शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary
शार्ङ्गधराचार्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पूर्वखण्ड
विषय-सूची
आमुख (v)
पूर्वखण्ड
प्रथमोऽध्यायः | भार तथा तुला के मान 6
मङ्गलाचरणम् 1 | क्रमशः चतुर्गुण के मान 6
टीकाकर्तुः मङ्गलाचरणम् 1 | द्रव आदि द्रव्यों का मान 7
ग्रन्थ का महत्त्व 1 | द्विगुण मान-व्यवहार 7
निदान के बाद चिकित्सा-निर्देश 2 | कुडवमान-मापक पात्र 7
दिव्यौषधियों के प्रभाव 2 | योग-नामकरण-विधि 7
चिकित्सा-विधि-निर्देश 3 | मात्रा-विचार 7
ग्रन्थ की प्रामाणिकता 3 | कालिंग-मान 8
पूर्वखण्ड के अध्याय 3 | द्विविध-मान 8
मध्यमखण्ड के अध्याय 3 | प्राचीनकाल में मान-भेद 9
उत्तरखण्ड के अध्याय 4 | कतिपय प्राचीन पौतवमान 9
अध्यायों तथा श्लोकों की गणना 4 | आयुर्वेदीय द्रुवयमान 11
मान-परिभाषा 4 | आयुर्वेदीय पाय्यमान 11
मागधमान-परिभाषा 4 | नवीन तथा प्राचीन द्रव्य 12
परमाणु-परिचय 5 | गीले द्रव्यों का प्रयोग 12
वंशी का मान 5 | सूखे तथा गीले द्रव्यों का विचार 12
मरीचि आदि के मान 5 | अनुक्त परिभाषा 12
यव आदि के मान 5 | प्राणिज द्रव्यग्रहण-विधि 13
शाण आदि के मान 5 | पुनरुक्त द्रव्य का मान 13
कर्ष का मान तथा पर्याय 5 | लाल एवं सफेद चन्दन का विचार 13
आधा पल तथा पल का मान 6 | चूर्णादि में गुणहीनता का विचार 14
प्रसृति आदि के मान 6 | गुणहीनता का निर्णय 14
प्रस्थ तथा आढक के मान 6 | भेषज-भण्डार 14
द्रोण तथा शूर्प मान 6 | भेषज-भण्डार-स्वरूप 15
द्रोणी तथा खारी के मान 6 | उचित-अनुचित द्रव्य 15
स्थानभेद से औषधद्रव्यों का विचार 15
(xii)
स्थानभेद से औषधद्रव्यों का विचार 15
त्रिविध देश-लक्षण 16
द्रव्यग्रहण-निर्देश 16
निन्दित भेषज द्रव्य 16
ऋतुभेद से औषधद्रव्य-संग्रह 16
द्रव्यों के अवयवों का ग्रहण 17
द्वितीयोऽध्यायः
औषध-सेवन-काल 18
औषध-सेवन के पाँच काल 18
औषध-सेवन का प्रथम-काल 18
औषध-सेवन का द्वितीय काल 18
औषध-सेवन का तृतीय काल 19
औषध सेवन का चतुर्थ काल 19
औषध-सेवन का पञ्चम काल 19
द्रव्य की पाँच अवस्थाएँ 19
द्रव्य का लक्षण 20
रसों के छः भेद 20
मधुररस के लक्षण 20
अम्लरस के लक्षण 20
लवणरस के लक्षण 20
कटुरस के लक्षण 20
तिक्तरस के लक्षण 21
कषायरस के लक्षण 21
रसों का उत्पत्ति-क्रम 21
पञ्चमहाभूतों के गुण 21
गुरु गुण के लक्षण 22
स्निग्ध गुण के लक्षण 22
तीक्ष्ण गुण के लक्षण 22
रूक्ष गुण के लक्षण 22
लघु गुण के लक्षण 22
वीर्य का वर्णन 22
उष्ण-शीतवीर्य के लक्षण 22
विपाक-परिचय 23
प्रभाव का वर्णन 23
प्रभाव का लक्षण 23
रस आदि के कर्म 24
ऋतु-भेद से दोषों का चय, कोप, शम 24
राशियों के क्रम से छः ऋतुएँ 24
संशोधनार्थ ऋतुक्रम 24
व्यवहारार्थ ऋतुक्रम 24
दोषों का चय, कोप, शम काल 24
वातादि दोषों की चय, प्रकोप, प्रशम तालिका 25
यमदंष्ट्रा काल-परिचय 25
चय आदि पर आहार-विहार का प्रभाव 25
वातदोष का प्रकोप तथा प्रशम 25
पित्तदोष का प्रकोप तथा प्रशम 26
कफदोष का प्रकोप तथा प्रशम 26
तृतीयोऽध्यायः
नाड़ी-परीक्षा का स्थान 27
वातदोष में नाड़ी की गतियाँ 27
पित्तदोष में नाड़ी की गतियाँ 27
कफदोष में नाड़ी की गतियाँ 28
सन्निपात में नाड़ी की गतियाँ 28
द्विदोषज तथा असाध्य नाड़ी की गतियाँ 28
प्राणनाशिनी नाड़ी 28
ज्वर आदि में नाड़ी की गति 28
मन्दाग्नि आदि में नाड़ी की गति 28
स्वस्थ आदि पुरुषों में नाड़ी की गति 28
नेत्र-परीक्षा 29
जिह्वा-परीक्षा 29
मूत्र-परीक्षा 29
दूत-परीक्षा 30
दूत के शकुन 30
वैद्य के शकुन 30
चिकित्सा-योग्य रोगी के लक्षण 30
वैद्य का लक्षण 30
परिचारक का लक्षण 30
भेषज का लक्षण 31
चिकित्सा के चार पाद 31
विविध प्रकार के दुःस्वप्न 31
दुःस्वप्नों के प्रायश्चित्त 31
शुभ स्वप्न 31
(xiii)
चतुर्थोऽध्यायः तीक्ष्ण एवं मन्द द्रव्य का लक्षण ३७
दीपन-पाचन द्रव्यों के लक्षण ३३ मृदु एवं कर्कश द्रव्य का लक्षण ३७
शमन द्रव्य का लक्षण ३३ पञ्चमोऽध्यायः
अनुलोमन द्रव्य का लक्षण ३३ शरीर-परिचय ३८
संस्रन द्रव्य का लक्षण ३३ कला का वर्णन ३८
भेदन द्रव्य का लक्षण ३३ कला-परिचय ३८
रेचन द्रव्य का लक्षण ३४ आशय-परिचय ३९
वमन द्रव्य का लक्षण ३४ धातुओं का उत्पत्ति-क्रम ३९
शोधन द्रव्य का लक्षण ३४ धातुओं के नाम ३९
छेदन द्रव्य का लक्षण ३४ धातुओं के मुख्य कार्य ३९
लेखन द्रव्य का लक्षण ३४ रस-स्वरूप ४०
ग्राही द्रव्य का लक्षण ३४ रक्त का स्वरूप ४०
स्तम्भन द्रव्य का लक्षण ३४ मांस का स्वरूप ४०
रसायन द्रव्य का लक्षण ३४ मेदस् का स्वरूप ४०
वाजीकरण द्रव्य का लक्षण ३५ अस्थि का स्वरूप ४०
शुक्रल द्रव्य का लक्षण ३५ मज्जा का स्वरूप ४०
शुक्र के प्रवर्तक तथा जनक द्रव्यों के लक्षण ३५ शुक्र का स्वरूप ४०
प्रवर्तक आदि द्रव्यों के लक्षण ३५ सप्त धातुओं के मल ४०
सूक्ष्म द्रव्य का लक्षण ३५ धातुमलों का परिगणन ४०
व्यवायी द्रव्य का लक्षण ३५ उप-धातु ४०
विकासी द्रव्य का लक्षण ३५ स्तन्य का स्वरूप ४१
मदकारी द्रव्य का लक्षण ३६ रजस् का स्वरूप ४१
विष का लक्षण ३६ वसा का स्वरूप ४१
