सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 564, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 564

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५६३ २१
देवा सय्यद ऊदन लाखनि सबको मिलाचँदेलाराय २२२
मिला भेंट करि सब काहुन सों तम्बू बैठिगये सब आय ॥
कीन बड़ाई लखराना की तहँ पर खूब बनाफरराय २२३
सच्ची बातें उदयसिंह की नहिंकहुँ लसरफसर ब्यवहार ॥
बड़ा प्रतापी रण मण्डल मा ठाकुर उदयसिंह सरदार २२४
पाग बैंजनी शिरपर सोहै टिहुनन धरी ढाल तलवार ॥
चढ़ा उतारू भुजदण्डै हैं आनन पङ्कजकेअनुहार २२५
सत्य बड़ाई की लाखनि की भे सब खुशी तहाँ सरदार ॥
जा बिधि चलिकै सब मोहबे ते पहुँचे दिल्ली के दरबार २२६
कीनि नौकरी ज्यहि प्रकार ते कुण्डल जौन भांतिसों लीन ॥
सो सब गाथा तहँ ब्रह्मा ते ठाकुरउदयसिंहकहिदीन २२७
खेत छूटिगा दिननायक सों झण्डा गड़ा निशाको आय ॥
तारागण सब चमकन लागे सन्तन धुनी दीनपरचाय २२८
राम राम की मन रटलाये लीन्ह्यनि अंग बिभूति रमाय ॥
डारि बघम्बर या मृगछाला आला परब्रह्म को ध्याय २२६
तपनि मिटाई सब देही की रघुबर नाम औषधी पाय ॥
यह सुखदायी सब संतन को या बलदेवैं निशाबिताय २३०
जब लग रैहै संजीवनि यह तबलम धर्मध्वजा फहराय ॥
माथ नवावों पितु माता को जिनबलगाथगयोंसबगाय२३१
आशीर्वाद देउँ मुंशीसुत जीवो प्रागनारायण भाय ॥
हुकुम तुम्हारो जो पावत ना ललितेकहतकौनविधिगाय२३२
रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥
मालिक ललिते के तबलौं तुम यशसों रहौ सदा भरपूर २३३
विपति निवारण जगतारण के दूनों धरौं चरणपर माथ ॥