शार्ङ्गधर संहिता (दीपिका टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharangadhara Samhita with Dipika Hindi Commentary
शार्ङ्गधराचार्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
अङ्गारक तैल 153 | सन्धान-कल्पना 164
(xxii)
लाक्षादि तैल 152 | दशमोऽध्यायः
अङ्गारक तैल 153 | सन्धान-कल्पना 164
नारायण तैल 153 | आसव तथा अरिष्ट का भेद 164
वारुणी तैल 154 | अरिष्टों में जल, गुड़ तथा मधु का मान 164
बलादि तैल 154 | सीधु का लक्षण 165
प्रसारिणी तैल 155 | सुरा आदि का लक्षण 165
माषादि तैल 155 | वारुणी का लक्षण 165
शतावरी तैल 156 | शुक्त बनाने की विधि 165
कासीसादि तैल 157 | विनष्ट तथा चुक्र लक्षण 166
पिण्ड तैल 157 | मधुशुक्त बनाने की विधि 166
अर्क तैल 157 | गुड़शुक्त का लक्षण 166
मरिचादि तैल 157 | शुक्त का लक्षण 166
त्रिफलादि तैल 158 | तुषाम्बु तथा सौवीर का लक्षण 166
निम्बबीज तैल 158 | काञ्जिक का लक्षण 166
यष्टीमधुक तैल 158 | उशीरासव निर्माण-विधि 167
करञ्ज तैल 158 | कुमार्यासव 167
नीलिकादि तैल 158 | पिप्पल्यासव 168
भृङ्गराज तैल 159 | लोहासव 168
इरिमेदादि तैल 159 | मृद्वीकारिष्ट 168
जात्यादि तैल 159 | कुटजारिष्ट 169
हिंग्वादि तैल 159 | विडङ्गारिष्ट 169
बिल्व तैल 160 | देवदार्वादि अरिष्ट 169
क्षार तैल 160 | खदिरारिष्ट 170
पाठादि तैल 160 | बब्बूलारिष्ट 170
व्याघ्री तैल 160 | द्राक्षारिष्ट 171
कुष्ठादि तैल 160 | रोहीतकारिष्ट 171
गृहधूम तैल 160 | दशमूलारिष्ट 171
वज्री तैल 160 | एकादशोऽध्यायः
करवीरादि तैल 161 | धातुओं की संख्या 173
चन्दनादि तैल 161 | धातुओं के शोधन की विधि 173
वचा तैल 161 | सुवर्ण भस्म की विधि 173
निर्गुण्डी लांगली तैल 162 | सुवर्ण भस्म की दूसरी विधि 174
चक्रमर्द तैल 162 | तीसरी विधि 174
धत्तूर तैल 162 | चौथी विधि 175
कटुतैलमूर्च्छन-विधि 163 | पाँचवीं विधि 175
तैल की गन्धवृद्धि 163 | छठी विधि 175
पत्रकल्क 163
(xxiii)
सुवर्ण भस्म के गुण ..................................... 175 | क्षार बनाने की विधि ..................................... 185
रजत भस्म की विधि .................................... 175 | पानीय प्रतिसारणीय क्षार ................................. 185
रजत भस्म की दूसरी विधि ............................ 176 |
आर भस्म की विधि ..................................... 176 | द्वादशोऽध्यायः
ताम्र, पीतल, कांस्य भस्म-विधि ..................... 177 | पारद के गुण ................................................ 187
ताम्र भस्म की विधि ..................................... 177 | पारद के नाम ................................................ 187
नाग भस्म ................................................... 178 | ग्रहानुसार धातु-नाम ...................................... 187
नाग भस्म की विधि .................................... 178 | पारद की शोधन-विधि .................................... 187
