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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 557

१४ | आल्हखण्ड । ५५६
देखि कीमती दोउ कुण्डल को बेला बड़ी खुशी ह्वैजाय १४१
चलै पालकी के संगै मा यहु रणबाघ लखुरवाभाय ॥
ताहर चलिभा राजमहल में जहँपर बैठ पिथौराराय १४२
खबरि सुनाई सब लाखनि की डोला जौन भांति लैजायँ ॥
सुनिकै बातें ये ताहर की तब जरिउठा पिथौराराय १४३
तुरत चौंड़िया को बुलवायो नाहर हुकुम दीन फरमाय ॥
लैकै फौजैं जल्दी जावो बेला डोला लेउ छिनाय १४४
जान न पावैं कनउज वाले सबके मूड़ लेउ कटवाय ॥
इतना सुनिकै चौंड़ा चलिभा डंकातुरत दीन बजवाय १४५
बाजत डंका अहतंका के चौंड़ा कूच दीन करवाय ॥
भा भटभेरा फिरि लाखनि ते दउदल गये बरोबरिआय १४६
भाला बरछी कड़ावीन की लागी होन भड़ोभड़ मार ॥
पैदल के सँग पैदल सेना औअसवारसाथअसवार १४७
सूंडि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतन केरि ॥
हौदा हौदा यकमिल ह्वैगे मारैं एक एक को हेरि १४८
ना मुँह फेरैं दिल्ली वाले ना ई कनउज के सरदार ॥
तेगा चमकै बर्दवान का ऊनाचलैबिलाइतिक्यार १४६
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ॥
मूड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लगे पहार १५०
रुण्डन लैकै तलवारी को अद्भुत कीन तहाँपर मार ॥
बड़े लड़ैया दोऊ ठाकुर मानैं नहीं तहाँ कछुहार १५१
यहु यकदन्ता हाथी ऊपर चौंड़ा गरू देय ललकार ॥
भूरी हथिनी के ऊपर ते राजा कनउजका सरदार १५२
भा भटभेरा दउ शूरन ते दोऊ खैंचि लीन तलवार ॥