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कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

by आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला

DevanagariSanskritpublished918 pages

३७४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ चौथा अधिकरण

Page 458Permalink

३७४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ चौथा अधिकरण

(१) स्वयमुद्बद्धस्य वा विप्रकारमयुक्तं मार्गेत ।

(२) सर्वेषां वा स्त्रीदायाद्यदोषः कर्मस्पर्धा प्रतिपक्षद्वेषः पण्यसंस्थासमवायो वा विवादपदानामन्यतमं वा रोषस्थानम् । रोषनिमित्तो घातः ।

(३) स्वयमादिष्टपुरुषैर्वा चोरैरर्थनिमित्तं सादृश्यादन्यवैरिभिर्वा हतस्य घातमासन्नेभ्यः परीक्षेत । येनाहूतः सहस्थितः प्रस्थितो हतभूमिमानीतो वा तमनुयुञ्जीत । ये चास्य हतभूमावासन्नचरास्तानेकैकशः पृच्छेत्—केनायमिहानीतो हतो वा, कः सशस्त्रः सङ्गूहमान उद्विग्नो वा युष्माभिर्दृष्ट इति । ते यथा ब्रूयुस्तथानुयुञ्जीत ।

(४) अनाथस्य शरीरस्थमुपभोगं परिच्छदम् ।
वस्त्रं वेषं विभूषां वा दृष्ट्वा तद्व्यवहारिणः ॥
अनुयुञ्जीत संयोगं निवासं वासकारणम् ।
कर्म च व्यवहारं च ततो मार्गणमाचरेत् ॥


(१) स्वयं ही फाँसी लगाकर आत्महत्या कर देने वाले व्यक्ति के कष्टों और आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जाय ।

(२) सामान्यतया हत्या और आत्महत्या का कारण क्रोध है, और क्रोध के भी स्त्री, दायभाग, राजकुलों में हुकूमत के लिए संघर्ष, शत्रुता, व्यापार में पारस्परिक हानि की इच्छा और संघ सम्बन्धी विवाद, आदि अनेक कारण हैं । क्रोध के बढ़ जाने पर ही हत्याएँ और आत्महत्याएँ होती हैं ।

(३) जिसने आत्मघात किया हो या जिसको नौकरों से मरवाया गया हो, या जिसको लुटेरों ने धन के लोभ से मारा हो, या किसी व्यक्ति ने रूप-रङ्ग की एकता जानकर अपना शत्रु होने के धोखे में मारा हो, इस प्रकार की हत्याओं के सम्बन्ध में मृतक के पड़ोसियों से पूछ-ताछ की जाय । जिसने उसको बुलाया हो और जो मृत्यु-स्थान पर इधर-उधर घूमते हों, उन सबसे भी पूछताछ की जाय । उनमें से एक-एक को पूछा जाय 'इस व्यक्ति को यहाँ कौन लाया है ? किसने इसको मारा है ? तुम लोगों ने किसी हथियार बन्द आदमी को लुक-छिप कर, भयभीत, इधर-उधर जाते-आते हुए तो नहीं देखा है ?' इस पर वे जैसा कहें तदनुसार मामले को आगे बढ़ाया जाय ।

(४) मृतक के कपड़े, छाता, जूता, माला, वेश (गृहस्थ या सन्यासी) और आभूषण आदि को भली-भाँति देखकर उन वस्तुओं के व्यापारियों से यह पता लगाया जाय कि 'उस व्यक्ति का मेल-जोल किस-किस से था, किसके साथ वह कारोबार करता था, उसका बर्ताव-व्यवहार कैसा था इत्यादि, इन सब बातों का ठीक-ठीक पता लग जाने के बाद हत्यारे की खोज की जाय ।