वंग भस्म की विधि ..................................... 178 | गन्धक शोधन-विधि ....................................... 188
लोह भस्म की विधि .................................... 178 | शिंगरफ शोधन-विधि .................................... 188
दूसरी विधि ................................................ 178 | शिंगरफ से पारा निर्माण-विधि .......................... 188
तीसरी विधि ................................................ 179 | डमरू यन्त्र-निर्माण-विधि ................................ 188
उपधातु संख्या ........................................... 179 | पारद को बुभुक्षित करने की विधि .................... 188
स्वर्णमाक्षिक शोधन-विधि ............................ 179 | दूसरी विधि ................................................... 189
स्वर्णमाक्षिक मारण-विधि ............................. 180 | तीसरी विधि ................................................... 189
विमला शोधन-विधि ................................... 180 | गन्धक-जारण-विधि ........................................ 189
तुत्थ-शोधन-विधि ..................................... 180 | पारद-मारण-विधि ......................................... 189
अभ्रक-शोधन-विधि ................................... 180 | पारद-मारण-विधि ......................................... 190
अभ्रक मारण-विधि ..................................... 180 | अन्य विधि .................................................... 191
अभ्रक मारण-विधि ..................................... 181 | अन्य विधि .................................................... 191
अभ्रक सत्व प्रकार ...................................... 181 | ज्वराङ्कुश रस ............................................... 191
नीलाञ्जन-शुद्धि .......................................... 181 | ज्वरारि रस .................................................... 191
मनःशिला-शुद्धि ......................................... 182 | शीतारि रस .................................................... 191
हरिताल-शोधन .......................................... 182 | ज्वरघ्नी गुटिका ............................................. 192
दोलायन्त्र ................................................... 182 | लोकनाथ रस ................................................. 192
रसक-शुद्धि .............................................. 183 | लघु लोकनाथ रस .......................................... 194
उपधातुओं से सत्व निकालने की विधि ........... 183 | मृगाङ्कपोट्टली रस ......................................... 194
रत्नशोधन-विधि ......................................... 183 | हेमगर्भपोट्टली रस .......................................... 195
वज्रभस्म की विधि ...................................... 183 | दूसरा हेमगर्भपोट्टली रस ................................. 195
