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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 50

महोबेका प्रथमयुद्ध । ४५. ९
सवैया ॥
सोय उठी परिमाल कि नारि तबै मनमें यह सोचन लागी ।
मंदिर एक कसामसि होय नई दुलही सुलही बड़ भागी ॥
दुःख मिलै इन नारिन को मन में यह सोचि उरै अनुरागी ।
सोय उठे ललिते परिमाल तबै यह नारि सुनावन लागी =१
सुनिकै परिमाल कह्योहँसिकै इनको हम आनहि ठौर टिकावैं ।
उठिकै पुर दूर कछू यक जाय तहां पुरवा कर नेव डरावैं ॥
नामधर्यो दशहरिपुर ताहि यहाँ दउकुँवरन फेरि बुलावैं ।
ललिते दउबन्धु टिकेतहँजाय न गायसकों जोमहासुखपावैं=२
को गति बरणै त्यहि पुरवा कै हमरे बूत कही ना जाय ॥
तहँही द्यावलि के आल्हा भे प्याट म रहे उदयसिंहराय =३
बिरमा केरे मलखाने भे सुलखे गये गर्भ में आय ॥
तबहीं करिया माड़ोवाला आधीरात पहुँचा आय =४
सोवत मास्यो बच्छराज को काट्यो देशराज शिरजाय ॥
आगि लगायो फिरि पुरवा में सबियाँ जेवर लीन मँगाय =५
लीन्ह्यो हाथी देशराज का घोड़ा पपिहा लिह्यो खुलाय ॥
लखा पतुरिया देशराज की सोऊ करिया लीन बुलाय =६
मालखजाना परिमालिक का सबियाँ बेगि लीन लुटवाय ॥
हार नौलखा को लैकै फिरि मोहबेते कूच दीन करवाय =७
आठरोजकी मंजिल करिकै माड़ो गयो करिंगाराय ॥
खबरि सुनाईती माहिलने सोऊ गयो तहाँ फिरि आय =८
बड़ी बड़ाई भै माहिलकै राजा जम्बै के दरबार ॥
अनँद बधैया माड़ो बाजी घरघरभये मंगलाचार =६
ब्रह्मारंजित भे मल्हना के औ द्यावलिके उदयसिंहराय ॥