प्रमाथी द्रव्य का लक्षण ३६ स्वेद का स्वरूप ४१
अभिष्यन्दी द्रव्य का लक्षण ३६ दाँत का स्वरूप ४१
विदाही द्रव्य का लक्षण ३६ केश का स्वरूप ४१
लंघन द्रव्य का लक्षण ३६ ओजस् का स्वरूप ४१
बृंहण द्रव्य का लक्षण ३६ त्वचाओं का स्वरूप तथा नाम ४१
रूक्षण द्रव्य का लक्षण ३६ दोषों का वर्णन ४२
स्नेहन द्रव्य का लक्षण ३६ दोष आदि संज्ञाओं का हेतु ४२
स्वेदन द्रव्य का लक्षण ३६ दोषों में वायु की प्रधानता ४२
श्लक्ष्ण द्रव्य का लक्षण ३६ वात के गुण, स्थान तथा नाम ४२
स्थिर, सर, पिच्छिल द्रव्य का लक्षण ३७ पित्त के गुण, स्थान तथा नाम ४३
विशद द्रव्य का लक्षण ३७ कफ के गुण, स्थान तथा नाम ४३
स्थूल द्रव्य का लक्षण ३७ सन्धि-परिचय ४३
द्रव एवं सान्द्र द्रव्य का लक्षण ३७ अस्थि-परिचय ४४
(xiv)
मर्म-परिचय 44 पञ्चतन्मात्राएँ 50
सिरा-परिचय 44 तन्मात्राओं के स्थूल रूप 50
धमनी-परिचय 44 इन्द्रियों के विषय 50
पेशी-परिचय 45 प्रकृति-परिचय 50
कण्डरा-परिचय 45 प्रकृति-विकृति 51
रन्ध्र-परिचय 45 सोलह-विकार 51
मल तथा स्रोतस्-परिचय 45 जीवात्मा का निवास-स्थान 51
जाल-परिचय 45 जीवात्मा का स्वरूप 51
कूर्च्च-परिचय 45 जीवात्मा के प्रतिबन्धक 51
रज्जु-परिचय 45 मोह का लक्षण 51
सेवनी-परिचय 45 अहङ्कार का लक्षण 51
सङ्घात-परिचय 45 काम का लक्षण 51
सीमन्त-परिचय 46 क्रोध का लक्षण 52
जिह्वा-परिचय 46 लोभ का लक्षण 52
हृदय-परिचय 46 रोग-आरोग्य के लक्षण 52
फुफ्फुसादि का स्थान 46 षष्ठोऽध्यायः
फुफ्फुस-परिचय 46 आहार-परिचय 53
प्लीहा-परिचय 46 आहार के भेद 53
यकृत्-परिचय 46 पाचन-प्रकार 53
क्लोम-परिचय 46 ग्रहणी-परिचय 53
वृक्क-परिचय 47 जठराग्नि के कार्य 54
वृषण-परिचय 47 रस-परिपाक 54
लिंग-परिचय 47 अपक्वरस से हानि 54
गर्भाशय-परिचय 47 रस, मल, मूत्र तथा वली-परिचय 54
शरीर-पोषण के प्रकार 47 रक्तनिर्माण-प्रक्रिया 54
प्राणवायु द्वारा शरीर-पोषण 47 रक्त का महत्त्व 54
जीवन-मरण-परिभाषा 48 रसादि धातुओं का परिणाम-क्रम 55
रोग-निवृत्ति का महत्त्व 48 गर्भावतरण-क्रम 55
चिकित्सा का महत्त्व 48 पुत्र-कन्या की उत्पत्ति में कारण 55
रोगनिवारण-निर्देश 48 जातकर्म-संस्कार 55
समदोष का महत्त्व 48 मन्त्र 56
स्वस्थ की परिभाषा 49 नाल-छेदन 56
सृष्टि क्रम 49 अभिमन्त्रण-मन्त्र 56
सृष्टि में प्रकृति का योगदान 49 स्त्री की देख-रेख 57
बुद्धि आदि तत्त्वों की उत्पत्ति 49 प्रसूतासंज्ञा 57
दस इन्द्रियाँ 50 प्रसूता का आहार-विहार 57
(xv)
बालक की स्तन्यपान विधि ५७ ग्लानि का कारण और लक्षण ६१
अभिमन्त्रण मन्त्र ५७ गौरव का कारण और लक्षण ६१
स्तन्य-प्रवृत्ति ५७ सप्तमोऽध्यायः
नवजात के लिए पेय ५७ रोगभेद-परिचय ६२
दूध की कमी का कारण ५७ ज्वर-संख्या ६२
माता के दूध का विकल्प ५७ अतिसार-ग्रहणी-प्रवाहिका-गणना ६३
शुद्ध दुग्ध के लक्षण ५८ अजीर्ण-अलसक-विसूची-दण्डालसक-
बालक की परिचर्या-विधि ५८ विलम्बिका-गणना ६३
बालक का अन्नप्राशन ५८ अर्श-गणना ६३
तीन प्रकार की अवस्था ५८ कृमि-गणना ६३
अवस्था-क्रम से दोष-विचार ५८ पाण्डुकामला-कुम्भकामला-हलीमक-गणना ६४
औषधमात्रा-विचार ५८ रक्तपित्त-गणना ६४
बालकोचित-उपचार ५९ कास-गणना ६४
प्रमुख उपचारों में काल की अवधि ५९ क्षय-गणना ६४
अञ्जन-प्रयोग ५९ शोष की कारण-भेद से गणना ६५
उबटन ५९ श्वास-गणना ६५
स्नान ५९ हिक्का-गणना ६५
अभ्यङ्ग ५९ जठराग्निविकार-गणना ६५
व्यायाम ५९ अरोचक-गणना ६५
मैथुन ५९ छर्दि-गणना ६५
ह्रास-क्रम ५९ स्वरभेद-गणना ६५
प्रकृति का कारण ६० तृष्णा-गणना ६५
वात-प्रकृति का लक्षण ६० मूर्च्छादि-गणना ६६
पित्त-प्रकृति का लक्षण ६० मद-मदात्ययादि-गणना ६६
कफ-प्रकृति का लक्षण ६० दाह-गणना ६६
मिश्रित प्रकृति का लक्षण ६० उन्माद-गणना ६६
निद्रा, मूर्च्छा, भ्रम एवं तन्द्रा का कारण ६० भूतोन्माद-गणना ६६
ग्लानि और आलस्य का लक्षण ६० अपस्मार-गणना ६७
जृम्भा का लक्षण ६० आमवात-गणना ६७
छींक का कारण और लक्षण ६० शूल-गणना ६७
उद्गार का कारण तथा लक्षण ६० परिणामशूल-गणना ६७
निद्रा का कारण और लक्षण ६० उदावर्त-गणना ६७
भ्रम का कारण और लक्षण ६१ आनाह-गणना ६७
तन्द्रा का कारण और लक्षण ६१ उरोग्रह-गणना ६८
क्लम का कारण और लक्षण ६१ हृद्रोग-गणना ६८
उत्क्लेश का कारण और लक्षण ६१ उदररोग-गणना ६८
(xvi)
गुल्मरोग-गणना 68 मुखरोग-गणना 75
मूत्राघात-गणना 68 ओष्ठरोग-गणना 75
मूत्रकृच्छ्र-गणना 68 दन्तरोग-गणना 75
अश्मरी-गणना 69 दन्तमूलगत रोग-गणना 76
प्रमेह-गणना 69 जिह्वागत रोग-गणना 76
सोमरोग-गणना 69 तालुगत रोग-गणना 76
प्रमेहपिड़का-गणना 69 कण्ठगत रोग-गणना 76
मेदोरोग-गणना 69 मुखगत रोग-गणना 76
शोथ-गणना 69 कर्णगत रोग-गणना 76
वृद्धिरोग-गणना 69 कर्णपालीगत रोग-गणना 77
अण्डवृद्धि-गणना 70 कर्णमूलगत रोग-गणना 77
गण्डमाला-गणना 70 नासारोग-गणना 77
गण्डालजी-गणना 70 शिरोरोग-गणना 77
ग्रन्थि-गणना 70 शिरःकपालगत रोग-गणना 77
अर्बुद-गणना 70 नेत्ररोग-गणना 78
श्लीपद-गणना 70 नेत्रवर्त्म रोग-गणना 78
विद्रधि-गणना 70 नेत्रसन्धिगत रोग-गणना 78
व्रण-गणना 70 नेत्रशुक्ल-भागगत रोग-गणना 78
