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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 56, कुल 618 में से

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पृष्ठ 56

सवापहर के फिरि अर्सामाँ ऊदन गयो मोहोबे आय ६
हाँ पनिहारी चलि पनिघटसों माहिल द्वार पहुंची आय ॥
कही हक़ीकत सब माहिल सों आँखिन आँसू रहीं बहाय १०
ईजति हमरी वहि लैडारयो बेटा देशराज के लाल ॥
गगरी सबियाँ चूरण कैकै औचलिगयो जहाँपरिमाल ११
सुनिकै बातैं पनिहारिन की माहिलजला अग्निकीज्याल ॥
काग़ज लीन्ह्यो कलपीवाला लीन्ह्यो कलमदवाइत हाल १२
शिरीसरखऊ को पहिले लिखि पाछे लिखनलाग सब हाल ॥
चिट्ठी तुमका हम भेजित है सो पढ़िलेउ रजापरिमाल १३
तुम्हरे घरका जो चाकर है जाको उदयसिंह है नाम ॥
सो चलिआयो म्वरि उरई माँ सबियाँ बाग कीन बेकाम १४
उधुम मचायो सो पनिघट में सिगरी गगरी दीन नशाय ॥
कबसे ऊदन भे तरवरिहा सो तुम उन्हें देव समुझाय १५
टँगीं खुपरियाँ देशराज की राजा जम्बा क्यरे दुवार ॥
बड़ी वीरता जो आई हो माड़ो करें जाय तलवार १६
लिखिकै चिट्ठी सो माहिलने धावन हाथ दीन पकराय ॥
साजि साँड़िनी को जल्दी सों धावन चला मोहोबे जाय १७
तीन पहर का अरसा करके फाटक उपर पहुंचा जाय ॥
बैठि साँड़िनी गै फाटक पर धावन उतरपरा तहँ आय १८
चलिभो धावन फाटक भीतर जहँ पै बैठ रजा परिमाल ॥
कीन बन्दगी महराजा को पत्री देत भयो ततकाल १६
फारि लिफाफा को जल्दी सों पत्री पढ़त भयो परिमाल ॥
लिखी हकीकत जो माहिल है सोसबबाँचिलीनत्यहिकाल २०
कलम दवाइत कागज लैंकै उत्तर लिखनलाग परिमाल ॥