गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
DevanagariHindipublished421 पृष्ठ
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परिशिष्ट-५
ग्रंथ में प्रयुक्त संस्कृत पारिभाषिक शब्दों का स्पष्टीकरण
[ हिन्दी-वर्णमाला क्रम में ]
| शब्द | सूत्र | अध्याय | पृष्ठ | स्पष्टीकरण | अभ्युक्ति |
|---|---|---|---|---|---|
| अगरु | ... | ... | ... | सुगंधित काष्ठ । | Amyris ag- |
| allocha | |||||
| अग्र | १२१- | ३ | ... | आगे अथवा आरम्भ का । | |
| १२२ | |||||
| अङ्ग | ... | ... | ... | श्रुतज्ञान के भेदों में से एक भेद का | |
| नाम अंग है । ये बारह होते हैं । | |||||
| अङ्गुल | २५-२९ | १ | ... | लम्बाई का माप । | परिशिष्ट ४ की सूची |
| १ भी देखिये । | |||||
| अणु | २५-२७ | १ | ... | परमाणु या अंत्यमहत्ता को प्राप्त पुद्गल | |
| कण । | |||||
| अध्वान | ३३२½- | ६ | ... | किसी दत्त संख्या के अक्षरोंवाले छन्द | |
| ३३६½ | के समस्त सम्भव प्रकारों के दीर्घ | ||||
| और लघु अक्षरों को उपस्थित करने | |||||
| के लिए उदग्र ( vertical ) | |||||
| अन्तराल । लघु अथवा दीर्घ अक्षर के | |||||
| प्रतीक का अन्तराल एक अंगुल तथा | |||||
| प्रत्येक प्रकार के बीच का अन्तराल | |||||
| भी एक अंगुल होता है । | |||||
| अन्त्यधन | ... | ... | ... | समान्तर या गुणोत्तर श्रेढि में अंतिम | |
| पद । | |||||
| अन्तरावलम्बक | ... | ... | ... | भीतरी लम्ब; दो स्तम्भों के शिखर से | |
| दोनों स्तम्भों के तल से जाने वाली | |||||
| रेखा में स्थित बिन्दु तक तत | |||||
| ( stretched ) दो धागों के मिथ- | |||||
| श्छेदन बिन्दु से लटकने वाले धागे | |||||
| का माप । |