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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

अथ आल्हखण्ड ॥
नैनागढ़की लड़ाई अथवा आल्हाका विवाह ॥
सवैया ॥
दीनसहायक नाम तुम्हार सुना बहु ग्रन्थन में महराजा ।
है शबरी गजगीध अजामिल ते अजहूं जिहिकोयशछाजा॥
जो करणी सुमिरों इनकी तबहीं मन धैर्य्य लहै रघुराजा ।
दीन पुकारकरै ललिते प्रभु बेगि द्रवो हे गरीब नेवाजा १॥
सुमिरन ॥
गया न कीन्ही जिन कलियुगमाँ काशिम घोड़ दान नहिंदीन ॥
जन्मत बैरी जिन मारा ना नाहक जन्म जगत में लीन १
पूजा कीन्ही नहिं शम्भू की अक्षत चन्दन फूल चढ़ाय ॥
फिरि गलभँदरी जिनबाजी ना मुख ना बम्ब बम्ब गा छाय २
भसमरमायो नहिं देही माँ कवहूंन लीन सुमिरनी हाथ ॥
सोचन लायक ते आय हैं जिन नहिं कबौं नवायोमाथ ३
को अस देवता रहै शम्भूसम जिनको पूज्यो रामउदार ॥
वेद उपनिषदके ज्ञाता रहें जिनबल भयो रावणाद्धार ४

३ आल्हखण्ड । ११८
झूटि सुमिरनी गे देवन के शाखा सुनो शूरमनक्यार ॥
ब्याह बखानों मैं आल्हाका होई तहाँ भयानक मार ५
अथ कथाप्रसंग ॥
नैनागढ़ का जो महराजा साजा सबै भांति कर्त्तार ॥
राजा इन्दर का बरदानी औ नैपाली नाम उदार १
तिन घर कन्या इक पैदा भै सबविधि रूप शीलगुणखान ॥
पढ़िकै विद्या सब जादूकी कछुदिनबाद भई फिरिज्वान २
संगसहेलिन के खेलति भय सुनवाँ कही तासुका नाम ॥
खेल लरिकई को जाहिर है लरिका खेलैं चारिहूयाम ३
खेलत खेलत फुलबगिया गईं सब मिलि करैं फूलनकी मार ॥
कटहर बड़हर त्यहि बगिया में कहुँ कहुँ फूलिरही कचनार ४
उठै सुगन्धे कहुँ चन्दन की कतहूँ कदलिन खड़ी कतार ॥
गुम्मज सोहैं मोमशिरिन के कहुँ कहुँ फुलीं चमेलीडार ५
बेला फूले अलबेला कहुँ खिन्निन लता गई बहुछाय ॥
हर्र बहेरा साँखो बिरवा सीधे चले उपर को जायँ ६
बरगद फैले हैं नीचे को फैले भूमि रहे नियराय ॥
जैसे सम्पति सज्जन पावैं नीचे शीश झुकावत जायँ ७
शीशम जानो तुम नीचनको आधे सरग फरहरा खायँ ॥
चलै कुल्हाड़ा जब नीचेते गिरिकै टूक टूक हैजाएँ ८
को गति वरणै तहँ अधमनकै सोहैं करिल रूपते भाय ॥
ताल तमालन कै गिनतीना कदमन गई सघनता छाय ६
फुली नेवारी अब अगस्त्य हैं आमनडार कैलिया बोल ॥
सोहैं अशोकन के बिरवा भल तीनों तहाँ बयारी डोल १०
गूलर जामुन पाकर पीपर कोनन खड़े वृक्ष सरदार ॥

आल्हाका बियाह । ११६ ३
तार अपारन के बिरवा बहु कहूँ कहूँ खड़े वृक्ष कहार ११
टेसू फूले कहूँ सोहत हैं जैसे सोहैं लड़ैता ज्वान ॥
रूप गुलाबन को देखत खन फूलनछांड़िदीनअभिमान १२
कौन कनै रन को वर्णन कर चाँदनि चाँद सरिस गै छाय ॥
फूल दुपहरी के भल सोहैं मोहैं मुनिन मनै अधिकाय १३
गेंदन केरे बहु बिरवा हैं अर्जुन वृक्ष परै दिखराय ॥
मेला लाग्यो नौरङ्गिन का हेला निंबुन का दर्शाय १४
ठेला भरि भरि अमरुतन का माली राजभवन को जाय ॥
केवँड़ा केरी उठै सुगन्धी कहुँकहुँ नागबेलिगै छाय १५
ताही बगिया सुनवाँ खेलै मेलै गले सखिन के हाथ ॥
सखियाँ बोलीं तहँ सुनवाँते तुम नित खेलोहमारेसाथ १६
पैर महावर पै तुम्हरे ना -टिकुली नहीं बिराजै भाल ॥
द्रव्य तुम्हारे का घर नाहीं जो नहिं ब्याहकरें नरपाल १७
इतना कहिकै सब आलिनने औ करताली दीन बजाय ॥
समय दुपहरी को जान्यो जब तब फिरि खेलबन्द द्वैजाय १८
कीरति गावैं सब आल्हा की माड़ो लिहेनि बापका दायँ ॥
धन्य बनाफर उदयसिंह हैं आल्हा केर लहुरवा भाय १६
ऐसी बातें सखियाँ करतै अपने भवन पहूँचीं आय ॥
ताही क्षणमें सुनवाँ मन में अपने ठीक लीन ठहराय २०
ब्याही जैबे आल्हा सँग में की मरिजाब जहरको खाय ॥
छाय उदासी गै चिहरा में पूँछै बार बार तब माय २१
कौन रोगहै त्वरि देहीमाँ बेटी हाल देउ बतलाय ॥
पीली ह्वैगै सब देही है औतनकाँपिकाँपि रहिजाय २२
को हितकारी है मातासम नाता बड़ा जगत केहिभाय ॥

