आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 48, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहोबेका प्रथमयुद्ध । ४३ ७
सुनिकै बातें ये करिया की क्षत्रिन लिह्यो कुल्हाड़ाहार्थ ॥
मरै कुल्हाड़ा फिरि फाटक में नायकै रामचन्द्र को माथ ५७
यह गति चारो भाइन दीख्यो ताल्हन बनरस को सरदार ॥
पांचों मिलिकै सम्मत करिकै गरुई हांक दीन ललकार ५८
जल्दी खोलो अब फाटक को मूरति दखौं करिंगा केरि ॥
जान न पाई माड़ोवाला मारौ एक एक को हेरि ५६
यह कहि फाटक को खुलवायो औ फौजनमाँ परे दबाय ॥
मारन लागे चारो भाई जिनका कही बनाफरराय ६०
जौनी दिशि को ताल्हन जावैं कोउ न पैर अड़ावै ज्वान ॥
जौनी दिशिको बच्छराजजायँ त्यहिदिशिमारिकैरैंखरिहान ६१
को गति बरौ देशराजकै सरबरि करै कौन सरदार ॥
बड़ा लड़ैया रहिमलतोंड़र दोऊहाथ करै तलवार ६२
मूंड़नकेरे मुड़चौरा भे औ रुंडनके लाग पहार ॥
खूनकिनदिया तहँ बहिनिकरी जूझे बड़े बड़े सरदार ६३
बड़ा लड़ैया माड़ोवाला यहु जम्बैको राजकुमार ॥
ताल्हनकेरे यहु मुरचापर कीन्हेसि पाँचघरी तलवार ६४
जीति न दीख्यो जब ताल्हनसों तब फिरि भागा लिहेपरान ॥
बचे खुचे जे माड़ोवाले तेऊ भागिगये सब ज्वान ६५
यह सुनि पावा रनिमलहनांने चारिउ कुँवर लीन बुलवाय ॥
बड़ी बड़ाई करि चारों की औ परिमालसों कहा बुझाय ६६
इन्हें टिकावो तुम मोहबे माँ इनके ब्याह देव करवाय ॥
ईजति हमरी इन राखी है औ गाढ़ेमाँ भये सहाय ६७
बातें सुनिकै रनिमलहना की फिरि दरबार पहुंचे आय ॥
देशराज औ बच्छराज को दोउन लीन्ह्यो हृदय लगाय ६८