गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
गणितसारसंग्रह ३३
(१३६) ३२; ८७; ६; २३२ (१३८) ३७; २४; २९; ४० (१३९) १७; १६ ; १३ ; २४ (१४०) ६२५;
६७२; ९७०; १९०४ (१४१) २८१; ३२०; ४४२; ८८० (१४३ से १४५) वृत्त २५९२० महिलाएँ;
७२० दण्ड । सम चतुरश्र (वर्ग) ३४५६० महिलाएँ; ७२० दण्ड । समबाहु त्रिभुज ३८८८० महिलाएँ;
१०८० दण्ड । आयतचतुरश्र : ३८८८० महिलाएँ; १०८० दण्ड, ५४० दण्ड । (१४७) (i) भुजा ८
(ii) आधार १२; लम्ब ५ (१४९) ५३/३; ५३/३; ४३/३; ४३/३; ४ (१५१) १३; १२; १३; ३; १२ (१५३ से
१५३ १/२) ३; १६; ११; १२ (१५५ १/२) ३√४८ (१५७ १/२) ५; ६; ४ (१५९ १/२) ३५/७; ६९/७
३४ गणितसारसंग्रह
और १९६८ दण्ड (३९½ और ४०½) २६ योजन और १९५२ दण्ड (४१½ और ४२½) ६ योजन,
२ क्रोश और ४८८ दण्ड (४५½) ६९१२ इकाई ईंटें (४६½) ३४५६ इकाई ईंटें (४७½) ५१८४ इकाई
ईंटें (४८½) १०८००० इकाई ईंटें (४९½) ४०३२० इकाई ईंटें (५०½) ४०३२० इकाई ईंटें
(५१½) २०७३६ इकाई ईंटें (५३½) १४४० इकाई ईंटें और २८८० इकाई ईंटें (५५½) २६४० इकाई
ईंटें; १६८० इकाई ईंटें (५६½) २८८० इकाई ईंटें और १४४० इकाई ईंटें (५८½) २०; ७/७२
(५९-६०) ८९१ इकाई ईंटें (६२) १८७२० इकाई ईंटें (६८½) ६४ पट्टिका ।
अध्याय-९
(९½) १/८ दिनांश (११½) ३ ३/४ घटी (१३½
परिशिष्ट-४
माप-सारिणियाँ
१. रेखा-माप *
अनन्त परमाणु = १ अणु
८ अणु = १ त्रसरेणु
८ त्रसरेणु = १ रथरेणु
८ रथरेणु = १ उत्तम भोगभूमि बाल-माप
८ उ. भो. बा. = १ मध्यम भोगभूमि का बाल-माप
८ म. भो. बा. = १ जघन्य ,, ,, ,,
८ ज. भो. बा. = १ कर्मभूमि का बाल-माप
८ कर्मभूमि का बाल-माप = १ लीक्षा-माप
८ लीक्षा माप = १ तिल माप या सरसों-माप †
८ तिल-माप = १ यव-माप
८ यव-माप = १ अङ्गुल या व्यवहाराङ्गुल
५०० व्यवहाराङ्गुल = १ प्रमाण या प्रमाणाङ्गुल
वर्तमान नराङ्गुल = १ आत्माङ्गुल
६ आत्माङ्गुल = १ पाद-माप ( तिर्यक् )
२ पाद = १ वितस्ति
२ वितस्ति = १ हस्त
४ हस्त = १ दण्ड ‡
२००० दण्ड = १ क्रोश
४ क्रोश = १ योजन
२. काल-माप []
असंख्यात समय = १ आवलि
संख्यात आवलि = १ उच्छ्वास
७ उच्छ्वास = १ स्तोक
७ स्तोक = १ लव
- इस सम्बन्ध में तिलोयपण्णत्ती में दिया गया रेखा-माप द्रष्टव्य है १;९३-१३२ ।
† तिलोयपण्णत्ती में लीक्षा के पश्चात् जूं माप है ।
‡ तिलोयपण्णत्ती में दण्ड को धनुष, मूसल या नाळी भी बतलाँया है ।
[] इस सम्बन्ध में तिलोयपण्णत्ती में दिया गया काल-माप द्रष्टव्य है । ४; २८५-२८६
३६ गणितसारसंग्रह
३८ १/२ लव = १ घटी
२ घटी = १. मुहूर्त
३० मुहूर्त = १ दिन
१५ दिन = १ पक्ष
२ पक्ष = १ मास
२ मास = १ ऋतु
३ ऋतु = १ अयन
२ अयन = १ वर्ष
३. धारिता-माप ( धान्य-माप )
४ षोडशिका = १ कुडह
४ कुडह = १ प्रस्थ
४ प्रस्थ = १ आढक
४ आढक = १ द्रोण
४ द्रोण = १ मानी
४ मानी = १ खारी
५ खारी = १ प्रवर्तिका
४ प्रवर्तिका = १ वाह
५ प्रवर्तिका = १ कुम्भ
४. सुवर्ण भार-माप
४ गण्डक = १ गुञ्जा
५ गुञ्जा = १ पण
८ पण = १ धरण
२ धरण = १ कर्ष
४ कर्ष = १ पल
५. रजत भार-माप
२ धान्य = १ गुञ्जा
२ गुञ्जा = १ माष
१६ माष = १ धरण
२ १/२ धरण = १ कर्ष या पुराण
४ कर्ष या पुराण = १. पल
६. लोहादि भार-माप
४ पाद = १ कला
६ १/२ कला = १ यव
गणितसारसंग्रह ३७
४ यव = १ अंश
४ अंश = १ भाग
६ भाग = १ द्रक्षूण