४ आल्हखण्ड । १२०
अब तो बाबा कलियुग आये माता सहैं लात के घाय २३
सुनिकै बातें ये माता की सुनवाँ चरण शीश नवाय ॥
जो कछु भाषारहै सखियनने सुनवाँ मातै गई सुनाय २४
सुनिकै बातें सब कन्या की माता रही समय को देखि ॥
यकदिन ऐसा आनपहूँचा राजा रहा कन्यका पेखि २५
रानी बोली तब राजाते हमरे बचन करो परमान ॥
ब्याहन लायक यह कन्या भै सोतुमजानो नृपतिसुजान २६
सुनिकै बातें ये रानी की बिजिया बेटा लीन बुलाय ॥
नाई बारी को बुलवायो तिनते कह्योहालसमुझाय २७
जयो मोहोबे ना टीका लै सब कहुँ जाउ तुरतही धाये ॥
नाई बारी तुरतै चलिभे पहुँचे नगर नगर में जाय २८
काहू टीका को लीन्ह्यो ना. नैनागढ़ै पहुँचे आय ॥
खबरि सुनाई सब राजा को नेगिनचरणशीशनवाय २६
जालिम राजा नैनागढ़ का राजन यही विचारा जीय ॥
मारे डरके छाती धड़कै कैसेहोयँ तहांपर पीय ३०
थोरी थोरी फौजें लैके नैनागढ़ै पहुँचे आय ।
नजरी दीन्ह्यो नेपाली को राजाचरण शीशनवाय ३१
सरवरि तुम्हरी का नाहीं हैं टीका लेयँ कहौ कस भाय ।
कुमक तुम्हारी को आयन है राजन सत्यदीन बतलाय ३२
त्यही समैया त्यहि औसरमाँ औ सुनवाँ को सुनो हवाल ॥
हीरामणि सुवनाको लैके सुनवाँ भई रोवासिनिबाल ३३
चूम्यो चाट्यो त्यहि सुवनाको औफिरिकह्योबचन यहगाय ॥
मेवा खायो भल पिंजरन में अब गाढ़े में होउ सहाय ३४
लैके पाती जाउ मोहोबे देवो उदयसिंह को जाय ॥

आल्हाका बिबाह । १२१ ५
लिखी हकीकत सब आल्हाको सुनवाँ बारबार समुझाय ३५
नामी ठाकुर तुम मोहबे में हमरो ब्याह करो अब आय ॥
नहिं मरिजयो जहर खायकै दूनों भाइ बनाफरराय ३६
लिखिकै पाती गल सुवनाके सुनवाँ तुरत दीन लटकाय ॥
मूठी दीन्ह्यो फिरि कोठे ते सुवना चला मोहोबे जाय ३७
चन्दन बगिया सुवना पहुँँच्यो तहँ पर रहें उदयसिंहराय ॥
चन्दन ऊपर सुवना बैठो परिगा दृष्टि तुरतही आय ३८
भल चुचकारयो उदयसिंहने आपन नाम दीन बतलाय ॥
सुवना बैठ्यो तब हाथेपर पाती छोरि लीन हर्षाय ३६
बाँचिकै पाती तब ऊदन ने औ सय्यद को दीन सुनाय ॥
सय्यद आल्हासों बतलायो मलखे देबै दीन बताय ४०
लैके पाती औ सुवना को गे परिमाल कचहरी धाय ॥
कही हकीकति सब राजा सों पाती दीन उदयसिंहराय ४१
पढ़िकै पाती को परिमालिक मनमाँ गये सनाकाखाय ॥
होश उड़ान्यौ परिमालिक का मुहँकाबिरगयो कुम्हिलाय ४२
बोलि न आवा परिमालिक सों औ द्वाढ़ालों लार सुखाय ॥
थर थर थर थर देही काँपी शिरसों मुकुट गिरा भहराय ४३
रोम रोम सब ठाढ़े व्हैगे नैनन बही आँसु की धार ॥
धीरजधरिकै परिमालिक फिरि औ मलखे तन रहे निहारि ४४
मलखे बोले तब राजा ते साँचे बचन सुनो नरपाल ॥
टीका पठयो है बेटी ने सोनहिंलौटिसकैक्यहुकाल ४५
सुनिकै बातें मलखाने की बोले तुरत रजापरिमाल ॥
ब्याधि नशायो गढ़माड़ो की दूसरि ब्याधिभयोफिरिहाल ४६
टीका फेरो नयनागढ़ को मलखे मानो कही हमार ॥

