आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५४६ ७
बेला बेटी के द्वारे की रक्षा करो कह्यो चौहान ५७
हुकुम पाय कै महराजा को पांचो चले शीश को नाय ॥
बेला बेटी के द्वारे पर ह्वैगे द्वारपाल फिरि आय ५८
चौपरि बिछिगै तहँ लाखनि कै खेलन लाग बनाफरराय ॥
चर्चा कीन्ही तहँ बेला की यहु अलबेला लहुरवाभाय ५६
गुप्त बार्त्ता बाँदी सुनिकै बेलै खबरि जनाई जाय ॥
दारपाल गाँजर के आये तुम्हरी कथा रहे ते गाय ६०
इतना सुनिकै बेला बेटी आपै गयी द्वारढिग आय ॥
लाखनि ऊदन की बातें सुनि जान्यो गये बनाफर आय ६१
रूपा बाँदी ते बोलति भै पूँछो द्वारपाल सों जाय ॥
कहाँ के ठाकुर ये आये हैं आपन हाल देयँ बतलाय ६२
सुनिकै बातें ये बेला की बाँदी चली तड़ाका धाय ॥
जहाँ बनाफर उदयसिंहहैं बाँदी अटी तहाँपर आय ६३
कही हकीकति सब बेला की बाँदी हाथजोरि शिरनाय ॥
सुनिकै बातें त्यहि बाँदी की चिट्ठी दीन बनाफरराय ६४
लै कै चिट्ठी बाँदी चलिभै बेलै दीन तड़ाकाधाय ॥
पढ़ी बनाफर की चिट्ठी जब महलन तुरतलीन बुलवाय ६५
परदा कीन्ह्यो उदयसिंह ते कुरसी अलग दीन डरवाय ॥
गुप्त बार्त्ता बेला पूछी ऊदन सबै दीन बतलाय ६६
तब बिश्वास भई जियरे मा आँहीं ठीक बनाफरराय ॥
तब तो पूँछन बेला लागी साँची कहौ लहुरवाभाय ६७
संग न आये तुम बालम के जूझै खेत चँदेलेराय ॥
कहाँ मंसई तब तुम्हरी गै ऊदन साँच देउ बतलाय ६८
ऊदन बोले तब बेला ते भौजी मोर कीन अपमान ॥