सद्योव्रण-गणना 70 नेत्रकृष्ण-भागगत रोग-गणना 78
कोष्ठभेद-गणना 71 काचरोग-गणना 78
अस्थिभंग-गणना 71 तिमिररोग-गणना 79
अग्निदग्ध-गणना 71 लिङ्गनाश रोग-गणना 79
नाड़ीव्रण-गणना 71 दृष्टिगत रोग-गणना 79
भगन्दर-गणना 71 अधिमन्थरोग-गणना 79
उपदंश-गणना 71 अभिष्यन्दरोग-गणना 79
शूकरोग-गणना 72 सर्वनैत्ररोग-गणना 79
कुष्ठरोग-गणना 72 पुंस्त्वरोग-गणना 79
क्षुद्ररोग-गणना 72 शुक्रधातु रोग-गणना 80
विसर्परोग-गणना 73 स्त्रीरोग-गणना 80
उदर्द एवं शीतपित्त-गणना 73 रक्तप्रदर-गणना 80
अम्लपित्त-गणना 73 योनिरोग-गणना 80
वातरक्तरोग-गणना 73 योनिकन्द-गणना 81
वातज रोग-गणना 73 गर्भरोग-गणना 81
पित्तज रोग-गणना 74 स्तनगत रोग-गणना 81
कफज रोग-गणना 75 स्तनविकार-गणना 81
रक्तज रोग-गणना 75 स्त्रीदोष-गणना 81
(xvii)
| प्रसूताविकार-गणना | 81 | शीत आदि उपद्रव | 83 |
| बालरोग-गणना | 81 | विष-विवेचन | 83 |
| बालग्रह-गणना | 82 | जङ्गमविष-भेद | 83 |
| पादरोग-गणना | 82 | कृत्रिम-विष | 83 |
| दोष-भेद | 82 | अन्य उपद्रव | 83 |
| पञ्चकर्म-व्यापद् | 82 | मद-विचार | 83 |
| स्नेहादि व्यापद् | 82 | अध्यायोपसंहार | 84 |
मध्यमखण्ड
| प्रथमोऽध्यायः | | चावल का धोवन बनाने की विधि | 88 |
| पञ्च-कषाय | 85 | अरलूत्वक् पुटपाक | 88 |
| स्वरस-निर्माण-विधि | 85 | तित्तिर पुटपाक | 88 |
| स्वरस की दूसरी विधि | 85 | दाड़िम पुटपाक | 88 |
| स्वरस की तीसरी विधि | 85 | बीजपूरादि पुटपाक | 88 |
| स्वरस-पान की मात्रा | 85 | वासा पुटपाक | 88 |
| प्रक्षेप द्रव्यों का मान | 86 | कण्टकारी पुटपाक | 88 |
| अमृता-स्वरस | 86 | बिभीतक पुटपाक | 88 |
| वासक-स्वरस | 86 | शुण्ठी पुटपाक | 89 |
| त्रिफलादि का स्वरस | 86 | दूसरा शुण्ठी पुटपाक | 89 |
| तुलसी आदि का स्वरस | 86 | सूरण पुटपाक | 89 |
| जम्ब्वादि पत्र-स्वरस | 86 | मृगशृंग पुटपाक | 89 |
| बब्बूलादि स्वरस | 86 | द्वितीयोऽध्यायः | |
| आर्द्रक-स्वरस | 86 | क्वाथ बनाने की विधि | 90 |
| बीजपूर-स्वरस | 86 | क्वाथ-पान की विधि | 90 |
| शतावरी आदि का स्वरस | 86 | क्वाथ में मधु आदि का परिमाण | 90 |
| अलम्बुषादि स्वरस | 86 | क्वाथ में जीरा आदि का परिमाण | 90 |
| मुण्डी-स्वरस | 87 | क्वाथ में दूध आदि का परिमाण | 90 |
| ब्राह्मी आदि का स्वरस | 87 | क्वाथ पकाने को विधि | 90 |
| सोमरोग-चिकित्सा | 87 | गुडूच्यादिगण क्वाथ | 91 |
| उदर्द-चिकित्सा | 87 | गुडूच्यादि क्वाथ | 91 |
| उष्णोपद्रव-चिकित्सा | 87 | शालपर्ण्यादि क्वाथ | 91 |
| कूष्माण्ड-स्वरस | 87 | काश्मर्यादि क्वाथ | 91 |
| गाङ्गेरुकी-स्वरस | 87 | कट्फलादि क्वाथ | 91 |
| पुटपाक-विधि | 87 | पर्पटादि क्वाथ | 91 |
| कुटज पुटपाक | 88 | द्राक्षादि क्वाथ | 91 |
(xviii)
पर्पटादि क्वाथ ९१ | पुनर्नवादि क्वाथ ९६
बीजपूरादि क्वाथ ९२ | वासादि क्वाथ ९६
भूनिम्बादि क्वाथ ९२ | वासादि तथा क्षुद्रा क्वाथ ९७
पटोलादि क्वाथ ९२ | क्षुद्रादि क्वाथ ९७
पञ्चभद्र क्वाथ ९२ | रेणुकादि क्वाथ ९७
कण्टकार्यादि क्वाथ ९२ | बिल्वत्वक् क्वाथ ९७
आरग्वधादि क्वाथ ९२ | गृध्रसीनाशक क्वाथ ९७
अमृताष्टक क्वाथ ९२ | रास्नापञ्चक क्वाथ ९७
पटोलादिगण क्वाथ ९२ | रास्नासप्तक क्वाथ ९७
कण्टकार्यादि क्वाथ ९३ | महारास्नादि क्वाथ ९७
दशमूल क्वाथ ९३ | एरण्डादि क्वाथ ९८
अभयादि क्वाथ ९३ | नागरादि क्वाथ ९८
पिप्पल्यादि क्वाथ ९३ | त्रिफलादि क्वाथ ९८
किरातादि क्वाथ ९४ | एरण्ड क्वाथ ९८
कट्फलादि क्वाथ ९४ | दशमूल क्वाथ ९८
गुडूची क्वाथ ९४ | हरीतक्यादि क्वाथ ९८
निदिग्धिकादि क्वाथ ९४ | वीरतर्वादि क्वाथ ९८
देवदार्वादि क्वाथ ९४ | एलादि क्वाथ ९९
क्षुद्रादि क्वाथ ९४ | गोक्षुरादि क्वाथ ९९
मुस्तादि क्वाथ ९४ | वरादि क्वाथ ९९
पटोलादि क्वाथ ९४ | फलत्रिकादि क्वाथ ९९
गुडूच्यादि क्वाथ ९५ | दार्व्यादि क्वाथ ९९
देवदार्वादि क्वाथ ९५ | न्यग्रोधादि क्वाथ ९९
बृहद्गुडूच्यादि क्वाथ ९५ | बिल्वादि क्वाथ १००
नागरादि क्वाथ ९५ | त्रिफला क्वाथ १००
धान्यपञ्चक क्वाथ ९५ | चव्यादि क्वाथ १००
धान्यनागर क्वाथ ९५ | पुनर्नवादि क्वाथ १००
वत्सकादि क्वाथ ९५ | पथ्यादि क्वाथ १००
कुटजाष्टक क्वाथ ९५ | पुनर्नवादि क्वाथ १००
ह्रीबेरादि क्वाथ ९६ | फलत्रिक क्वाथ १००
धातक्यादि क्वाथ ९६ | रास्नादि क्वाथ १००
शालपर्ण्यादि क्वाथ ९६ | काञ्चनार क्वाथ १००
गुडूच्यादि क्वाथ ९६ | शाखोटक क्वाथ १०१
इन्द्रयवादि क्वाथ ९६ | पुनर्नवादि क्वाथ १०१
त्रिफलादि क्वाथ ९६ | वरुणादिगण में ऊषकादिगण का योग १०१
फलत्रिकादि क्वाथ ९६ | वरुणादि क्वाथ १०१
(xix)
खदिरादि क्वाथ १०१ | पेया तथा यूष १०६
पटोलादि क्वाथ १०१ | भक्त-निर्माण-विधि १०६
अमृतादि क्वाथ १०१ | मण्ड-निर्माण-विधि १०६
पटोलादि क्वाथ १०२ | अष्टगुण मण्ड १०७
धात्रीखदिर क्वाथ १०२ | यवमण्ड १०७
लघुमञ्जिष्ठादि क्वाथ १०२ | लाजमण्ड १०७
बृहन्मञ्जिष्ठादि क्वाथ १०२ | तृतीयोऽध्यायः
पथ्यादि क्वाथ १०२ | फाण्ट-निर्माण-विधि १०८
वासादि क्वाथ १०२ | बृहत् मधूकपुष्पादि फाण्ट १०८
