आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहोबेका प्रथमयुद्ध । ४१ ५
सुनिकै बातें ये माहिल की करिया चरण शीश नवाय ॥
बिदा माँगिकै फिरि माहिलसों तम्बू तुरत पहुंचा आय ३३
हुकुम लगायो सब क्षत्रिनको हाँते कूच देव करवाय ॥
करो तयारी अब मोहबे की सीताराम चरणको ध्याय ३४
सुनिकै बातें ये करिया की क्षत्री सबै भये हुशियार ॥
हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ३५
कूच के डंका बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान ॥
चालिभो करिया फिरि मोहबेको मनमें किहे गंगको ध्यान ३६
त्यही समय की बातें हैं यारो सुनिल्यो कान लगाय ॥
चारो भाई हैं बकसर के जिनका कही बनाफरराय ३७
रहिमलें टोंडेर बच्छराजैं औ चौथे देशराजैं महराज ॥
मीराताल्हन हैं बनरस के जिनके नौ लड़िका शिरताज ३८
अली अलोमत औ दरियाखां बेटा जानबेगें सुल्तानै ॥
मियांबिसारतैं औ दरियाई नाहर कारे औ कल्यानै ३६
कारे बाना करे निशाना कारे घोड़न पर असवार ॥
चीरा शिर पर है सुलतानी मीराताल्हन केर कुमार ४०
ये सब मिलिकै यकठौरी है डाँड़ पै किहेनि बखेड़ाजाय ॥
जयचंद केरी तहँ ठकुरी है जिनका कही कनौजीराय ४१
सब फिरियादी गे कनउज को पहुँचे नगर महोबा जाय ॥
नगर महोबा सों कनउज को रस्ता सीध निकरिगै भाय ४२
यक हरिकारा सों पूँछत भे चारों भई बनाफरराय ॥
जावा चाहें हम कनउज को जहँपै रहैं चँदेलोराय ४३
सुनिकै बातें इन चारों की सोऊ कहा बचन हर्षाय ॥
कौने मतलब को जावत हौ हमते सत्य देव बतलाय ४४