६ | आल्हखण्ड | १२५


जालिम राजा नयपाली है ज्यहिघर अमरढोल सरदार ३७
कौन बियाहन त्यहि घर जैहै ऐहै लौटि कौन बलवान ॥
टीका फेरो सब राजन ने मानो कही वीर मलखान ४८
सवैया ॥
शान चढ़ी मलखान के ऊपर आन नहीं कछूहू नृप राखी।
मोहिं पियार न प्राण भुवार कहौं मैं सत्य सदाशिव साखी ॥
कीरतिही प्रिय बीरनको हम शान कि आन सदा मनमाखी।
आनरहै नहिं शान कि जो मरि जान भलो ललिते हम भाखी ४६
इतना कहिकै मलखाने ने डंका तुरत दीन बजवाय ॥
लिखिकै उत्तर उदयसिंहने सुवना गरे दीन लटकाय ५०
उड़िकै सुवना फिरि मोहबे ते सुनवाँ पास पहुंचा आय ॥
रानी मल्हना के महलन में राजा तुरत पहुंचे जाय ५१
हाल बतायो सब मल्हना को सुनतै गई सनाकाखाय ॥
मलखे देवा को बुलवायो सुनतै गये महल में आय ५२
मल्हना बोली तब मलखे ते बेटा हाल देउ बतलाय ॥
काहे डंका तुम्हरे बाजे कहँ चढ़िजाउ बनाफरराय ५३
हाथ जोरिकै मलखे बोले मल्हना चरणन शीश नवाय ॥
पाती आई नैनागढ़ की आल्हा तहाँ बियाहन जायें ५४
सुनिकै बातें मलखाने की मल्हनै देवै कहा सुनाय ॥
शकुन तुम्हारे सों मलखाने माड़ो लीन बाप का दायँ ५५
कैसी गुजरी नैनागढ़ में सो सब हाल देव बतलाय ॥
सुनिकै बातें ये मल्हना बुझि देवा पोथी लीन मँगवाय ५६
लैके पोथी ज्योतिष वानी औ सब हाल दीन बतलाय ॥
जीति तुम्हारी द्वैहै सांची बात कहैं हम माय ५७

आल्हाका विवाह । १२३ ७
इतना कहिकै दूनों चलि भे महलन भये मंगलाचार ॥
बांदी आंगन लीपन लागी पंडित साइति रहे बिचार ५८
एक कुमारी तेल चढ़ावै गावनलगीं सखी त्यहिकाल ॥
माय मंतरा भे पाछे सों नेगिननेग दीन परिमाल ५६
लैकै महाउर नाइनि आई नहखुर होनलाग त्यहिबार ॥
नाइनि मांग्यो तहँ पुरवाको दीन्ह्यो मल्हना परम उदार ६०
उबटन करिकै तन केसरसों निर्मलजलसों फिरिअन्हवाय ॥
कंकण बांधागा आल्हा के दूलह बने बनाफरराय ६१
सजी पालकी तहँ ठाढ़ीथी तापर बैठि शम्भु को ध्याय ॥
कुँवा वियाहन आल्हा पहुंचे मल्हना पैर दीन लटकाय ६२
पहिली भाँवरि के फिरतैखन आल्हा गहा चरणको धाय ॥
बाग लगावों तेरे नाम की माता लेवो चरण उठाय ६३
ऐसो कहिकै सातों भाँवरि घूमा तुरत बनाफरराय ॥
मल्हनाबोली फिरि आल्हा सों सेयों तुमको दूध पियाय ६४
तासों द्यावलि सों अधिकी मैं तासों पैर दीन लटकाय ॥
पंजा फेर्यो फिरि पीढ़ी माँ तुम्हरो बार न बाँको जाय ६५
पाँय लागिकै फिरि द्यावलिके पलकी चढ़े बनाफरराय ॥
हुकुम लगायो बघऊदन ने डंका वजनलाग घहराय ६६
घोड़ करिलिया आल्हा वाला कोतल चला पालकी साथ ॥
मलखे पपिहापर बैठत भे नायकै रामचन्द्र को माथ ६७
घोड़ा मनोहरा की पीठी माँ देवा तुरत भयो असवार ॥
सय्यद सिरगा पर बैठत भे नाहर बनरस के सरदार ६८
अली अल्लामत औ दरियाखां बेटा जानबेग सुल्तान ॥
तेग बहादुर अलीबहादुर बैठे घोड़ आपने ज्वान ६६

८ आल्हखण्ड । १२४
मीराताल्हन के लरिका ये नाहर समरधनी तलवार ॥
मन्नागूजर मोहबे वालो सोऊ वेगि भयो असवार ७०
सातलाख लग फौजैं सजिकै नैनागढ़ को भई तयार ॥
डंका बाजैं अहलंका के ऊदन बेंबुलपर असवार ७१
सजे बराती सब मोहबे के जल्दी कूच दीन करवाय ॥
सातरोज की मैजलि करिकै फौजैं अठीं धुरा पर आय ७२
आठ कोस नैनागढ़ रहिगा तहँपर डेरादीन डराय ॥
तम्बू गड़िगा तहँ आल्हा का बैठे सबै शूरमा आय ७३
ऊंचे ऊंचे तम्बू गड़िगे नीचे लागीं खूब बजार ॥
कम्भर छोरे राजपूतन ने हाथिन हौदा धरे उतार ७४
तंग बछेड़न की छोरी गईं क्षत्रिन धरा ढाल तलवार ॥
बनी रसोई राजपूतन की सबहिनजेंयलीन ज्यँवनार ७५
गा हरकारा तब तहँनाते जहँना भरीलाग दरबार ॥
बैठक बैठे सब क्षत्री हैं एकते एक शूर सरदार ७६
गम् गम् गम् गम् तबला गमकैं किन् किन् परी मँजीरन मार ॥
को गतिबरणै सारंगी कै होवै नाच पेतुरियन क्यार ७७
खये अफीमनके गोला कोउ पलकैं मूंदैं औ रहिजायँ ॥
कोऊ जमाये हैं भांगनको मनमाँ रहे रामयश गाय ७८
उड़ै तमाखू बुटवल वाली धुँवना रहा तहांपर छाय ॥
हाथ जोरि औ बिनती करिकै धावन बोल्यो शीशनवाय ७९
अईं बरातें क्यहु राजाकी धूरे परीं आजही आय ॥
आठकोस केहैं दूरीपर सांची खबरि दीन बतलाय ८०
सुनिकै बातें नयपाली ने तीनों लड़का लये बुलाय ॥
जोगा भोगा औ बिजियाते राजा बोल्यो बचन सुनाय ८१

