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सिंहासन बत्तीसी (द्वात्रिंशत्पुत्तलिका)

Singhasan Battisi (Dvatrimshat Puttalika)

पारम्परिक / लल्लू जी लाल द्वारा

स्रोत: सिंहासन बत्तीसी (द्वात्रिंशत्पुत्तलिका) · बृजवल्लभ हरिप्रसाद जी · 1920 (उद्गम)

DevanagariHindipublished190 पृष्ठ

पहली पुतली १. ( १७ )

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पहली पुतली १. ( १७ )

अच्छे गुलचले ओर तीरंदाज थे, साथ लिये, जाकर एक जंग-
लमें पहुंचे वहां हिरनके पीछे राजाने अपना घोड़ा डाला.
तब राजा आगे बढ़गया और सबके साथ कोई भी न पहुँचा.
एक बड़े जंगलमे राजा जा निकला और वहा जाकर सोच करने
लगा कि, मैं कहां आया ? राहभी भूला और साथभी गवाँया
इतनेमें जो निगाह की तो एक बड़ा दरख्त देखा और उस-
दरख्तकी फुनगीपर चढ़गया वहांसे देखने लगा, जंगलही-
जंगल नजर आताथा. मगर एक तरफ जो देखा तो एक शहर
नजर आया. उसको देखकर राजाकी एक ढाढ़ससी बँधी वह
नगर जो देखा तो निहायत आबाद है. कबूतर वहां उड रहे
हैं चीलहे मडरा रही हैं. सूर्य्यकी झलकसे हवेलियोंके कलश
चमक रहे हैं यह देख कहने लगा कि, यह नया शहर
मैने देखा. कल इसे छीनलूगा. और इस नगरके राजाका
दीवान जिसका नाम लूनबरन था वह कौवेके भेससे रहता था.
उस तरफसे खडा हुआ आताथा. उसने यह राजा मुँहसे
बात सुनी और बहुत दिलमे खपा हुवा. गुस्सेसे उसके मुँहमें
बीट करदी. राजा गजवमें आया. इतनेमें लोग कुछ उसके
वहां आप पहुँचे, उनके साथ होकर अपने शहरमें दाखिल
होगया. और दीवानको हुक्म किया कि जहानमे जहां तक
कौवे हैं वे सब पकड़ लावो. यह सुनतेही चारों तरफ बहेलिये

( १८ ) सिंहासनबत्तीसी
दौड़े और कौवे पकड़ पकड़ लाये, और पींजरेमें बंद किये
राजाने जाकर उन कौवोंसे कहा-अरे चांडाळा ! वह कौनसा
कौवा था कि जिसने हमारे मुँहपर बीट की ? तुम सच कहोगे
तो हम सबको छोड़ देंगे, नहीं कहोगे तो सबको मार डालेंगे.
यह राजाकी बात सुनके सब कौवे बोले-महाराज ! हममें कोई
कौवा नहीं रहा जो पकड़ा नहीं आया और वह काम हमसे
नहीं हुआ. तब राजा जियादः खफा हुआ और बोला कि-
तुम सबके सिवाय वह कौन कौवा है कि जिसने यह काम
किया ? तब उन्होंने कहा-महाराज ! सच पूछते हो तो हम
कहते हैं, बाहुबल एक राजा है, उदय अस्तग उसका राज है,
और उसका दीवान लूतबरन बड़ा दानी बहुत होशियार
पंडित है, वह कौवेके भेसमें रहता है. यह काम उसका हो तो
हो; क्योंकि कौवेकी सूरत एक वह बच रहा है. तब राजाने कहा
वह किस तरहसे हमारे पास आवै ? उसका बयान कुछ समझ-
कर मुझे इलाज बताओ ? कोई तुम्हारे यहांसे वकील जाय
और उसको ले आवै, तुम अपने यहांसे दो कौवोंको भेजदो
और वे जाकर उसको यहां ले आवें. तब उन्हींमेंसे दो कौवे
वहीं गये. उनकी लूतबरनने बहुतसी आव भगत की और
पूँछा कि, तुम यहां किसलिये आयेहो ? तब वे बोले महाराज !
तुम्हारे वगर हम सब कौवे मारे जातेहैं. इसवास्ते जो तुम राजा