२ द्रक्षूण = १ दीनार
२ दीनार = १ सतेर
१२ १/२ पल = १ प्रस्थ
२०० पल = १ तुला
१० तुला = १ भार
७. वस्त्र, आभरण और वेत्रमाप
२० युगल = १ कोटिका
८. भूमि-प्रमाण
१ घन हस्त घनीभूत भूमि = ३६०० पल
१ घन हस्त ढीली (loose) ” = ३२०० पल
९. ईंट-प्रमाण
१ हस्त × १/२ हस्त × ४ अङ्गुल ईंट = इकाई ईंट
१०. काष्ठ-प्रमाण
१ हस्त और १८ अङ्गुल = १ किष्कु
९६ अङ्गुल लम्बे और १ किष्कु चौड़े
काष्ठखंड को आरे से काटने में
किया गया कार्य = १ पट्टिका
११. छाया-प्रमाण
मनुष्य की १/७ ऊँचाई = उसका पाद माप
परिशिष्ट-५
ग्रंथ में प्रयुक्त संस्कृत पारिभाषिक शब्दों का स्पष्टीकरण
[ हिन्दी-वर्णमाला क्रम में ]
| शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति |
|---|---|---|---|---|---|
| अगरु | ... | ... | ... | सुगंधित काष्ठ । | Amyris ag- |
| allocha | |||||
| अग्र | १२१- | ३ | ... | आगे अथवा आरम्भ का । | |
| १२२ | |||||
| अङ्ग | ... | ... | ... | श्रुतज्ञान के भेदों में से एक भेद का | |
| नाम अंग है । ये बारह होते हैं । | |||||
| अङ्गुल | २५-२९ | १ | ... | लम्बाई का माप । | परिशिष्ट ४ की सूची |
| १ भी देखिये । | |||||
| अणु | २५-२७ | १ | ... | परमाणु या अंत्यमहत्ता को प्राप्त पुद्गल | |
| कण । | |||||
| अध्वान | ३३२½- | ६ | ... | किसी दत्त संख्या के अक्षरोंवाले छन्द | |
| ३३६½ | के समस्त सम्भव प्रकारों के दीर्घ | ||||
| और लघु अक्षरों को उपस्थित करने | |||||
| के लिए उदग्र ( vertical ) | |||||
| अन्तराल । लघु अथवा दीर्घ अक्षर के | |||||
| प्रतीक का अन्तराल एक अंगुल तथा | |||||
| प्रत्येक प्रकार के बीच का अन्तराल | |||||
| भी एक अंगुल होता है । | |||||
| अन्त्यधन | ... | ... | ... | समान्तर या गुणोत्तर श्रेढि में अंतिम | |
| पद । | |||||
| अन्तरावलम्बक | ... | ... | ... | भीतरी लम्ब; दो स्तम्भों के शिखर से | |
| दोनों स्तम्भों के तल से जाने वाली | |||||
| रेखा में स्थित बिन्दु तक तत | |||||
| ( stretched ) दो धागों के मिथ- | |||||
| श्छेदन बिन्दु से लटकने वाले धागे | |||||
| का माप । |
गणितसारसंग्रह ३९
शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति
अन्तश्चक्रवाल वृत्त | ⋯ | ⋯ | ⋯ | कङ्कण की भीतरी परिधि । |
अपर | ११ ३/२ | ९ | ⋯ | उत्तर, बाद की । |
अमोघ वर्ष | ⋯ | ⋯ | ⋯ | राजा का नाम; ( साहित्यिक ) : वह |
| | | | जो वास्तव में उपयोगी वर्षा करते हैं । |
अम्लवेतस | ⋯ | ⋯ | ⋯ | खट्टी पत्तियों वाली एक प्रकार की | Rumex
| | | | जड़ी । | Vesicarius.
अयन | ⋯ | ⋯ | ⋯ | काल का माप । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची २ देखिये ।
अरिष्टनेमि | ⋯ | ⋯ | ⋯ | बाईस वें तीर्थंकर । |
अर्जुन | ⋯ | ⋯ | ⋯ | वृक्ष का नाम । | Ferminalia
| | | | | Arjuna W.
| | | | | & A.
अर्बुद | ⋯ | ⋯ | ⋯ | ग्यारहवें स्थान की संकेतना का नाम । |
अवनति | ३२ | ९ | ⋯ | झुकाव । |
अवलम्ब | ४९ | ७ | ⋯ | शीर्ष से गिराया हुआ लम्ब । |
अव्यक्त | १२१ | ३ | ⋯ | अज्ञात । |
अशोक | ⋯ | ⋯ | ⋯ | वृक्ष का नाम । | Jonesia
| | | | | Asoka Roxb.
असित | ⋯ | ⋯ | ⋯ | ,, | Grislea To-
| | | | | mentosa.