अमृतादि क्वाथ १०३ | आम्रादि फाण्ट १०८
पञ्चवल्कल क्वाथ १०३ | लघुमधूकपुष्पादि फाण्ट १०८
पाठादि क्वाथ १०३ | मन्थ-विधि १०८
निम्बादि क्वाथ १०३ | खर्जूरादि मन्थ १०९
काञ्चनार क्वाथ १०३ | मसूर सक्तु मन्थ १०९
शतपुष्पादि क्वाथ १०३ | यवसक्तु मन्थ १०९
लंघन या अपतर्पण १०३ | चतुर्थोऽध्यायः
लंघन के अयोग्य व्यक्ति १०३ | हिम-निर्माण-विधि ११०
लंघन का फल १०३ | आम्रादि हिम ११०
सुलंघित का लक्षण १०३ | मरिचादि हिम ११०
अति लंघन के दोष १०३ | नीलोत्पलादि हिम ११०
लंघन का सदुपयोग १०३ | अमृता हिम ११०
प्रमथ्यापाक-विधि १०३ | धान्यक हिम ११०
मुस्तकादि प्रमथ्या १०४ | धान्यकादि हिम ११०
यवागू-निर्माण-विधि १०४ | पञ्चमोऽध्यायः
आम्रादि यवागू १०४ | कल्क-निर्माण-विधि ११२
यूष-निर्माण-विधि १०४ | वर्द्धमानपिप्पली कल्क ११२
सप्तमुष्टिक यूष १०४ | निम्बपत्र कल्क ११२
पानादि विधि १०५ | महानिम्ब कल्क ११२
षडङ्ग-पानीय १०५ | रसोन कल्क ११२
उष्णोदक-विधि १०५ | द्वितीय रसोन कल्क ११३
उष्णोदक के गुण १०५ | पिप्पल्यादि कल्क ११३
क्षीरपाक-विधि १०५ | विष्णुक्रान्ता कल्क ११३
पञ्चमूलपक्व-क्षीर १०५ | शुण्ठ्यादि कल्क ११३
त्रिकण्टकपक्व-क्षीर १०५ | अपामार्गबीज कल्क ११३
यवागू आदि की निर्माण-विधि १०६ | बदरीमूल कल्क ११४
विलेपी-विधि १०६
(xx)
लाक्षा कल्क 114 | वृद्धगङ्गाधर चूर्ण 121
तण्डुलीय कल्क 114 | अजमोदादि चूर्ण 121
अङ्कोट कल्क 114 | मरिचादि चूर्ण 121
वन्ध्याकर्कोटकादि कल्क 114 | कपित्थाष्टक चूर्ण 121
अभयादि कल्क 114 | दाडिमाष्टक चूर्ण 121
त्रिवृतादि कल्क 114 | बृहद् दाडिमाष्टक चूर्ण 122
तिल कल्क 114 | पिप्पल्यादि चूर्ण 122
शुण्ठी कल्क 115 | लवङ्गादि चूर्ण 122
षष्ठोऽध्यायः | जातीफलादि चूर्ण 122
| महाखाण्डव चूर्ण 123
चूर्ण-निर्माण-विधि 116 | नारायण चूर्ण 123
चूर्ण में गुड़ आदि का मान 116 | हपुषादि चूर्ण 124
चूर्ण-सेवन-विधि 116 | पञ्चसम चूर्ण 124
चूर्ण का अनुपान 116 | नाराच चूर्ण 124
अनुपान का फल 116 | लवणत्रितयादि चूर्ण 124
चूर्ण-भावना-विधि 117 | तुम्ब्रुवादि चूर्ण 125
आमलकादि चूर्ण 117 | चित्रकादि चूर्ण 125
पिप्पली चूर्ण 117 | वडवानल चूर्ण 125
त्रिफला चूर्ण 117 | अजमोदादि चूर्ण 125
त्र्यूषण चूर्ण 117 | शुण्ठ्यादि चूर्ण 126
पञ्चकोल चूर्ण 117 | हिंग्वादि चूर्ण 126
त्रिगन्ध-चतुर्जात चूर्ण 118 | यवानीखाण्डव चूर्ण 126
कृष्णादि चूर्ण 118 | तालीसादि चूर्ण 127
जीवनीयगण चूर्ण 118 | सितोपलादि चूर्ण 127
अष्टवर्ग चूर्ण 118 | लवणभास्कर चूर्ण 127
लवणपञ्चक चूर्ण 118 | एलादि चूर्ण 128
क्षारद्वय चूर्ण 119 | व्याघ्री चूर्ण 128
सुदर्शन चूर्ण 119 | पञ्चनिम्ब चूर्ण 128
त्रिफलापिप्पली चूर्ण 120 | शतावर्यादि चूर्ण 128
कट्फलादि चूर्ण 120 | अश्वगन्धादि चूर्ण 128
बृहत्कट्फलादि चूर्ण 120 | मुसल्यादि चूर्ण 129
तृतीय कट्फलादि लेह 120 | नवायस चूर्ण 129
शृंग्यादि चूर्ण 120 | आकारकरभादि चूर्ण 129
यवक्षारादि चूर्ण 120 | पञ्चवल्कल चूर्ण 129
शुण्ठ्यादि चूर्ण 120 | माषादि चूर्ण 129
हरीतक्यादि चूर्ण 121 | बकुलत्वक् चूर्ण 129
लघुगङ्गाधर चूर्ण 121 |
(xxi)
सप्तमोऽध्यायः | कूष्माण्डावलेह 141
वटी के पर्याय नाम 130 | सूरणावलेह 142
वटी-निर्माण की विधि 130 | अगस्त्यहरीतकी अवलेह 142
वटी-निर्माण की दूसरी विधि 130 | कुटजावलेह 142
वटी में सिता आदि का मान 130 | कुटजाष्टकावलेह 143
बाहुशाल गुड़ 130 | नवमोऽध्यायः
मरिचादि गुटिका 131 | स्नेहपाक की विधि 144
गुडादि गुटिका 131 | स्नेहपाकार्थ क्वाथ-विधि 144
आमलक्यादि गुटिका 131 | क्वाथ में जल का परिमाण 144
सञ्जीवनी वटी 132 | अन्य प्रकार से जल का मान 144
व्योषादि वटी 132 | स्नेह में कल्क का परिमाण 144
गुड़ के चार योग 132 | स्नेह में द्रवद्रव्यों का परिमाण 145
वृद्धदारुक मोदक 132 | केवल क्वाथ से स्नेहपाक 145
सूरण-पिण्डी 132 | कल्कहीन स्नेहपाक 145
सूरण-बटक 132 | पुष्पकल्क से स्नेहपाक-विधि 145
मण्डूर-बटक 133 | स्नेहसिद्धि का लक्षण 145
पिप्पली मोदक 133 | स्नेहपाक के प्रकार 146
चन्द्रप्रभा वटी 133 | मृदुपाक आदि के गुण 146
कांसायन वटी 134 | घृतादि पाक में काल-निर्देश 146
योगराज गुग्गुलु 135 | पिप्पल्यादि घृत 146
कैशोर गुग्गुलु 136 | चाङ्गेरी घृत 146
त्रिफला गुग्गुलु 137 | मसूर घृत 147
गोक्षुरादि गुग्गुलु 137 | कामदेव घृत 147
त्रिफला मोदक 137 | पानीयकल्याणक घृत 148
काञ्चनार गुग्गुलु 137 | अमृता घृत 148
गूगलशोधन विधि 138 | महापञ्चतिक्त घृत 148
माषादि मोदक 138 | कासीसादि घृत 149
उदर्दनाशक मोदक 138 | जात्यादि घृत 149
अष्टमोऽध्यायः | षड्बिन्दु घृत 149
अवलेह-निर्माण-विधि 139 | त्रिफला घृत 150
अवलेह में सिता आदि का मान 139 | गौराद्य घृत 150
अवलेह-सिद्धि का लक्षण 139 | मयूर घृत 151
अवलेह के अनुपान 140 | फलघृत 151
कण्टकारी अवलेह 140 | दूसरा फल घृत 152
च्यवनप्राशावलेह 140 | पञ्चतिक्त घृत 152
अङ्गारक तैल 153 | सन्धान-कल्पना 164
(xxii)
लाक्षादि तैल 152 | दशमोऽध्यायः
