गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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शब्द सूत्र अध्याय पृष्ठ स्पष्टीकरण अभ्युक्ति
कोटि करोड़, संकेतना का आठवाँ स्थान ।
कोटिका ... ... ... वस्त्र, आभूषण तथा बेत का संख्यात्मक परिशिष्ट ४ की
माप । सूची ७ देखिये ।
क्रोश ... ... ... लम्बाई (दूरी) का माप । परिशिष्ट ३ की
सूची १ देखिये ।
कृति ... ... ... वर्ग करण क्रिया ।
कृष्णागरु ... ... ... सुगन्धित काष्ठ की काली विभिन्नता ।
खर्व संकेतना का तेरहवाँ स्थान ।
खारी धान्य का आयतन सम्बन्धी माप ।
गच्छ श्रेढि के पदों की संख्या ।
गण्डक स्वर्ण का भार माप । परिशिष्ट ४ की
सूची ४ देखिये ।
गतनाऽद्य १०½ ९ पूर्वाह्न में बीता हुआ दिनांश ।
गुञ्जा ... स्वर्ण या रजत का भार माप । परिशिष्ट ४ की
सूचियाँ ४ एवं
५ देखिये ।
गुण ५ ७ ... जीवा ।
गुणकार ... ... ... गुणा ।
गुणधन ९३ २ ... गुणोत्तर श्रेढि के पदों की संख्या के
तुल्य साधारण निष्पत्तियों को लेकर,
उनके परस्पर गुणनफल में प्रथम पद
का गुणा करने से गुणधन प्राप्त होता है ।
गुण सङ्कलित ... गुणोत्तर श्रेढि (Geometrical
progression).
घटी काल माप परिशिष्ट ४ की
सूची २ देखिये ।
घन ५३-५४ २ ... किसी राशि का घन करना; जिस राशि
का घनमूल निकालना इष्ट होता है,
उसे इकाई के स्थान से प्रारम्भ कर
तीन-तीन के समूह में विभाजित कर
लेते हैं । इन समूहों में से प्रत्येक का
दाहिनी ओर का अंतिम अंक घन
कहलाता है ।
घन मूल घनमूल निकालने की क्रिया।