आढक | ⋯ | ⋯ | ⋯ | धान्य-माप | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची ३ देखिये ।
आदि | ⋯ | ⋯ | ⋯ | श्रेढि का प्रथम पद । |
आदिधन | ६३-६४ | २ | ⋯ | समान्तर श्रेढि के प्रत्येक पद को प्रथम |
| | | | पद एवं प्रचय के अपवर्त्य के योग से |
| | | | संयवित मान लेते हैं । समस्त प्रथम |
| | | | पदों के योग को आदिधन कहते हैं । |
आदि मिश्रधन | ८०-८२ | २ | ⋯ | प्रथम पद से संयुक्त । समान्तर श्रेढि |
| | | | का योग । |
आबाधा | ⋯ | ⋯ | ⋯ | किसी त्रिभुज या चतुर्भुज के आधार |
| | | | को संचरित करनेवाली सरल रेखा |
| | | | का खण्ड । |
आयत वृत्त | ६ | ७ | ⋯ | ऊनेन्द्र (Ellipse) |
४० गणितसारसंग्रह
शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति
आयाम | ... | ... | ... | लम्बाई । |
आवलि | ... | ... | ... | काल माप । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची २ देखिये ।
इच्छा | ... | ... | ... | त्रैराशिक प्रश्न सम्बन्धी वह राशि जिसके |
| | | | सम्बन्ध में दत्त अर्थ ( Rate ) पर |
| | | | कुछ निकालना इष्ट होता है । |
इन्द्रनील | ... | ... | ... | शनिप्रिय, नीलमणि | Sapphire
इभदन्ताकार | ७९ १/२ | ७ | ... | हाथी के दांत ( खीस ) का आकार । |
उच्छ्वास | ... | ... | ... | काल माप । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची २ देखिये ।
उत्तर धन | ६३–६४ | २ | ... | समान्तर श्रेढि में पाये जाने वाले प्रचय |
| | | | के समस्त अपवर्त्यों का योग । |
उत्तर मिश्रधन | ८०–८२ | २ | ... | समान्तर श्रेढि के प्रचयों तथा श्रेढि के |
| | | | योग को जोड़ने से प्राप्त मिश्र योगफल । |
उत्पल | ... | ... | ... | जल में उगने वाला नलिनी पुष्प । |
उत्सेध | ... | ... | ... | उच्छ्राय या ऊँचाई । |
उन्नत वृत्त | ६ | ७ | ... | उठे हुए सम्मितीय तलवाली आकृति । |
उभय निषेध | ३७ | ७ | ... | एक प्रकार का चतुर्भुज । |
ऋतु | ... | ... | ... | काल माप । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची २ देखिये ।
एक | ... | ... | ... | इकाई का स्थान । |
औण्ड्र-औण्ड्रफल | २ | ८ | ... | किसी सांद्र अथवा खात की घनात्मक |
| | | | समाई का व्यावहारिक माप जिसे |
| | | | ब्रह्मगुप्त ने औत्र कहा है । |
अंश | ... | ... | ... | धातुओं सम्बन्धी भार का माप । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची ६ देखिये ।
अंशमूल | ... | ... | ... | भिन्नांश का वर्गमूल । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची ३ देखिये ।
अंशवर्ग | ... | ... | ... | भिन्नांश का वर्ग । | " "
कदम्ब | ... | ... | ... | वृक्ष का नाम । | Nauclea
| | | | | Cadamba.
कम्बुका वृत्त | ६ | ७ | ... | शंख के आकार की आकृति । |
गणितसारसंग्रह ४१
शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति
कर्ण | ५४ | ७ | | सम्मुख कोण बिन्दुओ को जोड़ने वाली सरल रेखा । |
कर्म | ... | ... | ... | जीव के रागद्वेषादिक परिणामों के निमित्त से कार्माण वर्गणारूप जो पुद्गल स्कंध जीव के साथ बंधको प्राप्त होते हैं, उनको कर्म कहते हैं । | परिशिष्ट १ में भी 'कर्म' देखिए ।
कर्मान्तिका | ९ | ८ | | किसी सान्द्र अथवा खात की घनात्मक समाई का व्यावहारिक माप । |
कर्ष | | | | स्वर्ण या रजत का भार माप । | परिशिष्ट ४ की सूचियाँ ४ और ५ देखिये ।
कला | | | | कुप्य (base) धातुओं का भार माप । | परिशिष्ट ४ की सूची ६ देखिये ।
कला सवर्ण | | | | भिन्न । | अध्याय तीन के प्रारम्भ में पाद-टिप्पणी देखिये ।
कार्षापण | ... | ... | ... | कर्ष । |
किष्कु | ... | ... | ... | काष्ठ चीरने के सम्बन्ध में लम्बाई का माप । |
कुङ्कुम | | | | कुंकुम फूलों के पराग एवं अंशु । | Croeus sativus
कुट्टीकार | ७९३ | ६ | | अनुपाती विभाजन । |
कुडव- \ | ... | | | धान्य का आयतन सम्बन्धी माप । | परिशिष्ट ४ की सूची ३ देखिये ।
कुडहा / | | | | |
कुटजा | | | | वृक्ष का नाम । | Wrightia Antidysenterica.
कुम्भ | ... | ... | ... | धान्य का आयतन सम्बन्धी माप । | परिशिष्ट ४ की सूची ३ देखिये ।
कुर्वक | ... | ... | | वृक्ष का नाम । | the Amaranath or the Barleria.
केतकी | ... | ... | | " | Pandanus Odoratissimus.
