भोजनकुतूहल: प्रथम भाग (रघुनाथ नवहस्त - आहार-रसायन, पाकशाला-व्यवस्था व विरुद्धाहार)
Bhojanakutuhala of Raghunatha Navahasta
रघुनाथ नवहस्त (सम्पादक: सूरनाड कुंजन पिल्लै) द्वारा
४
• श्लोकाः • | पृष्ठम् | श्लोकाः • | पृष्ठम् •
इत्थं यथादोषं | 101 | उद्रेकं ... | 197
इत्थं विमृश्य | 229 | उपरोधित्वात् | 167
इत्थं हि ताम्बूलं | 227 | उपवासफलं | 183
इत्थमद्भुतं केवन्न | 207 | उपोदकातिसाराय | 198
इत्यमं विषवपु | 197 | उपादकाशाकु | 205
इत्युदार्य | .219 | उपोदकी कटुः | 67
इदं तेऽन्ये च | 203 | उपोदकी तृतीया | ,,
इदं कुसरनाम | 29 | उपोदकी परा | 67
इन्द्रनीलदळा | 166 | उभाभ्यां लक्ष्म्युपेतः | 213
इन्द्रो दुर्भगतां | 144 | उभौ कफप्रश | 24
ईषच्च दीपनं | 150 | उष्ट्रीक्षीरं | 133
ईषत्कषायं स्वाद्वम् | 106 | उष्णे कटु च | 75
ईषत्कषायः | 68 | उष्णे वाऽन्तं | 143
ईषत्कषायमधुरं | 83 | उष्णे शृतं तु | 100
,, | 187 | उष्णे विधीमवयजेष | 201
,, | 81 | उष्णमेककफं | 133
ईषद्रूक्षं च | 105 | उष्णवीर्यं | 102
ईषद्विद्रिधा | 28 | उष्णस्त्वल्पो | 16
ईषद्धातकरा | 14 | उष्णा मारुत | 54
ईषल्लघु बलं | 171 | उष्णा सन्तर्पणी | 36
ईषल्लघु स्यात् | 170 | ऊनेन शीतं | 209
उक्ता येव सदा | 41 | ऊष्णेः सहोष्ण | 167
उग्रगन्धि पुराणं | 150 | ऊष्णेनंमोम्बुवा | 212
उत्तानाः पाक | 54 | ऊष्णोदनों भ्रम | 27
उत्तुण्डक्याः | 200 | ऊष्णोष्णसर्पिषा | 35
उदकैस्संहितैः | 124 | ऊर्ध्वरे चास्थिता | 101
उदमन्यादिवा | 202 | ऋज्वस्य दासस्य | 155
उदरक्षीपदा | 184 | ऋतुप्रभो | 175
उदरे ये गदाः | 123 | ऋतुकन्यो | 202
उदभिश्शोषिता | 146 | ॠर्तु व्यजनं | 225
उदावर्त्तानमर्दादि | 124 | एकत्र बहुमांसानि | 212
उद्गारशुद्धिः | 213 | एकत्र वा समांशानि | 198
उद्दालः कथिताः | 166 | एकयोनीन् | 55
उद्दाम्यते ततो | 186 | एकाहाच्युषितं | 140
6
श्लोकाः पृष्ठम् | श्लोकाः
एडकः शृङ्गिणो 34 | एष भक्ष्यो 46
एणः कुरङ्गो 111 | एषा कुण्डलिनी 47
एतत्कण्डं 41 | एषा वेणी 140
एतदुक्तं 28 | एषा वृकोदर ,,
एतद्गुणेव 48 | एषा शिखरिणी 141
एतद् पथ्यत्वं 25 | " " 142
एता अन्याः 54 | एषा सिंहा 40
एते शुक्लाश्च 15 | एषा सिद्धि 28
एते समगुणाः ,, | एषा हरीषा 52
एरण्डतैलं 152 | एषैव गोलाकृतिका 48
एरण्डपत्रं 215 | ऐक्यं पावस 198
एरण्डफलं 99 | ऐक्षवं तु 168
एर्वारुकं 79 | ऐक्षवं रसं 207
एलाजीरक 58 | ऐरण्डेन 199
एला तिक्तोष्ण 115 | ओजस्तेजो 229
एलादियुक्तान् 56 | ओदनो विषवान् 196
एलाद्यैः 186 | औत्तरं च 117
एलाद्रवं 227 | औदुम्बरं कषायं 89
एलालवण 56 | औदुम्बरं फलं 89
,, 42 | ओहालं स्वेदहरकं 166
,, 122 | ओहालिकं तु ,,
,, 48 | औद्भिदं वारि 184
एलासैन्धव 139 | और्वांनलं 179
एलोदकं 210 | औष्ट्रं मांसं 170
एवं द्रव्यगुणान् 212 | औष्ट्रपयोऽपि 137
एवं प्रकारकाः 47 | औष्ट्रीघृतं 150
एवं भुक्त्वा 218 | कङ्कोलं कटु तिक्तोष्णं 120
एवं सूरणवटकम् 39 | कङ्कोलजाती 227
एवं हि कुर्वन् 224 | कङ्गुकोद्रव 19
एवमयं हि 225 | कङ्गुस्तु मम - ,,
एवमन्येऽपि 42 | कच्चटं तिक्तकं 69
एवमेव प्रकारेण 47 | कटा हस्तपुटरस्थ 46
एवमेव बृहत् 70 | कटुकं कफवातघ्नं 109
एवमेव विजानीयात् 49 | कटु क्रिमिहरं 108
7
• श्लोका• पृष्टम् | • श्लोका• पृष्टम्
कटु ज्योतिष्मती 158 | कपिला पिङ्गला 118
कटुतिक्तकषायोष्णं 98 | कपोतं सार्षपं 212
कटुपाकं सरं 115 | कपोतपरभृत् 197
कटूष्णं दीपनं 66 | कपोतपारावत 207
कटूष्णं राजिका 69 | कफं रूक्ष 113
कटूष्णमार्द्रकं 64 | कफकृत् पवन • 94
कटूष्णो माहिषी 63 | कफकृत् पित्त 229
कटूष्णे वात 62 | कफघ्नं पित्तलं 52
कट्टभी कटूष्णा 85 | कफघ्नं रक्तवर्णानां 126
कणामूलतो 208 | कफघ्नो मधुरः 162
कण्टकारी कटूष्णा 82 | कफघ्नितद्रुमं 23
कण्टकोदरगतं 167 | कफपित्तहरं 98
कण्ठदोषहरो 120 | ,, 110
कण्ठरुक्शमनो 117 | ,, 112