आल्हाका विवाह । १२५ ६
जावो जल्दी तुम धूरेपर हमको खबरि सुनावो आय ॥
सुनिकै बातें तीनों चलिभे धूरे तुरत पहुंचे जाय ८२
ऊंचे टिकुरी तीनों चढ़िकै दूरिते लखैं तमाशा भाय ॥
देखिकै फौजें मलखाने की तीनों गये तहाँ सन्नाय ८३
तीनों लौटे त्यहि टिकुरीते अपने महल पहुंचे आय ॥
भोजन केरी फिरि बिरियामाँ राजै खबरि दीन बतलाय ८४
लगी कचहरी हाँ आल्हाकी भारी लाग तहाँ दरबार ॥
बैठक बैठे सब क्षत्री हैं एकते एक शूर सरदार ८५
मीराताल्हन बनरसवाले आली खानदान के ज्वान ॥
बड़े पियारे ते क्षत्रिनके अपने धर्म कर्म अनुमान ८६
सच्चे साथी रहें चारों के यारों मानों कही हमार ॥
ऐसे होते जो सय्यद ना कैसे बने रहत सरदार ८७
अली अलामत औ दरियाखाँ बेटा जानबेग सुल्तान ॥
औरो लड़का रहें सय्यदके एकते एक रूप गुणखान ८८
मन्नागूजर मोहबे वाला बैठा बड़ा सजीला ज्वान ॥
रुपनाबारी ते त्यहि समया बोले तहाँ बीर मलखान ८९
ऐपनावारी बारी लै कै राजैद्वार पहुंचो जाय ॥
सुनिकै बातें मलखाने की रुपना बोला शीशनवाय ६०
औरो नेगी मोहबे वाले आये साथ बनाफरराय ॥
ऐपनावारी बारी लै कै द्वारे मूड़ कटावै जाय ६१
सुनिकै बातें ये रुपना की बोले तुरत उदयसिंहराय ॥
तुमको नेगी हम मानैं ना जानें सदा आपनो भाय ६२
दादा बियाहन को रहि हैं ना बतियाँ कहिबे को रहिजायँ ॥
यश नहिंजावै नर मरिजावै परहित देवै मूड़क़टाय ६३

१० आल्हखण्ड । १२६
स्वारथ देही तब नरकेही नेही मरे न पावै चाम ॥
सन्मुख जूझै समरभूमि में जावै तुरत हरी के धाम ९४
बड़े प्रतापी जग में जाहिर मनियाँदेव मोहोबे केर ॥
तिनके सेवक तेई रक्षक रूपन काह लगावो देर ९५
रूपन बोला तब मलखे ते दादा मानो कही हमार ॥
घोड़ करिलिया आल्हा वाला अपने हाथ देउ तलवार ९६
सुनिकै बातें ये रुपना की मलखे घोड़ दीन सजवाय ॥
ढाल खड्ग रुपना को दैके बैठे तुरत बनाफरराय ९७
बैठिकै रुपना फिरि घोड़े पर ऐपनावारी लीन उठाय ॥
चारिघरी को अरसा गुजरो नैनागढ़ै पहुँचो जाय ९८
देखिकै बारी दरवानी ने भारी हाँक दीन ललकार ॥
कहां ते आयो औ कहँ जैहौ बोलो घोड़े के असवार ६६
सुनिकै बातें द्वारपाल की रूपन बोला बचन उदार ॥
आल्हा ब्याहन को हम आये नामी मोहबे के सरदार १००
खबरि सुनावो नैपाली को फिरि तुम हमैं सुनावो आय ॥
ऐपनावारी बारी लायो ताको नेग देव पठवाय १०१
सुनिकै बोलो द्वारपाल फिरि तुम्हरो नेग काह है भाय ॥
सोऊ सुनावों महराजा को लादे लिहे घोड़ पर जाय १०२
सुनिकै बातें द्वारपाल की रूपन बोला बचन उदार ॥
चारिघरीभर चलै सिरोही द्वारे बहै रक्त की धार १०३
नेग हमारो यहु प्यारो है देवो पठै स्वईं सरदार ॥
जाहि पियारो तन होवै ना आवै स्वईं शूर अब द्वार १०४
सुनिकै बातें ये बारी की आरी द्वारपाल हैजाय ॥
मनमें सोचै मनै विचारै मनमें बार बार पछिताय १०५