अङ्गारक तैल 153 | सन्धान-कल्पना 164
नारायण तैल 153 | आसव तथा अरिष्ट का भेद 164
वारुणी तैल 154 | अरिष्टों में जल, गुड़ तथा मधु का मान 164
बलादि तैल 154 | सीधु का लक्षण 165
प्रसारिणी तैल 155 | सुरा आदि का लक्षण 165
माषादि तैल 155 | वारुणी का लक्षण 165
शतावरी तैल 156 | शुक्त बनाने की विधि 165
कासीसादि तैल 157 | विनष्ट तथा चुक्र लक्षण 166
पिण्ड तैल 157 | मधुशुक्त बनाने की विधि 166
अर्क तैल 157 | गुड़शुक्त का लक्षण 166
मरिचादि तैल 157 | शुक्त का लक्षण 166
त्रिफलादि तैल 158 | तुषाम्बु तथा सौवीर का लक्षण 166
निम्बबीज तैल 158 | काञ्जिक का लक्षण 166
यष्टीमधुक तैल 158 | उशीरासव निर्माण-विधि 167
करञ्ज तैल 158 | कुमार्यासव 167
नीलिकादि तैल 158 | पिप्पल्यासव 168
भृङ्गराज तैल 159 | लोहासव 168
इरिमेदादि तैल 159 | मृद्वीकारिष्ट 168
जात्यादि तैल 159 | कुटजारिष्ट 169
हिंग्वादि तैल 159 | विडङ्गारिष्ट 169
बिल्व तैल 160 | देवदार्वादि अरिष्ट 169
क्षार तैल 160 | खदिरारिष्ट 170
पाठादि तैल 160 | बब्बूलारिष्ट 170
व्याघ्री तैल 160 | द्राक्षारिष्ट 171
कुष्ठादि तैल 160 | रोहीतकारिष्ट 171
गृहधूम तैल 160 | दशमूलारिष्ट 171
वज्री तैल 160 | एकादशोऽध्यायः
करवीरादि तैल 161 | धातुओं की संख्या 173
चन्दनादि तैल 161 | धातुओं के शोधन की विधि 173
वचा तैल 161 | सुवर्ण भस्म की विधि 173
निर्गुण्डी लांगली तैल 162 | सुवर्ण भस्म की दूसरी विधि 174
चक्रमर्द तैल 162 | तीसरी विधि 174
धत्तूर तैल 162 | चौथी विधि 175
कटुतैलमूर्च्छन-विधि 163 | पाँचवीं विधि 175
तैल की गन्धवृद्धि 163 | छठी विधि 175
पत्रकल्क 163
(xxiii)
सुवर्ण भस्म के गुण ..................................... 175 | क्षार बनाने की विधि ..................................... 185
रजत भस्म की विधि .................................... 175 | पानीय प्रतिसारणीय क्षार ................................. 185
रजत भस्म की दूसरी विधि ............................ 176 |
आर भस्म की विधि ..................................... 176 | द्वादशोऽध्यायः
ताम्र, पीतल, कांस्य भस्म-विधि ..................... 177 | पारद के गुण ................................................ 187
ताम्र भस्म की विधि ..................................... 177 | पारद के नाम ................................................ 187
नाग भस्म ................................................... 178 | ग्रहानुसार धातु-नाम ...................................... 187
नाग भस्म की विधि .................................... 178 | पारद की शोधन-विधि .................................... 187
वंग भस्म की विधि ..................................... 178 | गन्धक शोधन-विधि ....................................... 188
लोह भस्म की विधि .................................... 178 | शिंगरफ शोधन-विधि .................................... 188
दूसरी विधि ................................................ 178 | शिंगरफ से पारा निर्माण-विधि .......................... 188
तीसरी विधि ................................................ 179 | डमरू यन्त्र-निर्माण-विधि ................................ 188
उपधातु संख्या ........................................... 179 | पारद को बुभुक्षित करने की विधि .................... 188
स्वर्णमाक्षिक शोधन-विधि ............................ 179 | दूसरी विधि ................................................... 189
स्वर्णमाक्षिक मारण-विधि ............................. 180 | तीसरी विधि ................................................... 189
विमला शोधन-विधि ................................... 180 | गन्धक-जारण-विधि ........................................ 189
तुत्थ-शोधन-विधि ..................................... 180 | पारद-मारण-विधि ......................................... 189
अभ्रक-शोधन-विधि ................................... 180 | पारद-मारण-विधि ......................................... 190
अभ्रक मारण-विधि ..................................... 180 | अन्य विधि .................................................... 191
अभ्रक मारण-विधि ..................................... 181 | अन्य विधि .................................................... 191
अभ्रक सत्व प्रकार ...................................... 181 | ज्वराङ्कुश रस ............................................... 191
नीलाञ्जन-शुद्धि .......................................... 181 | ज्वरारि रस .................................................... 191
मनःशिला-शुद्धि ......................................... 182 | शीतारि रस .................................................... 191