कण्ठशुद्धिकरो 81 | कफपित्तहरा 23
कण्ठशोषणकरं 94 | कफपित्ताहरो 20
कण्ठशोषशमनो 61 | ,, 11
कण्ठस्य शोष 65 | ,, 14
कण्ठामयहरं 60 | कफपित्तास्रचीन् 112
कण्ठ्यं बल्यं च 60 | कफपित्तास्रजिद् 107
कण्डूकुष्ठप्रशमनं 182 | कफप्रकोपं 48
कण्डूपित्तास्रदं 183 | कफप्रकोपजननं 49
कथितानि काल 145 | कफभेदानिल 87
बध्यन्ते द्रावको 4 | कफवृद्धिकरं 84
कदम्बनिम्बजैः 194 | कफवातं 24
कदलीकुसुम 39 | कफवातकरी 17
कदलीफल 10 | कफवातहरं 53
कनकाभाः 54 | कफस्य हन्ता 15
कन्दमूलफलादीनि 125 | कफहरमरुचिघ्नं 109
कपालाहार 55 | कफहृद्दीपनः 61
कपित्थपत्रा 68 | कफहृच्च 194
कपित्थमातुलुङ्गैः 141 | कफानिल 40
कपित्थमामं 97 | कफास्रकण्डू 65
कपित्थं मधुराम्लः 96 | कफे पित्ते 144
• श्लोक• • पृष्ठम् • • श्लोक• • पृष्ठम् •
कपोतपक्षेण 179 कर्पूरी भिन्नचूर्णश्च 156
कवलञ्जु गदेष्वथ 210 कर्पूरं नारिकेलश्च 91
करं च हुंवरंग्वश्च 225 कर्मांरकोलश्च 98
करकाथं जलं 179 कलम्बी साम्यदा 75
करण्डकाकिर्वपुरः 157 कषायः कुरुते 18
करञ्जबीजं 152 कषायवातकं 76
करमक्षितं गुड़ 146 कलिङ्गो मधुरः 80
करमक्षितमथिक्षो 145 काम्बहामुं 225
करमर्दस्तितिक्ताम्लो 89 कवित्तं पित्त ”
करम्बी शतपर्वा 75 कषायं कटुकं 90
करीरं कटु तिक्ताम्लं 77 कषायं मधुरं 107
करीराः कटुकाः 99 कषायं कटु 150
करीरवाष्पाम्लकरं 77 कषायं स्वादु 155
करोति कुक्कुटोद्याति 110 ” ” ”
करोति चोल्य 220 ” ” 10
करोति दीपबल्यर्ति 109 कषायकटुतिक्तोष्णं 108
करोति पित्तं 51 कषायातिकं 112
” 54 ” 118
” 100 कषायमधुरस्वादु 101
कर्कटं तुवरं 78 कषायमधुरं 172
कर्कटी मधुरा 194 कषायमधुरा 14
कर्कन्धुदाह 85 कषायमधुरौ 11
कर्कोटकी कटूष्णा 65 ” 89
कर्पूरः कटु 72 कषायावुरसं 104
कज्जमर्ति 228 कषायानुरसः 11
कर्पूरः कफ 227 कषायानुरसाः 6
कर्पूरकहोल 154 कषाया अल्प 8
कर्पूरकैलं 206 कषाया कषषो 2
कर्पूरपूगी 140 कषायाः स्वादु 15
कर्पूरवासितो 119 कषायेषु गवाः 134
कर्पूरसिक्थिरः 141 कस्तूरिकादिस्नेहश्च 205
कर्पूरसिक्थैः 47 कस्तूरी धूम 119
कर्पूरादिसुगन्ध्ये 49 कस्तूरीवासितैः 118
• श्लोका• | पृष्ठम् | श्लोका• | पृष्ठम्
कांस्यं.शुद्धिप्रदं | 214 | ,,,, तोः | 196
कांस्ये दशाहे | 198 | कालेऽतीते | 218
काचमाची कटुः | • 71 | कालेन जायते | 202
काचेने रचितं | 214 | कावेरीसक्तिकां | 183
काञ्जिकं च | 207 | काषायमधुरो | 7
काञ्जिकं भेदि | 123 | काष्ठधात्रीफलं | 97
” ” | ” | देरजैः | 194
काञ्जिकं हि | 206 | कासघ्नं श्रमनाशनं | 147
काञ्जिकेषु | 38 | कासचर्काद | 65
कञ्जिके संस्थितं | 78 | कासपित्तो | 22
काचोषणाभ्यां | 198 | कासमर्दश्च | 72
काण्डीरः कटु | 106 | कासराख्यफलं | 114
कादम्बरी समुन्मुद्रा | 168 | कासश्वास | 149
कादलं गुरु | 26 | कासश्वासज्वरा | 65
कान्तसारमये | 129 | कासश्वासहरा | 41
कान्ता कफघ्नी | 76 | कासश्वासातिसार | 190
कान्ति देहस्य | 157 | कासामिसाहा | 189
कान्ति प्रदां | 126 | कासालुरुग्र | 62
कापित्थजम्बु | 135 | किञ्चित्कालं | 157
कामकोपातपायास | 223 | किञ्चित्कालकृतं | ”
कामरते वा तदन्ने | 118 | किञ्चित् तिक्ताः | 3
कामला पाण्डुगुल्मार्शः | 168 | किञ्चित्समगुणा | 47
कामला पाण्डुतृष्णाघ्न | 74 | किञ्चिदुष्णो रक्त | 67
कारवल्लीशुष्कफलं | 114 | किञ्चिदेकीकृते | 50
कारवल्ली सुतीक्ष्णोष्णा | 84 | किञ्चिल्लघुगुणा | 48
कारवेलं करूटकं | ” | किमत्र चित्रं | 207
कार्कटं तु फलं | 98 | किलासकफ | 118
कार्तिके मार्गशीर्षे च | 186 | किलासकुष्ठ | 146
कार्येऽपि ते | 25 | कीटकादियुतं | 167
काष्यं बाज्यकरं | 183 | कीटसंपीड | 189
कालखण्डादि | 53 | कीकसजत्व | 14
कालयोगान् | 101 | कुक्कुटकर्पर | 55
कालसेयं प्रति | 146 | कुक्कुटाण्डकलाबा | 6
कालसेयक | 145 | कुङ्कुमं सुरभि | 117
1081
10
| श्लोकाः | पृष्ठम् | श्लोकाः | पृष्ठम् |
|---|---|---|---|
