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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 566

अथ आल्हखण्ड ॥
बेलाऔरताहरकायुद्धवर्णन ॥
सवैया ॥
मैं बृषभान लली बिनवों सो अली सँग कुंजन जातनितय ।
गावत बेनु बजावत आवत मोहनलालहु नित्त तितय ॥
श्यामह श्याम भये ज्यहि ठौर सो और बखानकरै को कितय ।
गावत गीत सबै ललिते ज्यहि आवत जौन जहाँलों जितय १
सुमिरन ॥
राधा रानी ठकुरानी के दूनों धरौं चरण पर माथ ॥
मोहिं भरोसा अब तेरो है स्वामिनि पूरिकरो यह गाथ १
कण्ठ में बैठै तुम कण्ठेश्वरि भुज बल बैठिजाय हनुमान ॥
बैठि सरस्वति जा जिह्वामा भूले अक्षर करों बखान २
झाँग भवानी महरानी के बन्दन करों जोरि दोउ हाथ ॥
झाँग न होती जो दुनिया मा ललिते कौन देत तब साथ ३