हरिताल-शोधन .......................................... 182 | ज्वरघ्नी गुटिका ............................................. 192
दोलायन्त्र ................................................... 182 | लोकनाथ रस ................................................. 192
रसक-शुद्धि .............................................. 183 | लघु लोकनाथ रस .......................................... 194
उपधातुओं से सत्व निकालने की विधि ........... 183 | मृगाङ्कपोट्टली रस ......................................... 194
रत्नशोधन-विधि ......................................... 183 | हेमगर्भपोट्टली रस .......................................... 195
वज्रभस्म की विधि ...................................... 183 | दूसरा हेमगर्भपोट्टली रस ................................. 195
दूसरी विधि ................................................ 183 | द्वितीय ज्वरांकुश रस ...................................... 196
तीसरी विधि ................................................ 183 | आनन्दभैरव रस ............................................ 196
वैक्रान्त-मारण ........................................... 184 | सूचिकाभरण रस ........................................... 197
रत्नों का शोधन-मारण ................................ 184 | जलबन्धु रसं ................................................. 197
शिलाजतु शोधन-विधि ............................... 184 | पञ्चवक्त्र रस ................................................ 197
शिलाजतु निर्माण-विधि .............................. 184 | उन्मत्त रस .................................................... 198
मण्डूर भस्म निर्माण-विधि ............................ 185 | सन्निपाताञ्जन ................................................ 198
| नाराच रस ..................................................... 198
(xxiv)
इच्छाभेदी रस १९८ | अजीर्णकण्टक रस २०४
वसन्तकुसुमाकर रस १९८ | मन्थानभैरव रस २०५
राजमृगाङ्क रस १९९ | वातनाशन रस २०५
स्वयमग्नि रस १९९ | कनकसुन्दर रस २०५
अमृतार्णव रस २०० | सन्निपातभैरव रस २०५
सूर्यावर्त रस २०० | ग्रहणीकपाट रस २०६
स्वच्छन्दभैरव रस २०० | ग्रहणीवज्रकपाट रस २०६
हंसपोट्टली रस २०१ | मदनकामदेव रस २०७
त्रिविक्रम रस २०१ | कन्दर्पसुन्दर रस २०८
महातालेश्वर रस २०१ | लोह रसायन २०८
कुष्ठकुठार रस २०१ | जैपाल-शुद्धि की विधि २०९
उदयादित्य रस २०२ | विष-शुद्धि की विधि २०९
सर्वेश्वर रस २०२ | अहिफेन-शोधन २१०
स्वर्णक्षीरी रस २०३ | भंगा-शोधन २१०
मेहबद्ध रस २०३ | विषमुष्टि शोधन २१०
महावह्नि रस २०३ | लांगली-शोधन २१०
विद्याधर रस २०४ | गुञ्जा-शोधन २१०
त्रिनेत्र रस २०४ | करवीर-शोधन २१०
गजकेसरी रस २०४ | अर्क-सेहुण्ड दुग्ध-शोधन २१०
अग्नितुण्डवटी रस २०४ |
उत्तरखण्ड
प्रथमोऽध्यायः
स्नेह के भेद, उनके पान का समय २११ | तैलपान के योग्य व्यक्ति २१२
स्नेह की दो योनियाँ २११ | वसापान के योग्य व्यक्ति २१३
मिलित स्नेहों के नाम २११ | मज्जापान के योग्य व्यक्ति २१३
स्नेह-सेवन की कालावधि २११ | स्नेहपान का काल २१३
स्नेह की मात्राएँ २१२ | घृत तैल की उपयोग-विधि २१३
विधिहीन स्नेहपान के दोष २१२ | स्नेहों के अनुपान २१३
दोषशान्ति के उपाय २१२ | स्नेह-सेवन २१३
स्नेह-मात्रा-विचार २१२ | यवागू से स्नेह-सेवन २१३
अन्य प्रकार से मात्रा का निश्चय २१२ | धारोष्ण दुग्ध से स्नेह-पान २१३
मात्राओं के गुण २१२ | स्नेहाजीर्ण की चिकित्सा २१३
दोष-भेद से स्नेह का विधान २१२ | स्नेहाजीर्ण का उपचार २१४
घृतपान के योग्य व्यक्ति २१२ | स्नेहपान-जनित तृष्णा-चिकित्सा २१४
| स्नेहपान से हानि २१४
(xxv)
स्नेहपान के अयोग्य रोगी 214 | वमन के योग्य रोग 221
स्नेहपान के योग्य रोगी 214 | वमन के अयोग्य रोग 221
स्निग्ध तथा रूक्ष के लक्षण 214 | वमन के अयोग्य रोगी 221
अतिस्निग्ध के लक्षण 214 | वमन के अयोग्यों को भी वमन का विधान 222
रूक्ष तथा अतिस्निग्ध का उपचार 215 | सुकुमार आदि के वमन की विधि 222
रूक्षण द्रव्य 215 | वमन का विशेष विधान 222
स्नेह-सेवन का फल 215 | वमन के सहायक द्रव्य 222
स्नेह-सेवन में त्याज्य 215 | वमन-विरेचन-स्वरूप 222
द्वितीयोऽध्यायः | वमन-द्रव्यों का परिमाण 222
स्वेद की संख्या और गुण 216 | क्वाथ-पान की मात्रा 222
स्वेद के भेद तथा प्रयोग 216 | कल्कादि की मात्रा 222
दोष भेद से स्वेद के भेद 216 | वमन के वेग 222
पूर्व स्वेदनीय रोगी 216 | वमनादि में प्रस्थ का मान 222
पश्चात् स्वेदनीय रोगी 216 | दोष-भेद से द्रव्य-भेद 222
उभयविध स्वेदनीय रोगी 217 | पित्त में वमन 223
स्वेद की व्यवस्था 217 | कफवातज रोगों में वमन 223
स्वेद का फल 217 | वमन के उपद्रवों की चिकित्सा 223
स्वेदन-काल में रोगी की रक्षा 217 | वमन करते समय कर्तव्य 223
स्वेद के अयोग्य रोगी 217 | दुर्दान्त के लक्षण 223
