भोजनकुतूहल: प्रथम भाग (रघुनाथ नवहस्त - आहार-रसायन, पाकशाला-व्यवस्था व विरुद्धाहार)
Bhojanakutuhala of Raghunatha Navahasta
रघुनाथ नवहस्त (सम्पादक: सूरनाड कुंजन पिल्लै) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें21
श्लोका• पुटम् श्लोका• पुटम्
दींपनी तर्पणी 130 देशाज्जाङ्गलकरं 180
दीपनी पाचनी 115 देशेषु मुद्गलानां • 94
दीपनी बृंहणी 141 देहसात्म्यं 202
दीपनीयं लघुतरं 139 देहस्थैल्यापहं 166
दीपनी योनिदोषघ्नी , 85 दोषकाः श्लेष्मलाः 45
दीपनी शूलगुल्मा 72 दोषत्रयहरं 97
दीपने गुल्महारी 63 दोषहृत् दृष्टिकृत् •214
दीप्ताग्नीनां 127 दोहानुशीतं 129
दीप्तिदं लघु 138 द्रवं प्रयाति 193
दीप्तिवर्णकरो 12 द्रवभाग्नि 127
दुग्धेन साज्य 33 द्वाव्यमपि 217
दुग्धेनार्धघृतेन 140 द्वाधिका स्वल्प 26
दुद्दाला मधुरा 10 द्रवीभवत्यजांमासं 96
दुर्जरं दोषलं 113 द्रवो द्रवोत्तरः 217
दुर्जरं बलकृत् . 49 द्रव्याणामाई 195
दुर्जरं बहुमूत्रं च 102 द्रव्याणि वेक्ष 51
दुर्जरा बहु 27 द्रव्यान्तरावरोधि 130
दुर्जरा लघवो 40 द्राक्षातिमधुराम्ला 92
दुर्नामकफ 99 द्राक्षाबालफलं 93
दुर्नामकुष्ठानल 61 द्राक्षेक्षवः सखर्जूराः 169
दुर्नामकृच्छ्रघ्ना 76 द्रोणपुष्पी कटुः 73
दुर्नामाक्रिमि द्रोणपुष्पीदळं 73
दुर्नामगुल्म 59 द्रोणेयं लवणं 117
दुर्नामग्रहणी 149 द्वात्रिंशत्पलसम्मितं 142
दुर्नामरोगग्रहणी 136 द्विकुष्ठकोऽसौ 173
दुर्नामश्वास 137 द्विप्रस्थां सुमितां 47
दुर्भाजनस्था 201 द्वीपान्तरसमुत्पन्नः 72
दृक् शुक्रहृत् 18 द्वीपान्तरात् समानीतो 6
दृष्टं स्यात् कादळं 121 दूष्वन्दोषितं 21
दृष्टिदोषविनाशाय 215 धन्वन्तरियंत्र 102
दृष्टिप्रसादं कुरुते 68 धर्मा विचित्रा 200
दृष्टेः स्पृष्टे 202 धवलो यावनालस्तु 9
देशानां भोजन 223 धातकीगुडतोयानि 202