आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
३४ आल्हखण्ड ।
कान्ह कुँवरहू अतिकोपित भा यहु रजपूत वीर चौहान ॥
लीन्हे भाला नागदवनि का क्षत्रिनमारिकीन खरिहान १०७
औ ललकारा रतीभान का ठाकुर खबरदार ह्वैजाय ॥
यह कहि मारा तलवारी का सोपै लैगा वार बचाय १०८
आपौ मारा तलवारी को परिगै कान्ह कुँवर शिरजाय ॥
ककरी ऐसी खपरी फाटी पै शिखांधि तहांरहिजाय १०९
खैंचि सिरोही को कम्मर सों मारा रतीभान को धाय ॥
रतीभान फाटक पर गिरिगे गिरिगो कान्हकुँवरभहराय ११०
दोऊ जूझे जब फाटक में डोला अटा महल में जाय ॥
उतरिकै डोला सों संयोगिनि बैठी रङ्ग महल में आय १११
चंद कवीश्वर फिरि जल्दी सों पहुँचा जहां चँदेलाराय ॥
औ फिरि बोला हाथ जोरिकै ओ महराज कनौजीराय ११२
लाखन जूझे दिल्ली वाले लाखन कनउज के सरदार ॥
बड़ी लड़ाई दउदल कीन्ह्यो ज्यहिका रहा न वारा पार ११३
बचा पिथौरा अब इकलो है ज्यहिका राखिलीन भगवान ॥
त्यहि नहिं मारो महाराजा तुम मानों सत्य बचन परमान ११४
लौटि कनौजै जो चलि जइहौ कीरति बनी रही संसार ॥
हारि तुम्हारी कोउ गाईना राजा कनउज के सरदार ११५
कनउज तेनी औ दिल्ली लौं कीन्ह्यो घोर शोर घमसान ॥
अस कोउ क्षत्री मैं देखों ना जोफिरिकैरैसमरअभिमान ११६
चंद कवीश्वर की बातें सुनि बोला कनउज का महराज ॥
कहा तुम्हारो हम टारब ना मानोसत्यबचनकबिराज ११७ -
बड़ो भरोसो तुम हमरो करि आयो मिलन हमारे पास ॥
कहा तुम्हारो जो मानैंना तौफिरिजावोआपनिराश ११८
संयोगिनिस्वयम्बर । ३५
करन निराशा नहिं चाहत हैं मानो सत्य बचन कबिराज ॥
तुमहूं जावो निज मन्दिर को हमहूं जात आपनी राज ११६
यह सुनि गमने चन्द कवीश्वर जयचँद कूच दीन करवाय ॥
राति दिनौनन के धावा करि पहुँचेकनउजमेंफिरिआय १२०
पृथुइराज निज महलन पहुँचे पद्मिनि मिली तहांपर आय ॥
करि गन्धर्व ब्याह ताके सँग औसुखकरनलागिअधिकाय १२१
पूर स्वयम्बर संयोगिनि का गायों सत्य सत्य सब हाल ॥
माथ नवावों शिवशङ्करका अम्बुजसरिसनयनत्रयलाल १२२
किहे कोपिनी हैं सर्पन की धारे जटाजूट हैं शीश ॥
सकल जगत के सो स्वामी हैं किरपाकरें ललितपर ईश १२३
माथ नवावों पितु अपने को जिन म्वहिं विद्या दीन पढ़ाय ॥
आशिर्वाद देंव मुंशीसुत जीवहु प्रागनारायणभाय १२४
रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥
मालिक ललिते के तबलों तुम यशसों रहौ सदा भरपूर १२५
इति श्रीलखनऊनिवार्सि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मज
बाबू प्रयागनारायणजीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्त-
र्गत पँडरीकलांनिवासि मिश्रबंशोद्भवबुध कृपाशङ्कर
सूनु पण्डितललिताप्रसादकृत पृथुइराजजयचन्द
युद्धवर्णनो नाम तृतीयस्तरङ्गः ॥ ३ ॥
संयोगिनिस्वयंम्वरसम्पूर्ण ॥
इति ॥
This page contains only an illustration (depicting the Rām Darbār / Lord Rama on the throne with Sita, Lakshmana, and attendants) framed by ornamental borders, with no printed text present to transcribe.
