अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
अकबर बीरबल विनोद १७१
अकबर बीरबल विनोद १७१
कि उसको ऐसा कठोर दण्ड दें ताकि वह फिर ऐसी गुस्ताखी
न करे।” यह सुनकर बादशाह को बड़ा विस्मय हुआ और
उसी क्षण बीरबल को दण्ड देने का प्रण किया। कुछ समय
बाद चपरासी द्वारा बीरबल को बुलवाया। जब वह आया
तो बादशाह ने कहा-“बीरबल ! तुम बड़े घमंडी होगये हो?”
बीरबल बोला-“पृथ्वीनाथ ! मैं तो अपने को ऐसा अनुमान
नहीं करता, परन्तु यदि मुझसे कोई अपराध हुआ हो तो
आपको अधिकार है कि मुझे दंड दें।” बादशाह तो बेगम से
सब सुनही चुका था। वह बोला-“तुमने बेगम से मेरे
निस्बत क्या कहा था, मुझसे झख मरवाते थे, क्या यह
सही नहीं है?”
बीरबल बाअदब हाथ जोड़कर बोला-“पृथ्वीनाथ ! मेरी
गुस्ताखी माफ की जावे तो कहूँ। मेरी जबान में यानी
संकृत में मछली को झख कहते हैं और आप उस समय
मछली ही मार रहे थे। अतएव मैंने बेगम के पूछने पर आपको
झख मारना बतलाया था।” बीरबल के इस उत्तर से
बादशाह और बेगम दोनों ही प्रसन्न हो गये और बीरबल को
पुरस्कार देकर बिदा किया।
काली ही न्यामत है
एक दिन सन्ध्या समय बादशाह और बीरबल हवा
सेवन के लिये कहीं जा रहे थे। नगर के बाहर जाकर बाद-
शाह ने देखा कि एक कुत्ता एक फूली और कई दिन की
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सड़ी होने के कारण काली पड़ी हुई रोटी को बड़ी चाव से
खा रहा है। उसे देख बादशाह को मजाक करने की सूझी
और बीरबल को सम्बोधन कर बोला-“देखो बीरबल ! कुत्ता
काली को खा रहा है।” बीरबल अपने हाजिर जवाबी के
लिये तो विख्यात ही था, वह झट बोला-“पृथ्वीनाथ ! उसे
वही न्यामत है।” इसपर बादशाह कुछ चिड़चिड़ा सा गया
क्योंकि नियामत उसकी माता का नाम था और काली
बीरबल की माता का नाम था। उसने कहा-“बीरबल तुम
मेरी माता को कुत्तेको खिला रहा है।” बीरबल ने उत्तर दिया-
“क्या आप ने मेरी माता से पहले कुत्तेको नहीं खिलाया था?”
बादशाह ने उत्तर दिया-“मैं तुम्हारी माता को नहीं
उस काली रोटी के लिये कह रहा था।” बीरबल बोला-“मैं
भी तो यही कहा था कि रोटी चाहे कैसी भी सड़ी गली
क्यों न हो; परन्तु उसके लिये तो वही नियामत है।” बाद-
शाह संतुष्ट हो गया और उस समय से फिर बीरबल से कोई
दूसरा मजाक नहीं किया।
और क्या ? कढ़ी
एक दिन बीरबल को बिरादरी भोज में जाना था, अतएव
वह बादशाह से अवकाश लेकर भोज में शामिल हुआ। जब
भोजन करके लौटकर आया तो बादशाह ने उससे पूछा-
“क्यों बीरबल ! आज भोज में कौन २ सा पदार्थ खाये हो।”
बीरबल ने पहले तो उस जगह की सुन्दरता का वर्णन किया