४२ गणितसारसंग्रह
शब्द सूत्र अध्याय पृष्ठ स्पष्टीकरण अभ्युक्ति
कोटि करोड़, संकेतना का आठवाँ स्थान ।
कोटिका ... ... ... वस्त्र, आभूषण तथा बेत का संख्यात्मक परिशिष्ट ४ की
माप । सूची ७ देखिये ।
क्रोश ... ... ... लम्बाई (दूरी) का माप । परिशिष्ट ३ की
सूची १ देखिये ।
कृति ... ... ... वर्ग करण क्रिया ।
कृष्णागरु ... ... ... सुगन्धित काष्ठ की काली विभिन्नता ।
खर्व संकेतना का तेरहवाँ स्थान ।
खारी धान्य का आयतन सम्बन्धी माप ।
गच्छ श्रेढि के पदों की संख्या ।
गण्डक स्वर्ण का भार माप । परिशिष्ट ४ की
सूची ४ देखिये ।
गतनाऽद्य १०½ ९ पूर्वाह्न में बीता हुआ दिनांश ।
गुञ्जा ... स्वर्ण या रजत का भार माप । परिशिष्ट ४ की
सूचियाँ ४ एवं
५ देखिये ।
गुण ५ ७ ... जीवा ।
गुणकार ... ... ... गुणा ।
गुणधन ९३ २ ... गुणोत्तर श्रेढि के पदों की संख्या के
तुल्य साधारण निष्पत्तियों को लेकर,
उनके परस्पर गुणनफल में प्रथम पद
का गुणा करने से गुणधन प्राप्त होता है ।
गुण सङ्कलित ... गुणोत्तर श्रेढि (Geometrical
progression).
घटी काल माप परिशिष्ट ४ की
सूची २ देखिये ।
घन ५३-५४ २ ... किसी राशि का घन करना; जिस राशि
का घनमूल निकालना इष्ट होता है,
उसे इकाई के स्थान से प्रारम्भ कर
तीन-तीन के समूह में विभाजित कर
लेते हैं । इन समूहों में से प्रत्येक का
दाहिनी ओर का अंतिम अंक घन
कहलाता है ।
घन मूल घनमूल निकालने की क्रिया।
गणितसारसंग्रह ४३
शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति
चक्रिकाभञ्जन | ६ | १ | १ | जन्ममरण के चक्र का संहार करनेवाले; |
| | | | राष्ट्रकूट राजवंश के राजा का नाम । |
चतुर्मण्डल क्षेत्र | ८२ ½ | ७ | २०१ | मध्य स्थिति |
चम्पक | ६ | ४ | ६९ | पीले सुगन्धित पुष्प वाला वृक्ष | Michelia
| | | | | Champaka
चय | ६८ | २ | २२ | प्रचय । वह राशि जो समान्तर श्रेढि |
| | | | के उत्तरोत्तर पदों में समान अन्तर |
| | | | स्थापित करती है । |
चरमार्ध | १०३ ½ | ६ | ११२ | शेष मूल्य |
चिति | ३०३ | ६ | १६९ | श्रेढि संकलन । ढेर । |
| | | २६२ | |
चित्र कुट्टीकार | २१६ | ६ | १४५ | अनुपाती विभाजन समन्वित विचित्र |
| | | | एवं मनोरञ्जक प्रश्न । |
चित्र कुट्टीकार मिश्र | २७३ ½ | ६ | १६० | अनुपाती विभाजन क्रिया के प्रयोग |
| | | | गर्भित विचित्र एवं मनोरञ्जक मिश्रित |
| | | | प्रश्न । |
छन्द | ३३३ ½ | ६ | १७७ | ... ... | A syllabic
| | | | | metre
जन्य | ९० ½ | ७ | २०४ | 'बीज' नामक दत्त न्यास से व्युत्पादित |
| | | | त्रिभुज और चतुर्भुज आकृतियाँ । |
जम्बू | ६४ | ४ | ८० | वृक्ष का नाम । | Eujenia
| | | | | Jambalona,
जिन | १ | ६ | ९१ | जिन्होंने घातिया कर्मों का नाश किया | जिन्होंने अनेक
| | | | है वे सकल जिन हैं इनमें अरहंत और | विषम भवों के
| | | | सिद्धगर्भित हैं । आचार्य, उपाध्याय | गहन दुःख प्रदान
| | | | तथा साधु एक देश जिन कहे जाते हैं | करनेवाले कर्म
| | | | क्योंकि वे रत्नत्रय सहित होते हैं । | शत्रुओं को जीता
| | | | असंयत सम्यक् दृष्टि से लेकर अयोगी | है-निर्जरा की है,
| | | | पर्यन्त सभी जिन होते हैं । | वे जिन कहलाते
| | | | | हैं ।
जिनपति | ८३ ½ | ६ | १०८ | तीर्थंकर । |
ज्येष्ठ धन | १०२ ½ | ६ | ११२ | सबसे बड़ा धन । |
डुण्डुक | ६७ | ८ | २६८ | वृक्ष का नाम । |
४४ गणितसारसंग्रह
शब्द सूत्र अध्याय पृष्ठ स्पष्टीकरण अभ्युक्ति
तमाल ३९ ४ ७४ वृक्ष का नाम । Xantho-
chymus
ताली ११६ १/२ ६ ११९ वृक्ष का नाम Pictorius
तिलक २६ ४ ७२ सुन्दर पुष्पों वाला वृक्ष ।
तीर्थ १ ६ ९१ उथला स्थान जहाँ से नदी आदि को
पार कर सकते हैं ।
