय ॥
सय्यद देवा धनुवाँ सँगमें | पहुँचा तहाँ बनाफरराय ६६
माथनायकै महाराजा को | बोला सुनो पिथौराराय ॥
नेगु चुकावा हम नेगिन का | दायज आप देउ मँगवाय १००
बेला जैहैं अब श्वशुरे को | राजन साँच दीन बतलाय ॥
हिरसिंहविरसिंह हम आहिनना | हमहैं छोट बनाफरराय १०१
इतना सुनिकै माहिल भूपति | बोले सुनो पिथौराराय ॥
बैठक करिये दरवाजे पर | दायज उचित देउ मँगवाय १०२
माहिल बोले फिरि चुप्पे से | राजन साँच देयें बतलाय ॥
उतरै घोड़ा ते जब ऊदन | तुरतै मूड़लेउ कटवाय १०३
यह मन भाई महाराजा के | बैठक तहाँ दीन करवाय ॥
बड़े कीमती दुइ कुण्डल को | तुरतै तहाँ दीन रखवाय १०४
कह्यो पिथौरा फिरि ऊदन ते | बैठो आय बनाफरराय ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५३ ११
दायज दीन्ह्यों परिमालिक को कुण्डल यहाँ दीन रखवाय १०५
इतनी सुनिकै ऊदन बोले दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥
राजा नौकर की समता ना बैठैं कौन भाँति से आय १०६
नोक लगायो फिरि भाला की कुण्डल दोऊ लीन उठाय ॥
सजग देखिकै फिरि क्षत्रिनको घोड़ा तुरत दीन दौराय १०७
बेला पहुँची जब महलन मा माता लीन्ह्यो कण्ठ लगाय ॥
भल समझायो रानी अगमा बेटी शोक देउ बिसराय १०८
लिखी विधाता की मेटै को कीन्ह्यों घाटि चौंड़ियाराय ॥
दुलहिनि बोली तब ताहर की ननदी रोवै तोरि बलाय १०९
ब्याह तुम्हारो कहुँ अनतै अब करिहैं श्वशुर पिथौराराय ॥
राजपाट सब तुम्हरे घरमा दौलतभरी पुरीअधिकाय ११०
संग न कीन्ह्यो ननदोई का ननदी रोवै तोरिबिलाय ॥
ब्याह न अनुचित कछु दूसरहै ननदी काह गयी बौराय १११
मरे चँदेले मरि जावैदे ननदी रोवै तोरि बलाय ॥
सुनिकै बातें ये भौजीकी बेला बोली क्रोध बढ़ाय ११२
उचित न बातें कछु तेरी हैं अनुचित बात रही बतलाय ॥
भाँवरि फिरिकै चंदेले सँग करिब्योब्याह औरसँगजाय ११३
कउने गवाँरे की बिटियाहै ऐसी टेढ़ि मेढ़ि बतलाय ॥
नहिं सुखस्वइहै तुइ महलन में डरिहौं अवशि राँड़ करवाय ११४
राँड़ अभागिनि की बातें सुनि भौजी चुप्प साधि रहिजाय ॥
तब तो बेला अलबेला यह भूषणवस्त्र सजे अधिकाय ११५
रूप उजागरि सबगुणआगरि शोभा कही बून ना जाय ॥
कटि लचकीली सो मटकीली पीली दुःख देह दिखलाय ११६
माँग सँवारी सो सुकुमारी मानो इन्द्रधनुष समुदाय ॥

१२ आल्हखण्ड । ५५४
कारी अलकैं नागिन झलकैं पलकैं मूँदै औ रहिजाय ११७
ब्यला भवानी बनि महरानी पलकी चढ़ी तड़ाका धाय ॥
चलिमै पलकी फिरि बेलाकैकै लाखनिपास पहुँची आय ११८
लैकै पलकी लाखनि राना तुरतै कूच दीन करवाय ॥
सय्यद देवा धनुवाँ लैकै पहुँचा आय बनाफरराय ११९
मठी शारदा की डांड़े पर डोला तहाँ दीन धरवाय ॥
बेला पहुँची तहँ मठिया मा पूजन हेतु शारदामाय १२०
चन्दन अक्षत औ पुष्पन सों बेला पूज्यो मोद बढ़ाय ॥
धूप दीप दी तहँ देवी की मेवा मिश्री भोग लगाय १२१
फुलवा मालिनि ते फिरि बोली ताहर खबरि जनावो जाय ॥
बहिनि तुम्हारी के डोला को लीन्हे जाय कनौजीराय १२२
बदला लैहैं संयोगिनि का तुम्हरे जीनेका धिक्कार ॥
जल्दी आवो अब मारग में डोला रोंकि लेउ यहिवार १२३
मालिनि चलिमै तब मठिया ते दिल्ली अटी तड़ाका धाय ॥
खबरि सुनाई सब ताहर को दोऊ हाथजोरिशिरनाय १२४