मृदुस्वेद के स्थान 217 | अतिवान्त के लक्षण 223
अतिस्वेद के उपद्रव 217 | वमन के उपद्रवों की चिकित्सा 223
तापस्वेद-विधि 218 | सम्यग् वात के लक्षण 224
ऊष्मस्वेद-विधि 218 | वान्त का पथ्य 224
उपनाह-स्वेद-विधि 218 | वमन के लाभ 224
द्रवस्वेद-विधि 219 | वमन में परिहार्य 224
द्रवद्रव्य का परिमाण 219 | वमन-विरेचन के पूर्व स्नेहन-स्वेदन 224
स्नेहकृत स्वेद का काल 219 | चतुर्थोऽध्यायः
स्वेद का लाभ-प्रकार 219 | विरेचन-योग्य रोगी 225
स्वेद से धातुवृद्धि 219 | वमन-रहित विरेचन के दोष 225
स्वेदन की अवधि 219 | विरेचन का काल 225
सुस्विन्न का आहार-विहार 219 | संशोधन का फल 225
उष्ण जल से स्नान-विधि 220 | विरेचन-योग्य रोग 225
तृतीयोऽध्यायः | विरेचन के अयोग्य रोगी 225
वमन-विरेचन का काल 221 | विरेचन-योग्य रोगी 226
वमन के योग्य पुरुष 221 | विरेचन के लिए कोष्ठ-भेद 226
| कोष्ठ-भेद से मात्रा-विचार 226
(xxvi)
कोष्ठ-भेद से द्रव्यों का विचार 226 | अनुवासन-वस्ति के द्रव्य 232
वेग-भेद से विरेचन-मात्रा 226 | विरेचन के पश्चात् वस्ति 232
विरेचन-द्रव्यों का मान-विचार 226 | वस्ति देने की विधि 232
दोष-भेद से द्रव्य-विधान 226 | वस्ति-प्रयोग में काल-निर्देश 233
एरण्ड तैल-प्रयोग 227 | मात्रा-काल-प्रमाण 233
सब ऋतुओं के योग्य विरेचन 227 | वस्ति-प्रयोग में पश्चात् कर्म 233
अभयादि मोदक 227 | सम्यक् अनुवासित के लक्षण 233
विरेचन-काल में कर्तव्य 228 | वस्ति के पश्चात् पथ्य 233
सम्यग् विरेचन का लक्षण 228 | अनुवासन की व्यापत्ति की चिकित्सा 233
दुर्विरिक्त का लक्षण 228 | उष्णोदक के गुण 233
दुर्विरिक्त की चिकित्सा 228 | धान्यशुण्ठी जल का गुण 233
अति विरेचन के उपद्रव 228 | स्नेह वस्ति के साथ निरूहण-वस्ति 233
विरेकातियोग में कर्तव्य 228 | वस्तियों के फल 233
सुविरिक्त के लक्षण 228 | वातरोगी के लिए स्नेह-वस्ति 234
विरेचन से लाभ 229 | स्नेह तथा निरूहवस्ति की प्रशंसा 234
विरेचन में परिहार्य 229 | स्नेह-वस्ति के निकलने पर 234
विरेचन में पथ्य 229 | स्नेह-वस्ति के उपद्रव और प्रतिकार 234
| उपद्रवहीन स्नेह-वस्ति 234
पञ्चमोऽध्यायः | स्नेह के न लौटने पर उपाय 235
वस्तियों के दो भेद 230 | स्नेह-वस्ति के लिए गुडूच्यादि तैल 235
वस्तियों के लक्षण 230 | स्नेहपानादि उपचार 235
वस्ति-क्रम का निर्देश 230 | धान्यशुण्ठी क्वाथ 235
अनुवासन का भेद मात्रावस्ति 230 | वस्ति-फलश्रुति 235
अनुवासन के योग्य रोगी 231 | वस्ति-सेवनक्रम 235
अनुवासन के अयोग्य रोगी 231 | वस्ति-व्यापत्तियाँ 235
वस्ति-नेत्र के द्रव्य 231 | पथ्यापथ्य-निर्देश 235
वयस्-भेद से नेत्र-परिमाण 231 |
वस्ति-नेत्र का छिद्र तथा आकार 231 | षष्ठोऽध्यायः
वस्ति-नेत्र का परिणाह 231 | निरूहण-वस्ति-परिचय 237
वस्ति-नेत्र की कर्णिका 231 | निरूहण-वस्ति की मात्रा 237
वस्ति के योग्य द्रव्य 231 | निरूहण के अयोग्य रोगी 237
व्रणवस्ति का नेत्र 231 | निरूहण-वस्ति के योग्य रोगी 237
वस्ति के सम्यग्योग का फल 232 | निरूहण की विधि 237
वस्ति के लिए समय-निर्देश 232 | सुनिरूढ के लक्षण 238
वस्ति के पूर्व भोजन-निर्देश 232 | दुर्निरूढ के लक्षण 238
वस्ति की मात्रा के दोष 232 | अतिनिरूढ के लक्षण 238
वस्ति-मात्रा-निर्देश 232 | आस्थापन तथा निरूहण का प्रयोग 238
(xxvii)
दोष-भेद से वस्ति-विधान २३८
दोष-भेद से भोजन-व्यवस्था २३८
एकाधिक वस्तियों का विधान २३८
दोषभेद से भोजन-व्यवस्था २३९
सुकुमारादि के लिए वस्ति २३९
वस्तियों का क्रम २३९
उत्क्लेशन-वस्ति २३९
दोषहर-वस्ति २३९
शोधन-वस्ति २३९
शमन-वस्ति २३९
लेखन-वस्ति २३९
बृंहण-वस्ति २३९
पिच्छिल-वस्ति २३९
प्रमाणानुसार द्रव्यमिश्रण-विधि २४०
दोष-भेद से स्नेह, मधु का प्रमाण २४०
माधुतैलिक-वस्ति २४०
दीपन-वस्ति २४०
युक्तरथ वस्ति २४०
सिद्ध-वस्ति २४०
मुस्तादि-वस्ति २४१
वस्ति-कल्पना २४१
त्रिदोषहर-वस्तियाँ २४१
रक्तविकार-वस्ति २४१
निरूहण-वस्ति में पथ्यापथ्य २४१
सप्तमोऽध्यायः
उत्तरवस्ति-विधान २४२
वस्ति-मात्रा-निर्धारण २४२
पुरुषों में वस्ति-प्रयोग-विधि २४२
स्त्रियों में वस्ति-प्रयोग-विधि २४२
बालकों में वस्ति-प्रयोग-विधि २४३
विशेष मात्रा-निर्देश २४३
स्त्रियों में वस्ति-प्रयोग विधि २४३
फलवर्त्ति-प्रयोग-विधि २४३
फलवर्त्ति-निर्माण-विधि २४३
लक्षण-समन्वय २४४
फलवर्त्ति का नामभेद २४४
अष्टमोऽध्यायः
नस्य की निरुक्ति २४५
नस्य के भेद २४५
नस्य-प्रयोग का काल २४५
नस्य के अयोग्य काल और रोगी २४५
नस्य के योग्य-अयोग्य वय २४५
विरेचन-नस्य २४५
विरेचन-नस्य की मात्रा २४६
नस्य के लिए द्रव्यों का परिमाण २४६
विरेचन-नस्य के दो भेद २४६
अवपीड, प्रधमन का स्वरूप २४६
विरेचन-नस्य के योग्य रोग २४६
स्नेहन-नस्य २४६
अवपीड-नस्य के योग्य रोगी २४६
प्रधमन के योग्य रोग २४६
गुडादि-नस्य २४६
मधूकसारादि नस्य २४७
सैन्धवादि नस्य २४७
प्रधमन-नस्य २४७
बृंहण-नस्य-कल्पना २४७
मर्श-शिरोविरेचन २४७
बृंहण-नस्य के योग्य रोग २४७
कुंकुम-नस्य २४८
बृंहण-नस्य के द्रव्य २४८