तीर्थंकर १ ६ ९१ तीर्थों को उत्पन्न करनेवाली, चार-
घातिया कर्मों का नाशकर अर्हंत पद
से विभूषित आत्मा ।
तुला ४४ १ ६ कुप्य ( Baser ) धातुओं का भार
माप ।
त्रसरेणु २६ १ ४ कण । क्षेत्रमाप ।
त्रिप्रश्न १२ १ २ संस्कृत ज्योतिष ग्रंथों के किसी अध्याय
का नाम ।
त्रिसमचतुरश्र ५ ७ १८१ तीन समान भुजाओं वाला चतुर्भुज
क्षेत्र ।
दण्ड ३० १ ४ दूरी की माप । परिशिष्ट ४ की
सूची १ देखिये ।
दश ६३ १ ८ संकेतना का दसवाँ स्थान ।
दश कोटि ६५ १ ८ दस करोड़ ।
दश लक्ष ६४ १ ८ दस लाख ( One million ) ।
दश सहस्र ६४ १ ८ दस हजार ।
द्विरग्र शेषमूल ३ ४ ६८ भिन्नो के विविध प्रश्नों की एक जाति ।
द्विसम त्रिभुज ५ ७ १८० दो समान भुजाओं वाला (समद्विबाहु)
त्रिभुज क्षेत्र ।
द्विसम चतुरश्र ,, ,, १८० दो समान भुजाओं वाला चतुर्भुज क्षेत्र ।
द्वि द्विसम चतुरश्र ,, ,, १८० आयत क्षेत्र ।
दीनार ४३ १ ६ कुप्य धातुओं का भार माप । टंक- परिशिष्ट ४ की
( सिक्के ) का नाम भी दीनार है । सूची ६ देखिये ।
दृष्ट धन ८४ २ २६ ज्ञात धन
द्रक्षूण ४३ १ ६ कुप्य धातुओं ( Baser metals ) ,, ,,
का भार माप ।
द्रोण ३७ १ ५ धान्य सम्बन्धी आयतन माप परिशिष्ट ४ की
सूची ३ देखिये ।
धनुषाकार क्षेत्र ४३ ७ १९० वृत्त के चाप एवं चापकर्ण से सीमित क्षेत्र ॥
गणितसारसंग्रह ४५
शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति
धरण | ३९ | १ | ५ | स्वर्ण या रजत का भार माप । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूचियाँ ४ और
| | | | | ५ देखिये ।
नन्द्यावर्त | ३३२ १/२ | ६ | १७७ | विशेष प्रकार के बने हुए राजमहल
| | | | का नाम । |
नरपाल | १० | २ | ११ | राजा; सम्भवतः किसी राजा का नाम । |
निरुद्ध | ५६ | ३ | ४९ | लघुत्तम समापवर्त्य । |
निष्क | ११४ | ३ | ६१ | स्वर्ण टंक (सिक्का) । |
नीलोत्पल | २२१ | ६ | १४७ | नील कमल (जल में उगने वाली
| | | | नीली नलिनी) । |
नेभिक्षेत्र | १७ | ७ | १८४ | दो संकेन्द्र परिधियों का मध्यवर्ती
| ८० १/२ | " | २०० | क्षेत्र (Annulus) । |
न्यर्बुद | ६५ | १ | ८ | संकेतना का बारहवाँ स्थान । |
पट्टिका | ६३- | ८ | २६७ | क्रकच कर्म (Saw-work) का | परिशिष्ट ४ की
| ६७ १/२ | | | माप । | सूची १० देखिये ।
पण | ३९ | १ | ५ | स्वर्ण का भार माप; स्वर्ण टंक | परिशिष्ट ४ की
| | | | (सिक्का) । | सूची ४ देखिये ।
पणव | ३२ | ७ | १८८ | डिंडम या भेरी;
(अन्वायाम छेद) | | | | ... ... ... |
पद्म | ६६ | १ | ८ | संकेतना का पंद्रहवाँ स्थान । |
पद्मराग | ३ | २ | १० | एक प्रकार का रत्न । |
परमाणु | २५ | १ | ४ | पुद्गल का अविभागी कण । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची १ देखिये ।
४६ गणितसारसंग्रह
शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति
परिकर्म | ४७ | १ | ६ | गणितीय क्रियाएँ। इन्द्रनन्दि कृत |
| ४८ | | | श्रुतावतार (श्लोक १६०-१६१) के |
| | | | अनुसार कुन्दकुन्दपुर के पद्मनन्दि |
| | | | (अर्थात् कुन्दकुन्द) ने अपने गुरुओं |
| | | | से सिद्धान्त का अध्ययन किया और |
| | | | षट्खण्डागम के तीन खंडों पर परि- |
| | | | कर्म नाम की टीका लिखी। यह |
| | | | अनुपलब्ध है। (त्रिलोक प्रज्ञप्ति, |
| | | | भाग २, १९५१ की प्रस्तावना से |
| | | | उद्धृत)। |
पल | ३९ | | ५ | स्वर्ण, रजत एवं अन्य धातुओं का | परिशिष्ट ४ की
| ४१ | १ | ५ | भार माप। | सूचियाँ ४, ५, ६
| ४४ | | ६ | | देखिये।
पक्ष | ३४ | १ | ५ | काल माप। | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची २ देखिये।
पाटली | ६ | ४ | ६९ | मधुर गंध वाले पुष्पों | Bignonia
| २४ | ४ | ७२ | वाला वृक्ष। | Suaveolens.