दूसरी विधि ................................................ 183 | द्वितीय ज्वरांकुश रस ...................................... 196
तीसरी विधि ................................................ 183 | आनन्दभैरव रस ............................................ 196
वैक्रान्त-मारण ........................................... 184 | सूचिकाभरण रस ........................................... 197
रत्नों का शोधन-मारण ................................ 184 | जलबन्धु रसं ................................................. 197
शिलाजतु शोधन-विधि ............................... 184 | पञ्चवक्त्र रस ................................................ 197
शिलाजतु निर्माण-विधि .............................. 184 | उन्मत्त रस .................................................... 198
मण्डूर भस्म निर्माण-विधि ............................ 185 | सन्निपाताञ्जन ................................................ 198
| नाराच रस ..................................................... 198
(xxiv)
इच्छाभेदी रस १९८ | अजीर्णकण्टक रस २०४
वसन्तकुसुमाकर रस १९८ | मन्थानभैरव रस २०५
राजमृगाङ्क रस १९९ | वातनाशन रस २०५
स्वयमग्नि रस १९९ | कनकसुन्दर रस २०५
अमृतार्णव रस २०० | सन्निपातभैरव रस २०५
सूर्यावर्त रस २०० | ग्रहणीकपाट रस २०६
स्वच्छन्दभैरव रस २०० | ग्रहणीवज्रकपाट रस २०६
हंसपोट्टली रस २०१ | मदनकामदेव रस २०७
त्रिविक्रम रस २०१ | कन्दर्पसुन्दर रस २०८
महातालेश्वर रस २०१ | लोह रसायन २०८
कुष्ठकुठार रस २०१ | जैपाल-शुद्धि की विधि २०९
उदयादित्य रस २०२ | विष-शुद्धि की विधि २०९
सर्वेश्वर रस २०२ | अहिफेन-शोधन २१०
स्वर्णक्षीरी रस २०३ | भंगा-शोधन २१०
मेहबद्ध रस २०३ | विषमुष्टि शोधन २१०
महावह्नि रस २०३ | लांगली-शोधन २१०
विद्याधर रस २०४ | गुञ्जा-शोधन २१०
त्रिनेत्र रस २०४ | करवीर-शोधन २१०
गजकेसरी रस २०४ | अर्क-सेहुण्ड दुग्ध-शोधन २१०
अग्नितुण्डवटी रस २०४ |
उत्तरखण्ड
प्रथमोऽध्यायः
स्नेह के भेद, उनके पान का समय २११ | तैलपान के योग्य व्यक्ति २१२
स्नेह की दो योनियाँ २११ | वसापान के योग्य व्यक्ति २१३
मिलित स्नेहों के नाम २११ | मज्जापान के योग्य व्यक्ति २१३
स्नेह-सेवन की कालावधि २११ | स्नेहपान का काल २१३
स्नेह की मात्राएँ २१२ | घृत तैल की उपयोग-विधि २१३
विधिहीन स्नेहपान के दोष २१२ | स्नेहों के अनुपान २१३
दोषशान्ति के उपाय २१२ | स्नेह-सेवन २१३
स्नेह-मात्रा-विचार २१२ | यवागू से स्नेह-सेवन २१३
अन्य प्रकार से मात्रा का निश्चय २१२ | धारोष्ण दुग्ध से स्नेह-पान २१३
मात्राओं के गुण २१२ | स्नेहाजीर्ण की चिकित्सा २१३
दोष-भेद से स्नेह का विधान २१२ | स्नेहाजीर्ण का उपचार २१४
घृतपान के योग्य व्यक्ति २१२ | स्नेहपान-जनित तृष्णा-चिकित्सा २१४
| स्नेहपान से हानि २१४
(xxv)
स्नेहपान के अयोग्य रोगी 214 | वमन के योग्य रोग 221
स्नेहपान के योग्य रोगी 214 | वमन के अयोग्य रोग 221
स्निग्ध तथा रूक्ष के लक्षण 214 | वमन के अयोग्य रोगी 221
