आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
८ आल्हखण्ड । ५५०
बिरा धरावा गा गौने का रहिगा चार घरी लौं पान ६९
कोऊ खावा जब बीरा ना तब मैं उठा शारदा ध्याय ॥
कर्सों हमरे बीरा लीन्ह्यो तुम्हरे कन्त चँदेलेराय ७०
माहिल भूपति तहँ मुसकाने हमरो मरण समय गो आय ॥
कछु नहिं बोले परिमालिकजी दादा हमरे उठे रिसाय ७१
कहा हमारो तुम मान्यो ना ऊदन गयो मोहोवे आय ॥
सवन चिरैया ना घर छोड़ै नावनिउरा बनिजकोजाय ७२
तबै निकार्यो परिमालिकजी दीन्ही बहुत तलाक माय ॥
गे जगनायक जब लेने को तब नहिं अवै बनाफरराय ७३
बहु समुझाये ते आये ते लाखनिराना संग लिवाय ॥
भरी कचहरी परिमालिक की ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ७४
वासरि करिकै द्वासरी कीन्ही दूनों भाय गयन अलगाय ॥
दादा रोंका मोहिं अवतीखन तुमनहिंजाउलहुरवाभाय ७५
वादा तुमते हम कीन्हा था तुम्हरी बिदा लेब करवाय ॥
गड़बड़िचिट्ठीतुमअतिलिखिकै धावन हाथ दीन पठवाय ७६
सो दिखलावा नहिं दादा को कण्ठै हाल दीन बतलाय ॥
दूध पियावा मल्हना रानी स्यावामोहिं बहुत डुलराय ७७
व्याह हमारे मल्हना रानी कुँवना पाँव दीन लटकाय ॥
प्राण नेग दै मैं मल्हना को टार्यों पैर तहाँ ते माय ७८
प्राण निछावरि तुमपर करिकै बिछुरे कन्त देव मिलवाय ॥
इतना सुनिकै बेला बोली यहनहिंआशपूरिदिखलाय ७९
कुटुंब हमारो सब बैरी है हमको राँड़ दीन करवाय ॥
जियत पिथौरा औ ताहर के कैसे मिलब पियाको जाय ८०
प्रभुता ऐसी क्यहि क्षत्री मा प्रीतम मिलन देय करवाय ॥
बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५१
शब्द कान सुनि तीर चलावैं हमरे पिता पिथौराराय ८१
लाखनि ऊदन कै गन्ती का हमरी बिदा लेयँ करवाय ॥
डोला लाये संयोगिनि का तब कहँ हते कनौजीराय ८२
सोई लाखनि की दूसर हैं हमरी बिदा लेयँ करवाय ॥
रहे आसरा तुम्हेरो ऊदन सोऊ नहीं पूर दिखलाय ८३
भारी फौजैं महराजा की डोला कौन भांति सों जाय ॥
यहै अंदेशा है जियरे मा लाखनिराना लेउ बुलाय ८४
हुकुम पायकै यह बेला को बाँदी चली तड़ाका धाय ॥
है मर्दाना ज्यहिका बाना सुन्दर सुघर कनौजीराय ८५
सो चलिआवा सँग बाँदी के पहुँचा रंग महल में आय ॥
आवत दीख्यो लखराना को खातिर कीन लहुरखा माय ८६
बैठि कनौजी गे महलन मा बेला बोली बैन सुनाय ॥
बिदाकरावन तुम कस आये दिल्ली शहर कनौजीराय ८७
तुम्हरे घरते संयोगिनि का लाये दिल्ली के सरदार ॥
त्यही वंश के तुम लाखनि हौ की कहुँअन्तलीनअवतार ८८
सुनिकै बातैं ये बेला की यहु अलबेला कनौजीराय ॥
लाली लाली आँखी करिकै दाढ़ी बार दीन बिखराय ८९
एक हाथ धरि तहँ मुच्छन मा नंगी एक हाथ तलवारि ॥
लाखनि बोले तहँ बेलाते कैसी बातें बकै गँवारि ९०
काह हक़ीकत थी पिरथी की बिटिया लेत चँदेले केरि ॥
बिटिया लाये घर चेरी की रानी कहा गँवारिनि टेरि ९१
त्यहिके बदले कहु अगमा का डोला लेउँ आज निकराय ॥
तौ तो लरिका रतीभान का नहिं ई मुच्छ डरों मुड़वाय ९२
ऊदन बोले फिरि बेलाते भौजी काह गयी बौराय ॥
१० | आल्हखण्ड । ५५२
दीख मंसई तुम ऊदन की | हाथी द्वार पछारा आय ६३
करो तयारी तुम महलन ते | बिछुरे कन्त देयें मिलवाय ॥
इतना सुनिकै बेला बोली | मानो कही लहुरवाभाय ६४
चोरी चोरा हम जैहैं ना | नेगिन नेगु देउ चुकवाय ॥
लेउ अधकरी अब ब्याहे की | पाछे बिदालेउ करवाय ६५