पाद | २९ | १ | ४ | लम्बाई का माप। | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची १ देखिये।
पार्श्व | ८३½ | ६ | १०८ | पार्श्वनाथ, २३वें तीर्थंकर। बाजू में। |
पुन्नाग | ३५ | ४ | ७३ | वृक्ष का नाम। | Rottleria
| | | | | Tinctoria
पुराण | ४१ | १ | ६ | रजत का भार माप, सम्भवतः | परिशिष्ट ४ की
| | | | टंक भी। | सूची ५ देखिये।
पुष्यराग | ४ | २ | १० | एक प्रकार का रत्न। |
पैशाचिक | ११२½ | ७ | २१३ | पिशाच सम्बन्धी; इसलिये अत्यन्त |
| | | | कठिन अथवा जटिल। |
प्रकीर्णक | ३ | ४ | ६८ | विविध प्रश्नावली। |
प्रतिबाहु | ७ | ७ | १८२ | पार्श्व या बाजू की भुजा। |
प्रत्युत्पन्न | १ | २ | ९ | गुणन। |
प्रपूरणिका | १९२ | ६ | १४० | (साहित्यिक) वह जो पूर्ण रूप से |
| | | | भर अथवा तुष्ट कर देती है; यहाँ |
| | | | स्वर्ण मिश्रित कुप्य धातुएँ; तलछट |
| | | | (dross)। |
गणितसारसंग्रह ४७
शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति
प्रभाग | ९९ | ३ | ५९ | भिन्न का भिन्न (भाग का भाग)।
प्रमाण | २८ | १ | ४ | लम्बाई का माप। | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची १ देखिए !
| २ | ५ | ८३ | इच्छा की संवादी दत्त राशि जो |
| | | | त्रैराशिक प्रश्नों से सम्बन्धित है। |
प्रवर्तिका | ३७ | १ | ५ | धान्य सम्बन्धी आयतन माप। |
प्रस्थ | ३६ | १ | ५ | ,, ,, | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूचियाँ ३ और ६
| | | | | देखिये।
प्रक्षेपक | ७९ ½ | ६ | १०८ | अनुपाती वितरण। |
प्रक्षेपक करण | ७९ ½ | ६ | १०८ | अनुपाती वितरण सम्बन्धी क्रिया। |
प्लक्ष | ६७ | ८ | २६८ | वृक्ष का नाम; प्रोदुम्बर। | Ficus Infec-
| | | | | toria, or
| | | | | Religiosa.
फल | २ | ५ | ८३ | त्रैराशिक प्रश्न में निकाली जाने वाली |
| | | | राशि की संवादी दत्त राशि। |
बहिश्चक्रवाल वृत्त | २८ | ७ | १८७ | कङ्कण की बाहिरी परिधि। |
| ६७ ½ | ७ | १९७ | |
बाण | ४३ | ७ | १९० | धनुषाकार क्षेत्र में चाप और चापकर्ण |
| | | | की महत्तम उदग्र दूरी। (height |
| | | | of a segment) |
बालेन्दु क्षेत्र | ७९ ½ | ७ | २०० | चंद्रमा की कला सदृश क्षेत्र। |
बीज | | | | (साहित्यिक), बोया जाने वाला |
| | | | धान्य आदि। |
| ९० ½ | ७ | २०४ | (यहाँ) इसका उपयोग धनात्मक |
| | | | दो पूर्णांकों के अभिधान हेतु होता है |
| | | | जिनके गुणनफल एवं वर्गों की सहायता |
| | | | से भुजाओं के माप को निकालने |
| | | | पर समकोण त्रिभुज संरचित होता है। |
भाग | ४२ | १ | ६ | कुप्य (baser) धातुओं का माप | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची ६ देखिये।
भागानुबंध | ११३ | ३ | ६१ | संयव भिन्न (Fractions in |
| | | | association) |
भागापवाह | १२६ | ३ | ६३ | वियुत भिन्न (Dissociated |
| | | | fractions) |
४८ गणितसारसंग्रह
शब्द सूत्र अध्याय पृष्ठ स्पष्टीकरण अभ्युक्ति
भागाभ्यास ३ ४ ६८ प्रकीर्णक भिन्नों का एक प्रकार ।
भागभाग १११ ३ ६० जटिल भिन्न ( Complex frac-
tion ) ।
भागमातृ १३८ ३ ६६ भाग, प्रभाग, भागभाग, भागानुबन्ध,
और भागापवाह भिन्न जातियों के
दो या दो से अधिक प्रकारों के संयोग
से संरचित ।
भाग सम्वर्ग ३ ४ ६८ प्रकीर्णक भिन्नों की एक जाति ।
भागहार १८ २ १२ विभाजन क्रिया ।
भाज्य ५३-५४ २ १८ घनमूल समूह की रचना करने वाले
तीन स्थानों में से बीच का स्थान ।
जिसमें भाग देते हैं ।