अतिस्निग्ध के लक्षण 214 | वमन के अयोग्यों को भी वमन का विधान 222
रूक्ष तथा अतिस्निग्ध का उपचार 215 | सुकुमार आदि के वमन की विधि 222
रूक्षण द्रव्य 215 | वमन का विशेष विधान 222
स्नेह-सेवन का फल 215 | वमन के सहायक द्रव्य 222
स्नेह-सेवन में त्याज्य 215 | वमन-विरेचन-स्वरूप 222
द्वितीयोऽध्यायः | वमन-द्रव्यों का परिमाण 222
स्वेद की संख्या और गुण 216 | क्वाथ-पान की मात्रा 222
स्वेद के भेद तथा प्रयोग 216 | कल्कादि की मात्रा 222
दोष भेद से स्वेद के भेद 216 | वमन के वेग 222
पूर्व स्वेदनीय रोगी 216 | वमनादि में प्रस्थ का मान 222
पश्चात् स्वेदनीय रोगी 216 | दोष-भेद से द्रव्य-भेद 222
उभयविध स्वेदनीय रोगी 217 | पित्त में वमन 223
स्वेद की व्यवस्था 217 | कफवातज रोगों में वमन 223
स्वेद का फल 217 | वमन के उपद्रवों की चिकित्सा 223
स्वेदन-काल में रोगी की रक्षा 217 | वमन करते समय कर्तव्य 223
स्वेद के अयोग्य रोगी 217 | दुर्दान्त के लक्षण 223
मृदुस्वेद के स्थान 217 | अतिवान्त के लक्षण 223
अतिस्वेद के उपद्रव 217 | वमन के उपद्रवों की चिकित्सा 223
तापस्वेद-विधि 218 | सम्यग् वात के लक्षण 224
ऊष्मस्वेद-विधि 218 | वान्त का पथ्य 224
उपनाह-स्वेद-विधि 218 | वमन के लाभ 224
द्रवस्वेद-विधि 219 | वमन में परिहार्य 224
द्रवद्रव्य का परिमाण 219 | वमन-विरेचन के पूर्व स्नेहन-स्वेदन 224
स्नेहकृत स्वेद का काल 219 | चतुर्थोऽध्यायः
स्वेद का लाभ-प्रकार 219 | विरेचन-योग्य रोगी 225
स्वेद से धातुवृद्धि 219 | वमन-रहित विरेचन के दोष 225
स्वेदन की अवधि 219 | विरेचन का काल 225
सुस्विन्न का आहार-विहार 219 | संशोधन का फल 225
उष्ण जल से स्नान-विधि 220 | विरेचन-योग्य रोग 225
तृतीयोऽध्यायः | विरेचन के अयोग्य रोगी 225
वमन-विरेचन का काल 221 | विरेचन-योग्य रोगी 226
वमन के योग्य पुरुष 221 | विरेचन के लिए कोष्ठ-भेद 226
| कोष्ठ-भेद से मात्रा-विचार 226
(xxvi)
कोष्ठ-भेद से द्रव्यों का विचार 226 | अनुवासन-वस्ति के द्रव्य 232
वेग-भेद से विरेचन-मात्रा 226 | विरेचन के पश्चात् वस्ति 232
विरेचन-द्रव्यों का मान-विचार 226 | वस्ति देने की विधि 232
दोष-भेद से द्रव्य-विधान 226 | वस्ति-प्रयोग में काल-निर्देश 233
एरण्ड तैल-प्रयोग 227 | मात्रा-काल-प्रमाण 233
सब ऋतुओं के योग्य विरेचन 227 | वस्ति-प्रयोग में पश्चात् कर्म 233
अभयादि मोदक 227 | सम्यक् अनुवासित के लक्षण 233
विरेचन-काल में कर्तव्य 228 | वस्ति के पश्चात् पथ्य 233
सम्यग् विरेचन का लक्षण 228 | अनुवासन की व्यापत्ति की चिकित्सा 233
दुर्विरिक्त का लक्षण 228 | उष्णोदक के गुण 233
दुर्विरिक्त की चिकित्सा 228 | धान्यशुण्ठी जल का गुण 233
अति विरेचन के उपद्रव 228 | स्नेह वस्ति के साथ निरूहण-वस्ति 233
विरेकातियोग में कर्तव्य 228 | वस्तियों के फल 233
सुविरिक्त के लक्षण 228 | वातरोगी के लिए स्नेह-वस्ति 234
विरेचन से लाभ 229 | स्नेह तथा निरूहवस्ति की प्रशंसा 234
विरेचन में परिहार्य 229 | स्नेह-वस्ति के निकलने पर 234
विरेचन में पथ्य 229 | स्नेह-वस्ति के उपद्रव और प्रतिकार 234
| उपद्रवहीन स्नेह-वस्ति 234