| कुटिलाभ्यासनिन्दा | 48 | कृकलासश्चिरूप्यते | 218 |
| कुटिलाक्षिप्तस्य | 24 | कृकलासमयी | 70 |
| कुन्थकः | 68 | कृतान्नं च कषायं च | 212 |
| कुन्दातिमुक्ताः | 50 | कृतार्थ विम्ब | 89 |
| कुमुदोत्पलद | 64 | कृष्ण विरेचनात् | 87 |
| कुम्भातुरुम्बी | 80 | कृमिक्रियार्थज्ञा | 74 |
| कुरङ्गमांसं | 170 | कृष्णपक्वहरितं | 169 |
| कुरो तु तुत्तचाग्न्थ्यं | 20 | कृष्णानां वृहत्वाच्च | 151 |
| कुर्परं चीरखण्डं | 218 | कृष्णं रम्भाफलं | 88 |
| कुर्पाससमितश्चा | 34 | कृष्णः शल्की | 173 |
| कुर्पासनिहितं | " | कृष्णमुखः | 10 |
| कुर्परपदद् | 27 | कृष्णमेध्या | 188 |
| कुर्परै बहुधाऽक्षिप्तं | 138 | कृष्णशाकिः | 3 |
| कुशंखपालं | 223 | कृष्णसितकः | 16 |
| कुल्याया इति | 24 | कृष्णस्तु चणकः | 18 |
| कुशित्त्वपुटो | 82 | कृष्णस्तु रूक्षो | 156 |
| कुलित्थ गुरुयो | 25 | कुसरा शुक्ला | 27 |
| कुर्व तत्कार्य | 200 | केदारं क्षेत्रं | 186 |
| कुष्ठखण्ड | 184 | केडन्नाविकं | 129 |
| कुष्ठपागाकिमि | 154 | केवलाम्रमिति | 28 |
| कुष्ठमेहाकिमि | 63 | केशकीटक | 224 |
| कुष्ठमण्डक | 163 | केश्यं पित्तावरुहरं | 154 |
| " | 164 | केशस्वस्तिको | 90 |
| कुष्ठारिनामधेय | 182 | केसरं वारि | 186 |
| कुष्ठघ्नं स्वादु | 152 | केवारा बात | 2 |
| कुष्ठारिंकमृदि | " | केकाले यदि | 144 |
| कुष्ठाण्डक | 98 | कोद्रवो मधुरः | 20 |
| कुसुम्भतैलं | 152 | कोद्रवो हन्ति | 200 |
| कूष्माण्डकं च | 208 | कोमलं बीजमुन्ताकं | 86 |
| कूष्माण्डकवटो | 38 | कोलजम्बूः पहुः | 68 |
| कूष्माण्डकस्य | 210 | कोशातकी राजपद | 80 |
| कूष्माण्डखण्ड | 109 | कोशातम्पक्क | 105 |
| कूष्माण्डमण्द्यां | 39 | कोष्ठाकृतिकरा | 40 |
| कूष्माण्डांक | 38 | कोठे स्फोटाभिषग्व | 208 |
11
• श्लोका• पृष्ठम् श्लोका• • पृष्ठम्•
कोष्णं तीक्ष्णं च ६० गरीयो गुड २०१
कोष्णं वम्यं १७३ गर्दभप्रभवं १७०
कोष्णाम्बु पिहतान्न २०९ गर्दभीदधि १३७
कोष्णेन मण्डेन २०७ गर्दभीनवनीतं १४८
कौपं पयो वदि १८५ गर्मजावि च १२६
कौपं प्रह्वभवं १८६ गवयस्यामिषं १६९
कौपा वृष्याः १७५ गवां विविधवर्णानां १२६
कौसुम्भः कटुकः ६८ गवां क्षितानां ,,
कौसुम्भशाकं ,, गव्यं क्षीरं ,,
क्रमुकं पक्वानिलं २२० गव्यं तु दीपनं १४३
क्रिमिकुष्ठहरं १५२ गव्यं पूर्वाह्नकाले १२८
क्रिमिश्रीपद १८४ गव्यं वा माहिषं १४८
क्रिमिहृत् पित्त ८९ गलग्रहे सुत २२८
क्रोधः प्रमोहति २२३ गात्रमाश्वनुजे १७७
” २६ गात्रेष्वकटकं ७४
क्वचिदुष्णं १९३ गाजरं मधुरं ६०
क्वचिद्देवेष्वज १९३ गाढादिलवण ११६
क्वचिद्योगप्रभावेन २६ गिरिकदली
क्वचिका पाचनी ४० गुञ्जाद्वयं
खण्डं शूरं सरं १६१ गुडः कर्तापि २००
,, १६३ गुडः समधुरः १५९
खण्डेन सहितं १३० गुडगोधूम ५१
खर्जूरो रक्तपित्त ९२ ,, ५४
खर्जूरं मूत्रकं ८० गुडतोयारण्य २०१
खाडवं कफ १४६ गुडपिप्पलि २२४
गजकर्णाकन्दभवं १०९ गुडोदनं च २८
गडोत्थं च ११६ गुणहीनं निस्सारं १२९
गडोत्थं लवणं ,, गुणाधिक्यं तु १०८
गण्डूषान् सीत्कृतान् २२६ गुणानेषां यथा २९
गण्डूषैर्बहु ,, गुणे गुणज्ञैः ४४
गतौ स्वक्रान्ति २२४ गुष्टीकादिव ३६
गन्धनाः कुशविन्दार्य ६ गुरवस्त्वन्ये १०६
गन्धपत्रा कटु ६५ गुरवः पेष्टिका ५५
गन्धर्वहस्त १९३
71 (Wait: गुल्मशूलोदरा 71) | ग्रहशं वह्नम् 146
L21: गुल्मशूलोदरामान 115 | ग्रहण्यार्त्तो *
L22: गुल्मानाहकफार्त्ती 64 | ग्रहण्यां पाण्डुरोगे च 125
L23: गुल्मासोंग्रहणी 144 | ग्रहण्यां पीनसे 139
L24: गुल्मिनः क्षीरदध्यादि 203 | ग्राहकं च मधुरं 69
L25: गुल्मोदरार्शः 111 | ग्राहिणी बन्धिकृत् 30
L26: गूजरं कटुकोष्णं 59 | ग्राहिजो लघवः 15
L27: गूजरस्य मधुरं 61 | ग्राहिणोऽल्पबला 10
L28: गृष्टिकारं तु वातघ्नं 127 | ग्राही लघुर्वल 7
L29: गोदुग्धतः स्वादधिकं 132 | ग्राही स्यान्मधुरः 17
L30: गोदुग्धप्रभवं 134 | ग्रीष्मे तथा 140