यह मनभाई लखराना के | बोले सुनो बनाफरराय ॥
चारि रुपैयन के तोड़ा लै | नेगिन नेगु देउ चुकवाय ६६
इतना सुनिकै ऊदन ठाकुर | नेगिन तुरत लीन बुलवाय ॥
चारिउ तोड़ा रुपयन वाले | तहँ पर तुरत दीन बँटवाय ६७
रानी अगमा के महलन को | बेला चली तड़ाकाधाय ॥
देवा ऊदन धनुवाँ सय्यद | ये दरबार पहुँचे जाय ६८
द्वारे ड्योढ़ी के महाराजा | ठाढ़े रहेँ पिथौराराय ॥
सय्यद देवा धनुवाँ सँगमें | पहुँचा तहाँ बनाफरराय ६६
माथनायकै महाराजा को | बोला सुनो पिथौराराय ॥
नेगु चुकावा हम नेगिन का | दायज आप देउ मँगवाय १००
बेला जैहैं अब श्वशुरे को | राजन साँच दीन बतलाय ॥
हिरसिंहविरसिंह हम आहिनना | हमहैं छोट बनाफरराय १०१
इतना सुनिकै माहिल भूपति | बोले सुनो पिथौराराय ॥
बैठक करिये दरवाजे पर | दायज उचित देउ मँगवाय १०२
माहिल बोले फिरि चुप्पे से | राजन साँच देयें बतलाय ॥
उतरै घोड़ा ते जब ऊदन | तुरतै मूड़लेउ कटवाय १०३
यह मन भाई महाराजा के | बैठक तहाँ दीन करवाय ॥
बड़े कीमती दुइ कुण्डल को | तुरतै तहाँ दीन रखवाय १०४
कह्यो पिथौरा फिरि ऊदन ते | बैठो आय बनाफरराय ॥
बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५३ ११
दायज दीन्ह्यों परिमालिक को कुण्डल यहाँ दीन रखवाय १०५
इतनी सुनिकै ऊदन बोले दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥
राजा नौकर की समता ना बैठैं कौन भाँति से आय १०६
नोक लगायो फिरि भाला की कुण्डल दोऊ लीन उठाय ॥
सजग देखिकै फिरि क्षत्रिनको घोड़ा तुरत दीन दौराय १०७
बेला पहुँची जब महलन मा माता लीन्ह्यो कण्ठ लगाय ॥
भल समझायो रानी अगमा बेटी शोक देउ बिसराय १०८
लिखी विधाता की मेटै को कीन्ह्यों घाटि चौंड़ियाराय ॥
दुलहिनि बोली तब ताहर की ननदी रोवै तोरि बलाय १०९
ब्याह तुम्हारो कहुँ अनतै अब करिहैं श्वशुर पिथौराराय ॥
राजपाट सब तुम्हरे घरमा दौलतभरी पुरीअधिकाय ११०
संग न कीन्ह्यो ननदोई का ननदी रोवै तोरिबिलाय ॥
ब्याह न अनुचित कछु दूसरहै ननदी काह गयी बौराय १११
मरे चँदेले मरि जावैदे ननदी रोवै तोरि बलाय ॥
सुनिकै बातें ये भौजीकी बेला बोली क्रोध बढ़ाय ११२
उचित न बातें कछु तेरी हैं अनुचित बात रही बतलाय ॥
भाँवरि फिरिकै चंदेले सँग करिब्योब्याह औरसँगजाय ११३
कउने गवाँरे की बिटियाहै ऐसी टेढ़ि मेढ़ि बतलाय ॥
नहिं सुखस्वइहै तुइ महलन में डरिहौं अवशि राँड़ करवाय ११४
राँड़ अभागिनि की बातें सुनि भौजी चुप्प साधि रहिजाय ॥
तब तो बेला अलबेला यह भूषणवस्त्र सजे अधिकाय ११५
रूप उजागरि सबगुणआगरि शोभा कही बून ना जाय ॥
कटि लचकीली सो मटकीली पीली दुःख देह दिखलाय ११६
माँग सँवारी सो सुकुमारी मानो इन्द्रधनुष समुदाय ॥
१२ आल्हखण्ड । ५५४
कारी अलकैं नागिन झलकैं पलकैं मूँदै औ रहिजाय ११७
ब्यला भवानी बनि महरानी पलकी चढ़ी तड़ाका धाय ॥
चलिमै पलकी फिरि बेलाकैकै लाखनिपास पहुँची आय ११८
लैकै पलकी लाखनि राना तुरतै कूच दीन करवाय ॥
सय्यद देवा धनुवाँ लैकै पहुँचा आय बनाफरराय ११९
मठी शारदा की डांड़े पर डोला तहाँ दीन धरवाय ॥
बेला पहुँची तहँ मठिया मा पूजन हेतु शारदामाय १२०
चन्दन अक्षत औ पुष्पन सों बेला पूज्यो मोद बढ़ाय ॥
धूप दीप दी तहँ देवी की मेवा मिश्री भोग लगाय १२१
