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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 378, कुल 421 में से

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पृष्ठ 378

गणितसारसंग्रह ४३

शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति

चक्रिकाभञ्जन | ६ | १ | १ | जन्ममरण के चक्र का संहार करनेवाले; |
| | | | राष्ट्रकूट राजवंश के राजा का नाम । |
चतुर्मण्डल क्षेत्र | ८२ ½ | ७ | २०१ | मध्य स्थिति |
चम्पक | ६ | ४ | ६९ | पीले सुगन्धित पुष्प वाला वृक्ष | Michelia
| | | | | Champaka
चय | ६८ | २ | २२ | प्रचय । वह राशि जो समान्तर श्रेढि |
| | | | के उत्तरोत्तर पदों में समान अन्तर |
| | | | स्थापित करती है । |
चरमार्ध | १०३ ½ | ६ | ११२ | शेष मूल्य |
चिति | ३०३ | ६ | १६९ | श्रेढि संकलन । ढेर । |
| | | २६२ | |
चित्र कुट्टीकार | २१६ | ६ | १४५ | अनुपाती विभाजन समन्वित विचित्र |
| | | | एवं मनोरञ्जक प्रश्न । |
चित्र कुट्टीकार मिश्र | २७३ ½ | ६ | १६० | अनुपाती विभाजन क्रिया के प्रयोग |
| | | | गर्भित विचित्र एवं मनोरञ्जक मिश्रित |
| | | | प्रश्न । |
छन्द | ३३३ ½ | ६ | १७७ | ... ... | A syllabic
| | | | | metre
जन्य | ९० ½ | ७ | २०४ | 'बीज' नामक दत्त न्यास से व्युत्पादित |
| | | | त्रिभुज और चतुर्भुज आकृतियाँ । |
जम्बू | ६४ | ४ | ८० | वृक्ष का नाम । | Eujenia
| | | | | Jambalona,
जिन | १ | ६ | ९१ | जिन्होंने घातिया कर्मों का नाश किया | जिन्होंने अनेक
| | | | है वे सकल जिन हैं इनमें अरहंत और | विषम भवों के
| | | | सिद्धगर्भित हैं । आचार्य, उपाध्याय | गहन दुःख प्रदान
| | | | तथा साधु एक देश जिन कहे जाते हैं | करनेवाले कर्म
| | | | क्योंकि वे रत्नत्रय सहित होते हैं । | शत्रुओं को जीता
| | | | असंयत सम्यक् दृष्टि से लेकर अयोगी | है-निर्जरा की है,
| | | | पर्यन्त सभी जिन होते हैं । | वे जिन कहलाते
| | | | | हैं ।
जिनपति | ८३ ½ | ६ | १०८ | तीर्थंकर । |
ज्येष्ठ धन | १०२ ½ | ६ | ११२ | सबसे बड़ा धन । |
डुण्डुक | ६७ | ८ | २६८ | वृक्ष का नाम । |