L31: गोधामांसं तु 171 | ग्रीष्मे शरादि 193
L32: गोध
18
• श्लोका• पृष्ठम् श्लोका• पृष्ठम्
घृतं गार्दभिकं 150 चक्रवाकभवं 172
घृतं दुग्धभवं 151 चक्षुष्यं कटुकं 148
घृतं सज्जवनं 53 चक्षुष्यं महदोषघ्नं 138
घृतपूरं बलकरं 45 चक्षुष्यं दीपनं 112
घृतपूर्वं समश्नीयात् 216 148
घृतप्लुतेन चान्नेन 224 चक्षुष्यं भेदनं 102
घृतमर्धशरावं च 47 चक्षुष्यमेतदथ 95
घृतमानूपदेशोत्थं 203 चक्षुष्यं शुक्लं 82
घृतमुष्णोदकस्नानं 221 चक्षुष्यं शोष— 146
घृताक्तया समितया 47 चक्षुष्यं सर्वदोषघ्नं 148
घृताक्तसमिता 43 चक्षुष्यं स्तन्यकृत् 82
घृताक्तां समितां 49 चक्षुष्यममिदं 150
घृताक्ते जल• 45 चक्षुष्या अति 39
घृतान्वया समितया 43 चक्षुष्यो ज्वरहत 46
घृतान्वयसमिता ,, चक्षुष्योऽपि हि 201
घृतादिपक्कं मधुरं 224 चक्षुष्यो मूत्रलः 4
घृते तैलेऽथवा 50 चटकस्यात्मवित् 172
घृतेन तलिता 36 चणकश्शीतको 12
घृतेन वाथ 45 चणकस्य गुणैः 37
घृते सुगन्धे तद् 53 चणकाम्लोपमं 96
घृते हरिद्रा 27 चणका यव 21
घोरवात 40 चणको मधुरो 12
घोरानाह 45 चणस्य यूषं 82
घोलं मथितं 143 चणो गौरस्तु 13
घोलं मातृत ,, चतुर्थभागं 128
घोला च घोलिका 69 चन्दनं रक्त• 228
घोलभक्तं 27 चन्द्रकान्तोद्भवं 190
घोषपात्रे यदत्युष्णं 195 चन्द्रमण्डलसङ्काशा 54
घ्नन्ति शुक्रमरी 15 चन्द्रामृतस्राविणी 142
घ्नन्ति सन्तर्पणाः 24 चम्पायममृताभया 100
घ्राण्वा सकक्षां 210 चञ्चेरोधाक 69
चकोरशिखि 225 चञ्चेरोसहशः 75
चकोरस्याक्षिबैराग्यं 197 चाणक्या रोटिका 36
चक्रमर्दः कटुः 72 चाण्डालकण्हो 64
16
श्लोकाः पृष्ठम् | श्लोकाः पृष्ठम्
चान्द्रायणकृमिदं 181 | चर्वणोद्गार 28
चारः पित्तकफा 97 | चर्वयन् कफ 96
चाङ्गेर्यम्लरसोष्णा च 178 | छागगोतक्रजं 171
चिञ्चिण्डो वातपित्तघ्नो 81 | छागमांसं गुरु ,,
चित्रातोये 38 | छागलो रस 172
चित्रामृतका 98 | छायादेरपि 51
चित्रापत्रं तु ,, | छायादेस्तत्कृतस्य 52
चित्रफलभवं 171 | छिच्छीकन्दः 64
चित्रफला कफघ्नी 86 | छेदसक्ता हिता 3
चिरमथितं 144 | जठराग्नेः प्रवर्धनं 194
चिरस्थो दाह 119 | जठरान्नकरु 175
चिरेण पच्यते 19 | जन्तुविग्धां 101
चिर्भिटस्य फलं 114 | जन्तुमांस 191
चिर्भिटिका चैव 73 | जम्बीरस्य फलं 95
चिल्ली वास्तुक 66 | जम्बीरोक्तं 108
चीचकः कटु 120 | जम्बूः कषाय 99
चीचकर्कटिका 79 | जम्बूपट्टामयैः 194
चीनाकः कटुभेदो 19 | जयेदपि 111
चुक्रं स्वाम्ल 66 | जयेद्वमथुं 109
चूर्णं तिन्त्यात् 227 | जयेदार्र्द्र 78
चूर्णं बकुलबीजस्य 121 | जरणं दाडिमं 41
चूर्णं दध्युक्त— 35 | जलं निर्मलं 181
चूर्णपर्णं हरेद्वायुः 220 | जलपात्रं तु 214
चूर्णवित्वेव 49 | जलाद्धस्तस्ततः 185
चूर्णौषिने तु 220 | जले चतुर्थांश 27
चूर्णितेनोद्रिक्तं 190 | जलेन शीतलेनैव 122
चूर्णीकृतैः 39 | जलेनैकं चतु र्थं च 193
चूतितं तत् परं 104 | जलेषु दिव्य 211
चेतकी च श्रुता 101 | जलोपरि 45
चौलं वह्निकरं 185 | जवादि सौरखं 121
चौरं स्वादु 96 | जाङ्गलं परमानूपं 177
छत्रार्कं तु 165 | जाङ्गलं सखिलं 179
कर्दिशा मक्षिकाविट् 208 | ,, 180
कर्दशी कौशला 84 | जातं तामस्रतः 96
18
श्लोकाः | पृष्ठम् | श्लोकाः | पृष्ठम्
जातीपत्री कटुः 120 | त एवं लवणो 25
जातीफलं ,, | तक्रं ग्राहि 202
220 | तक्रं तलवणो 144
जाम्बीरं स्वादु 111 | तक्रं त्वचाविप्रभाव ,,
108 | तक्रं देयं न क्षते 145
(जीरा ? जरा) मिरा 208 | तक्रं पिष्टमरीचं 37
जीरकं कटुकं 115 | तक्रं लघु 146
जीरकं पचति 204 | तक्रं रुचिकरं 123
जीरकस्योष्णिका 36 | तक्रं लवणहीनं 144
जीर्णं तु सर्वं 169 | तक्रपिण्ड 127
जीर्णज्वरं मूत्र 126 | तक्रीमांसं तु 52
जीर्णज्वरे कफे 128 | तक्रीमांसं कफं 144
जीर्णज्वरे मनो 125 | ,, 202
जीर्णज्वरे शैथिल्य 191 | तक्रस्योपरि 146
जीवनं बृंहणं 125 | तच्चूर्णं बेसनं 42
जीवनीयमपि 200 | तच्चेत् काम्ब्यावर्तितं 129
जीवन्ती चेतकी 100 | तज्जातं मधु 165
