सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 384, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 384

गणितसारसंग्रह ४९

शब्दसूत्रअध्यायपृष्ठस्पष्टीकरणअभ्युक्ति
मानी३७१५धान्य सम्बन्धी आयतन माप ।परिशिष्ट ४ की
सूची ३ देखिये ।
माष४०१५रजत का भार माप टंक (सिक्का) ।परिशिष्ट ४ की
सूची ५ देखिये ।
मिश्रधन८०-८२२२४संयुक्त या मिला हुआ योग ।
मुख५०७१९३चतुर्भुज की ऊपरी भुजा (top-side)शङ्खाकार और
मृदङ्ग आकार वाले
क्षेत्रों में भी मुख का
उपयोग हुआ है ।
मुरज३२७१८८मृदंग के समान डिंडिम या भेरी ।
मुहूर्त३४१५काल मापपरिशिष्ट ४ की
सूची २ देखिये ।
मूल३६२१५वर्गमूल; प्रकीर्णक भिन्नों को एक जाति
३४६८
मूलमिश्र३४६८जिसमें वर्गमूल अंतर्भूत हों; प्रकीर्णक
भिन्नों की एक जाति ।
मेरु५५८३जम्बूद्वीप के मध्यभाग में स्थित सुमेरु
पर्वत । विशेष विवरण के लिये त्रिलोक
प्रज्ञप्ति भाग २ में (४/१८०२-१८११;
४/२८१३, २८२३) देखिये ।
मृदंग३२७१८८एक प्रकार की डिंडिम या भेरी ।
(अन्वायाम छेद)
यव२७१४एक प्रकार का धान्य; लम्बाई का माप ।परिशिष्ट ४ की
४२१६एक प्रकार का धातु माप ।सूची १ देखिये ।
यव कोटि५ १/२९२७०लंका के पूर्व से ९०° की ओर एक स्थान ।
योग४२४७५मन वचन काय के निमित्त से आत्मा के(जैन परिभाषा)
प्रदेशों के चंचल होने की क्रिया ।
तपस्या; ध्यान का अभ्यास(अन्य मत से)
योजन३११४लम्बाई का मापपरिशिष्ट ४ की
सूची १ देखिये ।
रथरेणु२६१४पुद्गल कण" "
रूप९७ १/२६१११पूर्णांक ।
रोमकापुरी५ १/२९२७०लंका के पश्चिम से ९०° की ओर एक स्थान ।