अथ आल्हखण्ड ॥
महोबे का प्रथमयुद्धवर्णन ॥
सवैया ॥
काको मैं ध्यावों मनावों सदा तुमको तजिकै सुनिये रघुनाथा ।
मेरे तो एक तुम्हीं प्रभुजी अब काह बनाय लिखों बहुगाथा ॥
स्वारथ साथ सबै नरदेत न देत कोऊ परमारथ साथा ॥
दीन पुकार करै ललिते प्रभु बेगिकरो जनजानि सनाथा १
सुमिरन ॥
कण्ठ में बैठो तुम कण्ठेश्वरि भुजबल बैठिजाउ हनुमान ॥
बैठु शारदा मोरि जिह्वा माँ जासों करूँ आल्ह को गान १
नहीं आसरा निजभुजबलको है यहु आल्हा सिंधु अपार ॥
डगमग डगमग नैया होवै माता तुही लगावै पार २
रह्यों प्रतापी मैं सतयुग माँ त्रेता रह्यों बहुत बरियार ॥
बड़ी बड़ाई भै द्वापर माँ जबलग रहे परीक्षित यार ३
अब बृद्धाई अति छाई है गाई जाय नहीं सो यार ॥
२ आल्हखण्ड । ३८
कलियुग बाबा की रजधानी माता तुही लगावै पार ४
जप तप भाग्यो मेरि देही ते अब मैं भयौं बहुत सुकुमार ॥
ताते नैया डगमग होवै बेड़ा कौन लगावै पार ५
तुही खेवैया शारद मैया माता खेय लगावै पार ॥
नाहिं तो बूडौं मँझधारा में माता होवै हँसी तुम्हार ६
छूटि सुमिरनी गै शारद कै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥
करिया आई अब मोहवे का जो जम्बैका राजकुमार ७
अथ कथाप्रसङ्ग ॥
एक समइया की बातें हैं यारो सुनिल्यो कांन लगाय ॥
परब दशहरा की बुड़की रहै गंगा न्हान सबै कोउ जाय १
बड़ा महातम श्रीगंगा को गायो वालमीकि महराज ॥
ब्यास बनायो महभारत जो तामें कह्यो जगत के काज २
सो सब जानै माड़ोवाला यहु जम्बै का राजकुमार ॥
हाथ जोरिकै फिरि बोलतभा दद्दुवा सुनिल्यो वचन हमार ३
भारी मेला श्री गंगा को दद्दुवा जाजमऊ के घाट ॥
पुरके बाहर हम देखा है जावैं राव रङ्क सब बाट ४
हुकुम जो पावैं हम दद्दुवा को तो गंगा को अवैं अन्ह्याय ॥
पाप नशावैं सब देही के गंगा चरण शरण में जाय ५
सुनिकै बातें ये करिया की जम्बै गोद लीन बैठाय ॥
चूम्यो चाट्यो गले लगायो बोल्यो बचन तुरत मुसुकाय ६
बारह वरसनका अरसा भो पैसा दीन न कनउज केर ॥
नायब मन्त्री चन्देले के तुमको लेयँ वहाँ जो हेर ७
बाँधिकै मुशकें म्वरे बचुवा त्वहिं तुरतै जेहल देयँ पहुँचाय ॥
पैसा देवौ तो बचिजावौ नाहिं तो जाय प्राणपर आय ८
महोबेकाप्रथमयुद्ध । ३६ ३
त्यहिते तुम का समुझावत हौं बचुवा मानो कहा हमार ॥
राह कनौजी कै तहँते है ठाकुर समरधनी तलवार ६
हाथ जोरिकै करिया बोल्यो दोऊ चरणन शीश नवाय ॥
मने न करिये म्वहिं गंगा को दहुवा बार बार बलिजायँ १०
पार लगे हैं श्री गंगाजी मेरो बार न बांको जाय ॥
पकरो जइहौं जो मेला में पैसा माफ लेउँ करवाय ११
हुकुम जो पावौं मैं दहुवा को तौ फिरि गंगाअवौं अन्ह्याय ॥
बिनती सुनिकै बहु करिया की जम्बै हुकुम दीन फरमाय १२
हुकुम पायकै सो जम्बै को अपने कह्यो सिपाहिन बात ॥
करो तयारी जाजमऊ की गंगा न्हान हेतु हम जात १३
हुकुम पायकै सो करिया का तुरतै होन लागि तय्यार ॥
झीलम बख्तर पहिरिसिपाहिन हाथ म लीन ढाल तलवार १४
यक यक भाला दुइ दुइ बरछी लीन्हेनि कड़ाबीन सबज्वान ॥
बजे नगारा त्यहि सम या माँ भारी होन लाग घमसान १५