जीवन्तीफलं 99 | तज्जातं मधुरं 136
जीवन्ती मधुरा 70 | तडागजाः प्रावृषि 175
जुगुप्सितां रुजां 225 | तडागवापिशङ्ख ,,
ज्वरदाहकरः 16 | तण्डुलत्रिगुणं 28
ज्वरनेत्र 115 | तण्डुलद्विगुणे 28
ज्वरातिसार 32 | तण्डुलस्य त्रिभागेन 29
ज्वरे च ग्रहने 151 | तण्डुलांश्चापि 52
झाडव्यो बाङ्गलो 179 | ,, 27
ज्ञेयः शष्को 173 | तण्डुला शालि ,,
ज्ञेया च कफकृत् 63 | तण्डुलार्थे मुद्ग 28
झररिक्करी 68 | तण्डुलाश्च लवङ्गानि 51
झरसी मूत्रदोष ,, | तण्डुलीयकदलं 69
झर्झरी कफ 36 | ततः किञ्चिन्न्यूनं 149
झाकिर्हरति 124 | ततः किञ्चिल्लघुः 44
टङ्कारी शीतला 78 | ततः क्रमात् 6
डिण्डिशो रुचिकृत् 79 | ततश्चुरिकया तां 44
ततः परं भोजनं 224
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| श्लोकाः | पृष्ठम् | श्लोकाः | पृष्ठम् | |
|---|---|---|---|---|
| तंतः प्रसन्ननेत्रिश्च | २२६ | तथाऽम्लयोगे | २२६ | |
| ततस्ततो वृतो | २०० | तथा भोज्यं | ४८ | |
| ततस्तद्द्विगुणान् | २२१ | तथा विरचिता | ३८ | |
| ततस्तां क्षुप्तयेत् | ४४ | तथैव केशुदीतैलं | १५३ | |
| ततस्तु प्रक्षिपेत् | ४७ | तथैव भोजनस्य | १९८ | |
| ततस्तु वेल्लयेत् | ४४ | ततस्तन्मलं दन्तरोगम् | . १५६ | |
| तृतस्संक्षुद्य | ” | तदधं शुद्ध चूर्णं | २८ | |
| ततो निष्कास्य | ४० | तदर्थमाज्यं | २९ | |
| ततो बद्ध | २२६ | तदर्धस्नुविरेषेण | ८७ | |
| तत् कुर्यात्स्नान | १८९ | तथा हि लवणं | १२९ | |
| तत् क्षारं कफवातघ्नं | १८५ | तदिदं भुवि | १४६ | |
| तत्तद्गुणान्वितं | १८३ | तदुद्धृतं यत् | १६६ | |
| तत्त त्रिदोष | १७८ | तदुपद्रवशान्तिकरं | २०४ | |
| तत्तु मोमोद्भवं | १८४ | तदेकं तु गृह्य | ६६ | |
| तत्तु धान्यामिति | ५८ | तदेव वाद्यतं | १३१ | |
| तत्तु सक्षारलवणं | १७८ | तदेव तक्रे पीतं | १२८ | |
| तत्तु संस्वेदयेत् | ४० | तदेव द्विगुणे | १३१ | |
| तत् पक्वं मधुरं | ९० | तदेव पक्वं मधुरं | १०५ | |
| तत् पीयूषमिति | १२७ | तदेव पक्वं विहेयं | ९८ | |
| तत्पुष्पं सर्व | ७४ | तदेव मद्यं मद्यस्य | २०३ | |
| तन्मोरटंकं | १२७ | तदेव मिष्टं कफदं | १८५ | |
| तद्यायुम्य | १३७ | तदेव शुद्धसंपक्वं | १०४ | |
| तत्पक्कं तैल | ७४ | तदेव हि गुरु स्निग्धं | ८७ | |
| तत्फलस्य विकारजं | ८३ | तदेवातिश्रुतं | १३० | |
| तत्र काविदरपि | १७२ | तद्गात्रं सर्वदोषघ्नं | १७८ | |
| तत्र तापत्रिया | २ | तद्गुणाः फलवत् | ८४ | |
| तत्रत्वमुद्दकं | १८५ | तद्गुणा तिक्तमधुरा | १६२ | |
| तत्र वातकफकारे | ९२ | ” | १६३ | |
| तत्र द्विगुहृद्वियां | ५१ | तद्गुणास्तेऽपि | ४२ | |
| तथापि चातितीक्ष्णं | १३६ | तद्गुणानि तु | १० | |
| तत्राग्नेषु त्रिषु | १०३ | तद्दर्धं प्रस्रुतं | २६ | |
| तथा घृतं च | २२२ | तद्ववो गाङ्गितो | १०४ | |
| तथा पचेत | ५२ | तद्वृक्कस्तथावरक | १०७ | |
| तथा मेदः | २३ | तद्वच्च कृच्छ्रोऽपि | १५६ |
१७
श्लोकाः पृष्ठम् श्लोकाः पृष्ठम्
तुद्रश्च धूसरो ११ तस्य पुष्पं तु ९९
तद्वच्च कावकं १७२ तस्य शुष्कत्वचः ९८
तद्वच्चारण्य ,, तस्यां तत्पूरणं ४३
तद्वत्तित्तिरिपट्टाभ्या १९९ तस्यायुष्यं श्रोः २१३
तद्वद्वह्नप्रशान्त्यर्थं १२३ तस्यास्तु गोलकं ४२
तनोति पामाकण्डूति १८० तस्यास्तु वटकं ,,
तधीरे कृतसंस्कारे ३८ तस्यैवं तरुणं १८७
तन्मधुरं गुरु १५४ तस्येव श्लेष्मकारित्वं २०१
तप्तं तप्तं हेम वा २०८ तां खादेत्कण्डिका ३४
तप्तं दिवा जाड्यं १९२ तां भक्षयेदति ३६
तप्तं निर्झरजं १९४ तांश्च निर्णिज्य • २८
तप्तं पाथः १९२ तां सुपक्वां ४७
तप्तके स्वेदयेत् ३५ तांस्तान् व्याधीन् २१७
तप्ततलगृत ५४ ताटाकमुदकं १८५
तप्तायःपिण्ड १९२ तान् मुद्गदल ५६
तर्पणं रोचनं १८० तापी वेत्रवती १८२
तर्पणं लघु ५३ ताभिरुत्पादितं १६५
तर्पणा मधुराः २३ ताम्बूलं कटु तिक्तं २१९
तलितं बलमेधा ५८ ताम्बूलं नातिसेवेत २२०
तालतास्तम ३४ ताम्बूलपत्रसङ्घातः २१९
