वायु पुराण
Vayu Purana
महर्षि वेदव्यास / अनुवादक: पं० तारिणीश झा द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग (उद्गम)
इस ग्रन्थ के बारे में
वायु पुराण अठारह महापुराणों में से एक और प्राचीनतम पुराणों में गिना जाता है। इसका नाम वायु देवता के नाम पर है, जिन्हें इसका मूल वक्ता माना गया है। इसमें सृष्टि-प्रक्रिया, मन्वन्तर, भूगोल, ऋषि और राजवंशों की वंशावलियाँ, श्राद्ध-कल्प और युग-धर्म का विस्तृत वर्णन है, और अन्त में गया-माहात्म्य आता है, जो गया तीर्थ में पिण्डदान की परम्परा का प्रमुख स्रोत है।
स्कैन किए गए आरम्भिक पृष्ठ इसे पुणे के आनन्दाश्रम संस्कृत ग्रन्थावली का ४९वाँ ग्रन्थ बताते हैं, जिसका पाठ आनन्दाश्रम के पण्डितों ने संशोधित किया और जो १९८३ (शक १९०५) में नई आवृत्ति के रूप में छपा। अध्याय-शीर्षकों में प्रक्रियापाद का सृष्टि-प्रकरण, चतुराश्रम-विभाग, जम्बूद्वीप के नौ वर्षों का वर्णन, विष्णु-माहात्म्य और गया-माहात्म्य जैसे प्रसंग दिखते हैं। सूची में इस ग्रन्थ के साथ पं० तारिणीश झा के हिन्दी अनुवाद (हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग) का नाम जुड़ा है, पर स्कैन के आरम्भिक पृष्ठों में आनन्दाश्रम का संस्कृत पाठ ही दिखाई देता है।
पुराण-साहित्य और प्राचीन भारतीय भूगोल के अध्येताओं के लिए आनन्दाश्रम का यह पाठ लम्बे समय से आधार-ग्रन्थ रहा है।
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