करिया चलिभा त्यहि समया माँ माता भवन पहूँचा जाय ॥
हाथ जोरिकै करिया बोल्यो माता चरणन शीशनवाय १६
मोहिं आज्ञा है दंदुवा की गंगा न्हान हेतु हम जायँ ॥
आज्ञा पाऊँ जो माता की तौसब काज सिद्धह्वैजायँ १७
बातैं सुनिकै ये करिया की मातैं हुकुम दीन फरमाय ॥
चूम्यो चाट्यो हृदय लगायो आशिर्वाद दीन हर्षाय १८
बहिनि बिजैंसिनि तब बोलत भै भैया बार बार बलिजाउँ ॥
मोहिं निशानी कछु लैआयो जासों यादिकरुं तव नाउँ १६
इतनी सुनिकै करिया बोला बहिनी मानो कहा हमार ॥
लवों निशानी मैं मेलाते बहिनी कहा न टारौं त्वार २०
४ आल्हखण्ड । ४०
इतनी कहिकै करिया चलिभो फौजन फेरि पहुँचा आय ॥
तुरत नगड़ची को ललकार्यो मारू डंका देय बजाय २१
बजा नगाड़ा तब माड़ो में क्षत्रिन धरा रकावन पायँ ॥
आपो चढ़िकै फिरि घोड़ापर मनमें रामचन्द्र को ध्याय २२
कूच कराय दयो माड़ो सों पहुँचे जाजमऊ में जाय ॥
तम्बू गड़िगे तहँ करिया के चकरन विस्तर दीन बिछाय २३
उतरयो करिया तब तम्बू में मनमें सुमिरि शारदा माय ॥
लैकै धोती रेशमवाली गंगा निकट पहुँचा जाय २४
न्हवन करिकै श्री गंगा में आसन तहाँ लीन बिछवाय ॥
संध्या वन्दन करि प्रातः की विप्रन तुरत लीन बुलवाय २५
दान दक्षिणा दै विप्रन को तम्बू फेरि पहुँचा आय ॥
पहिरिकै कपड़ा अलबेला सो मेला फेरि पहुँचा जाय २६
जाय दुकानन माँ देखतभा कतहुँ न मिला नौलख्यहिहार ॥
तबलों माहिल उरई वाला तासों हैगै राम जुहार २७
माहिल बोल्यो तब करियाते ओ जम्बै के राजकुमार ॥
काह खरीदन को आयो है जो तुम घूमो सकल बजार २८
सुनिकै बातें ये माहिल की करिया बोला वचन उदार ॥
हार लखौटा नीको ढूंढें सो नहिं पावा कतौं बजार २९
बहिनि बिजैसिनि म्वरिमांगहैं ताते खोज करौं अधिकाय ॥
तुम्हरो जानों जो कतहूँ हो मोको वेगि देव बतलाय ३०
सुनिकै बातें ये करिया की माहिल कहा वचन मुसुकाय ॥
हार नौलखा है मोहबे माँ तुरतै चला तहाँको जाय ३१
बहिनि हमारी मल्हना जानों औ बहनोई रजा परिमाल ॥
कऊ लड़ैया तिन घर नाहीं मानों सत्य सत्य सब हाल ३२
महोबेका प्रथमयुद्ध । ४१ ५
सुनिकै बातें ये माहिल की करिया चरण शीश नवाय ॥
बिदा माँगिकै फिरि माहिलसों तम्बू तुरत पहुंचा आय ३३
हुकुम लगायो सब क्षत्रिनको हाँते कूच देव करवाय ॥
करो तयारी अब मोहबे की सीताराम चरणको ध्याय ३४
सुनिकै बातें ये करिया की क्षत्री सबै भये हुशियार ॥
हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ३५
कूच के डंका बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान ॥
चालिभो करिया फिरि मोहबेको मनमें किहे गंगको ध्यान ३६
त्यही समय की बातें हैं यारो सुनिल्यो कान लगाय ॥
चारो भाई हैं बकसर के जिनका कही बनाफरराय ३७
रहिमलें टोंडेर बच्छराजैं औ चौथे देशराजैं महराज ॥
मीराताल्हन हैं बनरस के जिनके नौ लड़िका शिरताज ३८
अली अलोमत औ दरियाखां बेटा जानबेगें सुल्तानै ॥
मियांबिसारतैं औ दरियाई नाहर कारे औ कल्यानै ३६
कारे बाना करे निशाना कारे घोड़न पर असवार ॥
चीरा शिर पर है सुलतानी मीराताल्हन केर कुमार ४०