आल्हाका विवाह । १२७ ११
कैसो बारी यहु आयो है नाहर घोड़ेका असवार ॥
जालिम राजा नैपाली है तासों कीन चहै तलवार १०६
यहै सोचिकै द्वारपालने औ रूपन ते कहा सुनाय ॥
गरमी तुम्हरी जो उतरी हो बोलो ठीक ठीक तुम भाय १०७
सुनिकै बातें दरवानी की रूपन गरु दीन ललकार ॥
नगर महोबा जगमें जाहिर नामी मोहबे के सरदार १०८
तिनको नेगी मैं द्वारेपर लीन्हे खड़ा ढाल तलवार ॥
जौन शूरमा हो नैनागढ़ आवै देय नेग सो द्वार १०९
इतनी सुनिकै दरवानी ने राजै खबरि सुनाई जाय ॥
ऐपनवारी बारी लावा भारी बात कहै सो गाय ११०
चारिघरीभर चलै सिरोही द्वारे बहै रक्तकी धार ॥
जौन शूरमाहो राजाघर आवै देय नेग सो द्वार १११
इतना सुनतै महाराजाके नैना अग्नि बरण द्वैजायँ ॥
पूरण राजा पटनावाला बोला राजै बचन सुनाय ११२
हम चलिजावैं अब द्वारेपर बारी नेग देयँ चुकवाय ॥
इतना कहिकै चलि ठाढ़ो भो साथै औरो चले रिसाय ११३
सवैया ॥
द्वार चले तलवार लिये रट मारहि मार कुमारन पेखा ।
लाल गुपाल गहे करबाल खेलैं जसफाग भयउ तस भेखा ॥
मार अपार जुझार किये औ गिरे रणखेत रहे नहिं शेखा ।
बारीकरै कब रारी नृपै ललिते मलखान कि है यह लेखा ११४
पूरन राजा पटना वाला लीन्हे नांगि हाथ तलवार ॥
सो धरि धमका त्यहि रूपनके रूपन लीन ढालपर वार ११५

९२ आल्हाखण्ड । १२८
सांगि उठाई फिरि रूपन ने राजै बार बार ललकार ॥
लटुवा लाग्यो पूरन शिर में औ बहिचली रक्तकी धार ११६
अगल बगल के फिरि मारतभा दाँयें बाँयें दीन हटाय ॥
ऐंड़ा मसके फिरि घोड़ा के फाटक तुरत पार है जाय ११७
गली गली में फिरि मारत भो औ वहिचली रक्तकी धार ॥
घरी चारके फिरि अरसा में लश्कर आयगयो असवार ११८
लाले रंग सों भीजे दीख्यो फागुन टेसू के अनुहार ॥
पूँछी हकीकति तब मलखेने नाहर मोहबे के सरदार ११९
कैसी गुजरी नैनागढ़ में रूपन हाल देउ बतलाय ॥
सुनिकै बातें मलखाने की रूपन यथातथ्य गा गाय १२०
हल्ला हैगा नैनागढ़माँ जहँतहँ कहन लागि सब कोय ॥
ऐस बहादुर जहँके परजा तहँकेनृपतिकहौ कसहोयँ १२१
देखि तमाशा यहु बारी का राजा बार बार पछिताय ॥
बड़ी हीनता हमरी हैगै बारी जियत निकरिगा हाय १२२
जोगा भोगा दोऊ लरिका बोले हाथ जोरि शिरनाय ॥
हुकुम जो पावैं महराजा का सबकी कटा देयँ करवाय १२३
जितनी रौढ़ें चढ़ि आई हैं सो विनघाव एक ना जायँ ॥
खेदिकै मारैं हम मोहबे लग टेंटुवा टायर लैँ छिनाय १२४
सुनिकै बातें ये लरिकन की राजै हुकुम दीन फरमाय ॥
तुरत नगड़ची को बुलवायो तासों बोल्यो हुकुम सुनाय १२५
बजै नगाड़ा नैनागढ़ में सबियाँ फौज होय तय्यार ॥
भोर सुरेरे पहफाटत खन मारों मुहवेके सरदार १२६
इतना कहिकै दूनों चलिभे अपने महल पहुँचे जाय ॥
रैन खटिगा दिननायक सों झण्डागड़ानिशाको आय १२७

आल्हाका विवाह । १२६ ९३
तारागण सब चमकन लागे सन्तन धुनी दीन परचाय ॥
परे आलसी निजनिज खटिया घों घों कंठ रहे घराँय १२८
माथ नवावों पितु अपने को जो नित मेरी करैं सहाय ॥
करों तरंग यहाँ सों पूरण पूरण ब्रह्म रामको ध्याय १२६
आगे फौजें दूनों सजिहैं मचि हैं घोर शोर घमसान ॥
जोगा भोगा के मुर्चापर लड़ि हैं खूब बीरमलखान १३०
इति श्रीलखनऊनिवासि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मज बाबू प्रयागना-
रायणजीकी आज्ञानुसारउन्नावप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भवबुध
कृपाशंकरसूनुपं० ललिताप्रसादकृतबरातआगमनवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥
कवित्त ॥
अंजली दिहेते रोग देहसों हटाय देत ध्यान के धरेते दुख दारिद दिखातना ।
ज्ञानसों विचारे मान राजैसों कराय देत नामके उचारे मुक्ति पदवी बिलातना ॥
धारे उर व्रत काम क्रोधहू नशाय देत दीनहैं पुकार करे खीन कुम्हिलातना ।
बोरिदेत विघ्नन मिरोरि देत शत्रुमुख ललित करजोरे पाप रंचहू लखातना १
सुमिरन ॥
मारतण्ड मैं तुमको सुमिरों धरिकै चरणकमल में माथ ॥
सूर्य्य भास्कर सविता रवि औ औरो नाम बहुत दिननाथ १
कथा पुराणन में पढ़िकै मैं जानों काश्यपेय महराज ॥
जो कोउ आयो तव शरणागत गई न तासु कबों जगलाज २
तुम्हरे कुलमाँ रघुनन्दन भे बन्दनकरैं ललित तिनक्यार ॥
अक्षत चन्दन औ फूलन सों मानस पूजन सदा हमार ३
तुम्ही सहाई हौ दीनन के गाई सबै पुराणन गाथ ॥
स्वई भरोसा धरि जियरेमाँ जावाचहौं नांघि भवपाथ ४
छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥
जोगा भोगा दोऊ लड़िहैं लड़िहैं उदयसिंह सरदार ५

