आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 561, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ें१८ आल्हखण्ड । ५६०
तन धन अप्पैं समरभूमि मा पावै सदा जगत में मान १८६
सज्जन मानै के भूखे हैं दुर्जन सहैं सदा अपमान ॥
मान न पावै नरदेही मा जीवतजानोश्वान निदान१८७
मान के भूखे लाखनिराना ठाना कठिन तहाँ संग्राम ॥
जौनौदिशि को लाखनिजावैं तादिशिहोतजातहंगाम १८८
लाखनिराना के मारुन मा आरी भये सिपाही ज्वान ॥
कायर भागे समरभूमि ते शूरन कीनघोरघमसान १८६
यहु महाराजा कनउजवाला मारत चला अगारी जाय ॥
आदिभयङ्कर जहाँ हाथी पर सोहत बैठि पिथौरा राय १६०
तहँ कनउजिया कनउजवाला आला अटा तड़ाका जाय ॥
आदिभयङ्कर ते ललकारा यहु महराज पिथौरा राय १६१
लाखनि पगिया ना अटकीहै रण मा प्राण गँवावो आय ॥
प्यारे बेटा तुम ताहर सम मानो कही कन्नौजी राय १६२
निमक चँदेले का इन खावा दूनों भाय बनाफरराय ॥
ये मरिजावैं सँग डोला के उनकेनमक अदाहैजायँ १६३
तुम्हें मुनासिब यह नाहीं है अनहक प्राण गँवावो आय ॥
बारह रानिन में इकलौता यहहमसुनाकन्नौजीराय १६४
त्यहिते तुमका समुझाइत हैं चुप्पै कूच जाउ करवाय ॥
इतना सुनिकै लाखनि बोले साँची सुनौ पिथौरा राय १६५
तीनि महीना औ त्यारादिन ' ऊदन कठिन कीन तलवार ॥
लै कै पैसा सब गाँजर का पठवा कनउज के दरबार १६६
गंगा कीन्हीं हम ऊदन ते देवे साथ बनाफरराय ॥
हमें मुनासिब यह नाहीं है जोअबकूचजायँ करवाय १६७
करब प्रतिज्ञा अब हम पूरी लड़िबे खूब पिथौराराय ॥