सुनिकै बातैं त्यहि मालिनि की ताहर फौज लीन सजवाय ॥
बाजत डंका अहर्तका के - तुरतै कूच दीन करवाय १२५
यहु निरशंका दिल्लीवाला ताहर अटा तड़ाका आय ॥
औ ललकारा लखराना को ठाढ़े होउ कनौजीराय १२६
धरिकै डोला अब बेला का तुरतै कूच देउ करवाय ॥
नहीतो बचिहौना कनउज लग जोविधि आप बचावैआय १२७
भूरी हथिनी के ऊपर ते लाखनि गरु दीन ललकार ॥
मर्द सराहों मैं ताहर को डोला पास आउ सरदार १२८
बेला मिलिहैं अब ब्रह्मा को ताहर कूच जाउ करवाय ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५५ . ९३

ब्याह बनाफर ऊदन कीन्ह्यो लाखनिबिदालीनकरवाय१२६
काह हकीकति है ताहर कै डोला पास जाय नगच्याय ॥
जितने सँगमा तुम लै आये सब के मूड़ लेउँ कटवाय१३०
तौ तौ लरिका रतीभान का नहिं ई मुच्छ डरों मुड़वाय ॥
जीवन चाहौ ताहर नाहर तौ अब कूच जाउकरवाय१३१
सुनिकै बातें ये लाखनि की ताहर बोले बचन सुनाय ॥
मारो मारो ओ रजपूतो डोला लेवो तुरत छिनाय १३२
सुनिकै बातें ये ताहर की तुरतै चलन लागि तलवार ॥
एक सहस दल पैदल सेना दुइशतबीससाथअसवार १३३
अभिरै क्षत्री अरझारा सों बाजै छपक छपक तलवार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकीधार १३४
को गति बरणै तहँ ताहर कै नाहर दिल्ली का सरदार ॥
पैदल सेना धुनकत आवै मारत अवै घोड़ असवार १३५
यहु दलगंजन की पीठी मा सोहै दिल्ली का सरदार ॥
जहँ पर भूरी है लाखनि कै ताहर आयगयो त्यहिबार१३६
ऐंड़ लगायो दलगंजन के हौदा उपर पहूंचा जाय ॥
गुर्ज चलाई लाखनिराना मस्तक परी घोड़ेकेआय १३७
हटि दलगंजन तब दलतेगा बलते थहर थहर थर्राय ॥
जितनी सेना थी ताहर की तुरतै भागिचली भर्राय १३८
ताहर हटिगे जब मोर्चा ते लाखनि कूचदीन करवाय ॥
बाजत डंका अहलंका के निर्भयजात कनौजीराय १३६
बेला बोली तहँ ऊदन ते साँची कहौ बनाफरराय ॥
दायज दीन्ह्यों का महराजा हमते साँच देउ बतलाय १४०
सुनिकै बातें ये बेला की कुण्डल तुरत दीन दिखलाय"

१४ | आल्हखण्ड । ५५६
देखि कीमती दोउ कुण्डल को बेला बड़ी खुशी ह्वैजाय १४१
चलै पालकी के संगै मा यहु रणबाघ लखुरवाभाय ॥
ताहर चलिभा राजमहल में जहँपर बैठ पिथौराराय १४२
खबरि सुनाई सब लाखनि की डोला जौन भांति लैजायँ ॥
सुनिकै बातें ये ताहर की तब जरिउठा पिथौराराय १४३
तुरत चौंड़िया को बुलवायो नाहर हुकुम दीन फरमाय ॥
लैकै फौजैं जल्दी जावो बेला डोला लेउ छिनाय १४४
जान न पावैं कनउज वाले सबके मूड़ लेउ कटवाय ॥
इतना सुनिकै चौंड़ा चलिभा डंकातुरत दीन बजवाय १४५
बाजत डंका अहतंका के चौंड़ा कूच दीन करवाय ॥
भा भटभेरा फिरि लाखनि ते दउदल गये बरोबरिआय १४६
भाला बरछी कड़ावीन की लागी होन भड़ोभड़ मार ॥
पैदल के सँग पैदल सेना औअसवारसाथअसवार १४७
सूंडि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतन केरि ॥
हौदा हौदा यकमिल ह्वैगे मारैं एक एक को हेरि १४८
ना मुँह फेरैं दिल्ली वाले ना ई कनउज के सरदार ॥
तेगा चमकै बर्दवान का ऊनाचलैबिलाइतिक्यार १४६
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ॥
मूड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लगे पहार १५०
