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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 374, कुल 421 में से

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पृष्ठ 374

गणितसारसंग्रह ३९

शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति

अन्तश्चक्रवाल वृत्त | ⋯ | ⋯ | ⋯ | कङ्कण की भीतरी परिधि । |
अपर | ११ ३/२ | ९ | ⋯ | उत्तर, बाद की । |
अमोघ वर्ष | ⋯ | ⋯ | ⋯ | राजा का नाम; ( साहित्यिक ) : वह |
| | | | जो वास्तव में उपयोगी वर्षा करते हैं । |
अम्लवेतस | ⋯ | ⋯ | ⋯ | खट्टी पत्तियों वाली एक प्रकार की | Rumex
| | | | जड़ी । | Vesicarius.
अयन | ⋯ | ⋯ | ⋯ | काल का माप । | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची २ देखिये ।
अरिष्टनेमि | ⋯ | ⋯ | ⋯ | बाईस वें तीर्थंकर । |
अर्जुन | ⋯ | ⋯ | ⋯ | वृक्ष का नाम । | Ferminalia
| | | | | Arjuna W.
| | | | | & A.
अर्बुद | ⋯ | ⋯ | ⋯ | ग्यारहवें स्थान की संकेतना का नाम । |
अवनति | ३२ | ९ | ⋯ | झुकाव । |
अवलम्ब | ४९ | ७ | ⋯ | शीर्ष से गिराया हुआ लम्ब । |
अव्यक्त | १२१ | ३ | ⋯ | अज्ञात । |
अशोक | ⋯ | ⋯ | ⋯ | वृक्ष का नाम । | Jonesia
| | | | | Asoka Roxb.
असित | ⋯ | ⋯ | ⋯ | ,, | Grislea To-
| | | | | mentosa.
आढक | ⋯ | ⋯ | ⋯ | धान्य-माप | परिशिष्ट ४ की
| | | | | सूची ३ देखिये ।
आदि | ⋯ | ⋯ | ⋯ | श्रेढि का प्रथम पद । |
आदिधन | ६३-६४ | २ | ⋯ | समान्तर श्रेढि के प्रत्येक पद को प्रथम |
| | | | पद एवं प्रचय के अपवर्त्य के योग से |
| | | | संयवित मान लेते हैं । समस्त प्रथम |
| | | | पदों के योग को आदिधन कहते हैं । |
आदि मिश्रधन | ८०-८२ | २ | ⋯ | प्रथम पद से संयुक्त । समान्तर श्रेढि |
| | | | का योग । |
आबाधा | ⋯ | ⋯ | ⋯ | किसी त्रिभुज या चतुर्भुज के आधार |
| | | | को संचरित करनेवाली सरल रेखा |
| | | | का खण्ड । |
आयत वृत्त | ६ | ७ | ⋯ | ऊनेन्द्र (Ellipse) |