फुलवा मालिनि ते फिरि बोली ताहर खबरि जनावो जाय ॥
बहिनि तुम्हारी के डोला को लीन्हे जाय कनौजीराय १२२
बदला लैहैं संयोगिनि का तुम्हरे जीनेका धिक्कार ॥
जल्दी आवो अब मारग में डोला रोंकि लेउ यहिवार १२३
मालिनि चलिमै तब मठिया ते दिल्ली अटी तड़ाका धाय ॥
खबरि सुनाई सब ताहर को दोऊ हाथजोरिशिरनाय १२४
सुनिकै बातैं त्यहि मालिनि की ताहर फौज लीन सजवाय ॥
बाजत डंका अहर्तका के - तुरतै कूच दीन करवाय १२५
यहु निरशंका दिल्लीवाला ताहर अटा तड़ाका आय ॥
औ ललकारा लखराना को ठाढ़े होउ कनौजीराय १२६
धरिकै डोला अब बेला का तुरतै कूच देउ करवाय ॥
नहीतो बचिहौना कनउज लग जोविधि आप बचावैआय १२७
भूरी हथिनी के ऊपर ते लाखनि गरु दीन ललकार ॥
मर्द सराहों मैं ताहर को डोला पास आउ सरदार १२८
बेला मिलिहैं अब ब्रह्मा को ताहर कूच जाउ करवाय ॥
बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५५ . ९३
ब्याह बनाफर ऊदन कीन्ह्यो लाखनिबिदालीनकरवाय१२६
काह हकीकति है ताहर कै डोला पास जाय नगच्याय ॥
जितने सँगमा तुम लै आये सब के मूड़ लेउँ कटवाय१३०
तौ तौ लरिका रतीभान का नहिं ई मुच्छ डरों मुड़वाय ॥
जीवन चाहौ ताहर नाहर तौ अब कूच जाउकरवाय१३१
सुनिकै बातें ये लाखनि की ताहर बोले बचन सुनाय ॥
मारो मारो ओ रजपूतो डोला लेवो तुरत छिनाय १३२
सुनिकै बातें ये ताहर की तुरतै चलन लागि तलवार ॥
एक सहस दल पैदल सेना दुइशतबीससाथअसवार १३३
अभिरै क्षत्री अरझारा सों बाजै छपक छपक तलवार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकीधार १३४
को गति बरणै तहँ ताहर कै नाहर दिल्ली का सरदार ॥
पैदल सेना धुनकत आवै मारत अवै घोड़ असवार १३५
यहु दलगंजन की पीठी मा सोहै दिल्ली का सरदार ॥
जहँ पर भूरी है लाखनि कै ताहर आयगयो त्यहिबार१३६
ऐंड़ लगायो दलगंजन के हौदा उपर पहूंचा जाय ॥
गुर्ज चलाई लाखनिराना मस्तक परी घोड़ेकेआय १३७
हटि दलगंजन तब दलतेगा बलते थहर थहर थर्राय ॥
जितनी सेना थी ताहर की तुरतै भागिचली भर्राय १३८
ताहर हटिगे जब मोर्चा ते लाखनि कूचदीन करवाय ॥
बाजत डंका अहलंका के निर्भयजात कनौजीराय १३६
बेला बोली तहँ ऊदन ते साँची कहौ बनाफरराय ॥
दायज दीन्ह्यों का महराजा हमते साँच देउ बतलाय १४०
सुनिकै बातें ये बेला की कुण्डल तुरत दीन दिखलाय"
१४ | आल्हखण्ड । ५५६
देखि कीमती दोउ कुण्डल को बेला बड़ी खुशी ह्वैजाय १४१
चलै पालकी के संगै मा यहु रणबाघ लखुरवाभाय ॥
ताहर चलिभा राजमहल में जहँपर बैठ पिथौराराय १४२
खबरि सुनाई सब लाखनि की डोला जौन भांति लैजायँ ॥
सुनिकै बातें ये ताहर की तब जरिउठा पिथौराराय १४३
तुरत चौंड़िया को बुलवायो नाहर हुकुम दीन फरमाय ॥
लैकै फौजैं जल्दी जावो बेला डोला लेउ छिनाय १४४
जान न पावैं कनउज वाले सबके मूड़ लेउ कटवाय ॥
इतना सुनिकै चौंड़ा चलिभा डंकातुरत दीन बजवाय १४५
बाजत डंका अहतंका के चौंड़ा कूच दीन करवाय ॥
भा भटभेरा फिरि लाखनि ते दउदल गये बरोबरिआय १४६
भाला बरछी कड़ावीन की लागी होन भड़ोभड़ मार ॥
पैदल के सँग पैदल सेना औअसवारसाथअसवार १४७
सूंडि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतन केरि ॥
हौदा हौदा यकमिल ह्वैगे मारैं एक एक को हेरि १४८
ना मुँह फेरैं दिल्ली वाले ना ई कनउज के सरदार ॥