रुण्डन लैकै तलवारी को अद्भुत कीन तहाँपर मार ॥
बड़े लड़ैया दोऊ ठाकुर मानैं नहीं तहाँ कछुहार १५१
यहु यकदन्ता हाथी ऊपर चौंड़ा गरू देय ललकार ॥
भूरी हथिनी के ऊपर ते राजा कनउजका सरदार १५२
भा भटभेरा दउ शूरन ते दोऊ खैंचि लीन तलवार ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५७ १५
दोऊ मारैं तलवारी ते दोऊ लेयँ ढालपर वार १५३
कोऊ काहू ते कमती ना द्वउ रणपरा बरोबरि आय ॥
गुर्ज चलाई फिरि चौंड़ा ने हौदा झुके कनौजीराय १५४
ताकिकै भाला लाखनि मारा हाथी मस्तक गयो समाय ॥
हाथी गिरिगा यकदनता तहँ पैदलभयो चौंडियाराय १५५
भागि सिपाही दिल्ली वाले अपने डारि डारि हथियार ॥
लैकै डोला आगे चलिभा लाखनिकनउजकासरदार १५६
गाहरिकारा फिरि दिल्ली मा जहँ पर भरीलाग दरबार ॥
ताहर धाँधू तहँ बैठे हैं अंगदनृपतिग्वालियरक्यार १५७
तहँ हरिकारा बोलन लाग्यो दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥
जूझि ग हाथी इकदन्ता है लश्कर सबैगयो भराय १५८
डोला जावत है मोहबे को साँची खबरि दीने बतलाय ॥
सुनिकै बातैं हरिकारा की लश्करतुरतलीनसजवाय १५६
आदिसयङ्कर चढ़ि गज ऊपर तुरतै कूच दीन करवाय ॥
बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्दगा छाय १६०
तुरही मुरही तहँ बाजत भइँ पुप्पू पुप्पू ध्वनी लगाय ॥
धम् धम् धम् धम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय १६१
को गनि बरणै त्यहि समयाकै हमरे बूत कही ना जाय ॥
पहिले मारुइ भइँ तोपन्ह की गोलाचलनलागिहहराय १६२
बड़ी दुर्दशा भइँ तोपन में तब फिरि मारुवन्द है्जाय ॥
मघा के बूँदन गोली बरषी क्षत्रीगये बहुत महराय १६३
तीर तमंचा भाला बरछी कोताखानी बर्छी कटार ॥
भा भटभेरा दल पैदल का घोड़नलड़ै घोड़असवार १६४
है दलगंजन के ऊपर मा ताहर पिरथी राजकुमार ॥

१६ आल्हाखण्ड । ५५८
घोड़ बेंदुला की पीठौ मा ठाकुर उदयसिंह सरदार १६५
मोर्चाबन्दी भै दूनों मा दूनों लड़ैलागि त्याहिकाल ॥
अभिरै क्षत्री अरझारा सों भिड़िगैतहाँ ढाल में ढाल १६६
धाँधू धनुवाँ का मोर्चा भा सय्यदनृपतिग्वालियरक्यार ॥
को गति बरणै रजपूतन कै मारैं दऊ हाथ तलवार १६७
जैसे भेड़िन भेड़हा बैठै जैसे अहिर विडारै गाय ॥
तैसे मारै ताहर नाहर शूरन दीन्ह्यो समर वराय १६८
धाँधू धमकै तहँ तेगा को चमकै चमाचम्म तलवार ॥
अली अली कहि सय्यद दौरै रणमाहोतजातगलियार १६६
बड़ा लड़ैया अंगद राजा गोरै ढूँढ़ि ढूँढ़ि सरदार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १७०
सवैया ॥
करहत शूर गिरैं रणखेतन पूरि रही ध्वनि गारु अपारा ।
मत्त मतंग गिरैं भहराय सो हाय दयी यह होत पुकारा ॥
छूटत तीर सो पूरि रहे तन धूरि उड़ै नहिं कीच अपारा ।
मीच भई रणशूरन की ललिते मन कायर जात दरारा १७१
कायर भागि चले ललिते अकुलात महामन दुःख न छाये ।
मोद बढ़यो रणशूरन के बलपूरन के कछु दुःख न आये ॥
कूर कुपूत रहे रजपूत ते मूत भये रण नाम घराये ॥
पूत सपूत महामजबूत सो वूतलड़ै नहिं पाउँ डिगाये १७२
घड़ी लड़ाई भै मारग में पिरथी लाखनि के मैदान ॥
मारे मारे तलवारिन के गिरिगे बड़ेसुघरवाज्वान १७३
मान न रहिगे क्यहु क्षत्रिनके सब के छूटिगये अभिमान ॥