ये सब मिलिकै यकठौरी है डाँड़ पै किहेनि बखेड़ाजाय ॥
जयचंद केरी तहँ ठकुरी है जिनका कही कनौजीराय ४१
सब फिरियादी गे कनउज को पहुँचे नगर महोबा जाय ॥
नगर महोबा सों कनउज को रस्ता सीध निकरिगै भाय ४२
यक हरिकारा सों पूँछत भे चारों भई बनाफरराय ॥
जावा चाहें हम कनउज को जहँपै रहैं चँदेलोराय ४३
सुनिकै बातें इन चारों की सोऊ कहा बचन हर्षाय ॥
कौने मतलब को जावत हौ हमते सत्य देव बतलाय ४४
६ आल्हखण्ड । ४२
सुनिकै बातें हरिकारा की ताल्हन बोला बनारसक्यार ॥
भयो बखेड़ा है धूरेपर . हूँवनाचली बिषमतलवार ४५
हम फिरियादी कनउज जावैं राजा जयचंद के दरबार ॥
सुनिकै बातें ये ताल्हनि की सोऊ बोला बचन उदार ४६
उन घर नायब चंदेलो है जो परिमाल मोहोबे क्यार ॥
एक महीना की छुट्टी लै आयो घरे आपने यार ४७
तुमचलिजावो परिमालिकढिग तौ सब काज सिद्धि ह्वैजाय ॥
नाहिं तो बरसैं तुमका लगिहैं मानो सत्य सत्य सबभाय ४८
सुनिकै बातें हरिकारा की ये चलिगयो जहाँ परिमाल ॥
तुरतै मिलिकै परिमालिक सों अपनो गायगयो सबहाल ४६
बड़ी प्रीतिसों परिमालिक तब इनको द्वार दीन टिकवाय ॥
सिधा मँगायो सब क्षत्रिन को ताल्हनि खानादीन मँगाय ५०
बनी रोसइयाँ राजपूतन की क्षत्रिन जेइँ लीन ज्यँवनार ॥
अब यहु लड़िका जम्बैवाला ठाकुर माड़ोका सरदार ५१
दावतिआवै सो मोहवे को करिया करिया के अनुमान ॥
बजै नगाड़ा त्यहि फौजन माँ भारी होय घोर घमसान ५२
सुन्यो नगाड़ा के शब्दन को चक्रित भयो रजापरिमाल ॥
तब हरिकारा दुइ आवतभे तेसब कह्यो वहाँ परहाल ५३
सुनिकै बातें हरिकारा की फाटक बन्द लीन करवाय ॥
तवलों करिया फौजैं लै कै फाटक ऊपर पहुँचा आय ५४
हुकुम लगायो राजपूतन को कुल्हड़न फाटक देव गिराय ॥
मर्दिगर्दै करि सब मोहवे को नेका टकालेउँ निकराय ५५
तौतौ लरिका मैं जम्बै का नाहिं ई डारौं मुच्छमुड़ाय ॥
नीके गहना ये देहैं ना कादर बंश चँदेलाराय ५६
महोबेका प्रथमयुद्ध । ४३ ७
सुनिकै बातें ये करिया की क्षत्रिन लिह्यो कुल्हाड़ाहार्थ ॥
मरै कुल्हाड़ा फिरि फाटक में नायकै रामचन्द्र को माथ ५७
यह गति चारो भाइन दीख्यो ताल्हन बनरस को सरदार ॥
पांचों मिलिकै सम्मत करिकै गरुई हांक दीन ललकार ५८
जल्दी खोलो अब फाटक को मूरति दखौं करिंगा केरि ॥
जान न पाई माड़ोवाला मारौ एक एक को हेरि ५६
यह कहि फाटक को खुलवायो औ फौजनमाँ परे दबाय ॥
मारन लागे चारो भाई जिनका कही बनाफरराय ६०
जौनी दिशि को ताल्हन जावैं कोउ न पैर अड़ावै ज्वान ॥
जौनी दिशिको बच्छराजजायँ त्यहिदिशिमारिकैरैंखरिहान ६१
को गति बरौ देशराजकै सरबरि करै कौन सरदार ॥
बड़ा लड़ैया रहिमलतोंड़र दोऊहाथ करै तलवार ६२
मूंड़नकेरे मुड़चौरा भे औ रुंडनके लाग पहार ॥
खूनकिनदिया तहँ बहिनिकरी जूझे बड़े बड़े सरदार ६३
बड़ा लड़ैया माड़ोवाला यहु जम्बैको राजकुमार ॥
ताल्हनकेरे यहु मुरचापर कीन्हेसि पाँचघरी तलवार ६४
जीति न दीख्यो जब ताल्हनसों तब फिरि भागा लिहेपरान ॥
बचे खुचे जे माड़ोवाले तेऊ भागिगये सब ज्वान ६५
यह सुनि पावा रनिमलहनांने चारिउ कुँवर लीन बुलवाय ॥