तेगा चमकै बर्दवान का ऊनाचलैबिलाइतिक्यार १४६
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ॥
मूड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लगे पहार १५०
रुण्डन लैकै तलवारी को अद्भुत कीन तहाँपर मार ॥
बड़े लड़ैया दोऊ ठाकुर मानैं नहीं तहाँ कछुहार १५१
यहु यकदन्ता हाथी ऊपर चौंड़ा गरू देय ललकार ॥
भूरी हथिनी के ऊपर ते राजा कनउजका सरदार १५२
भा भटभेरा दउ शूरन ते दोऊ खैंचि लीन तलवार ॥
बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५७ १५
दोऊ मारैं तलवारी ते दोऊ लेयँ ढालपर वार १५३
कोऊ काहू ते कमती ना द्वउ रणपरा बरोबरि आय ॥
गुर्ज चलाई फिरि चौंड़ा ने हौदा झुके कनौजीराय १५४
ताकिकै भाला लाखनि मारा हाथी मस्तक गयो समाय ॥
हाथी गिरिगा यकदनता तहँ पैदलभयो चौंडियाराय १५५
भागि सिपाही दिल्ली वाले अपने डारि डारि हथियार ॥
लैकै डोला आगे चलिभा लाखनिकनउजकासरदार १५६
गाहरिकारा फिरि दिल्ली मा जहँ पर भरीलाग दरबार ॥
ताहर धाँधू तहँ बैठे हैं अंगदनृपतिग्वालियरक्यार १५७
तहँ हरिकारा बोलन लाग्यो दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥
जूझि ग हाथी इकदन्ता है लश्कर सबैगयो भराय १५८
डोला जावत है मोहबे को साँची खबरि दीने बतलाय ॥
सुनिकै बातैं हरिकारा की लश्करतुरतलीनसजवाय १५६
आदिसयङ्कर चढ़ि गज ऊपर तुरतै कूच दीन करवाय ॥
बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्दगा छाय १६०
तुरही मुरही तहँ बाजत भइँ पुप्पू पुप्पू ध्वनी लगाय ॥
धम् धम् धम् धम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय १६१
को गनि बरणै त्यहि समयाकै हमरे बूत कही ना जाय ॥
पहिले मारुइ भइँ तोपन्ह की गोलाचलनलागिहहराय १६२
बड़ी दुर्दशा भइँ तोपन में तब फिरि मारुवन्द है्जाय ॥
मघा के बूँदन गोली बरषी क्षत्रीगये बहुत महराय १६३
तीर तमंचा भाला बरछी कोताखानी बर्छी कटार ॥
भा भटभेरा दल पैदल का घोड़नलड़ै घोड़असवार १६४
है दलगंजन के ऊपर मा ताहर पिरथी राजकुमार ॥
१६ आल्हाखण्ड । ५५८
घोड़ बेंदुला की पीठौ मा ठाकुर उदयसिंह सरदार १६५
मोर्चाबन्दी भै दूनों मा दूनों लड़ैलागि त्याहिकाल ॥
अभिरै क्षत्री अरझारा सों भिड़िगैतहाँ ढाल में ढाल १६६
धाँधू धनुवाँ का मोर्चा भा सय्यदनृपतिग्वालियरक्यार ॥
को गति बरणै रजपूतन कै मारैं दऊ हाथ तलवार १६७
जैसे भेड़िन भेड़हा बैठै जैसे अहिर विडारै गाय ॥
तैसे मारै ताहर नाहर शूरन दीन्ह्यो समर वराय १६८
धाँधू धमकै तहँ तेगा को चमकै चमाचम्म तलवार ॥
अली अली कहि सय्यद दौरै रणमाहोतजातगलियार १६६
बड़ा लड़ैया अंगद राजा गोरै ढूँढ़ि ढूँढ़ि सरदार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १७०
सवैया ॥
करहत शूर गिरैं रणखेतन पूरि रही ध्वनि गारु अपारा ।
मत्त मतंग गिरैं भहराय सो हाय दयी यह होत पुकारा ॥
छूटत तीर सो पूरि रहे तन धूरि उड़ै नहिं कीच अपारा ।
मीच भई रणशूरन की ललिते मन कायर जात दरारा १७१
कायर भागि चले ललिते अकुलात महामन दुःख न छाये ।
मोद बढ़यो रणशूरन के बलपूरन के कछु दुःख न आये ॥
कूर कुपूत रहे रजपूत ते मूत भये रण नाम घराये ॥
पूत सपूत महामजबूत सो वूतलड़ै नहिं पाउँ डिगाये १७२
घड़ी लड़ाई भै मारग में पिरथी लाखनि के मैदान ॥
मारे मारे तलवारिन के गिरिगे बड़ेसुघरवाज्वान १७३
