आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआल्हाका विवाह । १२३ ७
इतना कहिकै दूनों चलि भे महलन भये मंगलाचार ॥
बांदी आंगन लीपन लागी पंडित साइति रहे बिचार ५८
एक कुमारी तेल चढ़ावै गावनलगीं सखी त्यहिकाल ॥
माय मंतरा भे पाछे सों नेगिननेग दीन परिमाल ५६
लैकै महाउर नाइनि आई नहखुर होनलाग त्यहिबार ॥
नाइनि मांग्यो तहँ पुरवाको दीन्ह्यो मल्हना परम उदार ६०
उबटन करिकै तन केसरसों निर्मलजलसों फिरिअन्हवाय ॥
कंकण बांधागा आल्हा के दूलह बने बनाफरराय ६१
सजी पालकी तहँ ठाढ़ीथी तापर बैठि शम्भु को ध्याय ॥
कुँवा वियाहन आल्हा पहुंचे मल्हना पैर दीन लटकाय ६२
पहिली भाँवरि के फिरतैखन आल्हा गहा चरणको धाय ॥
बाग लगावों तेरे नाम की माता लेवो चरण उठाय ६३
ऐसो कहिकै सातों भाँवरि घूमा तुरत बनाफरराय ॥
मल्हनाबोली फिरि आल्हा सों सेयों तुमको दूध पियाय ६४
तासों द्यावलि सों अधिकी मैं तासों पैर दीन लटकाय ॥
पंजा फेर्यो फिरि पीढ़ी माँ तुम्हरो बार न बाँको जाय ६५
पाँय लागिकै फिरि द्यावलिके पलकी चढ़े बनाफरराय ॥
हुकुम लगायो बघऊदन ने डंका वजनलाग घहराय ६६
घोड़ करिलिया आल्हा वाला कोतल चला पालकी साथ ॥
मलखे पपिहापर बैठत भे नायकै रामचन्द्र को माथ ६७
घोड़ा मनोहरा की पीठी माँ देवा तुरत भयो असवार ॥
सय्यद सिरगा पर बैठत भे नाहर बनरस के सरदार ६८
अली अल्लामत औ दरियाखां बेटा जानबेग सुल्तान ॥
तेग बहादुर अलीबहादुर बैठे घोड़ आपने ज्वान ६६