वायु पुराण
Vayu Purana
महर्षि वेदव्यास / अनुवादक: पं० तारिणीश झा द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग (उद्गम)
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आनन्दाश्रमसंस्कृतग्रन्थावलिः ।
ग्रन्थाङ्कः
[ ४९ ]
महामुनिश्रीमद्व्यासप्रणीतं
वायुपुराणम् ।
एतत्पुस्तकमानन्दाश्रमस्थपण्डितैः संशोधितम् ।
तच्च
आनन्दाश्रमविश्वस्तैः
पुण्याख्यपत्तने
आनन्दाश्रममुद्रणालये
आयसाक्षरैर्मुद्रयित्वा
प्रकाशितम् ।
नूतनावृत्तिः ।
शालिवाहनशकाब्दाः १९०५
ख्रिस्ताब्दाः १९८३
( अस्य सर्वेऽधिकारा राजशासनानुसारेण स्वायत्तीकृताः ) ।
मूल्यम्-पञ्चाशद्रूप्यकाः । [ रु. ५० ]
॥ श्रीगोपालचरणौ शरणं मम ॥
ग्रन्थाङ्कः
[ ४४ ]
श्रीशौनकमुनिविरचिता
॥ माण्डूकीशिक्षा ॥
। सुबोधिनीटीका-नेपालभाषानुवादसहिता ॥
सम्पादक
पण्डितश्री...
नेपाल
...
आदर्शपुस्तकोल्लेखपत्रिका ॥
अथैतस्य वायुपुराणस्य पुस्तकानि यैः परहितैकपरतया संस्करणार्थं प्रदत्तानि तेषां नामादीनि पुस्तकानां संज्ञाश्च कृतज्ञतया प्रदर्श्यन्ते--
( क. ) इति संज्ञितम्--कलिकत्तास्थं मुद्रितम् ।
( ख. ) इति संज्ञितम्--बटोदरग्रामनिवासिनां रा. रा. 'बाप्यासा० मैराळ' इत्येतेषाम् ।
( ग. ) इति संज्ञितम्--पुण्यपत्तननिवासिनां रा. रा. 'तात्यासा० खाजगीवाले ।
इत्येतेषाम् ।
( घ. ) इति संज्ञितम्--रा. रा. 'शिवराव माधवराव पोतनीस' इत्येतेषाम् ।
( ङ ) इति संज्ञितम्--संस्थान मिरजमळास्थं रा. रा. 'गङ्गाधर गोविन्द पटवर्धन
इत्येतेषाम् ।
समाप्तेयमादर्शपुस्तकोल्लेखपत्रिका ।
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[ ८ ]
वायुपुराणम्।
अनुक्रमणिका।
| अध्यायक्रमः | शीर्षकम्। | श्लोकाः | अध्यायक्रमः | शीर्षकम्। | श्लोकाः |
|---|---|---|---|---|---|
| १ | अनुक्रमणिका | २०५ | ३० | दक्षशापः | १२१ |
| २ | द्वादशवार्षिकं सत्रम् | ४५ | ३१ | देववंशः | ६१ |
| ३ | प्रजापतिसृष्टिकथनम् | २४ | ३२ | युगधर्मः | ६६ |
| ४ | सृष्टिप्रकरणम् | ९२ | ३३ | स्वायंभुववंशः | ६५ |
| ५ | सृष्टिप्रकरणम् | ५४ | ३४ | जम्बुद्वीपवर्णनम् | ९६ |
| ६ | सृष्टिप्रकरणम् | ७९ | ३५ | जम्बुद्वीपम् | ४६ |
| ७ | प्रतिसंधिकीर्तनम् | ८० | ३६ | भुवनविन्यासः | ३३ |
| ८ | चतुराश्रमविभागः | २०९ | ३७ | भुवनविन्यासः | ३० |
| ९ | देवादिसृष्टिः | २२२ | ३८ | भुवनविन्यासः | ७८ |
| १० | मन्वंतरवर्णनम् | ९४ | ३९ | भुवनविन्यासः | ६४ |
| ११ | पाशुपतयोगः | ६३ | ४० | भुवनविन्यासः | २६ |
| १२ | योगोपसर्गः | ४२ | ४१ | भुवनविन्यासः | ९० |
| १३ | योगैश्वर्यनिरूपणम्ः | २४ | ४२ | भुवनविन्यासः | ८१ |
| १४ | पाशुपतयोगनिरूपणम् | ४२ | ४३ | भुवनविन्यासः | ३८ |
| १५ | पाशुपतयोगनिरूपणम् | १७ | ४४ | भुवनविन्यासः | २५ |
| १६ | शौचाचारलक्षणम् | २४ | ४५ | भुवनविन्यासः | १३७ |
| १७ | परमाश्रमविधिः | ८ | ४६ | भुवनविन्यासः | ३७ |
| १८ | यतिप्रायश्चित्तविधिः | २३ | ४७ | भुवनविन्यासः | ८० |