मान न रहिगे क्यहु क्षत्रिनके सब के छूटिगये अभिमान ॥
बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध। ५५६ ' १७
आदि भयङ्कर के ऊपर ते गरुई हाँक देय चौहान १७४
मारो मारो ओ रजपूतो डोला लेवो तुरत छिनाय ॥
जान न पावैं द्यावालिवाले इनके देवो मूड़ गिराय १७५
गरुई हाँकै सुनि पिरथी की जूझन लागि सिपाही ज्वान ॥
उड़ै बेंदुला बघऊदन का खाली होत जात मैदान १७६
धाँधू धनुवाँ के मुर्चा में बाजै घूमि घूमि तलवार ॥
अंगद राजा के मुर्चा मा सय्यद बनरसका सरदार १७७
औरो क्षत्री समरभूमि मा दूनों हाथ करैं तलवार ॥
को गति बरणै त्यहि समया कै अद्भुत होय तहाँपरमार १७८
पैग पैग पै पैदल गिरिगे दुइ दुइ कसी गिरे असवार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १७६
सोहैं लहासैं तहँ हाथिन की छोटे पर्वत के अनुहार ॥
परी लहासैं जो घोड़न की तिनकोजानों नदीकगार १८०
मुण्डन केरे मुड़चौड़ा भे औ रुण्डन के लगे पहार ॥
डोला सौंप्यो फिरि धनुवाँको चलिभाकनउजकासरदार१८१
जौनी दिशिको लाखनि जावैं तादिशि होय घोरघमसान ॥
बड़े लड़ैया दिल्ली वाले ताहर समरधनी चौहान १८२
हनि हनि मारैं रजपूतन का घायल होयँ अनेकनज्वान ॥
मान न रहिगा क्यहु क्षत्रीका सब के टूटिगये अरमान १८३
फूटि फूटि शिर चूरण ह्वै गे पूरण भयो समर मैदान ॥
कहँलग गाथा त्यहि समयाकै ललिते करैयहांपर गान १८४
सो भल जानतहैं नीकी बिधि जो यह दीख्यो युद्ध ललाम ॥
सम्मुख जूझैं जे मुर्चा में ते सब जायँ रामके धाम १८५
यही तपस्याहै क्षत्री कै सम्मुख लड़ै समर मैदान ॥
१८ आल्हखण्ड । ५६०
तन धन अप्पैं समरभूमि मा पावै सदा जगत में मान १८६
सज्जन मानै के भूखे हैं दुर्जन सहैं सदा अपमान ॥
मान न पावै नरदेही मा जीवतजानोश्वान निदान१८७
मान के भूखे लाखनिराना ठाना कठिन तहाँ संग्राम ॥
जौनौदिशि को लाखनिजावैं तादिशिहोतजातहंगाम १८८
लाखनिराना के मारुन मा आरी भये सिपाही ज्वान ॥
कायर भागे समरभूमि ते शूरन कीनघोरघमसान १८६
यहु महाराजा कनउजवाला मारत चला अगारी जाय ॥
आदिभयङ्कर जहाँ हाथी पर सोहत बैठि पिथौरा राय १६०
तहँ कनउजिया कनउजवाला आला अटा तड़ाका जाय ॥
आदिभयङ्कर ते ललकारा यहु महराज पिथौरा राय १६१
लाखनि पगिया ना अटकीहै रण मा प्राण गँवावो आय ॥
प्यारे बेटा तुम ताहर सम मानो कही कन्नौजी राय १६२
निमक चँदेले का इन खावा दूनों भाय बनाफरराय ॥
ये मरिजावैं सँग डोला के उनकेनमक अदाहैजायँ १६३
तुम्हें मुनासिब यह नाहीं है अनहक प्राण गँवावो आय ॥
बारह रानिन में इकलौता यहहमसुनाकन्नौजीराय १६४
त्यहिते तुमका समुझाइत हैं चुप्पै कूच जाउ करवाय ॥
इतना सुनिकै लाखनि बोले साँची सुनौ पिथौरा राय १६५
तीनि महीना औ त्यारादिन ' ऊदन कठिन कीन तलवार ॥
लै कै पैसा सब गाँजर का पठवा कनउज के दरबार १६६
गंगा कीन्हीं हम ऊदन ते देवे साथ बनाफरराय ॥
हमें मुनासिब यह नाहीं है जोअबकूचजायँ करवाय १६७
करब प्रतिज्ञा अब हम पूरी लड़िबे खूब पिथौराराय ॥
Here is the line-by-line transcription of the provided page:
बेलाकेगौनेका द्वितीययुद्ध । ५६१ १६
पाँव पिछारी का धरिबे ना बहुतन धजी २ उड़िजाय १६८
पता लगावै हौँ लाखनि का आल्हा केर लहुरवा भाय ॥
मारत मारत रजपूतन को पहुँचा जहाँ पिथौराराय १६६.
