अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
Akbar Birbal Vinod (Stories of Justice, Wit and Humour)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
पृष्ठ 161, कुल 292 में से
संदर्भ में पढ़ें१४७ अकबर बीरबल बिनोद
बीरबल की कुरूपता
बीरबल का रंग साँवला था। एक दिन दर्बार के समय
लोगों में मनुष्य की सुन्दरता और कुरूपता पर बहस छिड़ी।
बहुतेरे लोग बीरबल का स्मरण कर उसकी कुरूपता पर हँस
पड़े। उस समय बीरबल दर्बार में उपस्थित नहीं था, जब कुछ
कालोपरान्त लौटकर आया तो दर्बारी लोग उसे देखकर जोर २
से हँसने लगे। बीरबल चाहता था कि उनके इस आकस्मिक
हँसी का कारण पूछे, परन्तु कुछ सोच विचार कर चुप रह
गया। इधर उधर की बातें होने लगीं। कुछ देर बाद बीरबल
को अवसर मिला तो बादशाह से बोला-“पृथ्वीनाथ ! आज
आप लोग बड़े हँसमुख क्यों दीख पड़ते हैं ?”
बादशाह ने हँसते हुए उत्तर दिया-“लोगों के हँसने का
कारण तुम्हारी कुरूपता है, वे कहते हैं-“हम लोग गोरे और
बीरबल काला कैसे हुआ ?”
बीरबल बोला-“अफसोस कि अभी तक आपको इसका
कारण ही नहीं ज्ञात हुआ।” बादशाह ने कहा-“भला भाई बिना
बतलाए यह लोगों को कैसे मालूम हो ? आप यदि जानकारी
रखते हों तो बतला कर सबका भ्रम निवारण करें।”
बीरबल ने उत्तर दिया-“पृथ्वीनाथ ! जिस समय ईश्वर
ने सृष्टि की रचना प्रारम्भ की सर्वप्रथम वृक्ष और बैलों की
रचना की। पर इतना ही करके वह संतुष्ट नहीं हुआ, तब पशु
और पक्षियों की बारी आई। इतना करके कुछ समय तक
आनन्द उपभोग करता रहा, फिर उससे भी उत्तम