पञ्चमोऽध्यायः | स्नेह के न लौटने पर उपाय 235
वस्तियों के दो भेद 230 | स्नेह-वस्ति के लिए गुडूच्यादि तैल 235
वस्तियों के लक्षण 230 | स्नेहपानादि उपचार 235
वस्ति-क्रम का निर्देश 230 | धान्यशुण्ठी क्वाथ 235
अनुवासन का भेद मात्रावस्ति 230 | वस्ति-फलश्रुति 235
अनुवासन के योग्य रोगी 231 | वस्ति-सेवनक्रम 235
अनुवासन के अयोग्य रोगी 231 | वस्ति-व्यापत्तियाँ 235
वस्ति-नेत्र के द्रव्य 231 | पथ्यापथ्य-निर्देश 235
वयस्-भेद से नेत्र-परिमाण 231 |
वस्ति-नेत्र का छिद्र तथा आकार 231 | षष्ठोऽध्यायः
वस्ति-नेत्र का परिणाह 231 | निरूहण-वस्ति-परिचय 237
वस्ति-नेत्र की कर्णिका 231 | निरूहण-वस्ति की मात्रा 237
वस्ति के योग्य द्रव्य 231 | निरूहण के अयोग्य रोगी 237
व्रणवस्ति का नेत्र 231 | निरूहण-वस्ति के योग्य रोगी 237
वस्ति के सम्यग्योग का फल 232 | निरूहण की विधि 237
वस्ति के लिए समय-निर्देश 232 | सुनिरूढ के लक्षण 238
वस्ति के पूर्व भोजन-निर्देश 232 | दुर्निरूढ के लक्षण 238
वस्ति की मात्रा के दोष 232 | अतिनिरूढ के लक्षण 238
वस्ति-मात्रा-निर्देश 232 | आस्थापन तथा निरूहण का प्रयोग 238
(xxvii)
दोष-भेद से वस्ति-विधान २३८
दोष-भेद से भोजन-व्यवस्था २३८
एकाधिक वस्तियों का विधान २३८
दोषभेद से भोजन-व्यवस्था २३९
सुकुमारादि के लिए वस्ति २३९
वस्तियों का क्रम २३९
उत्क्लेशन-वस्ति २३९
दोषहर-वस्ति २३९
शोधन-वस्ति २३९
शमन-वस्ति २३९
लेखन-वस्ति २३९
बृंहण-वस्ति २३९
पिच्छिल-वस्ति २३९
प्रमाणानुसार द्रव्यमिश्रण-विधि २४०
दोष-भेद से स्नेह, मधु का प्रमाण २४०
माधुतैलिक-वस्ति २४०
दीपन-वस्ति २४०
युक्तरथ वस्ति २४०
सिद्ध-वस्ति २४०
मुस्तादि-वस्ति २४१
वस्ति-कल्पना २४१
त्रिदोषहर-वस्तियाँ २४१
रक्तविकार-वस्ति २४१
निरूहण-वस्ति में पथ्यापथ्य २४१
सप्तमोऽध्यायः
उत्तरवस्ति-विधान २४२
वस्ति-मात्रा-निर्धारण २४२
पुरुषों में वस्ति-प्रयोग-विधि २४२
स्त्रियों में वस्ति-प्रयोग-विधि २४२
बालकों में वस्ति-प्रयोग-विधि २४३
विशेष मात्रा-निर्देश २४३
स्त्रियों में वस्ति-प्रयोग विधि २४३
फलवर्त्ति-प्रयोग-विधि २४३
फलवर्त्ति-निर्माण-विधि २४३
लक्षण-समन्वय २४४
फलवर्त्ति का नामभेद २४४
अष्टमोऽध्यायः
नस्य की निरुक्ति २४५
नस्य के भेद २४५
नस्य-प्रयोग का काल २४५
नस्य के अयोग्य काल और रोगी २४५
नस्य के योग्य-अयोग्य वय २४५
विरेचन-नस्य २४५
विरेचन-नस्य की मात्रा २४६
नस्य के लिए द्रव्यों का परिमाण २४६
विरेचन-नस्य के दो भेद २४६
अवपीड, प्रधमन का स्वरूप २४६
विरेचन-नस्य के योग्य रोग २४६
स्नेहन-नस्य २४६
अवपीड-नस्य के योग्य रोगी २४६
प्रधमन के योग्य रोग २४६
गुडादि-नस्य २४६
मधूकसारादि नस्य २४७
सैन्धवादि नस्य २४७
प्रधमन-नस्य २४७
बृंहण-नस्य-कल्पना २४७
मर्श-शिरोविरेचन २४७
बृंहण-नस्य के योग्य रोग २४७
कुंकुम-नस्य २४८
बृंहण-नस्य के द्रव्य २४८
दोष-भेद से स्नेह-व्यवस्था २४८
माषादि-नस्य २४८
प्रतिमर्श-नस्य-विधि २४८
प्रतिमर्श की मात्रा २४९
प्रतिमर्श के काल २४९
प्रतिमर्श की विधि २४९
प्रतिमर्श के योग्य रोगी २४९
पलित में नस्य २४९
नस्य-ग्रहण-विधि २४९
नस्य-धारण-काल २५०