| १९ | अरिष्टनिरूपणम् | ४३ | ४८ | भुवनविन्यासः | ४१ |
| २० | ॐकारप्राप्तिलक्षणम् | ३९ | ४९ | भुवनविन्यासः | १८६ |
| २१ | कल्पनिरूपणम् | ८१ | ५० | ज्योतिषप्रचारः | २२१ |
| २२ | कल्पसंख्यानिरूपणम् | ३० | ५१ | ज्योतिषप्रचारः | ७९ |
| २३ | माहेश्वरावतारयोगः | ४२ | ५२ | ज्योतिषप्रचारः | ९९ |
| २४ | शार्वस्तवः | १६ | ५३ | ज्योतिःसंनिवेशः | १२३ |
| २५ | मधुकैटभोत्पत्तिविनाशः | ९२ | ५४ | नीलकंठस्तवः | ११७ |
| २६ | स्वरोत्पत्तिः | ४२ | ५५ | लिङ्गोद्भवस्तवः | ६८ |
| २७ | महादेवतनुवर्णनम् | ६० | ५६ | पितृवर्णनम् | ९३ |
| २८ | ऋषिवंशानुकीर्तनम् | ३९ | ५७ | यज्ञवर्णनम् | १२५ |
| २९ | अग्निवंशः | ४८ | ५८ | चतुर्युगाख्यानम् | १२५ |
[ २ ]
| अध्यायक्रमः | शीर्षकम् । | श्लोकाः | अध्यायक्रमः | शीर्षकम् । | श्लोकाः |
|---|---|---|---|---|---|
| ५९ | ऋषिलक्षणम् | १४२ | ८६ | तत्र वैवस्वतमनुवंशगांधर्वमूर्छनाकथनम् | ६९ |
| ६० | महास्थानतीर्थवर्णनम् | ७५ | ८७ | गीतालंकारनिर्देशः | ४६ |
| ६१ | प्रजापतिवंशः | १८६ | ८८ | वैवस्वतमनुवंशवर्णनम् | २१५ |
| ६२ | पृथिवीदोहनम् | १९२ | ८९ | वैवस्वतमनुवंशकीर्तनम् | २३ |
| ६३ | पृथुवंशः | ५६ | ९० | सोमजन्मविवरणम् | ४९ |
| ६४ | वैवस्वतसर्गः | ३० | ९१ | चंद्रवंशकीर्तनम् | ११ |
| ६५ | प्रजापतिवंशः | १५८ | ९२ | चंद्रवंशकीर्तनम् | ९० |
| ६६ | कश्यपीयप्रजासर्गः | १५२ | ९३ | चंद्रवंशवर्णनम् | १०० |
| ६७ | कश्यपीयप्रजासर्गः | १३५ | ९४ | कार्तवीर्यार्जुनोत्पत्तिवर्णनविवरणम् | ५६ |
| ६८ | कश्यपीयप्रजासर्गः | ३९ | ९५ | ज्यामघवृत्तांतकथनम् | ४५ |
| ६९ | कश्यपीयप्रजासर्गः | ३५५ | ९६ | विष्णुवंशवर्णनम् | २५ |
| ७० | ऋषिवंशानुकीर्तनम् | ९१ | ९७ | विष्णुमाहात्म्यकीर्तनम् | २० |
| ७१ | श्राद्धप्रक्रियारंभः | ७६ | ९८ | विष्णुमाहात्म्यकीर्तनम् | १२६ |
| ७२ | श्राद्धकल्पः | ५० | ९९ | तुर्वस्वादिंवंशवर्णनम् | ४६४ |
| ७३ | श्राद्धकल्पः | ७३ | १०० | मन्वंतरनिसर्गवर्णनम् | २४६ |
| ७४ | श्राद्धकल्पः | ३२ | १०१ | भूर्लोकादिव्यवस्थावर्णनम् | ३५५ |
| ७५ | श्राद्धकल्पः | ७७ | १०२ | प्रतिसर्गवर्णनम् | १३४ |
| ७६ | श्राद्धकल्पः | ४३ | १०३ | अथ सृष्टिवर्णनम् | ७३ |
| ७७ | श्राद्धकल्पः | १३३ | १०४ | व्याससंशयापनोदनम् | ११० |
| ७८ | श्राद्धकल्पः | ७८ | १०५ | गयामाहात्म्यम् | ४९ |
| ७९ | श्राद्धकल्पः | ९५ | १०६ | गयामाहात्म्यम् | ८६ |
| ८० | श्राद्धकल्पे दानफलम् | ६२ | १०७ | गयामाहात्म्यम् | ५८ |
| ८१ | श्राद्धकल्पे तिथिविशेषे श्राद्धफलम् | २४ | १०८ | गयामाहात्म्यम् | ९१ |
| ८२ | श्राद्धकल्पे भिन्नकालिकतृप्तिसाधनद्रव्यविशेषः, गयाश्राद्धादिफलम्, ब्राह्मणपरीक्षादिकथनम् | १२९ | १०९ | गयामाहात्म्यम् | ५५ |
| ८४ | श्राद्धकल्पे वरुणवंशवर्णनम् | ८६ | ११० | गयामाहात्म्यम् | ६६ |
| ८५ | श्राद्धकल्पे वैवस्वतमनुवंशवर्णनम् | २८ | १११ | गयामाहात्म्यम् | ८४ |
| ११२ | गयामाहात्म्यम् | ६८ |