तीर कमनिया लै हाथे मा मारन हेतु भयो तैयार ॥
तब ललकारा नर नाहर यहु ठाकुर उदयसिंह सरदार २००
तुम्हें मुनासिब यह नाहीं है राजा समरधनी चौहान ॥
नहीं बराबरीके लखराना जोतुम लीन्ही तीर कमान २०१
सुनिकै बातें बचऊदन की कायल भये बीर चौहान ॥
चुप्पै हौदा पर रख दीनी राजा अपनी तीर कमान २०२
यहु दलगंजन की पीठी मा ताहर आय गयो त्यहिबार ॥
भये कनौजी त्यहिके सम्मुख लागे करन तहाँ पर मार २०३
ऊदन अंगद का मुर्चा भा दोऊ लड़न लागि सरदार ॥
दोऊ मारैं तलवारी सों दोऊ लेयँ ढाल पर वार २०४
तब ललकार्यो फिरि धाँधू को यहु महराज पिथौराराय ॥
जाय न डोला अब मोहबे का लावो जाय तड़ाकाधाय २०५
इतना सुनिकै धाँधू चलिभे डोला पास पहुँचे जाय ॥
तब ललकारा तहँ धनुवाँने क्षत्री खबरदार है जाय २०६
पाँव अगाड़ी का डोरेना नहिं यमपुरी देउँ दिखवाय ॥
कहा न माना कछु धनुवाँका धाँधू चला तड़ाका धाय २०७
तेलिके बच्चा कब्बा खैहौँ लुच्चा ठाढ़ होय यहिवार ॥
सच्चा लड़का जो क्षत्रीका तौ मुखघाँसिदेउँ तलवार २०८
इतना कहिकै धांधू क्षत्री अँगुरिन भालालीन उठाय ॥
ताकि कै मारा सो धनुवाँ का परिगा घाव जाँघ पर आय २०६
गिरिगा धनुवाँ जब खेतन मा डोला तुरत लीन उठवाय ॥
३६
२० आल्हखण्ड । ५६२
डोला उठिगा जब बेला का सय्यदगयो तड़ाका आय २१०
औ ललकारा त्यहि धाँधू का अब ना धस्यो अगारी पाँय ॥
जान न पैहौ तुम सय्यद ते क्षत्री साँच दीन बतलाय २११
इतना सुनिकै अंगद राजा तहँ पर गयो तड़ाका आय ॥
भूरी हथिनी के चढ़वैया आये तहाँ कनौजीराय २१२
ताहर नाहर दलगंजन पर सोऊ बेगि पहुँचा आय ॥
कठिन लड़ाई भै डोलों पर हमरे बूत कही ना जाय २१३
को गति बरणै त्यहि समयाकै बाजै घूमि घूमि तलवार ॥
सुनिसुनि गाजैं रजपूतन की कायर डारिभागि हथियार २१४
को गति बरणै रण शूरनकी दूनों हाथ करें तलवार ॥
कीरति प्यारी जिन क्षत्रिन को तिनको भलाकरैं करतार २१५
कीरति वाले लाखनि ताहर ठाना घोर शोर घमसान ॥
यहु महराजा कनउज वाला लीन्ही गुर्ज तड़ाकातान २१६
ऐंचिकै मारा सो ताहर के मस्तक परी घोड़के जाय ॥
घोड़ा भाग्यो तहँ ताहर का डोला लीन कनौजीराय २१७
बिना नृपति के सब सेना तहँ रणमा कौन भांति समुहाय ॥
बिन बर कन्या ज्यों मड़ये मा भौंरी कौन करावन जाय २१८
दुलहिन दुलहा की समता मा ममता कौन खवैया भान ॥
मिलै रुपैया बरतौनी ना तबलग देखिपरे तहँ लात २१६
तैसे मुर्चा की बातें हैं यारो जानिलेउ सब घात ॥
घोड़ा भाग्यो जब ताहर का लाग्योनहीं क्यहूकी लात २२०
डोला चलिभा तब बेला का जहँ पर रहै चँदेलाराय ॥
ब्रह्मा ठाकुर के तम्बू मा द्वैगै भीरभार अधिकाय २२१
बाजे डङ्का अहतङ्का के शङ्का सबन दीन बिसराय ॥
बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५६३ २१
देवा सय्यद ऊदन लाखनि सबको मिलाचँदेलाराय २२२
मिला भेंट करि सब काहुन सों तम्बू बैठिगये सब आय ॥
कीन बड़ाई लखराना की तहँ पर खूब बनाफरराय २२३
सच्ची बातें उदयसिंह की नहिंकहुँ लसरफसर ब्यवहार ॥
बड़ा प्रतापी रण मण्डल मा ठाकुर उदयसिंह सरदार २२४
पाग बैंजनी शिरपर सोहै टिहुनन धरी ढाल तलवार ॥
चढ़ा उतारू भुजदण्डै हैं आनन पङ्कजकेअनुहार २२५
सत्य बड़ाई की लाखनि की भे सब खुशी तहाँ सरदार ॥
जा बिधि चलिकै सब मोहबे ते पहुँचे दिल्ली के दरबार २२६
कीनि नौकरी ज्यहि प्रकार ते कुण्डल जौन भांतिसों लीन ॥
सो सब गाथा तहँ ब्रह्मा ते ठाकुरउदयसिंहकहिदीन २२७
खेत छूटिगा दिननायक सों झण्डा गड़ा निशाको आय ॥
तारागण सब चमकन लागे सन्तन धुनी दीनपरचाय २२८
राम राम की मन रटलाये लीन्ह्यनि अंग बिभूति रमाय ॥
डारि बघम्बर या मृगछाला आला परब्रह्म को ध्याय २२६
तपनि मिटाई सब देही की रघुबर नाम औषधी पाय ॥
यह सुखदायी सब संतन को या बलदेवैं निशाबिताय २३०