नस्य के तीन योग २५०
नस्य-शुद्धि के लक्षण २५०
(xxviii)
| नस्य का हीनयोग | 250 | शोथनाशक लेप | 258 |
| नस्य का अतियोग | 250 | दाहनाशक लेप | 258 |
| हीनातिषोग में उपचार | 250 | दशाङ्ग लेप | 258 |
| अतिस्निग्ध का लक्षण | 251 | भल्लातक-शोथहर लेप | 258 |
| पञ्चकर्म | 251 | लाङ्गल्यादि लेप | 258 |
| चिकित्सा-विषय विचार | 251 | रक्तचन्दनादि लेप | 259 |
| नवमोऽध्यायः | मातुलुङ्गादि लेप | 259 | |
| धूमपान-विधि | 252 | लोध्रादि लेप | 259 |
| धूमपान के अयोग्य व्यक्ति | 252 | सिद्धार्थकादि लेप | 259 |
| धूमपान-निषेध का कारण | 252 | अश्वखुरमसी लेप | 259 |
| धूमपान की अवधि | 252 | वटपत्रादि लेप | 259 |
| सुप्रयुक्त धूम-प्रशंसा | 253 | अरुषिकाहर लेप | 259 |
| धूमयन्त्र-परिचय | 253 | दूसरा लेप | 259 |
| प्रकार-भेद से धूमपान | 253 | दारुणरोगहर लेप (1) | 259 |
| व्रणधूपन-विधि | 253 | दारुणरोगहर लेप (2) | 259 |
| विविध धूपन-प्रयोग | 253 | इन्द्रलुप्तहर लेप | 260 |
| बालग्रहनाशक-धूपन | 254 | केशवर्द्धक लेप | 260 |
| पथ्य-अपथ्य आदि निर्देश | 254 | रोमोत्पादक लेप | 260 |
| दशमोऽध्यायः | इन्द्रलुप्तहर लेप | 260 | |
| गण्डूष-कवल-विधि | 255 | रोमसंजनन लेप | 260 |
| गण्डूष तथा कवल में भेद | 255 | पलितनाशक लेप (1) | 260 |
| गण्डूषादि सेवन में वय का विचार | 255 | पलितनाशक लेप (2) | 260 |
| स्नैहिक गण्डूष | 255 | पलितनाशक लेप (3) | 260 |
| मधु-गण्डूष के गुण | 256 | पलितनाशक लेप (4) | 260 |
| विविध रोगों में गण्डूष | 256 | पलितनाशक लेप (5) | 261 |
| दार्वादि-गण्डूष | 256 | रोमनाशक लेप (1) | 261 |
| प्रतिसारण और कवल | 256 | रोमनाशक लेप (2) | 261 |
| मातुलुङ्गकेसरादि कवल | 256 | अर्शोलेप | 261 |
| प्रतिसारण के भेद | 256 | शोथनाशक लेप | 261 |
| कुष्ठादि प्रतिसारण | 256 | कर्णमूल शोथ-चिकित्सा | 261 |
| गण्डूषादि के हीनयोग-अतियोग | 256 | श्वित्रहर लेप (1) | 261 |
| गण्डूषादि का सम्यग् योग | 256 | श्वित्रहर लेप (2) | 262 |
| दतवन या दातून | 257 | श्वित्रहर लेप (3) | 262 |
| ताम्बूल-सेवन | 257 | श्वित्रहर लेप (4) | 262 |
| एकादशोऽध्यायः | सिध्महर लेप (1) | 262 | |
| आलेप के नाम तथा परिमाण | 258 | सिध्महर लेप (2) | 262 |
(xxx)
शम्बूक तैल — 270 | रक्तमोक्षण में अपथ्य — 276
कर्णस्रावहर योग — 270 | तुम्बी-प्रयोग-विधि — 276
स्वर्जिका योग — 271 | जलौका-प्रयोग — 277
आम्रादि तैल — 271 | सिरावेध — 277
कर्णकीटहर योग (1) — 271 | त्रयोदशोऽध्यायः
कर्णकीटहर योग (2) — 271 | नेत्ररोगनाशक उपचार — 278
द्वादशोऽध्यायः | सेचन-विधि — 278
रोगानुसार रक्त-निर्हरण — 272 | वाताभिष्यन्द पर सेचन (1) — 278
रक्त-निर्हरण काल तथा लाभ — 272 | वाताभिष्यन्द पर सेचन (2) — 278
शुद्ध तथा अशुद्ध रक्त का लक्षण — 272 | वाताभिष्यन्द पर सेचन (3) — 278
रक्तदुष्टि के लक्षण — 272 | रक्ताभिष्यन्द पर सेचन (1) — 279
रक्तवृद्धि के लक्षण — 272 | रक्ताभिष्यन्द पर सेचन (2) — 279
रक्तक्षय के लक्षण — 272 | नेत्रशूलनाशक योग — 279