बड़ी बड़ाई करि चारों की औ परिमालसों कहा बुझाय ६६
इन्हें टिकावो तुम मोहबे माँ इनके ब्याह देव करवाय ॥
ईजति हमरी इन राखी है औ गाढ़ेमाँ भये सहाय ६७
बातें सुनिकै रनिमलहना की फिरि दरबार पहुंचे आय ॥
देशराज औ बच्छराज को दोउन लीन्ह्यो हृदय लगाय ६८
= आल्हाखण्ड । १४
तिनसों बोल्यो परिमालिक फिरि हमरी बात सुनो दोउ भाय ॥
दूध पूत औ धनदौलत के मालिक तुम्हीं बनाफरराय ६९
मीराताल्हन वनरस वाले तिनसों बोल्यो रजापरिमाल ॥
फौजनकेरे तुम मालिक हौ हमरे बचन करौ प्रतिपाल ७०
नाई बारी को बुलवायो तिनसों कह्यो बचन समुझाय ॥
जाति बिरादर जहाँ हमरे हैं तिनका खबरि सुनायो जाय ७१
लरिका द्वारे परिमालिक घर ब्याहन योग भये हैं आय ॥
क्वारी कन्या जिनघर होवैं टीका तुरत देयँ पठवाय ७२
सुनिकै बातें परिमालिक की नाइन पतालगायो जाय ॥
दलपतिराजा ग्वालीयर का त्यहिफिरि टीका दीनपठाय ७३
देशराज औ बच्छराज को लैके पहुँचिगयो परिमाल ॥
द्यावलि विरमाँ दूनो कन्या इनको ब्याहिदीन नरपाल ७४
देशराज का द्यावलि सँगमें विरमाँ बच्छराज के साथ ॥
ब्याहिकै चलिभे परिमालिक फिरि मनमें सुमिरि भवानीनाथ ७५
दोनों बहुवन को सँग में लै मोहवे आयगये परिमाल ॥
खबरि जनायो यह सखियनने मल्हनावहुत भई खुशियाल ७६
दौरति आई फिरि द्वारे पर औ आरती उतारी आय ॥
बाँह पकरिलइ दोउ बहुवन की राखी रंगमहल में जाय ७७
हार नौलखा के लेबे को आयो रहै करिंगाराय ॥
स्वई हार लै रानी मल्हना औद्यावलिको दीन पहिराय ७८
दूसर हार और तैसे लै विरमागले दीन फिर डार ॥
अनँद बधैया बाजन लागी घर घर होयं मंगलाचार ७९
को गनि बरणै त्यहिसमया कै हमरे बूत कही ना जाय ॥
सुखमाँ सोयो परिमालिक फिरि मल्हना संग महल हर्षाय ८०
महोबेका प्रथमयुद्ध । ४५. ९
सवैया ॥
सोय उठी परिमाल कि नारि तबै मनमें यह सोचन लागी ।
मंदिर एक कसामसि होय नई दुलही सुलही बड़ भागी ॥
दुःख मिलै इन नारिन को मन में यह सोचि उरै अनुरागी ।
सोय उठे ललिते परिमाल तबै यह नारि सुनावन लागी =१
सुनिकै परिमाल कह्योहँसिकै इनको हम आनहि ठौर टिकावैं ।
उठिकै पुर दूर कछू यक जाय तहां पुरवा कर नेव डरावैं ॥
नामधर्यो दशहरिपुर ताहि यहाँ दउकुँवरन फेरि बुलावैं ।
ललिते दउबन्धु टिकेतहँजाय न गायसकों जोमहासुखपावैं=२
को गति बरणै त्यहि पुरवा कै हमरे बूत कही ना जाय ॥
तहँही द्यावलि के आल्हा भे प्याट म रहे उदयसिंहराय =३
बिरमा केरे मलखाने भे सुलखे गये गर्भ में आय ॥
तबहीं करिया माड़ोवाला आधीरात पहुँचा आय =४
सोवत मास्यो बच्छराज को काट्यो देशराज शिरजाय ॥
आगि लगायो फिरि पुरवा में सबियाँ जेवर लीन मँगाय =५
लीन्ह्यो हाथी देशराज का घोड़ा पपिहा लिह्यो खुलाय ॥
लखा पतुरिया देशराज की सोऊ करिया लीन बुलाय =६
मालखजाना परिमालिक का सबियाँ बेगि लीन लुटवाय ॥
हार नौलखा को लैकै फिरि मोहबेते कूच दीन करवाय =७
आठरोजकी मंजिल करिकै माड़ो गयो करिंगाराय ॥
खबरि सुनाईती माहिलने सोऊ गयो तहाँ फिरि आय =८
बड़ी बड़ाई भै माहिलकै राजा जम्बै के दरबार ॥
