सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 43

२ आल्हखण्ड । ३८
कलियुग बाबा की रजधानी माता तुही लगावै पार ४
जप तप भाग्यो मेरि देही ते अब मैं भयौं बहुत सुकुमार ॥
ताते नैया डगमग होवै बेड़ा कौन लगावै पार ५
तुही खेवैया शारद मैया माता खेय लगावै पार ॥
नाहिं तो बूडौं मँझधारा में माता होवै हँसी तुम्हार ६
छूटि सुमिरनी गै शारद कै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥
करिया आई अब मोहवे का जो जम्बैका राजकुमार ७
अथ कथाप्रसङ्ग ॥
एक समइया की बातें हैं यारो सुनिल्यो कांन लगाय ॥
परब दशहरा की बुड़की रहै गंगा न्हान सबै कोउ जाय १
बड़ा महातम श्रीगंगा को गायो वालमीकि महराज ॥
ब्यास बनायो महभारत जो तामें कह्यो जगत के काज २
सो सब जानै माड़ोवाला यहु जम्बै का राजकुमार ॥
हाथ जोरिकै फिरि बोलतभा दद्दुवा सुनिल्यो वचन हमार ३
भारी मेला श्री गंगा को दद्दुवा जाजमऊ के घाट ॥
पुरके बाहर हम देखा है जावैं राव रङ्क सब बाट ४
हुकुम जो पावैं हम दद्दुवा को तो गंगा को अवैं अन्ह्याय ॥
पाप नशावैं सब देही के गंगा चरण शरण में जाय ५
सुनिकै बातें ये करिया की जम्बै गोद लीन बैठाय ॥
चूम्यो चाट्यो गले लगायो बोल्यो बचन तुरत मुसुकाय ६
बारह वरसनका अरसा भो पैसा दीन न कनउज केर ॥
नायब मन्त्री चन्देले के तुमको लेयँ वहाँ जो हेर ७
बाँधिकै मुशकें म्वरे बचुवा त्वहिं तुरतै जेहल देयँ पहुँचाय ॥
पैसा देवौ तो बचिजावौ नाहिं तो जाय प्राणपर आय ८