भार ४४ १ ६ कुप्य ( baser ) धातुओं का माप । परिशिष्ट ४ की
सूची ६ देखिये ।
भिन्न कुट्टीकार १३४ ६ १२३ भिन्नीय राशियों का अन्तर्धारक
अनुपाती वितरण ।
भिन्न दृश्य ३ ४ ६८ प्रकीर्णक भिन्नों की एक जाति ।
मधुक २५ ४ ७२ वृक्ष का नाम । Bassia
Latifolia
मध्यधन ६३ २ २१ समानान्तर श्रेढि का मध्य पद ।
मर्दल ३२ ७ १८८ डिंडिम या भेरी ।
( अन्वायाम छेद)
महाखर्व ६६ १ ८ संकेतना का चौदहवाँ स्थान ।
महापद्म ६६ १ ८ संकेतना का सोलहवाँ स्थान ।
महावीर १ १ १ २४वें तीर्थंकर वर्द्धमान स्वामी ।
महाशंख ६७ १ ८ संकेतना का बीसवाँ स्थान ।
महाक्षित्या ६८ १ ८ संकेतना का बाईसवाँ स्थान ।
महाक्षोभ ६८ १ ८ संकेतना का चौबीसवाँ स्थान ।
महाक्षोणी ६७ १ ८ संकेतना का अठारहवाँ स्थान ।
मार्ग ६३ ८ १६७ छेद ( section ); वह अनुरेखा
जिस पर से काष्ठ का टुकड़ा आरे से
चीरा जाता है ।
गणितसारसंग्रह ४९
| शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति |
|---|---|---|---|---|---|
| मानी | ३७ | १ | ५ | धान्य सम्बन्धी आयतन माप । | परिशिष्ट ४ की |
| सूची ३ देखिये । | |||||
| माष | ४० | १ | ५ | रजत का भार माप टंक (सिक्का) । | परिशिष्ट ४ की |
| सूची ५ देखिये । | |||||
| मिश्रधन | ८०-८२ | २ | २४ | संयुक्त या मिला हुआ योग । | |
| मुख | ५० | ७ | १९३ | चतुर्भुज की ऊपरी भुजा (top-side) | शङ्खाकार और |
| मृदङ्ग आकार वाले | |||||
| क्षेत्रों में भी मुख का | |||||
| उपयोग हुआ है । | |||||
| मुरज | ३२ | ७ | १८८ | मृदंग के समान डिंडिम या भेरी । | |
| मुहूर्त | ३४ | १ | ५ | काल माप | परिशिष्ट ४ की |
| सूची २ देखिये । | |||||
| मूल | ३६ | २ | १५ | वर्गमूल; प्रकीर्णक भिन्नों को एक जाति | |
| ३ | ४ | ६८ | |||
| मूलमिश्र | ३ | ४ | ६८ | जिसमें वर्गमूल अंतर्भूत हों; प्रकीर्णक | |
| भिन्नों की एक जाति । | |||||
| मेरु | ५ | ५ | ८३ | जम्बूद्वीप के मध्यभाग में स्थित सुमेरु | |
| पर्वत । विशेष विवरण के लिये त्रिलोक | |||||
| प्रज्ञप्ति भाग २ में (४/१८०२-१८११; | |||||
| ४/२८१३, २८२३) देखिये । | |||||
| मृदंग | ३२ | ७ | १८८ | एक प्रकार की डिंडिम या भेरी । | |
| (अन्वायाम छेद) | |||||
| यव | २७ | १ | ४ | एक प्रकार का धान्य; लम्बाई का माप । | परिशिष्ट ४ की |
| ४२ | १ | ६ | एक प्रकार का धातु माप । | सूची १ देखिये । | |
| यव कोटि | ५ १/२ | ९ | २७० | लंका के पूर्व से ९०° की ओर एक स्थान । | |
| योग | ४२ | ४ | ७५ | मन वचन काय के निमित्त से आत्मा के | (जैन परिभाषा) |
| प्रदेशों के चंचल होने की क्रिया । | |||||
| तपस्या; ध्यान का अभ्यास | (अन्य मत से) | ||||
| योजन | ३१ | १ | ४ | लम्बाई का माप | परिशिष्ट ४ की |
| सूची १ देखिये । | |||||
| रथरेणु | २६ | १ | ४ | पुद्गल कण | " " |
| रूप | ९७ १/२ | ६ | १११ | पूर्णांक । | |
| रोमकापुरी | ५ १/२ | ९ | २७० | लंका के पश्चिम से ९०° की ओर एक स्थान । |
५० गणितसारसंग्रह
शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति
लङ्का | ५ १/२ | ९ | २७० | वह स्थान जहाँ उज्जैन से निकलने वाला ध्रुववृत्त ( meridian ) विषुवत् रेखा से मिलता है । |
लव | ३३ | १ | ५ | काल माप । | परिशिष्ट ४ की सूची २ देखिये ।
लक्ष | ६४ | १ | ८ | लाख, संकेतना का छठवाँ स्थान । |
लाभ | ५ | ६ | ९२ | भजनफल या हिस्सा ( अंश ) । |
वकुल | २५ | ४ | ७२ | वृक्ष का नाम । | Mimusops Elengi.