अनँद बधैया माड़ो बाजी घरघरभये मंगलाचार =६
ब्रह्मारंजित भे मल्हना के औ द्यावलिके उदयसिंहराय ॥
१० आल्हखण्ड । ४६
सुलखे पैदा भे विरमा के ताकी खुशी कही ना जाय ६०
देवा पैदाभा भीषम के ठाकुर मैनपुरी चौहान ॥
सो भा साथी बघऊदन का ज्वानों सुनो चित्तदै कान ६१
याविधि लड़का इकठौरी है बाँधे छोटि छोटि तलवार ॥
छुटि छुटि ढालें सोहैं पीठि में शिरपर पगिया करैं बहार ६२
छुटि छुटि कलँगी तिनपरसोहैं छोटी बैसनके सरदार ॥
छुटि छुटि घोड़न के चढ़वैया बड़ बड़ ठकुरन केर कुमार ६३
रोज शिकारन को जावें ते बाँधे गूंरा और गुलेल ॥
जुलफै सोहैं तिन कुँवरन के जिनमाँ महकै अतरफुलेल ६४
आगे घोड़ा है आल्हा को पाछे जायँ वीर मलखान ॥
तिनके पीछे ब्रह्मा सोहैं पीछे उदयसिंह बलवान ६५
सुलखे भाई 'मलखाने का सोऊ लीन्हे हाँथ गुल्याल ॥
हिरना ढूंढें सब जंगल माँ एक ते एक दई के लाल ६६
हिरना पायो नहिं जंगल में लौटे फेरि महोबे बाल ॥
एक न लौट्यो उदयसिंह तहँ नाहर देशराजका लाल ६७
सो यह सोचै मन अपनेमाँ औ मनहीमाँ करै विचार ॥
हम कहिआये हैं माता सों माता लावैं आज शिकार ६८
हिरना मारे बिन जावें ना हमरो याही ठीक विचार ॥
यहै सोचि कै मन अपने माँ ढूंढ़न लाग्यो तहाँ शिकार ६६
हिरनादीख्यो इक झाबर में मारन चल्यो बनाफरराय ॥
हिरना भाग्यो तहँ उरईको माहिल बाग पहुँचा जाय १००
घोड़ बेंदुला को रपटाये पाछे चला बनाफर जाय ॥
खाँई ऊंची त्यहि बगियाकी ऊदन घोड़ा दीन फँदाय १०१
मारि बेंदुला की टापन सों सबियाँ बगिया दीन खुदाय ॥
महोबेका प्रथमयुद्ध । ४७ ११
छोटी दरखत बहु टूटत भे रौसैं पटरी दई गिराय १०२
यहगतिदीख्यो जब मालिनने बोल्यो उदयसिंहते आय ॥
कौने राजा के लरिकाहौ सबियाँ डार्यो बाग नशाय १०३
काह नाम है सो बतलाओ आपन देश देव बतलाय ॥
सुनिकै बातें त्यहि मालीकी बोल्यो तुरत बनाफरराय १०४
देश हमारो नगर महोबा हमरो उदयसिंह है नाम ॥
फिरिकै माली अब बोलेना नाहिं तो पठैदेवँ यमधाम १०५
सुनिकै बातें बघऊदन की माली चुप्प साधि तब लीन ॥
सुमिरि भवानी शिवशंकरको ह्याँते कलम बन्दकै दीन १०६
आशिर्वाद देवँ मुंशीसुत जीवहु प्रागनरायण भाय ॥
कीरति तुम्हरी जो सब गावैं तौफिरिकथाबहुतबढ़िजाय १०७
माथ नवावों पितु अपने को जिन म्वहिं बिद्यादीन पढ़ाय ॥
सो सुख पावैं देवलोक में गावैंललितचरितनितध्याय १०८
अब मैं ध्यावों रामचन्द्रको जो मम इष्टदेव महराज ॥
ईज्जति हमरी जग में राखैं पुरवैं सकल हमारे काज १०६
इति श्रीलखनऊनिव।सि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मजबायू प्रयागना-
रायणजीकीआज्ञानुसारउन्नामप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भव
बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृतमहोवायुद्धऊदनशिकार
वर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥
महोबेकाप्रथमयुद्धसमाप्त ॥
This page contains only an ornamental illustration (a vase of flowers enclosed within a decorative border) and contains no textual content to transcribe.