१४ आल्हखण्ड । १३०
अथ कथाप्रसंग ॥
उदय दिवाकर भे पूरबमाँ किरणन कीन जगत उजियार ॥
डंका बाज्यो नैनागढ़माँ सबियाँ फौज भई तय्यार १
बसैं बघेले औ चन्देले पाँवर सूरबंश सरदार ॥
माड़वाड़ के क्षत्री साजे औ परिहार गुटैयाचार २
हाड़ा वाले बूंदी वाले औ राठौर लीन सजाय ॥
तुरत निकुम्भन को सजवायो औ गौरन को लीन बुलाय ३
सजि गुहलौता औ कछवाये बहुतक चन्द्रबंश के ज्वान ॥
तोमर ठाकुर तुमरवार के सजिगे मैनपुरी चवहान ४
सजे भदावर वाले क्षत्री सजिगे गहिलवार सरदार ॥
बैस डौंडियाखेरे वाले जिनके बांट परी तलवार ५
हबशी साजे औ दुर्रानी जे मनइन के करें अहार ॥
कुरी छतीसों सब सजवाई ठाकुर सबै भये तय्यार ६
पूरन राजा पटनावाला सोऊ लीन ढाल तलवार ॥
जोगा भोगा दोनों ठाकुर अपने घोड़न भे असवार ७
रणकी मौहरि बाजन लागी रणकौ होनलाग व्यवहार ॥
दाढ़ी करखा बोलन लागे विप्रन कीन वेद उच्चार ८
मारु मारुकै मौहरि बाजी बाजी हाव हाव करनाल
को गति वरणै तहँ क्षत्रिनकै एक ते एक दई के लाल ६
हतु हुंकारनि तोपैं सजि गईँ जिनसों होय घोर घमसान ॥
मारू डंका बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान १०
खर खर खर खरकै रथ दौरे ख्बा चले पवन की चाल ॥
खट पट खट पट तेगा बोलैं मर मर होयँ गैंड़की ढाल ११
धक धक धक धक करै महावत हाथी धकापेल चलिजायें ॥

[Header] आल्हाका विवाह । १३१ १५

कोउ कोउ घोड़ा मोर चालपर कोउ कोउ सरपट रहे भगाय १२
कोउ कोउ घोड़ा हंस चालपर कोउ कोउ चले कदमपर जायँ ॥
कोउ कोउ घोड़ा ऐसे जावैं जिनके टाप न परै सुनाय १३
कोउ कोउ घोड़ा कावा देवैं कोउ कोउ गर्जि रहे असवार ॥
कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि चमचम चमाचम्म तलवार १४
घन घन घन घन घंटा बाजैं घूमत चलैं मत्त गजराज ॥
बल बल बल बल करैं साँड़िया भागत चलैं समर के काज १५
हिनहिन हिन हिन घोड़ा हींसैं खीसैं कायर देखि परान ॥
छाय अँधरिया गै पृथ्विी में गर्दा छाय गई असमान १६
देवता सकुचे आसमान में जंगल जीव गये थर्राय ॥
घरी चार के फिरि अर्सा में सेना अटी समर में आय १७
धूली दीख्यो आसमान में मलखे बोल्यो बचन सुनाय ॥
सजो बेन्दुला के चढ़वैया फौजै गई ऊपर अब आय १८
सुनिकै बातें मलखाने की ऊदन गरु दीन ललकार ॥
सजो सिपाही मोहबे वाले सबियाँ फौज होय तैयार १६
झीलम बख्तर पहिरिसिपाहिन हाथ म लीन ढाल तलवार ॥
सिरगा घोड़े की पीठिमाँ सय्यद तुरत भये असवार २०
चढ़ो कबूतरी में मलखाने अपनी लिये ढाल तलवार ॥
घोड़ मनोहर की पीठी माँ देवा चढ़त न लागी बार २१
बड़ी बड़ी तोपैं अष्टधातु की सो चरखिन में दीन चढ़ाय ॥
लै लै थैली बारूदन की सो तोपन में दई चलाय २२
बत्ती दइ दइ फिरि तोपन में रंजक तुरत दीन धरवाय ॥
बम्बके गोला छूटन लागे परलय जनो गई नगच्याय २३
गोली ओला सम वर्षत भई भनभन भन्नभन्न भन्नाय ॥

