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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 558

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५७ १५
दोऊ मारैं तलवारी ते दोऊ लेयँ ढालपर वार १५३
कोऊ काहू ते कमती ना द्वउ रणपरा बरोबरि आय ॥
गुर्ज चलाई फिरि चौंड़ा ने हौदा झुके कनौजीराय १५४
ताकिकै भाला लाखनि मारा हाथी मस्तक गयो समाय ॥
हाथी गिरिगा यकदनता तहँ पैदलभयो चौंडियाराय १५५
भागि सिपाही दिल्ली वाले अपने डारि डारि हथियार ॥
लैकै डोला आगे चलिभा लाखनिकनउजकासरदार १५६
गाहरिकारा फिरि दिल्ली मा जहँ पर भरीलाग दरबार ॥
ताहर धाँधू तहँ बैठे हैं अंगदनृपतिग्वालियरक्यार १५७
तहँ हरिकारा बोलन लाग्यो दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥
जूझि ग हाथी इकदन्ता है लश्कर सबैगयो भराय १५८
डोला जावत है मोहबे को साँची खबरि दीने बतलाय ॥
सुनिकै बातैं हरिकारा की लश्करतुरतलीनसजवाय १५६
आदिसयङ्कर चढ़ि गज ऊपर तुरतै कूच दीन करवाय ॥
बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्दगा छाय १६०
तुरही मुरही तहँ बाजत भइँ पुप्पू पुप्पू ध्वनी लगाय ॥
धम् धम् धम् धम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय १६१
को गनि बरणै त्यहि समयाकै हमरे बूत कही ना जाय ॥
पहिले मारुइ भइँ तोपन्ह की गोलाचलनलागिहहराय १६२
बड़ी दुर्दशा भइँ तोपन में तब फिरि मारुवन्द है्जाय ॥
मघा के बूँदन गोली बरषी क्षत्रीगये बहुत महराय १६३
तीर तमंचा भाला बरछी कोताखानी बर्छी कटार ॥
भा भटभेरा दल पैदल का घोड़नलड़ै घोड़असवार १६४
है दलगंजन के ऊपर मा ताहर पिरथी राजकुमार ॥