अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)
by पारम्परिक लोक संग्रह
Source: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (origin)
अकबर बीरबल विनोद १४६
अकबर बीरबल विनोद १४६
“महाशय जी ! क्या आप कृपा कर मुझे बीरबल के घर का
पता बतला सकते हैं ?” बीरबल ने कहा-“क्यों नहीं बतला
सकता ।” तब वह उसको अपने घर का पता ठिकाना बतला
कर वहाँ से चलता हुआ । वह मनुष्य पूछता २ बीरबल के
घर जा पहुँचा और उसके घरवालों से बीरबल से मिलने का
अनुरोध किया । वे बोले-“ताऊजी अभी बाहर गये हैं, ठहर
जाओ थोड़ी देर में मुलाकात हो जायगी । वह आदमी बीर-
बल के द्वार पर बैठकर उसके आने की प्रतीक्षा करने लगा ।
थोड़ी देर बाद बीरबल लौटकर आया, वह उसे पहचान
कर आश्चर्यचकित होकर पूछा-‘दीवान जी ! रास्ते में आपसे
मेरी मुलाकात हुई थी, परन्तु वहाँ पर आपने मुझे अपना
परिचय क्यों नहीं दिया ।” बीरबल ने कहा-“आपका कहना
अक्षरसः सत्य है, परन्तु आपने मुझसे बीरबल के घर का पता
पूछा था । इसलिये मैंने अपने घर का पता बतला दिया, यदि
मेरा परिचय पूछे होते तो मैं आपको अपना परिचय देता ।”
उस आदमी ने कहा-“लोगोंके मुखसे मैंने ऐसा सुना है कि आप
नित्यप्रति अपना थोड़ा समय एकान्त बास में बिताते हैं, सो
उसका क्या कारण है ?” बीरबल बोला-“आपको समझना
चाहिये था कि एकान्तबास से बड़ा लाभ होता है। अव्वल तो
एकान्त बास में विचारों की सूझ भलीभाँति होती है, दोयम
एकान्त मनन करने का सर्वोत्कृष्ट साधन है। यदि आप कहीं
अलग बैठकर विचार करेंगे तो आपको अपनी परिस्थिति
और की और ही देख पड़ेगी ।” वह मनुष्य बीरबल के उत्तर
से संतुष्ट होकर अपने घर लौट गया ।
१४७ अकबर बीरबल बिनोद
बीरबल की कुरूपता
बीरबल का रंग साँवला था। एक दिन दर्बार के समय
लोगों में मनुष्य की सुन्दरता और कुरूपता पर बहस छिड़ी।
बहुतेरे लोग बीरबल का स्मरण कर उसकी कुरूपता पर हँस
पड़े। उस समय बीरबल दर्बार में उपस्थित नहीं था, जब कुछ
कालोपरान्त लौटकर आया तो दर्बारी लोग उसे देखकर जोर २
से हँसने लगे। बीरबल चाहता था कि उनके इस आकस्मिक
हँसी का कारण पूछे, परन्तु कुछ सोच विचार कर चुप रह
गया। इधर उधर की बातें होने लगीं। कुछ देर बाद बीरबल
को अवसर मिला तो बादशाह से बोला-“पृथ्वीनाथ ! आज
आप लोग बड़े हँसमुख क्यों दीख पड़ते हैं ?”
बादशाह ने हँसते हुए उत्तर दिया-“लोगों के हँसने का
कारण तुम्हारी कुरूपता है, वे कहते हैं-“हम लोग गोरे और
बीरबल काला कैसे हुआ ?”
बीरबल बोला-“अफसोस कि अभी तक आपको इसका
कारण ही नहीं ज्ञात हुआ।” बादशाह ने कहा-“भला भाई बिना
बतलाए यह लोगों को कैसे मालूम हो ? आप यदि जानकारी
रखते हों तो बतला कर सबका भ्रम निवारण करें।”
बीरबल ने उत्तर दिया-“पृथ्वीनाथ ! जिस समय ईश्वर
ने सृष्टि की रचना प्रारम्भ की सर्वप्रथम वृक्ष और बैलों की
रचना की। पर इतना ही करके वह संतुष्ट नहीं हुआ, तब पशु
और पक्षियों की बारी आई। इतना करके कुछ समय तक
आनन्द उपभोग करता रहा, फिर उससे भी उत्तम