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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

DevanagariHindipublished292 पृष्ठ

२०१ अकबर बीरबल विनोद

२०१ अकबर बीरबल विनोद

की कन्या हूँ और मेरे माता पिता मुझे लक्ष्मी के नाम से
पुकारते हैं। यह पतित यवन बहुत दिनों से मेरे पीछे पड़ा है
परन्तु मैं इसके हाथ नहीं आती थी। आज अचानक इस जगह
इससे मेरी भेंट होगई, ईश्वर के नाम पर मुझे इसके
हाथसे बचाइये, आपको सवाब होगा। यह पतित मेरी आबरू
बिगाड़ने की फिराक में लगा है, प्रभु की कृपा से आप मेरे
पिता तुल्य धर्म रक्षक मिलगये। इसका शीघ्र सत्यानाश
होगा।” बीरबल ने उस कन्या को ढाढ़स दिलाया, फिर
सरदार खाँ को बुलाकर बोला-“वाह मियाँ सरदार खाँ!
आप सरकारी कर्मचारी हैं और आपका कर्तव्य प्रजाकी रक्षा
करना है, इतना होते हुए भी आप एक ब्राह्मण की लड़की के
साथ बलात्कार करना चाहते हैं, आपको शाही हुक्म पर जरा
गौर करना चाहिये था बादशाह की आज्ञा है कि उसके साम्राज्य
में कोई भी किसी पर अत्याचार न करे। यदि इस अपराध में
कोई पकड़ा जायगा तो उसे कठिन से कठिन दण्ड दिया
जायगा।
सरदार खाँ अपनी शेखी में भूला हुआ था अतएव धृष्टता
कर बोला-“यह सोख औरत आपसे झूठ बोल रही है।”
बीरबल ने कहा-“वह नहीं, बल्कि तुम झूठ बोलते हो। यह
कृपाशंकर व्यास की कन्या है; अब मेरे रहते तुम इसको छूने
की शक्ति नहीं रखते हो, इसी में भला है कि चुपचाप अपने घर
चले जावो; नहीं तो नाहक कष्ट भोगोगे! सरदार खाँ गीदड़
धमकी देखकर काम निकालना चाहता था इसलिये बीरबलको
झिड़क कर बोला-“दुष्ट! तूँ मुझे अलग हटाकर इसे बहका

अकबर बीरबल बिनोद २०२
दिया है, परन्तु मेरे सामने तेरी दाल न गलेगी और झट म्यान
से तलवार खींचकर बीरबल पर झपटा। बीरबल अपनी
नकली पोशाक उतारकर खासा बीरबल बन गया।'' सरदार
खाँ बीरबल को पहचान कर सन्न हो गया और उसकी
जबान एकदम बन्द हो गई। डरके कारण थरथर काँपने लगा।
बीरबल बोला-''ऐ प्रजा पर अत्याचार करने वाले सर-
दार खाँ ! अब तुम मेरे कैदी हो गये हो। तुमको मेरे साथ
चलना पड़ेगा। तुम प्रजा के रक्षा के निमित्त रक्खे गये थे
धिक्कार है तुम्हारी इस करतूत पर।''
सरदार खाँ चुपचाप बीरबल के साथ हो लिया फिर बीरबल
उस कन्या से बोला-"तू भी मेरे साथ चल। कल मैं तेरे पिता
को बुलवाकर सारी बातें समझा कर तुझे उसके साथ भेज
दूँँगा। कन्या ने सहर्ष बीरबल के साथ जाना स्वीकार किया
घर पहुँच कर बीरबल ने उसे अपनी स्त्री के हवाले किया।
और सरदार खाँ को एक कोठरी में कैदी के रूप में बन्द रक्खा।
सबेरा होते ही उसे सिपाहियों के पहरे में बादशाह के
सामने उपस्थित किया।
बादशाह तथा अन्य सभासद सरदार खाँ के सम्बन्ध में
कुछ नहीं जानते थे। एकाएक उसको कैदी के रूप में देखकर
चकित हो गये। बीरबल से उसका भेद पूछा और बीरबल
अपने भ्रमण से लेकर सरदार खाँ के पकड़े जाने तक की
सारी बातें बादशाह से कह सुनाया। बादशाह जो बात
सुनने का स्वप्न में भी कयास नहीं करता था वह सुनकर
और सामने सरदार खाँ कैदी को देखकर आग बबूला हो

२०३ अकबर बीरबल बिनोद
होकर बोले-“ऐ नीच सरदार खाँ ! तुमको मैंने इतना
ऊंचा पद प्रदान किया था जिसका तूने मुझे इस प्रकार से
बदला चुकायो, जा मुँहमें कालिख लगाकर मेरी आँखों से
ओझल हो जा। फिर बीरबल ने तुरत उसे कारागृह में
भेज दिया। इसका प्रभाव दूसरे सरदारों पर भी बड़ा गहरा
पड़ा। वे डरवश थरथर काँपने लगे।”
दूसरे दिन सरदारखाँ बादशाह की आज्ञा से भरी सभा
में उपस्थित किया गया और सबके सामने उसको कड़ी सजा
भुगतने का हुक्म सुनाया गया। मुसलमान दरबारी और सर-
दार लोग बीरबल से बहुत चिढ़गये और सभों ने आपस में
मिलकर बीरबल को दर्बार से निकाल बाहर करने की गुप्त चेष्टा
करने लगे। उन्होंने गुप्तरूप से बीरबल की बड़ी शिकायत की
परन्तु बादशाह उनकी एक बात भी सच्ची नहीं मानते थे
उनका बीरबल पर सच्चा अनुराग था और वे उसकी अनेकों
परीक्षाएँ भी ले चुके थे। जिस कारण उन्हें बीरबल पर
कभी अविश्वास नहीं होता था। उन लोगों का जब कोई
चारा न चला तो एक काने नाई को मिलाया और उसे
धन का प्रलोभन देकर इस काम के लिये अग्रसर किया। एक
दिन वह नाई हजामत बनाते समय बादशाह को पिघला कर
बोला-“पृथ्वीनाथ ! आप रोज बड़े से बड़े कर्म किया करते हैं
परन्तु एक बात पर आपने कभी विचार नहीं किया। आप के
बाप दादों को स्वर्ग गये एक जमाना गुजर गया; परन्तु
आपने उनकी सुधि तक न ली, भला वे अपने मन में आपको
क्या कहते होंगे, कहीं वे आपसे नाराज हो जायें तो फिर कौन