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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 546

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५४५ ३
होत इकछी ज्यहि पल्ली मा बेटा बच्छराजे को बाल ९
करत दुपल्ला सो छाती के घाती समर शूर मलखान ॥
तुम्हें मुनासिब अब याही है आवो उदयसिंह चढ़िज्वान१०
प्रथम मिलावो मोहिं प्रीतमको बदला लेउ बन्धुको आन ॥
जो नहिं अहौ उदयसिंह तुम मरि हैं गदा बीर चौहान ११
शोक समानी अलसानी सो मानी प्रथम यौबना नारि ॥
पूरी पाती लय छाती में थाती यौबन के उनहारि १२
यौवन केरे मदमाती सो घाती समय दीख त्यहिबार ॥
फरकत यौवन भुज दक्षिण है करकत हृदय करेजाफार १३
धड़कनअनवटबिछियाअँगुरिन कड़कत चोलीबन्द निहार ॥
तड़कन तनियाँ चौतनियाँसब रनियाँ दुखितभई त्यहिबार १४
दुख मदमाती रस बिसराती आती यार घांवरा धार ॥
फिर सतरांती पछताती मन घाती समय दीखत्यहिबार १५
थर थहराती लहराती मन आती मन्द मन्द त्यहिबार ॥
लखि कर पाती दुखघातीको ढाहत नैनन नीर अपार १६
थाहत आई द्वारपाल ढिग पाती दुःख करेजा फार ॥
सो दै दीन्ही द्वारपाल को मुद्रा दीन्हे एक हजार १७
मुद्रा रुद्रा के तुल्या जो मुल्या बिका सबै संसार १८
राम न लीन्ह्यो इक मुद्रा को त्यागे लंक अवध सरदार १८=
अनुचित वानी हम ठानी है रामै कहा जौन सरदार ॥
तीन लोक के आनँद करता हरता दुःख जगत भरतार १६
तिनसरदारकहब जगअनुचित नहिं यह देव वाणि निरवार ॥
बेद शास्त्रन के भोगत खन आल्हा जीतिलीन संसार २०
परम पवित्र चरित्र हैं जिनके तिनके नाम लेय संसार ॥
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