वातदूषित रक्त के लक्षण — 273 | आश्च्योतन-विधि — 279
पित्तदूषित रक्त के लक्षण — 273 | वातादि भेद से आश्च्योतन — 279
कफदूषित रक्त के लक्षण — 273 | आश्च्योतन का धारण काल — 279
द्विदोष तथा त्रिदोष से दूषित रक्त के लक्षण — 273 | आश्च्योतन के योग (1) — 279
विषदूषित रक्त के लक्षण — 273 | आश्च्योतन के योग (2) — 279
शुद्ध रक्त के लक्षण — 273 | आश्च्योतन के योग (3) — 279
रक्तस्राव के योग्य रोग — 273 | पिण्डिकाविधान — 280
रक्तस्राव की विधियाँ — 274 | पिण्डी के योग (1) — 280
किनका रक्त नहीं निकालना चाहिये — 274 | पिण्डी के योग (2) — 280
रक्तस्रावण यन्त्र — 274 | पिण्डी के योग (3) — 280
शृंग आदि द्वारा रक्तस्रावण — 274 | पिण्डी के योग (4) — 280
रक्तस्राव के अयोग्य काल एवं रोगी — 274 | बिडालक-विधि — 280
रक्तस्रावकारक उपाय — 274 | बिडालक के योग (1) — 280
रक्तस्राव का समय — 274 | बिडालक के योग (2) — 280
रक्तातिस्राव परिहार — 275 | बिडालक के योग (3) — 281
रक्त की अतिप्रवृत्ति में चिकित्सा — 275 | बिडालक के योग (4) — 281
रक्तरोधन के उपाय — 275 | बिडालक के योग (5) — 281
अग्निदाह-विधि — 275 | बिडालक के योग (6) — 281
अधिक रक्तस्राव का निषेध — 275 | तर्पण-विधि — 281
रक्त का महत्त्व — 276 | तर्पण का निषेध — 281
रक्तस्रावजनित दोष का प्रतिकार — 276 | तर्पण-विधि — 281
रक्तस्राव का फल — 276 | तर्पण के पश्चात् कर्म — 282
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammu. Digitized by S3 Foundation USA | तर्पणकाल तथा सम्यक् तर्पण का लक्षण — 282
(xxxi)
अतितर्पण हीनतर्पण तथा उनका उपचार २८२ | रसाञ्जनादि रसक्रिया २८६
पुटपाक-विधि २८२ | गुडूची रसक्रिया २८६
पुटपाक के भेद २८२ | पुनर्नवा रसाञ्जन २८६
पुटपाक के योग २८२ | बब्बूल रसक्रिया २८६
अञ्जन-विधि २८३ | हिज्जल-रसक्रिया २८६
अञ्जन के भेद २८३ | कतक-रसक्रिया २८६
अञ्जन के अन्य तीन भेद २८३ | शिरोत्पात में रसक्रिया २८६
अञ्जन का निषेध २८३ | कृष्णसर्प वसाञ्जन २८७
गुटिकाञ्जन की मात्रा २८३ | लेखनाञ्जन २८७
रसरूप अञ्जन की मात्रा २८३ | कणा-अञ्जन २८७
चूर्णरूप अञ्जन की मात्रा २८४ | चूर्णाञ्जन (लेखन) २८७
शलाका-निर्माण-विधि २८४ | चूर्णाञ्जन (रोपण) २८७
अञ्जन प्रयोग विधि एवं काल २८४ | चूर्णाञ्जन (प्रसादन) २८७
चन्द्रोदयावर्ति २८४ | शलाका-निर्माण-विधि २८७
करञ्जवर्ति २८४ | प्रत्यञ्जन-विधि २८८
समुद्रफेनादिवर्ति २८४ | नयनामृताञ्जन २८८
दन्तवर्ति २८५ | सर्पविषनाशक अञ्जन २८८
नीलोत्पलवर्ति २८५ | नेत्र-प्रसादन-विधि २८८
कुसुमिकावर्ति २८५ | नेत्र-सिंचन-विधि २८८
रसाञ्जनवर्ति २८५ | नेत्र-रक्षा का महत्त्व २८८
धात्र्यादिवर्ति २८५ | ग्रन्थकार की प्रार्थना २८८
तुत्थादि-रसक्रिया २८५ | शुभकामना २८९
वटक्षीर-रसाञ्जन २८५ | ग्रन्थ की उपयोगिता २८९
अतिनिद्रानाशक योग २८५ | प्रतिसंस्कर्ता का निवेदन २८९
तन्द्रानाशक योग २८५ | अञ्जननिदानम् २९०
प्रबोधाञ्जन २८६ | रोग-परक सूची (अकारादि क्रमानुसार) २९७
दार्व्यादि रसक्रिया २८६
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