१६ आल्हखण्ड । १३२
सर सर सर सर कै शर छूटैं मन मन मन्त्र मन्त्र मन्त्राय २४
खट खट खट खट तेगा बोलैं हट हट करैं लड़ैता ज्वान ॥
बड़ी लड़ाई भै नैनागढ़ जोगा भोगा के मैदान २५
सूंदि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतनकेर ॥
हौदा हौदा यकमिल हैगे मारैं एक एकको हेर २६
सात लाख दल मलखे लीन्हे भोगा पांच लाख परमान ॥
मीराताल्हन औ जोगाका परिगा समर बरोबरि आन २७
भोगा बोला तब ऊदनते ओ परदेशी बात बनाय ॥
कहाँते आयो औ का करिहौ आपन हाल देव बतलाय २८
ऊदन बोले तब भोगाते तुमते सत्य देयँ बतलाय ॥
देश हमारो नगर मोहोबा जहाँपर बसै चंदेलाराय २६
छोटे भैया हम आल्हाके औ ऊदनहै नाम हमार ॥
सुनवाँ व्याहन आल्हा आये मानौ सत्य वचन सरदार ३०
बाँधिकै मुशकें त्वरे बप्पाकी भँवरी फिरी बड़कवा भाय ॥
नीके ब्याहौ घर फिरिजावो अपने बाप देउ समुझाय ३१
सुनिकै बानै ये ऊदन की भोगा कालरूप हैजाय ॥
धोखे माड़ो के भूल्यो ना जहँ लै लियो बापका दायँ ३२
जाति बनाफर की ओछी है औ सब क्षत्रिन केर उतार ॥
कठिन बिसाने जग में जाहिर मोहबे लौटि जाउ सरदार ३३
बातै सुनिकै ये भोगा की बोला बिहँसि लहुरवा भाय ॥
नदिया भागै तौ गंगाजायँ गंगा भागि समुन्दर जायँ ३४
महादेव अर्घाते भागैं धरती लौटि रसातल जाय ॥
ऊदन भागैं समरभूमिते तौ फिरिभागिकहाँकोजायँ ३५
इतना कहिकै बघऊदनने सुमिरि हृदय शारदा माय ॥

[Header] आल्हाका बिवाह । १३३ १७

देवी शारदा महहरवाली मानों गई भुजापर आय ३६
बाहू फरके बघऊदन के फौजन घुसा बनाफरराय ॥
जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय ३७
तैसे क्षत्री ऊदन देखैं भागैं तुरतै पीठि दिखाय ॥
बड़ी लड़ाई मलखे कीन्हों अद्भुतसमर कहा ना जाय ३८
घोड़ मनोहर की पीठीपर देबा गरु करै ललकार ॥
हनि हनि मारै रजपूतन को बहुतक जूझिगये सरदार ३९
अली अलामत औ दरियाखाँ बेटा जानबेग सुल्तान ॥
ये सब लड़का सय्यदवाले तहँपर करैं घोर घमसान ४०
मन्ना गूजर मोहबेवाला दोऊ हाथ करै तलवार ॥
जोगा भोगा पूरन राजा येऊ करैं तहां पर मार ४१
जूझे सिपाही नैनागढ़ के लगभग एक लाखके ज्वान ॥
पांच सहस मोहबे के जूझे करिकै समर भूमि मैदान ४२
जोगा बोला तब भोगा ते मानो कही हमारी बात ॥
खबरि सुनावो महाराजाको जैसी देखि परै कुशलात ४३
सुनिकै बातें भोगा चलिभा नैनागढ़ै पहूंचा जाय ॥
हाथ जोरिकै महाराजा के भोगा यथातथ्य गा गाय ४४
सुनिकै बातें महाराजा ने लायो अमरढोल को जाय ॥
सो दै दीन्ह्यो कर भोगा के भोगाचलिभाशीशनवाय ४५
आयकै पहुंच्यो समर भूमि में भोगा दीन्ह्यो ढोल बजाय ॥
मुर्दा उठिकै जिन्दा हैंगे घैहा उठे तुरत हरषाय ४६
उठे सिपाही नैनागढ़ के मारैं खैंचि खैंचि तलवार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ४७
ढारे मुर्दा हैं लोहुन में मानों कच्छ मच्छ उतरायँ ॥

१८८ आल्हखण्ड । १३४
पगड़ी गिरि गईँ त्यहि लोहू में फूले कमल सरिस दर्शायँ ४८
परीं बंदूकें कहुँ लोहू में काली नागिनिसी मन्नायँ ॥
पांच कोसलों चली सिरोही लोथिन उपरलोथि दिखरायँ ४६
बड़ी लड़ाई मै नैनागढ़ मारा मारा परै सुनाय ॥
कोऊ हारा नहिं काहू सों दोउरण परा बरोबरि आय ५०
जोगा ठाकुर नैनागढ़ का सय्यद बनरस का सरदार ॥
भोगा देवाके मुर्चा माँ दोउ दिशिहोय बरोबरि मार ५१
'मन्नागूजर पूरन राजा दोऊ करें खूब तलवार ॥
बड़े लड़ैया रणमाँ राहिगे कायर छांड़ि भागि हथियार ५२
अमरढोल कहुँ रणमाँ बाजै गिरि उठि लड़ैं लड़ैताज्वान ॥
देखि तमाशा ऊदन बोले दादा सुनो बीर मलखान ५३
मरिमरि जीवैं नैनागढ़ के मैना दीख कबों असभाय ॥
कावा दै कै ऊदन चलिभे नैनागढ़ै पहुंचे आय ५४
संध्या द्वैगै ह्वाँ लश्कर में तब फिरि मारु बंद द्वैजाय ॥
ऊदन पहुंचे ह्वाँ मालिन घर तुरतै मोहर दीन थँभाय ५५
खबरि सुनावो म्वारि भौजीका आयो मिलन उदयसिंहराय ॥
सुनिकै वातैं मालिनि चलिभै सुनवैं खबरि सुनाई जाय ५६
सुनवाँ चलिभै तब महलन ते आई जहाँ लहुरवा भाय ॥
पाग बैंजनी शिरपर बाँधे ऊदन कह्यो बचन मुसुकाय ५७
याही कारण चिठिया पठई जल्दी अवो लहुरवा भाय ॥
जियत मोहोबे कोउ जाई ना डरिहौ बंश नाश करवाय ५८
मरे सिपाही क्यों जीवत हैं भौजी हाल देउ बतलाय ॥
सुनिकै वातें सुनवाँ बोली तुम सुनिलेउ लहुरवा भाय ५६
बरा बर्षलों मेरे वापने कीन्ह्यो कठिन तपस्या जाय ॥