तवराजोऽतिमधुरः १६४ ताम्बूलपत्राणि २२७
तस्मात्तु वामपार्श्वे २२१ ताम्बूलमेतत् ,,
तस्मात्स्वल्पं च १९२ तम्बूलयोग्यं २२८
तस्मादग्रं तथा २१९ ताम्रपात्रात्पत १९५
तस्माद्गुढ १७१ ताम्रे वातहरं १२९
तस्माद्बुधः ५९ तालजं तरुणतोयं १०३
तस्माद्भरो वह्नि १९२ तालमज्जा तु ,,
,, २१८ तालमूलस्य १२१
तस्मिंश्चूर्णे क्षिपेत् ४३ तालादिरस १६८
तस्मिन् घनीकृते ३४ तावद्दर्जति ३५
तस्मिन् देशे १८० तावद्विरिच्यते १०१
तस्मै नमः परानन्द १ तासां मात्रत्रयात् १२९
तस्य खण्डं गुरु परं १०४ तास्तु संविहिताः ४४
तस्य धातून् १३२ तिक्तं कटूष्णं ६८
1081
श्लोक• पृष्ठम् श्लोक• पृष्ठम्
तिक्तं कटूष्णं 113 तुषाम्बु दीपनं 124
तिक्तं कषायं 224 तुषाराम्बु हिमं 179
तिक्तं बाल्ये 78 तुषोदकं यवैरामैः 124
तिक्तं रूक्ष्यं 84 तुहिनशिशिरकाले 139
तिक्तं विदाहि च 148 तृदं गुरु सरं 100
तिक्ता कटूष्णा 114 तृदकफापहम् 114
तिक्ता लोहारजा 82 तृदापत्तदाह 88
तिक्ताम्लमधुरं 154 तृट्यक्षामिदोष 57
तिक्ता स्वादु हि 84 तृणधान्यं 19
तिक्ता स्वादे पि 118 तृणाम्लेन 24
तिक्तो मधुरकश्च 20 तृतीयादि तु 220
तित्तिरो मधुरः 5 तृषापहा दाह 88
तिलतैलं वरं 155 तृषितस्तु न 218
तिलतैले 151 तृषितस्तु भवेत् ,,
तिलावघाट्टत 57 तृषितो मोहं 192
तीक्ष्णं तु राजिकातैलं 153 तृष्णीं हरति 177
तीक्ष्णं पित्तकरं 113 तृष्णामिश्रजनं 109
तीक्ष्णाग्निना तु 132 तृष्णापित्तानिलहरं 187
तीक्ष्णाग्निशमनं ,, तृष्णामूर्च्छामद 97
तीक्ष्णोष्णं तुवरीतैलं 152 तृष्णोमोहध्वंसनं 180
तीक्ष्णोष्णं दोषजित् 85 तृष्णाविदाह 119
तीक्ष्णोष्णं पाचनं 124 तृष्णाहृल्ल 111
तीक्ष्णोष्णं सार्षपं 106 तृष्णाशीथ 229
तीक्ष्णोष्णः परिणाम 228 तेऽतिखण्डा 175
तुङ्गशस्त्राजकं 183 तेन हर्षा भवेत् 225
तुम्बी तु मधुरा 84 तेन हृत्कण्ठशुद्धिः 193
तुम्बी समधुरा 80 ते पीता बलदाः 23
तुर्यांशेन जलेन 123 ते बध्या लघवः 47
तुल्यस्य तस्य 51 तेभ्यस्त्वतिशशितं 126
तुल्याज्यतैलं 121 ते वदन्ति मुनयो 204
तुल्याज्ये कर्णिकारस्य ,, तेषामर्घबले 131
तुल्ये अपि हतो 201 तेषु यवाम्ल 80
तुवरं स्वादु 186 तेष्वपि च हंसमांसं 172
तुवरो बावनाळस्तु 9 ते स्निग्धाः क्षीरिकाः 30
19
श्लोकाः पृष्ठम् श्लोकाः पृष्ठम्
तैलं तु सद्य 154 त्रिदोषशमनी रुच्या 95
तैलं न संवेयेत् 155 त्रिदोषशमनो 5
तैलं सर्जरसोद्भूतं 154 त्रिदोषहारि 170
तैलं स्वयोनिवस्त्र 151 त्रिदोषहारी 156
तैलप्रयोगाज्जरा 155 त्रिपर्णी मधुरा 64
तैलन्नुष्णा रुचिकराः 39 त्रिपुटी मधुर 14
तैलानि सर्वाणि 207 त्र्यस्रां तु वेतकीं 100
तैलाभं फेनिलं 189 त्वक् तिक्ता कटुका 111
तैलाक्तं कन्दमूकनि 202 त्वक् तिक्ता दुर्जरा 95
तैले तान् गोलकान् 42 त्वक् पुष्पं कवचं 58
तैलेऽथवापि 25 त्वग्दोषकृत् 151
तैले विपक्वा 48 त्वग्दोषव्रण 153
तैलेषु तक्तजं 211 त्वग्दोषशमनो 18
तोदनं लघु सङ्ग्राहि 100 त्वग्दोषश्रमहा 63
तोयमागधिकोद्भूतं 109 त्वचं तु कटुकं 117
तोयभावे पिपासार्त्तः 198 त्वचा विस्फोट 94
तौषारं च तथा हैमं 177 दग्धबीजाः 25
त्यक्तास्तत्र मनो— 37 दग्धायां भुवि 21
त्रपुषात्रोदकं 195 दण्डादिमन्थनात् 201
त्रपुसस्य फलं 79 दण्डाहतं त्रिपादोष 145
त्रपुसाज्जातहरितं 110 दण्डाहतं प्रमेहघ्नं 146
त्रपुसोर्वारुक 154 दण्डैर्विहत्य 167
त्रिंशत्पलानि 140 दत्ते धातुप्रचयं 103
त्रिःसन्ध्यायां 173 दन्तच्छेदनमुष्णं च 217
त्रिदोषकृत् 152 दन्तलश्रमनिहार्थं 218
त्रिदोषघ्नं 153 दन्तान्तर्गतं "
त्रिदोषघ्नी पित्त 162 दन्तामलं दन्तशोषं 80
,, सिता 164 दद्यात्तत्रैव 222
त्रिदोषतापश्रम 65 दद्रुकुष्ठादि 183
त्रिदोषशमनं श्रेष्ठं 52 दधिकूचिका च 147
,, पथ्यं 86 दधितक्राभ्यां 224
,, पूतं 116 दधि त्रिकटु 139
,, वीर्यं 195 दधि त्वसारं "
त्रिदोषशमनी पथ्या 66 दधिसर्पिःपुडः 114
20
श्लोकाः । पृष्ठम् श्लोकाः । पृष्ठम्
तथा शष्कुलिकांश्चैवं 201 दाहशोषकरं 117