दोष-भेद से स्नेह-व्यवस्था २४८
माषादि-नस्य २४८
प्रतिमर्श-नस्य-विधि २४८
प्रतिमर्श की मात्रा २४९
प्रतिमर्श के काल २४९
प्रतिमर्श की विधि २४९
प्रतिमर्श के योग्य रोगी २४९
पलित में नस्य २४९
नस्य-ग्रहण-विधि २४९
नस्य-धारण-काल २५०
नस्य के तीन योग २५०
नस्य-शुद्धि के लक्षण २५०
(xxviii)
| नस्य का हीनयोग | 250 | शोथनाशक लेप | 258 |
| नस्य का अतियोग | 250 | दाहनाशक लेप | 258 |
| हीनातिषोग में उपचार | 250 | दशाङ्ग लेप | 258 |
| अतिस्निग्ध का लक्षण | 251 | भल्लातक-शोथहर लेप | 258 |
| पञ्चकर्म | 251 | लाङ्गल्यादि लेप | 258 |
| चिकित्सा-विषय विचार | 251 | रक्तचन्दनादि लेप | 259 |
| नवमोऽध्यायः | मातुलुङ्गादि लेप | 259 | |
| धूमपान-विधि | 252 | लोध्रादि लेप | 259 |
| धूमपान के अयोग्य व्यक्ति | 252 | सिद्धार्थकादि लेप | 259 |
| धूमपान-निषेध का कारण | 252 | अश्वखुरमसी लेप | 259 |
| धूमपान की अवधि | 252 | वटपत्रादि लेप | 259 |
| सुप्रयुक्त धूम-प्रशंसा | 253 | अरुषिकाहर लेप | 259 |
| धूमयन्त्र-परिचय | 253 | दूसरा लेप | 259 |
| प्रकार-भेद से धूमपान | 253 | दारुणरोगहर लेप (1) | 259 |
| व्रणधूपन-विधि | 253 | दारुणरोगहर लेप (2) | 259 |
| विविध धूपन-प्रयोग | 253 | इन्द्रलुप्तहर लेप | 260 |
| बालग्रहनाशक-धूपन | 254 | केशवर्द्धक लेप | 260 |
| पथ्य-अपथ्य आदि निर्देश | 254 | रोमोत्पादक लेप | 260 |
| दशमोऽध्यायः | इन्द्रलुप्तहर लेप | 260 | |
| गण्डूष-कवल-विधि | 255 | रोमसंजनन लेप | 260 |
| गण्डूष तथा कवल में भेद | 255 | पलितनाशक लेप (1) | 260 |
| गण्डूषादि सेवन में वय का विचार | 255 | पलितनाशक लेप (2) | 260 |
| स्नैहिक गण्डूष | 255 | पलितनाशक लेप (3) | 260 |
| मधु-गण्डूष के गुण | 256 | पलितनाशक लेप (4) | 260 |
| विविध रोगों में गण्डूष | 256 | पलितनाशक लेप (5) | 261 |
| दार्वादि-गण्डूष | 256 | रोमनाशक लेप (1) | 261 |
| प्रतिसारण और कवल | 256 | रोमनाशक लेप (2) | 261 |
| मातुलुङ्गकेसरादि कवल | 256 | अर्शोलेप | 261 |
| प्रतिसारण के भेद | 256 | शोथनाशक लेप | 261 |
| कुष्ठादि प्रतिसारण | 256 | कर्णमूल शोथ-चिकित्सा | 261 |
| गण्डूषादि के हीनयोग-अतियोग | 256 | श्वित्रहर लेप (1) | 261 |
| गण्डूषादि का सम्यग् योग | 256 | श्वित्रहर लेप (2) | 262 |
| दतवन या दातून | 257 | श्वित्रहर लेप (3) | 262 |
| ताम्बूल-सेवन | 257 | श्वित्रहर लेप (4) | 262 |
| एकादशोऽध्यायः | सिध्महर लेप (1) | 262 | |
| आलेप के नाम तथा परिमाण | 258 | सिध्महर लेप (2) | 262 |
(xxx)
शम्बूक तैल — 270 | रक्तमोक्षण में अपथ्य — 276
कर्णस्रावहर योग — 270 | तुम्बी-प्रयोग-विधि — 276
स्वर्जिका योग — 271 | जलौका-प्रयोग — 277
आम्रादि तैल — 271 | सिरावेध — 277
कर्णकीटहर योग (1) — 271 | त्रयोदशोऽध्यायः
कर्णकीटहर योग (2) — 271 | नेत्ररोगनाशक उपचार — 278
द्वादशोऽध्यायः | सेचन-विधि — 278
रोगानुसार रक्त-निर्हरण — 272 | वाताभिष्यन्द पर सेचन (1) — 278
रक्त-निर्हरण काल तथा लाभ — 272 | वाताभिष्यन्द पर सेचन (2) — 278
शुद्ध तथा अशुद्ध रक्त का लक्षण — 272 | वाताभिष्यन्द पर सेचन (3) — 278
रक्तदुष्टि के लक्षण — 272 | रक्ताभिष्यन्द पर सेचन (1) — 279
रक्तवृद्धि के लक्षण — 272 | रक्ताभिष्यन्द पर सेचन (2) — 279
रक्तक्षय के लक्षण — 272 | नेत्रशूलनाशक योग — 279
वातदूषित रक्त के लक्षण — 273 | आश्च्योतन-विधि — 279
पित्तदूषित रक्त के लक्षण — 273 | वातादि भेद से आश्च्योतन — 279
कफदूषित रक्त के लक्षण — 273 | आश्च्योतन का धारण काल — 279
द्विदोष तथा त्रिदोष से दूषित रक्त के लक्षण — 273 | आश्च्योतन के योग (1) — 279
विषदूषित रक्त के लक्षण — 273 | आश्च्योतन के योग (2) — 279
शुद्ध रक्त के लक्षण — 273 | आश्च्योतन के योग (3) — 279
रक्तस्राव के योग्य रोग — 273 | पिण्डिकाविधान — 280
रक्तस्राव की विधियाँ — 274 | पिण्डी के योग (1) — 280
किनका रक्त नहीं निकालना चाहिये — 274 | पिण्डी के योग (2) — 280
रक्तस्रावण यन्त्र — 274 | पिण्डी के योग (3) — 280
शृंग आदि द्वारा रक्तस्रावण — 274 | पिण्डी के योग (4) — 280
रक्तस्राव के अयोग्य काल एवं रोगी — 274 | बिडालक-विधि — 280
रक्तस्रावकारक उपाय — 274 | बिडालक के योग (1) — 280
रक्तस्राव का समय — 274 | बिडालक के योग (2) — 280
रक्तातिस्राव परिहार — 275 | बिडालक के योग (3) — 281
रक्त की अतिप्रवृत्ति में चिकित्सा — 275 | बिडालक के योग (4) — 281
रक्तरोधन के उपाय — 275 | बिडालक के योग (5) — 281
अग्निदाह-विधि — 275 | बिडालक के योग (6) — 281
अधिक रक्तस्राव का निषेध — 275 | तर्पण-विधि — 281
रक्त का महत्त्व — 276 | तर्पण का निषेध — 281
रक्तस्रावजनित दोष का प्रतिकार — 276 | तर्पण-विधि — 281
रक्तस्राव का फल — 276 | तर्पण के पश्चात् कर्म — 282
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammu. Digitized by S3 Foundation USA | तर्पणकाल तथा सम्यक् तर्पण का लक्षण — 282