गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगणितसारसंग्रह ४५
शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति
धरण | ३९ | १ | ५ | स्वर्ण या रजत का भार माप । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूचियाँ ४ और
| | | | | ५ देखिये ।
नन्द्यावर्त | ३३२ १/२ | ६ | १७७ | विशेष प्रकार के बने हुए राजमहल
| | | | का नाम । |
नरपाल | १० | २ | ११ | राजा; सम्भवतः किसी राजा का नाम । |
निरुद्ध | ५६ | ३ | ४९ | लघुत्तम समापवर्त्य । |
निष्क | ११४ | ३ | ६१ | स्वर्ण टंक (सिक्का) । |
नीलोत्पल | २२१ | ६ | १४७ | नील कमल (जल में उगने वाली
| | | | नीली नलिनी) । |
नेभिक्षेत्र | १७ | ७ | १८४ | दो संकेन्द्र परिधियों का मध्यवर्ती
| ८० १/२ | " | २०० | क्षेत्र (Annulus) । |
न्यर्बुद | ६५ | १ | ८ | संकेतना का बारहवाँ स्थान । |
पट्टिका | ६३- | ८ | २६७ | क्रकच कर्म (Saw-work) का | परिशिष्ट ४ की
| ६७ १/२ | | | माप । | सूची १० देखिये ।
पण | ३९ | १ | ५ | स्वर्ण का भार माप; स्वर्ण टंक | परिशिष्ट ४ की
| | | | (सिक्का) । | सूची ४ देखिये ।
पणव | ३२ | ७ | १८८ | डिंडम या भेरी;
(अन्वायाम छेद) | | | | ... ... ... |
पद्म | ६६ | १ | ८ | संकेतना का पंद्रहवाँ स्थान । |
पद्मराग | ३ | २ | १० | एक प्रकार का रत्न । |
परमाणु | २५ | १ | ४ | पुद्गल का अविभागी कण । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची १ देखिये ।