आल्हाका विवाह । १३५ १६
मांगु मांगु तब इन्दर बोले बप्पा बोले माथ नवाय ६०
अमरढोल जो हमको देवो तौ सब काम सिद्ध हैजाएँ ॥
एवमस्तु तब इन्दर बोले बप्पा भवन पहुंचे आय ६१
जबहीं क्षत्री गिरैं खेतमें अम्मरढोल देयं बजवाय ॥
कान भनक क्षत्रिन के परतै जीवैं तुरत बनाफरराय ६२
धोखे माड़ोके रहियो ना जहँ लैलियो बापका दायँ ॥
लड़े न जितिहौ मेरे बापसों तुमको भेद देउँ बतलाय ६३
देवी पूजन कल मैं जैहौं लेहौं अमरढोल मँगवाय ॥
माली बनिकै तहँ तुम आयो लीन्ह्यो अम्मर ढोल चुराय ६४
इतना कहिकै सुनवाँ चलिभै अपने महल पहुंची आय ॥
ऊदन आये फिरि तम्बूको बैठे जहाँ बनाफरराय ६५
हाल बतायो मलखाने ते सोयो सबै शतिको पाय ॥
भोर भुरहरे मुर्गा बोलत माली बने उदयसिंहराय ६६
जायकै पहुंचे तेहि मठियामाँ जहँपर सुनवाँ गई बताय ॥
घोड़ बेंदुला तहँ बांधा है मालिन बीच बनाफरराय ६७
फूल डिलैया माँ सोहैं भल सुन्दर हरवा रहे बनाय ॥
सुनवाँ जागी ह्याँ महलन में बोली मातै बचन सुनाय ६८
राति सुपनवाँ यक मैं देखा माता तुम्हें देउँ बतलाय ॥
संग सहेलिन देवी पूजैं तहँपर अमरढोल अरराय ६९
त्यहिते मनमाँ यह आई है पूजन करों भवानी जाय ॥
तुमसों माता यह बिनवतिहौं देवो अमरढोल मँगवाय ७०
सुनिकै बातें रानी चलिभै पहुंची तुरत सेजपर जाय ॥
हाल बतायो महराजा को लीन्ह्यो अमरढोल मँगवाय ७१
सो दै दीन्ह्यो लै बेटी को बेटी सखियन लीन बुलाय ॥

२० आल्हखण्ड । १३६
चली भवानी फिरि पूजनको सुन्दरि गीतरहीं सब गाय ७२
जायकै पहुंचीं त्यहि मंदिरमाँ ज्यहिमाँ बसै दुर्गा माय ॥
अक्षत चन्दन सों पूजन करि लौंगनहार दीन पहिराय ७३
शीश नवायो जगदम्बाका सुनवाँ फूलनहार चढ़ाय ॥
भोग लगायो फिरि मेवा का सेवा अधिक कीन हरषाय ७४
किह्यो इशारा फिरि ऊदनको तुरतै लीन्ह्यो ढोल उठाय ॥
कूदि बेंदुलापर चढ़ि बैठ्यो लशकर तुरतपहुंच्योआय ७५
कहाँ कहाँ कहि माली दौरे रहिगे जहाँ तहाँ शिरनाय ॥
खबरि सुनाई नयपाली को सुनतै गयो सनाकाखाय ७६
जायकै पहुंच्यो तेहि मंदिर में जेहि में रहैं दुर्गा माय !
तुरत पंडितन को बुलवायो जानैं तंत्रशास्त्र अधिकाय ७७
इन्द्र यज्ञ नृपने तहँ ठानी स्वाहा स्वाहा परै सुनाय ॥
एकसहसमन होम करायो गायो वेदमंत्र तहँ भाय ७८
हाथ जोरिकै विनय सुनायो मानो सत्यवचन सुरराज ॥
बारह बरसै जब तप कीन्हों तबमोहिंढोल दियोमहराज ७६
जाति बनाफर की ओछी है तिनने चोरी लई कराय ॥
सुनिकै बातें ये राजा की भइ नभवाणि समयसुखदाय ८०
तुम्हरे उनके नहिं काहूघर रहि है ढोल सुनो नृपराय ॥
इन्दर बोले फिरि देवन ते मानो बचन हमारे भाय ८१
आल्हा अम्मर हैं दुनिया में ते कस मरैं यहांपर आय ॥
देवी शारदा का वरदानी आल्हा केर लहुरवा भाय ८२
लै कै ढोलक तुम तम्बू ते पटको तुरत डांड़पर जाय ॥
सुनिकै बातें ये इन्दर की देवता तुरत चले शिरनाय ८३
लै कै ढोलक ते पटकत भे अपने धाम पहुंचे आय ॥