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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 373, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 373

परिशिष्ट-५
ग्रंथ में प्रयुक्त संस्कृत पारिभाषिक शब्दों का स्पष्टीकरण
[ हिन्दी-वर्णमाला क्रम में ]

शब्दसूत्रअध्यायपृष्ठस्पष्टीकरणअभ्युक्ति
अगरु.........सुगंधित काष्ठ ।Amyris ag-
allocha
अग्र१२१-३...आगे अथवा आरम्भ का ।
१२२
अङ्ग.........श्रुतज्ञान के भेदों में से एक भेद का
नाम अंग है । ये बारह होते हैं ।
अङ्गुल२५-२९१...लम्बाई का माप ।परिशिष्ट ४ की सूची
१ भी देखिये ।
अणु२५-२७१...परमाणु या अंत्यमहत्ता को प्राप्त पुद्गल
कण ।
अध्वान३३२½-६...किसी दत्त संख्या के अक्षरोंवाले छन्द
३३६½के समस्त सम्भव प्रकारों के दीर्घ
और लघु अक्षरों को उपस्थित करने
के लिए उदग्र ( vertical )
अन्तराल । लघु अथवा दीर्घ अक्षर के
प्रतीक का अन्तराल एक अंगुल तथा
प्रत्येक प्रकार के बीच का अन्तराल
भी एक अंगुल होता है ।
अन्त्यधन.........समान्तर या गुणोत्तर श्रेढि में अंतिम
पद ।
अन्तरावलम्बक.........भीतरी लम्ब; दो स्तम्भों के शिखर से
दोनों स्तम्भों के तल से जाने वाली
रेखा में स्थित बिन्दु तक तत
( stretched ) दो धागों के मिथ-
श्छेदन बिन्दु से लटकने वाले धागे
का माप ।