आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 555, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ें१२ आल्हखण्ड । ५५४
कारी अलकैं नागिन झलकैं पलकैं मूँदै औ रहिजाय ११७
ब्यला भवानी बनि महरानी पलकी चढ़ी तड़ाका धाय ॥
चलिमै पलकी फिरि बेलाकैकै लाखनिपास पहुँची आय ११८
लैकै पलकी लाखनि राना तुरतै कूच दीन करवाय ॥
सय्यद देवा धनुवाँ लैकै पहुँचा आय बनाफरराय ११९
मठी शारदा की डांड़े पर डोला तहाँ दीन धरवाय ॥
बेला पहुँची तहँ मठिया मा पूजन हेतु शारदामाय १२०
चन्दन अक्षत औ पुष्पन सों बेला पूज्यो मोद बढ़ाय ॥
धूप दीप दी तहँ देवी की मेवा मिश्री भोग लगाय १२१
फुलवा मालिनि ते फिरि बोली ताहर खबरि जनावो जाय ॥
बहिनि तुम्हारी के डोला को लीन्हे जाय कनौजीराय १२२
बदला लैहैं संयोगिनि का तुम्हरे जीनेका धिक्कार ॥
जल्दी आवो अब मारग में डोला रोंकि लेउ यहिवार १२३
मालिनि चलिमै तब मठिया ते दिल्ली अटी तड़ाका धाय ॥
खबरि सुनाई सब ताहर को दोऊ हाथजोरिशिरनाय १२४
सुनिकै बातैं त्यहि मालिनि की ताहर फौज लीन सजवाय ॥
बाजत डंका अहर्तका के - तुरतै कूच दीन करवाय १२५
यहु निरशंका दिल्लीवाला ताहर अटा तड़ाका आय ॥
औ ललकारा लखराना को ठाढ़े होउ कनौजीराय १२६
धरिकै डोला अब बेला का तुरतै कूच देउ करवाय ॥
नहीतो बचिहौना कनउज लग जोविधि आप बचावैआय १२७
भूरी हथिनी के ऊपर ते लाखनि गरु दीन ललकार ॥
मर्द सराहों मैं ताहर को डोला पास आउ सरदार १२८
बेला मिलिहैं अब ब्रह्मा को ताहर कूच जाउ करवाय ॥