अथ आल्हखण्ड ॥
माड़ो का युद्ध वर्णन ॥
सवैया ॥
श्वेतस्वरूप अनूपमनूप नहीं कोउ रूप कहौं ज्यहि गाई ।
आप समान हौ आपहि रूप स्वरूप के भूप गिरीश जमाई ॥
बैल बुढ़ान कि शूल हिरानभयो कछु आन कि आनहि भाई ।
पापी लस्यो ललिते शरणागत लूटत हैं त्यहि चोर सदाई १
काम औ क्रोध औ लोभौ मोहहु लूटत हैं नितही दुखदाई ।
राव न रंक कि शंक करें निरशंक फिरैं सबके उर जाई ॥
चार में मार अपार बली जो छली छलि देश गयो सब खाई ।
पापी लस्यो ललिते शरणागत लूटत हैं त्यहि चोर सदाई २
सुमिरन ॥
नित प्रति ध्यावै जो सुर्यन को होवै जौन बिसूरै काज ॥
सूर्य्य महातम जो कउ गावै ताकी बनी रहै जग लाज १
प्रातःकाल उदय पूरब दिशि पश्चिम अस्त शामको जान॥
देय अंजली जल सुर्यन को तापर खुशी होयं भगवान २
४
२ आल्हखण्ड । ५०
निमक न खावे जो रवि दिनमें एकै बेर करै आहार ॥
बंधन छूटैं त्यहि दुनिया के नाँघै माया सिंधु अपार ३
सोय के जागै जब कोऊ नर लेवै रोज सूर्य्य के नाम ॥
जब मरजावै वहु दुनिया में पावै तुरत सूर्य्य को धाम ४
छूटि सुमिरनी गै सूर्य्यन कै औ ऊदन का सुनो हवाल ॥
ऊदन जैहैं गढ़माड़ो को लड़िहैं तहाँ केर नरपाल ५
अथ कथाप्रसंग ॥
बरस बारहीं का ऊदन रहै बाँधे सबै ज्वान हथियार ॥
माहिल ठाकुर उरई वाला खेलै ताकी बाग शिकार १
घोड़ बेंदुला तहँ थिरकत भा विषधर उरई के मैदान ॥
भारी पनिघट रहै उरई का नारिन दीख सजीला ज्वान २
धीरज छूट्यो तब नारिन के बोलीं एक एक के कान ॥
काहू राजाको बालकहै याको रूप दीन भगवान ३
नारी बोलैं अस आपस में तवलग गयो बनाफर आय ॥
ऊदन बोल्यो पनिहारिन सों घोड़ै पानी देउ पियाय ४
सुनिकै बातैं बघऊदन की बोली एक नारि रिसिआय ॥
कौनदेश के रहवैया हौ आपन नाम देव बतलाय ५
लौंड़ी तुम्हरी हम आहिनना घोड़ै पानी देयँ पियाय ॥
माहिलराजा जो सुनि पैहैं लेहैं घोड़ा तुरत छिनाय ६
देश हमारो नगर मोहोबा आल्हा केर लहुरवाभाय ॥
बेटा आहिन देशराज के हमरो नाम उदयसिंहराय ७
यह कहि लीन्हों कर गुलेलको गुल्लन गगरी दीन गिराय ॥
जितनी गगरी रहैं पनिघटमाँ सबियाँ गुल्लन दीन नशाय ८
पैंड़ा मसक्यो रसबेंदुल के घोड़ा उड़ा हवा सम जाय ॥
सवापहर के फिरि अर्सामाँ ऊदन गयो मोहोबे आय ६
हाँ पनिहारी चलि पनिघटसों माहिल द्वार पहुंची आय ॥
कही हक़ीकत सब माहिल सों आँखिन आँसू रहीं बहाय १०
ईजति हमरी वहि लैडारयो बेटा देशराज के लाल ॥
गगरी सबियाँ चूरण कैकै औचलिगयो जहाँपरिमाल ११
सुनिकै बातैं पनिहारिन की माहिलजला अग्निकीज्याल ॥
काग़ज लीन्ह्यो कलपीवाला लीन्ह्यो कलमदवाइत हाल १२
शिरीसरखऊ को पहिले लिखि पाछे लिखनलाग सब हाल ॥
चिट्ठी तुमका हम भेजित है सो पढ़िलेउ रजापरिमाल १३
तुम्हरे घरका जो चाकर है जाको उदयसिंह है नाम ॥
सो चलिआयो म्वरि उरई माँ सबियाँ बाग कीन बेकाम १४
उधुम मचायो सो पनिघट में सिगरी गगरी दीन नशाय ॥
कबसे ऊदन भे तरवरिहा सो तुम उन्हें देव समुझाय १५
टँगीं खुपरियाँ देशराज की राजा जम्बा क्यरे दुवार ॥
बड़ी वीरता जो आई हो माड़ो करें जाय तलवार १६
लिखिकै चिट्ठी सो माहिलने धावन हाथ दीन पकराय ॥
साजि साँड़िनी को जल्दी सों धावन चला मोहोबे जाय १७