वज्र (अन्वायाम छेद) | ३२ | ७ | १८८ | इंद्र का आयुध । ... ... |
वज्रापवर्तन | २ | ३ | ३६ | भिन्नों के गुणन में तिर्यक् प्रहासन । |
वर्गमूल | ३६ | २ | १५ | वह इष्ट राशि जिसका वर्ग करने से वह दत्त राशि उत्पन्न होती है जिसका वर्गमूल निकालना इष्ट होता है । |
वर्ण | १६९ | ६ | १३५ | ( साहित्यिक ) रंग; शुद्ध स्वर्ण १६ वर्ण का मानकर दत्त स्वर्ण की शुद्धता के अंश का अभिधान वर्ण द्वारा होता है । |
वर्धमान | १ | ५ | ८३ | चौबीसवें तीर्थंकर । |
वल्लिका / वल्लिका कुट्टीकार | १९५ १/२ | ६ | ११५ | लता सदृश अंकश्रृंखला पर आधारित अनुपाती वितरण । |
वाह | ३८ | १ | ५ | धान्य सम्बन्धी आयतन माप । |
विचित्र कुट्टीकार | २१६ | ६ | १४५ | अनुपाती विभाजन समन्वित विचित्र एवं मनोरञ्जक प्रश्नावली । |
वितस्ति | ३० | १ | ४ | लम्बाई का माप । | परिशिष्ट ४ की सूची १ देखिये ।
विद्याधर नगर | ६२ | ८ | २६७ | यहाँ आयताकार नगर का प्रयोजन मालूम पड़ता है । |
विषम कुट्टीकार | १३४ | ६ | १२३ | भिन्नीय राशियों का अंतर्धारक अनुपाती ( भिन्न कुट्टीकार ) । |
विषम चतुरश्र | ५ | ७ | १८१ | सामान्य चतुर्भुज । |
गणितसारसंग्रह ५१
शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति
विषम संक्रमण | २ | ६ | ९१ | कोई भी दत्त दो राशियों के भाजक और भजनफल द्वारा प्ररूपित दो राशियों के योग एवं अंतर की अर्द्ध राशियों सम्बन्धी क्रिया । |
वृषभ | ८३ ½ | ६ | १०८ | प्रथम तीर्थंकर का नाम । |
व्यवहारांगुल | २७ | १ | ४ | लम्बाई का माप । | परिशिष्ट ४ की सूची १ देखिये ।
व्युत्कलित | १०६ | २ | ३२ | समानान्तर श्रेढि की समस्त श्रेढि में से श्रेढि का अंश घटाने की क्रिया । |
शङ्ख | ६७ | १ | ८ | संकेतना का उन्नीसवां स्थान । |
शत | ६३ | १ | ८ | सौ; सैकड़ा । |
शत कोटि | ६५ | १ | ८ | सौ करोड़ । |
शाक | ६४ | ८ | २६७ | वृक्ष का नाम ( Teak tree ) । |
शान्ति | ८४ ½ | ६ | १०८ | शान्तिनाथ तीर्थङ्कर । |
शेष | ३ | ४ | ६८ | आरम्भ से श्रेढि के अंश को निकाल देने पर शेष बचनेवाले पद । |
शेषनाड्य | १० ½ | ९ | २७१ | अपराह्न में बीतनेवाला दिनांश । |
शेषमूल | ३ | ४ | ६८ | प्रकीर्णक भिन्नों की एक जाति । |
शोध्य | ५३-५४ | २ | १८-१९ | घनमूल समूह के तीन अंकों में से एक । |
श्रावक | ६६ | २ | २२ | जैनधर्म का पालन करने वाला गृहस्थ । |
श्रीपर्णी | ६७ | ८ | २६८ | वृक्ष का नाम । | Premna Spinosa.
शृङ्गाटक | ३० ½ | ८ | ७५ | त्रिभुजाकार स्तूप । |
षोडशिका | ३६ | १ | ५ | धान्य सम्बन्धी आयतन माप । | परिशिष्ट ४ की सूची ३ देखिये ।
सकल कुट्टीकार | १३६ ½ | ६ | १२४ | अनुपाती वितरण जिसमें भिन्न अंतर्भूत नहीं होते । |
सङ्क्रमण | २ | ६ | ९१ | दो राशियों के योग एवं अन्तर की अर्द्ध राशियों सम्बन्धी क्रिया । |
सङ्कलित | ६१ | २ | २० | श्रेढि का योग निकालने की क्रिया । |
सङ्क्रान्ति | १७ | ५ | ८५ | सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने का मार्ग । |
५२ गणितसारसंग्रह
शब्द सूत्र अध्याय पृष्ठ स्पष्टीकरण अभ्युक्ति
सतेर ४३ १ ६ कुप्य (baser) धातुओं का भारमाप । परिशिष्ट ४ की
सूची ६ देखिये ।
समचतुरश्र ११२½ ७ २१३ वर्गाकार आकृति ।
सम त्रिभुज ५ ७ १८१ वह त्रिभुज जिसकी सब भुजाएँ
समान हों ।
समय ३२ १ ४ कालमाप । एक परमाणु का दूसरे परिशिष्ट ४ की
परमाणु के व्यतिक्रम करने में जितना सूची २ देखिये ।
काल लगता है, उसे समय कहते हैं ।
समवृत्त ६ ७ १८१ वृत्त ( Circle ) ।
सरल २६ ४ ७२ वृक्ष का नाम Pinus Longifolia
सर्ज ६७ ८ २६८ वृक्ष का नाम (साल वृक्ष के समान) ।
सर्वधन ६३–६४ २ २१ समान्तर श्रेढि का योग ।
सल्लकी ६३ ४ ८० वृक्ष का नाम । Boswellias Thurifera
सहस्र ६३ १ ८ हजार ।
सारस ३६ ४ ७४ एक प्रकार का पक्षी ।
सार संग्रह २३ १ ३ ( साहित्यिक ) किसी विषय के
सिद्धान्तों का संक्षिप्त प्रतिपादन ।
( यहाँ ) गणित ग्रंथ का नाम ।
साल २४ ४ ७२ वृक्ष का नाम । Shorea Ro-
busta, or
Valeria Ro-
busta.
सिद्ध १ ६ ९१ घातिया और अघातिया कर्मों का
नाश कर अष्टगुणों आदि को प्राप्त
मुक्त आत्मा ।
सिद्धपुरी ५½ ९ २७० लङ्का के प्रतिध्रुवस्थ ।
सुमति ७ ४ ७० पांचवें तीर्थङ्कर का नाम ।
सुवर्णकुट्टीकार १६९ ६ १३५ स्वर्ण सम्बन्धी प्रश्नों में प्रयुक्त अनु-
पाती वितरण ।
सुव्रत ८३½ ६ १०८ बीसवें तीर्थङ्कर का नाम ।
सूक्ष्मफल २ ७ १८१ क्षेत्रफल अथवा घनफल का शुद्ध माप । परिशिष्ट ४ की
स्तोक ३३ १ ५ कालमाप । सूची २ देखिये ।