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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

DevanagariHindipublished292 पृष्ठ

३१० अकबर बीरबल विनोद

३१० अकबर बीरबल विनोद
रहना पहला सुख है।" तब दूसरे प्रश्नकर्त्ता बोले-"यद्यपि
संसार में अनेकों प्रकार के शस्त्र विद्यमान हैं, परन्तु उनमें
प्रधान शस्त्र क्या है?" उत्तरदाता ने कहा-"बुद्धि।" तब
डोडरमल नामी तीसरे प्रश्नकर्त्ता का प्रश्न हुआ-"यदि बालू
के कण और चीनी किसी प्रकार एक में मिश्रित हो
जायें तो पानी डालकर अलग करने के अतिरिक्त दूसरा
उपाय क्या है?" उत्तरदाता ने कहा-"दोनों मिश्रित
वस्तुओं को जमीन पर फैला दें कुछ समय में चींटियाँ चीनी
उठा ले जायेंगी और बालू के कण जहाँ के तहाँ पड़े रह
जायेंगे।" पाँचवाँ प्रश्न नवाब खानखाना का हुआ-"क्या
आप समुद्र का जल पान कर सकेंगे?" उसने उत्तर
दिया-"हाँ, मैं भली भाँति पान कर सकता हूँ।" नवाब
ने पूछा-"क्योंकर ?" तब वह बोला-"पान करना तो आसान
बात है, परन्तु पहले आपको उसमें गिरने वाली नदियों को
रोकना पड़ेगा।" नवाब भी मात हो गया। जगन्नाथ
प्रसाद का छठवाँ सवाल इस प्रकार हुआ-"मनुष्य चिता में
जलाये बिना और कैसे भस्म किया जा सकता है?" उसने
उत्तर दिया--"चिन्ता की ज्वाला में।" फिर सातवाँ प्रश्न
टोडरमल का हुआ--"सबसे हेठा व्यवसाय क्या है?" उम्मेद-
वार ने बतलाया--"भिक्षाटन करना।" इसी प्रकार के और और
सवालों का उत्तर देने की प्रतीक्षा में वह मनुष्य निर्द्वन्द बैठा
रहा, परन्तु प्रश्नों का बौछार एक दम बन्द हो गया, उसके
हाजिर जवाबी से सभा के लोग मात हो गये।
सब को चुप देखकर उम्मेदवार बादशाह की सम्मति