तीन पहर का अरसा करके फाटक उपर पहुंचा जाय ॥
बैठि साँड़िनी गै फाटक पर धावन उतरपरा तहँ आय १८
चलिभो धावन फाटक भीतर जहँ पै बैठ रजा परिमाल ॥
कीन बन्दगी महराजा को पत्री देत भयो ततकाल १६
फारि लिफाफा को जल्दी सों पत्री पढ़त भयो परिमाल ॥
लिखी हकीकत जो माहिल है सोसबबाँचिलीनत्यहिकाल २०
कलम दवाइत कागज लैंकै उत्तर लिखनलाग परिमाल ॥
धोखे माड़ो की चरचा ना कीन्ह्यो उरई के नरपाल २१
फोरी गगरिया है माटी की ताँवे घड़ा देउँ बनवाय ॥
विषधर लड़का देशराज का जयहिकाकहीउदयसिंहराय २२
जैसे लरिका देशराज का तैसे पूत आपनो जान ॥
अनख न मानव यहि वातनका माहिल वचन हमारे मान २३
लिखिकै चिट्ठी को जल्दी सों धावन हाथ दीन पकराय ॥
माथ नायकै परिमालिक को धावन बैठ ऊंट पर जाय २४
जल्दी चलिकै फिरि मोहबे सों उरई तुरत पहुंचा आय ॥
किह्यो बन्दगी सो माहिल को पत्री दीन हाथ में जाय २५
पढ़िकै पत्री परिमालिक की माहिल ठाकुर उठा रिसाय ॥
नोचि फोंचिकै त्यहि चिट्ठीको माहिल तहँपर दीन चलाय२६
एक महीना के अरसा में ऊदन खेलन चल्यो शिकार ॥
जायकै पहुंच्यो फिरि उरई में माहिल बाग गयो सरदार २७
जोड़ी मास्यो करसायल की औ फुलबगिया डस्योनशाय॥
माली दौरे सब बगिया के औयहदिखयनितमाशाआय२८
जल्दी चलि भे ते उरई को अभई पास पहुंचे जाय ॥
कह्यो हकीकत सब माली ने अभई तुरतै चला रिसाय २६
जायकै पहुँच्यो फिरिबगियामें अभई गरु दीन ललकार ॥
अवगुन कीन्ह्यो भल उरई में ओ द्यावलि के राजकुमार३०
जान न पैहो अब उरई ते ऊदन खबरदार द्वैजाय ॥
सुनिकै बातें ये अभई की घोड़ते कुदा बनाफरराय ३१
पकरिकै बाहू द्वउ अभई की औ वगिया माँ दीन चलाय॥
हाँकिकै घोड़ा ऊदन चलिभे पहुँचे नगरमोहोबा आय ३२
माली दौरे फिरि बगिया ते माहिल पास पहुंचे आय ॥
माड़ोका युद्ध । ५३ ५
सुनिकै बातें तिन मालिन की माहिल ठाकुर उठा रिसाय ३३
लिल्ली घोड़ी को मँगवायो तापर माहिल भयो सवार ॥
जायकै पहुँच्यो फुलबगिया में ठाकुर उरई को सरदार ३४
गोद उठायो फिरि अभई को तुरतै नलकी लीन मँगाय ॥
त्यहि पौढ़ायौ सो अभई को महलन तुरत दीनपहुँचाय ३५
अपना चलिभा फिरि मोहबेको लिल्लीघोड़ी पर असवार ॥
तिकृतिकृतिकृतिकूहांकतिआवै पहुँचा फेरि महोबेदार ३६
उतरिकै घोड़ी सों जल्दी सों चलिभो जहाँ रजापरिमाल ॥
राम जुहार कीन राजा को औफिरिकहनलागसबहाल ३७
तुमने ऊदन को पालो है राजा मोहबे के सरदार ॥
दाख छुहारेन की बगिया को ऊदन जाय कीन संहार ३८
भुजा उखारी तिन अभई की मारो हिरण बाग में जाय ॥
दूजी कीन्हीं म्वरे साथ में ओ महराजा बात बनाय ३६
ऐस बहादुर जो पैदा भे काहे न लेयँ बाप को दायँ ॥
जम्बै राजा माड़ोवाला दशहरि पुरवा लीन लुटाय ४०
बाँधिकै मुश्कें देशराज की पत्थर कल्हू डरा पिरवाय ॥
लेखा पतुरिया देशराज की सो लैगयो करिंगाराय ४१
घोड़ पपीहा औ हाथी को लीन्ह्यो हार नौलखा आय ॥
सोवत मारयो बच्छराज को दशहरिपुरवा दीन फूँकाय ४२
इतना कहतै ऊदन आयों राजा गयो सनाका खाय ॥
कलहा लड़िका देशराज को जो मरिबे को नहीं डेराय ४३
सुनिकै बातें सो माहिल की ठाढ़ो भयो शीश को नाय ॥
को है राजा माड़ोवाला सांची हमें देउ बतलाय ४४
को है मारा म्वरे बाप को पुरवा कौन दीन फूँकवाय ॥