जब लग रैहै संजीवनि यह तबलम धर्मध्वजा फहराय ॥
माथ नवावों पितु माता को जिनबलगाथगयोंसबगाय२३१
आशीर्वाद देउँ मुंशीसुत जीवो प्रागनारायण भाय ॥
हुकुम तुम्हारो जो पावत ना ललितेकहतकौनविधिगाय२३२
रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥
मालिक ललिते के तबलौं तुम यशसों रहौ सदा भरपूर २३३
विपति निवारण जगतारण के दूनों धरौं चरणपर माथ ॥
२२ आल्हाखण्ड । ५६४
बैलारानी के गौने की पूरण भई दूसरी गाथ २३४
पूरि तरंग यहाँ सों द्वैगे तव पद सुमिरि भवानीकन्त ॥
राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छायही मोरि भगवन्त २३५
इति श्रीलखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजवाबूप्रयागनारायण
जीकी आज्ञानुसारउन्नामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलानिवासि मिश्रवंशोद्भव
बुधकृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृत बेलागमन
द्वितीययुद्धवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥
बेलागमनद्वितीययुद्धसमाप्त ॥
इति ॥
अथ आल्हखण्ड ॥
बेलाऔरताहरकायुद्धवर्णन ॥
सवैया ॥
मैं बृषभान लली बिनवों सो अली सँग कुंजन जातनितय ।
गावत बेनु बजावत आवत मोहनलालहु नित्त तितय ॥
श्यामह श्याम भये ज्यहि ठौर सो और बखानकरै को कितय ।
गावत गीत सबै ललिते ज्यहि आवत जौन जहाँलों जितय १
सुमिरन ॥
राधा रानी ठकुरानी के दूनों धरौं चरण पर माथ ॥
मोहिं भरोसा अब तेरो है स्वामिनि पूरिकरो यह गाथ १
कण्ठ में बैठै तुम कण्ठेश्वरि भुज बल बैठिजाय हनुमान ॥
बैठि सरस्वति जा जिह्वामा भूले अक्षर करों बखान २
झाँग भवानी महरानी के बन्दन करों जोरि दोउ हाथ ॥
झाँग न होती जो दुनिया मा ललिते कौन देत तब साथ ३
२ आल्हखण्ड । ५६६
चढ़ै तरंगै जब भांगन की आँगन देखि परै सुरलोक ॥
दुख नहिं ब्यापै कछु देहीमा मनके छूटिजात सब शोक ४
भाँग घोटिकै नित प्रति पीवै जीवै वर्ष एक शत एक ॥
हर को ध्यावै तब सुखपावै पूरी होय तबै यह टेक ५
छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाखा सुनो शूरमन क्यार ॥
बेला काटी शिर ताहर का सोई गाथ कहौं विस्तार ६
अथ कथाप्रसंग ॥
जहाँ चँदेले ब्रह्मा ठाकुर बेला गई तहाँ पर धाय ॥
बैठी पलँगा कर पंखालै लागी करन पवन सुखदाय १
ज्वरि २ बहियां हरि २ चुरियाँ शोभा कही बूत ना जाय ॥
शची मेनका की गिन्ती मा बेला रूप राशि अधिकाय २
यहु अलवेला ब्रह्मा ठाकुर बेलै बोला वचन सुनाय ॥
टरिजा टरिजा री आँखिनते दीखे गात सबै जरिजायँ ३
घटिहा राजा की कन्या ते कासुखहोय मोहिंअधिकाय ॥
इतना सुनिकै बेला बोली दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ४
तुम्हें मुनासिब यह नाहीं है जैसी कहौ चँदेलेराय ॥
राज कुटुँब सब अपनो तजिकै आइन चरण शरणमें धाय ५
सुनि सुनि बातैं अब प्रीतमकी छाती घाव होत अधिकाय ॥
परवश कन्या की गति जैसी तैसी रही चँदेलेराय ६
ऐसी तुमको अब चहिये ना जैसी सूखी रहे सुनाय ॥
सुरपुर अहिपुर नरपुर माहीं प्रीतम कौन मोर अधिकाय ७
प्यारे प्रीतम इक तुम्हीं हैं। साँचो साँच दीन बतलाय ॥
सुनिकै बातें ये बेला की बोला फेरि चँदेलाराय ८
मूड़ काटिकै अब ताहरका प्यारी मोहिं देउ दिखलाय ॥
बेलाताहरकामैदान । ५६७ ३
घाव करेजे का तब पूरे औ सुख सम्पति मोहिं सुहाय ६
इतना सुनिकै बेला बोली स्वामी बचन करो परमान ॥
कपड़ा घोड़ा दै कोड़ा निज पठवो मोहिं समर मैदान १०
एक लालसा पै डोलति है स्वामी पूरिकरो यहि काल ॥
नगर महोबा मोहिं पठवावो दर्शन करों सासुके हाल ११
इतना सुनिकै ब्रह्मा बोले जावो साथ लहुरवाभाय ॥
बेला बोली तब स्वामी ते यहनहिंउचितमोहिंदिखलाय १२
ब्रह्मा बोले फिरि लाखनि ते तुमहीं जाउ कनौजीराय ॥
बेला बोली फिरि स्वामी ते यहनहिंउचितमोहिंदिखलाय १३