दस्तूपरि वस्तव्यं 146 दाहशोषप्रमेहघ्नो 6
,, षो भागो 142 दाहश्रमहरो 156
दध्नो तक्रण 127 दाहाध्मान 93
दध्ना पर्युषितं 224 दाहापहं पित्त 151
दध्ना संयोज्य 51 दिवाकराभितप्तानां 181
दध्नो मण्डो 138 दिवा न नक्तं च 192
दग्धवस्त्रावच्छाद्य 186 दिवास्वापाज्ज्वरो 208
दग्ध्वाऽथं कफवातघ्नं 137 दिव्यं चतुर्विधं 177
दग्धूत्तरो दधिसरो 147 दिव्यं वार्यग्नि 178
दशान्नर्मदरिबस्तु 220 दिशानया शेषमपि 203
दशरात्रोषितं 224 दिशोऽनूप 179
दशासमुषितं 212 दीपनं कफवातघ्नं कुष्ठ 150
दहनमरिच योगात् 32 ,, वातश्लेष्मघ्नो 116
दाडिमं द्विविधमीरितं 92 ,, वातार्शः 69
दाडिमं मधुरमम्लं 92 दीपनं गुरु 98
दाडिमामलकं 211 दीपनं पाचनं रुच्यं कफ 120
दाडि 204 ,, रुच्यं लघु 66
दाडमं शीतलं 179 ,, हृद्यं 96
दारुद्रवे विशेषेण 214 दीपनं बलकरं 187
दालं कटु कषायाम्लं 166 दीपनं यत्कृत 3
दालवच्चणकानां 42 दीपनं रोचनं तीक्ष्णं 114
दाली तु सलिले 31 ,, मद्यं 169
दाली संस्वेदिता 36 दीपनं वात 82
दाहं निवारयति 165 दीपनः कफ 155
दाहं वा नैति 118 दीपनः कफहारी 99
दाहघ्नो मधुरो 92 दीपनः पाचनः 174
दाहज्वरहरं 128 दीपनः पाचनश्चैव 4
दाहतृट्च्छर्द 164 दीपनः पित्तकफहृत् 32
दाहपित्तप्रदा 18 दीपनपाचन 54
दाहपित्तवमीं 97 दीपनाः कफवातघ्नाः 77
दाहमूर्च्छाज्वर 92 दीपनः पाचनाः 37
91 दीपनास्तर्पणाः 42
दाहशोफापहो 65 दीपन्यो कफहृत् 35
21
श्लोका• पुटम् श्लोका• पुटम्
दींपनी तर्पणी 130 देशाज्जाङ्गलकरं 180
दीपनी पाचनी 115 देशेषु मुद्गलानां • 94
दीपनी बृंहणी 141 देहसात्म्यं 202
दीपनीयं लघुतरं 139 देहस्थैल्यापहं 166
दीपनी योनिदोषघ्नी , 85 दोषकाः श्लेष्मलाः 45
दीपनी शूलगुल्मा 72 दोषत्रयहरं 97
दीपने गुल्महारी 63 दोषहृत् दृष्टिकृत् •214
दीप्ताग्नीनां 127 दोहानुशीतं 129
दीप्तिदं लघु 138 द्रवं प्रयाति 193
दीप्तिवर्णकरो 12 द्रवभाग्नि 127
दुग्धेन साज्य 33 द्वाव्यमपि 217
दुग्धेनार्धघृतेन 140 द्वाधिका स्वल्प 26
दुद्दाला मधुरा 10 द्रवीभवत्यजांमासं 96
दुर्जरं दोषलं 113 द्रवो द्रवोत्तरः 217
दुर्जरं बलकृत् . 49 द्रव्याणामाई 195
दुर्जरं बहुमूत्रं च 102 द्रव्याणि वेक्ष 51
दुर्जरा बहु 27 द्रव्यान्तरावरोधि 130
दुर्जरा लघवो 40 द्राक्षातिमधुराम्ला 92
दुर्नामकफ 99 द्राक्षाबालफलं 93
दुर्नामकुष्ठानल 61 द्राक्षेक्षवः सखर्जूराः 169
दुर्नामकृच्छ्रघ्ना 76 द्रोणपुष्पी कटुः 73
दुर्नामाक्रिमि द्रोणपुष्पीदळं 73
दुर्नामगुल्म 59 द्रोणेयं लवणं 117
दुर्नामग्रहणी 149 द्वात्रिंशत्पलसम्मितं 142
दुर्नामरोगग्रहणी 136 द्विकुष्ठकोऽसौ 173
दुर्नामश्वास 137 द्विप्रस्थां सुमितां 47
दुर्भाजनस्था 201 द्वीपान्तरसमुत्पन्नः 72
दृक् शुक्रहृत् 18 द्वीपान्तरात् समानीतो 6
दृष्टं स्यात् कादळं 121 दूष्वन्दोषितं 21
दृष्टिदोषविनाशाय 215 धन्वन्तरियंत्र 102
दृष्टिप्रसादं कुरुते 68 धर्मा विचित्रा 200
दृष्टेः स्पृष्टे 202 धवलो यावनालस्तु 9
देशानां भोजन 223 धातकीगुडतोयानि 202
४२
श्लोकाः पृष्ठम् । श्लोकाः पृष्ठम्
धातुक्षये रक्तविकार १९१ । न तत् पक्वेन १७०
धातुशोणितकाडीरस १९६ । नेत्रनिमिषक १८३
धातुपुष्टिकरी ४७ । नदीनिष्पावकः १६
धातुसाम्यकरं १९५ । नद्यः प्राच्या १८४
धात्रीदाह १९४ । नद्यः सैह्यवराच्च ”
धात्री पथ्या ११८ । नयादिनिशेटे १८६
धौतास्तु दुर्जरा • २८ । नया नदस्य १८०
धान्यं योज्यं च १ । न भवेत् काञ्जिकं १२४
धान्यं वापितमुप्तं २१ । न भुक्त्वा न २४
धान्यानि प्राहु २३ । नमः प्रचण्ड १
धान्यानां कम्बुकं १० । न मूर्च्छाभ्रम १४१
धान्याम्लं १२५ । नवं धान्यं २१
धान्याम्लं कालि ” । ” ” २२
धारं नीरं १७७ । नवं मधु १६६
धाराभिः पतितं ” । नवनीतं तु नारीणां १४८
च वायुशीतं १३१ । नवनीतं सद्यस्कं ”
धारोष्णं त्वमृतं १२९ । नवनीतं नवोद्धृतं ”
धारोष्णममृतं १३१ । नवनीतं शृङ्गवेरं १३४
” पथ्यं ” । नवा स्निग्धायता १०१