बदला लैहैं संयोगिनि का रखिहैं मोहिं कनौजे जाय ॥
दुई हँसौवा दुहुँ तरफा का प्रीतम करिहौ कौन उपाय १४
ब्रह्मा बोले फिरि आल्हा ते तुम चलिजाउ बनाफरराय ॥
यह मन भाई तब बेला के पलकी चढ़ी तड़ाकाधाय १५
चढ़ि पचशब्दा हाथी ऊपर अल्हा ठाकुर भये तयार ॥
डोला चलिभा फिरि बेला का संगै चले बहुत असवार १६
यह गति देखी माहिल ठाकुर लिल्ही उपर भये असवार ॥
जहाँ पर बैठे पृथीराज हैं पहुँचा उरई का सरदार १७
बड़ी खातिरी राजा कीन्ह्यो अपने पास लीन बैठाय ॥
जो कछु गाथा थी तम्बू की माहिल यथानथ्य गा गाय १८
तब महराजा दिल्लीवाला चौंडे तुरत लीन बुलवाय ॥
खबरि सुनाई सब चौंड़ा को जो कछु माहिल दीन बताय १६
नार कँकरिहा पर तुम घेरो डोला लावो बेगि छिनाय ॥
हुकुम पायकै महराजा को फौजें तुरत लीन सजवाय २०
चढ़ि इकदन्ता हाथी ऊपर चौंड़ा कूचदीन करवाय ॥
४ आल्हखण्ड । ५६८
बाजत डंका अहलंका के पहुँचा नार उपरसो आय २१
दीख्यो आल्हा को चौंडाने गरुई हाँक कहा गुहराय ॥
डोला धरिकै अब बेला का जावो लौटि बनाफरराय २२
हुकुम पिथौरा का याही है आल्हा साँच दीन बतलाय ॥
सुनिकै बातें ये चौंड़ा की बोला फेरि बनाफरराय २३
डोला लौटनको नाहीं है चौंड़ा काह गये बौराय ॥
एक पिथौरा की गिन्ती ना लाखन चढ़ैं पिथौरा आय २४
नगर मोहोवे डोला जाई चौंड़ा साँच दीन बतलाय ॥
गा हरिकारा फिरि तहँना ते जहँना बैठ बनाफरराय २५
डोला घेरा है बेला का बोला हाथ जोरि शिरनाय ॥
इतना सुनिकै ऊदन ठाकुर तुरतै कूच दीन करवाय २६
जहँ पर फौजैं हैं चौंड़ा की पहुँचा तुरत लहुरवाभाय ॥
हाथ जोरिकै ऊदन बोले दादा कूच जाउ करवाय २७
इतना सुनिकै चौंड़ा बक्शी तुरतै हुकुम दीन फर्माय ॥
जान न पावैं मोहवे वाले सब के देवो मूड़गिराय २८
हुकुम चौंड़िया का पावतखन क्षत्रिन खैंचि लीन तलवार ॥
झुके सिपाही दुहुँ तरफा के लागी होन भड़ाभड़ मार २९
गोली ओला सम बरसी तहँ कोताखानी चलीं कटार ॥
भा खलभल्ला औ हल्ला अति जूझन लागि शूर सरदार ३०
कटि कटि कल्ला गिरैं बछेड़ा घूमैं मूड़ बिना असवार ॥
खट खट खट खट तेगा बोलैं बोलैं छपक छपक तलवार ३१
झल् झल् झल् झल् झीलमझलकें नीलम रंग परै दिखलाय ॥
चम् चम् चम् चम् छूरीचमकैं कउँधालपकनिखङ्गदिखाय ३२
मर् मर् मर् मर् दालैंच्वालैं तेगा टन्र टन्र टन्राय ॥
बेलाताहरकामैदान । ५६६
सन् सन् सन् सन् गोली बरसें तीरन मन्न मन्न गा छाय ३३
धम् धम् धम् धम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय ॥
बड़ी खुशहाली रणशूरन के कायेर गये तहाँ सन्नाय ३४
कायर सोचत मन अपनेमा नाहक प्राण गँवाये आय ॥
माठा रोटी घरमा खाइत आपनि भैंसिचराइत जाय ३५
यह गति जानित जो पहिलेते काहे फँसित समर में आय ॥
नई बहुरिया घरमा बैठी कैसे धरा धीर उरजाय ३६
हाय रुपैया बैरी ह्वैगे हमरे गई प्राणपर आय ॥
को समुझाई घर दुलहिनिका देवी देवता रहे मनाय ३७
कायर बिनवैं मन सूरजते पश्चिम जाउ आज महराज ॥
तौ हम भागैं समरभूमि ते औ रहिजायजगतमें लाज ३८
शूर सिपाही ईजतिवाले दहिनी धरैं मुच्छ पर हाथ ॥
हनि हनि मारैं समरभूमि मा कटिकटिगिरैं चरणऔमाथ ३९
को गतिवरणै त्यहिसमया कै बाजै घूमि घूमि तलवार ॥
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ४०
मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ॥
घोड़ बेंदुला के ऊपर ते नाहर उदयसिंह सरदार ४१
फिरि फिरि मारै औ ललकारै बेटा देशराज का लाल ॥
गरुई हाँकैं सुनि ऊदन की कम्पित होयँ तहाँ नरपाल ४२
ऐंड़ लगावै रस बेंदुल के हौदा उपर पहुँचै जाय ॥
मारि महाउत को हनिडारै औ असवारै देय गिराय ४३
• यह गति दीख्यो जब ऊदन कै चौंड़ा हाथी दीन बढ़ाय ॥
औ ललकारा समरभूमि मा ठाढ़े होउ बनाफरराय ४४
गरुई हाँकैं सुनि चौंड़ा की ऊदन घोड़ा दीन उड़ाय ॥