धीकान्तिस्मृति १४९ । नवीने मृन्मये १२३
धूमसी तु द्रवी ४६ । नष्टदुग्धभवं १२७
धूमनीरचिता सेष ३६ । नष्टदुग्धस्य ”
” हिङ्गु ” । नष्टनिद्राविनिन्द्रेभ्यो १६९
धूमावश्वनिर्मुक्ताः १७९ । नस्तश्चाक्षोतेन १३३
धूमेनापोद्य २१९ । न हि कष्टतमं १६७
धूमाकृतिस्तु ११८ । नलिने कुमुदे २१५
धौतं निर्गेळितं ५१ । नाकुलीयुगळं ६८
ध्यानमण्डलता १९६ । नागरं हरति २०४
ध्याक्षः स्वरान् २२८ । नागरस्य रसोन्मिश्रा १४१
नखान्यनां ७१ । नागरा मरिचा १४२
नखरोगच्युतेः १९७ । नाडीका रक्त ७४
न च शरदि वसन्ते १८९ । नातिदोषकराः १०७
न तत्र बहुशः २१८ । नातिपच्याः २०२
! तपात्स्नानं ” । नातिस्थूलो १७८
28
श्लोका• | पृष्ठम् | श्लोका• | पृष्ठम्
नादेयमम्बुपानात् | 132 | निरामयानां | 151
नांद्यं नंबन्मृन्मयेषु | 186 | निर्गुण्डिपुष्पं | 107
नानाद्रव्य | 168 | निर्दोषं वात | 171
नानाद्रव्यात्मकं | 167 | निर्मलं निर्विषं | 178
नानापुष्पफल | 141 | निर्माय भोजन | 229
,, रसा | 165 | निर्वयकरणे | 28
नान्धकारे न | 223 | निशंशुक्वात्ययात् | 223
नारंगं दाडिमं | 141 | निश्चल्का निन्दिता | 174
नारंगं मधुरं | 95 | निश्शूको दीर्घ | 8
नारिकेरं तनुकृत्य | 30 | निषेवेत हितं | 199
नारिकेरं सकर्पूरं | 43 | निषेव्यमाणं • | 200
नारिकेरफलं | 204 | निष्कामस्यापि | 132
नारिकेरसलिकं | 187 | निष्पावा वात | 15
नारिकेरस्य | ,, | निष्पावा द्वौ | 81
नारिकेराम्बु | . 188 | निस्तुषैर्मुद्ग | 38
नारिकेरोदकं | 187 | निस्तुषैश्चणकैः | 23
नारिकेरोद्भवं | 154 | निस्तुषो मुद्ग | 31
नारिकेरोद्भवा | 30 | निस्तुषो मुद्गं | ,,
नारिकेली गुरुः | 90 | निस्स्नेहं दीर्घपत्रं | 120
नारीकेरफलेऽथ | 203 | निस्सारो वातलो | 9
नित्याचारपवित्र | 222 | निहन्ति कटुकं | 137
निन्दिताः फलं | 89 | निहन्ति पित्तं | 89
निद्रालस्यकरी | 67 | निहन्ति पित्त | 151
निद्रालस्यनिवारणं | 176 | निहन्ति सद्यो हि | 208
निद्रासात्म्योऽथवा | 226 | निहन्ति हस्तिनी | 150
निपालेऽपि च | 118 | निहन्त्याध्मातं | 113
निपुणो भर्जयेत् | 47 | निहन्याद्विश्वजं | 106
निमज्जेषा | 101 | नीला राजी | 196
निम्बतैलं तु | 153 | नीलाङ्गुर्मधुरः | 62
निम्बुफलं | 95 | नीहारे सरचीतटाग | 186
निम्बूफलं | 122 | नूतनं घटमादाय | 47
निम्बूफलेन | 206 | नैकश्यं पयसा | 155
निम्बूरसं | 41 | नैर्झरं रुचिकृत् | 184
24
श्लोक• पृष्ठम् श्लोक• पृष्ठम्
नैव तंकं 144 पटोलं शाकशाकेषु २११
नैव क्लान्तं 145 पटोलः शाकवर्गेषु 184
नैरोज्यं 139 पटोलपत्रं 81
नोदकान्तरितात् 24 पटोलं व्याहृतं 205
पक्तवा जले 50 पटोली स्वादु 81
पक्वं चेन्मधुरं कषाति 96 पट्टिकांस्तु 74
", " तथाऽम्ल 93 पट्टसूत्रमयं 229
", त्रिदोष 104 पतद्वाततपनीयाश्च 6
पक्वं तालफलं 102 पतन्ति बिन्दवः 46
पक्वं तु कतकं 112 पत्रं तु बादरं 94
पक्वं तु पित्तहृत् 93 पत्रं पुष्यं फलं 49
पक्वं तु मधुरं 104 पत्रं सुरणजं 74
पक्वं तु मधुराम्लं 98 पत्रकं कटु 117
पक्वं तु मधुराम्ला 98 पत्रशाके तु 211
पक्वं दोषत्रयघ्नं 166 पत्रशक्यमुशन्ति 61
पक्वं भवेन्मधुरं 105 पत्राणि पुष्पाणि 105
पक्वं मांसं 176 पत्रेषु क्षीरवृक्षाणां 215
पक्वं वदेतत् 29 पथ्यं चायुर्बलं 180
पक्वं लघूष्णं 77 पथ्यं दोषहरं 194
पक्वं श्लेष्मकरं 86 पथ्यं पटोलहरितं 110
पक्वचिञ्चाफल 98 पथ्यं बाह्ये 150
पक्वमेतदपि 187 पथ्यं वह्निकरं 182
पक्वरस्तु मधुराम्लः 93 पथ्यं वातप्रकोपेषु 188
पक्वस्त्रिदोषशमनो 89 पथ्यं विषे 89
पक्वस्य सहकारस्य 105 पथ्यं सुगन्धि 193
पक्वामलकफला 89 पथ्याः हृद्याः 40
पक्वे तैलावशेषे तु 121 पथ्याःसमस्ताः 183
पक्वेषां संहितैः 124 पथ्या नान्दीमुखी 8
पक्षिणां तित्तिरिः 211 पथ्यास्सर्वगदे 7
पक्षी श्वेत पुच्छो 176 पथ्यो मज्जा च 101
पचेद्भाजने • 43 पनस मधुरं 88
पचेद् घृते 44 पनसकामलकी 205
पद्म सदाकराः 169 पनसस्य फलं 88
पद्माक्षा च 100 पनसस्यातिपक्वस्य 84